(घना जंगल, ऊपर आसमान में अमावस्या की काली चादर फैली हुई है। समंदर का काला पानी हल्की-हल्की तरंगें ले रहा है।)
करण अपने पंख फैलाकर सिमरन को अपनी बाँहों में उठाकर आकाश में उड़ रहा है। उसकी रफ्तार किसी चीते से भी तेज़, किसी चील से भी ऊँची। सिमरन डरी-सहमी उसकी छाती से लिपटी है।)*
Simran (काँपती आवाज़ में) बोली -
"सर… ये क्या हो रहा है? हम कहाँ जा रहे हैं? ये लोग हमारे पीछे क्यों हैं? आप उड़ भी सकते हैं?"
(सिमरन ऊपर देखती है कि करण की बिरादरी — दर्जनों लाल आँखों वाले शैतान — हवा में उसका पीछा कर रहे हैं। उनकी गुर्राहट से आसमान गूँज रहा है।)
Shaitan Leader (चिल्लाकर) बोला -
"करण! रुक जा!
अमावस्या की रात है… आज खून सबसे ज़्यादा ताक़त देगा।
शिकार अकेले मत हड़प, वरना अंजाम बुरा होगा!"
(करण की आँखें आग की तरह चमकती हैं। वह पीछे मुड़कर गरजता है।)
Karan (दहाड़ते हुए) बोला -
"ये शिकार मेरा है!
किसी और की हिम्मत नहीं कि इसकी एक खून की बूँद भी छू सके!"
(बिरादरी वाले और तेज़ उड़कर उसके करीब आने लगते हैं। हवा में पंखों की फड़फड़ाहट और शैतानी हँसी गूँजती है।)
Shaitan 2 (हँसते हुए) बोला -
"करण… तू इंसान के लिए हमसे दुश्मनी लेगा?
याद रख, अमावस्या की रात… हमें अजेय बना देती है।
तू हमें रोक नहीं पाएगा।"
(सिमरन करण की बाँहों में काँप रही है। उसका चेहरा पीला पड़ चुका है। समंदर नीचे है और चारों ओर से शैतान करण को घेर रहे हैं।)
Simran (डरते हुए फुसफुसाती हुए) बोली -
"कृपया मुझे छोड़ दीजिए… मुझे कुछ मत कीजिए।"
(करण उसे और कसकर पकड़ लेता है, उसकी आवाज़ में गुस्सा और दर्द दोनों है।)
Karan (गंभीर स्वर में) बोला -
"तुम मेरी हो, सिमरन।
तुम्हारा खून… तुम्हारी साँस… तुम्हारी हर धड़कन…
सिर्फ़ मेरी है।"
(बिरादरी वाले करण को चारों तरफ से घेर लेते हैं। काला आसमान, ठंडी हवाएँ और समंदर की भयानक गहराई। एक शैतान तीर जैसी गति से करण की ओर बढ़ता है।)
Shaitan Leader (गरजकर) बोला -
"आख़िरी बार कह रहा हूँ करण—
या तो शिकार हमें बाँट दे…
या फिर आज की रात… तेरा भी ख़ून इस तालाब में बहेगा!"
(करण की आँखें और लाल हो जाती हैं। उसकी पकड़ सिमरन पर और मज़बूत हो जाती है। समंदर का पानी हलचल करने लगता है जैसे किसी बड़ी लड़ाई का गवाह बनने को तैयार हो।)
(करण समंदर के ऊपर रुक जाता है। उसके पंख फैले हुए, आँखों से लाल आग बरस रही है। चारों तरफ़ उसकी बिरादरी उसे घेरे खड़ी है। सिमरन उसकी बाँहों में काँप रही है।)
Shaitan Leader (ठंडी हँसी के साथ) बोला -
"करण… तू भूल गया कि तू कौन है?
तेरे जैसे को इंसान की मोहब्बत नहीं,
उसका लहू शोभा देता है।"
(करण गुस्से से गरजता है, उसकी आवाज़ आसमान में गूंजती है।)
Karan बोला -
"ये मेरी कमजोरी नहीं… मेरी ताक़त है।
और कोई इसकी एक खून की बूँद भी नहीं छू सकता!"
(इतना कहते ही करण तेज़ी से नीचे की ओर गोता लगाता है और एक शैतान को पंख से काटकर समंदर में गिरा देता है। पानी लाल हो जाता है।)
(सिमरन उसकी छाती से लगी हुई काँप रही है। उसकी साँसें तेज़ हैं, दिल धड़क रहा है। आँखों में आँसू भरे हैं।)
Simran (फुसफुसाकर) बोली -
"मुझे… यहाँ से बचा लो… मैं मरना नहीं चाहती।"
(करण उसकी ओर देखता है, पलभर को उसकी आँखें नरम पड़ती हैं। फिर वह और ज़्यादा हिंसक होकर बिरादरी वालों पर हमला बोलता है।)
(चार शैतान एक साथ करण पर झपटते हैं। उनके पंजे और दाँत चमक रहे हैं। करण अपनी पूरी ताक़त से उन्हें रोकता है, लेकिन अमावस्या की रात ने सबको अजेय बना दिया है।)
Shaitan 2 (हँसते हुए) बोला -
"एक अकेला शेर… पूरी टोली से कब तक लड़ेगा?"
(करण की पीठ पर गहरी चोट लगती है। सिमरन चीख पड़ती है। करण दर्द से कराहता है लेकिन उसे और कसकर पकड़ लेता है।)
Karan (गरजकर) बोला -
"जब तक साँस है… कोई सिमरन को छू भी नहीं सकता!"
(अचानक समंदर का पानी अजीब तरह से चमकने लगता है। उसमें से धुएँ जैसे साए उठने लगते हैं। सिमरन डर के मारे चीख पड़ती है।)
Shaitan Leader (घबराकर) बोला -
"नहीं… ये तो समन्दर का श्राप है!
जो भी इसमें गिरेगा… कभी वापस नहीं आएगा!"
(करण को एक योजना सूझती है। वह सिमरन को कसकर पकड़ता है और समंदर के ऊपर मंडराता है। उसकी आँखों में आग है और आवाज़ में चुनौती।)
Karan बोला -
"तो आओ… देखते हैं कौन जीतता है।
तुम्हारी भूख… या मेरी जिद!"
(बिरादरी वाले और ज़्यादा गुस्से से उस पर झपटते हैं। अमावस्या की रात… हवाओं में युद्ध का मैदान बन चुकी है।)
रात अमावस्या की है। चारों ओर काला अंधेरा। तालाब के ऊपर पंख फैलाए करण अपनी बिरादरी से लड़ रहा है। उसके पंख ज़ख़्मी हैं, शरीर पर गहरी चोटें हैं, लेकिन आँखों में जुनून की आग जल रही है।)
"उसका दर्द… उसकी कमजोरी नहीं था।
वो जुनून था—अपना शिकार किसी और को न देने का।
सिमरन की हर बूँद… सिर्फ़ करण की थी।"
(एक शैतान करण के कंधे में पंजा गाड़ देता है। खून बहने लगता है। करण दर्द से कराहता है, लेकिन तुरंत उसकी गरज हवाओं को चीर देती है।)
Karan (गुस्से में गरजकर) बोला -
"मैं गिर सकता हूँ… मर सकता हूँ…
पर सिमरन को कोई नहीं छू सकता!"
(वो शैतान को पकड़कर पंखों की पूरी ताक़त से तालाब में फेंक देता है। पानी तेज़ी से उबलने लगता है और शैतान काले धुएँ में बदलकर गायब हो जाता है।)
(सिमरन करण की बाँहों में है। उसकी आँखों से आँसू बह रहे हैं, शरीर काँप रहा है।)
Simran (डरी हुई आवाज़ में) बोली -
"क…करण… तुम गिर जाओगे… नीचे मत गिरना…!"
(अचानक करण का संतुलन बिगड़ता है। उसके पंख थककर लड़खड़ाते हैं। वह समंदर की ओर झुकने लगता है। सिमरन चीख पड़ती है और उसकी गर्दन से कसकर लिपट जाती है।)
(करण का शरीर आधा नदी के ऊपर झूल रहा है। नीचे अंधेरी गहराई है। उसके होंठों पर खून लगा है, और आँखों में पागलपन।)
Karan (दाँत पीसते हुए) बोला -
"नहीं… मैं गिरूँगा नहीं…
मेरा शिकार… मेरा है… सिर्फ़ मेरा!"
(वो आखिरी ताक़त जुटाकर अपने पंख फैलाता है और जोर से ऊपर की ओर उड़ता है। उसके पीछे उसकी बिरादरी शोर मचाते हुए रह जाती है। करण ज़ख़्मी है, लेकिन समंदर पार कर लेता है।)
(करण किनारे पर उतरता है। उसके पंख काँप रहे हैं, घाव से खून बह रहा है। सिमरन अब भी उसकी बाँहों में है, पूरी तरह डरी हुई।)
Simran (सिसकते हुए) बोली -
"आप… आखिर हो कौन? क्यों… क्यों मुझे नहीं छोड़ते?"
(करण उसकी ओर खून से भीगी आँखों से देखता है। उसके चेहरे पर पागलपन और दर्द का मिश्रण है।)
Karan (धीमे, खतरनाक लहजे में) बोला -
"क्योंकि… तुम मेरी हो।
तुम्हारे खून की हर बूँद… मेरी है।
और मैं किसी को भी… तुम्हारे पास फटकने नहीं दूँगा।"
(सिमरन काँप जाती है, उसकी साँसें थम-सी जाती हैं। करण उसके चेहरे के बेहद करीब है, लेकिन अभी भी उसे पीने का वक़्त नहीं आया है। उसकी प्यास और ज़्यादा बढ़ चुकी है।)
(जंगल के अंधेरे में चाँद की हल्की रोशनी। करण और सिमरन नदी के किनारे खड़े हैं। तभी हवा में एक तेज़ फड़फड़ाहट और अजीब हँसी गूंजती है।)
Chudail (आक्रामक आवाज़ में) बोली -
"करण!
तुम एक इंसान से मोहब्बत नहीं कर सकते।
तुम सिर्फ़ मेरे हो।
और इस बच्ची का खून… अब मैं ही पीऊँगी!"
(सिमरन पीछे हटती है, डर के मारे काँपती है। उसकी आँखों में आँसू हैं।)
Simran (रोते हुए) बोली
"स…सर… ये क्या कर रही है? मुझे मत मारो!"
(करण के चेहरे पर गुस्सा और लाल आँखों में आग। उसकी पूरी प्यास जाग उठती है।)
"करण… इंसान से मोहब्बत नहीं करता था।
उसकी दुनिया सिर्फ़ प्यास और शिकार की थी।
सिमरन सिर्फ़ उसकी प्यास को रोकती थी,
वरना वो उसे पीने के लिए तैयार था।"
(करण गहरी साँस लेता है और चुड़ैल की ओर झपटता है। उसके पंख फैल जाते हैं, और वह हवा में घूमते हुए चुड़ैल को मारने लगता है।)
(चुड़ैल और करण एक-दूसरे पर हमला करते हैं। चुड़ैल आग की तरह तेज़ है, लेकिन करण की लाल आँखें और पंख उसकी ताक़त बढ़ा देते हैं।)
Chudail (चिल्लाते हुए) बोली -
"तुम मुझे नहीं हरा सकते!
तुम्हारा शिकार… अब मेरा होगा!"
Karan (गरजते हुए) बोला -
"शिकार… सिर्फ़ मेरा है!
और कोई इसे छू नहीं सकता!"
(सिमरन डर के मारे अपने सिर को पकड़ती है। पेड़ और झाड़ियों के ऊपर दोनों की लड़ाई की आवाज़ गूँजती है।)
(करण चुड़ैल को झुकाकर हवा में घुमाता है और समंदर की तरफ फेंक देता है। चुड़ैल पानी में गिरती है और धुआँ बनकर गायब हो जाती है।)
"उस रात, करण की प्यास और जूनून ने चुड़ैल को हराया।
सिमरन सुरक्षित थी,
लेकिन करण का सच अब सामने था —
उसका प्यार नहीं, उसकी प्यास सबसे बड़ी थी।"
(सिमरन कांपती हुई उसके सामने खड़ी है। करण उसकी ओर देखता है, आँखों में लाल आग और चेहरे पर गंभीरता।)
Karan (धीमे स्वर में, खतरनाक लहजे में) बोला -
"अब तुम जान गई…
मैं तुम्हें सिर्फ़ इसलिए नहीं बचाता…
क्योंकि मैं तुमसे प्यार करता हूँ…
बल्कि… क्योंकि ये मेरी प्यास की लड़ाई है।"