Devil की दास्तान - 9 Sonam Brijwasi द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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Devil की दास्तान - 9

(रात का समय। गली का अँधेरा। करण एक क्रिमिनल से लड़ रहा है। उसकी लाल आँखें चमक रही हैं।)

"करण की प्यास अब और बढ़ चुकी थी।
कई दिनों से उसने खून नहीं पिया था।
और अब, सामने खड़ा अपराधी उसे रोक नहीं पा रहा था।"

(करण क्रिमिनल पर टूट पड़ता है। कुछ ही समय में वह उसे मार देता है और उसका खून पीता है।)

(सिमरन, जो छुपकर सब देख रही थी। उसकी आँखों में डर और सन्नाटा।)

Simran (धीमे स्वर में, भयभीत होकर) बोली - 
"ये क्या... वो खून पी रहे हैं... वो... वो शैतान हैं!"

(सिमरन डर के मारे पीछे हटती है।)

"सिमरन ने करण को उसके असली रूप में देखा।
और उसे समझ में आ गया कि सामने खड़ा आदमी सिर्फ़ उसका रक्षक नहीं,
बल्कि उसकी सबसे बड़ी चुनौती और खतरा भी है।"

(सिमरन डर के मारे गली में दौड़ने लगती है।)

Simran (घबराकर, चिल्लाते हुए) बोली - 
"मुझे यहाँ से भागना होगा! ये boss... ये खतरनाक हैं!"

(करण उसकी ओर दौड़ता है।)

Karan (गहरी, धमकाने वाली आवाज़ में) बोला - 
"रुको... तुम अभी भी मेरी सुरक्षा में हो।
लेकिन याद रखो, तुम्हारा खून... एक दिन मेरा होगा।"

(सिमरन डर के मारे गली में भागती है। उसका चेहरा डर, भ्रम और मासूमियत से भरा है।)

"अब सिमरन को पता चल चुका था कि जो आदमी उसे बचा रहा है, वही उसका सबसे बड़ा खतरा भी था।
करण की प्यास चरम पर थी, और अब उसे खुद पर काबू रखना और भी कठिन हो गया था।
और इस रात का खेल... अब और भी खतरनाक और रोमांचक हो गया था।"

(सिमरन ऑफिस की गलियों में दौड़ रही है। वो डरी हुई घबराई हुई। रात का समय। अचानक वह किसी मजबूत जिस्म से टकरा जाती है और गिर पड़ती है।)

"सिमरन की मासूमियत और डर अब उसे हर जगह कमजोर बना रहे थे।
और अचानक... उसका सामना किसी से हो गया।"

(सिमरन गिर पड़ती है। उसकी नाक से खून बहने लगता है। उसके सिर में चक्कर आ रहे हैं।)

Simran (घबराकर, फुसफुसाते हुए) बोली - 
"ओह नहीं... मेरा सिर... मेरी नाक... मैं गिर गई..."

(सिमरन दर्द और डर से काँप रही है।)

"सिमरन अब पूरी तरह असहाय थी।
उसकी नाक से खून बह रहा था और चक्कर उसे संभाल नहीं पा रहे थे।
और तभी... सामने खड़ा था करण।"

(करण धीरे-धीरे उसके पास आता है। लाल आँखें चमक रही हैं।)

Simran (घबराकर, भयभीत):
"आप... आप तो पीछे थे। आप सामने कैसे ...? Please मुझे छोड़ दीजिए। मैं किसी को कुछ नहीं बताऊंगी।"

Karan (धीमी, नियंत्रित आवाज़ में) बोला - 
"शांत रहो, सिमरन।
तुम्हें चोट लगी है।
मैं तुम्हें संभालूंगा।
लेकिन याद रखो, मेरी प्यास अब और तेज़ है।"

(करण धीरे-धीरे सिमरन को उठाता है और उसे अपने पास खड़ा करता है।)

"सिमरन अब भी डर और दर्द में थी।
लेकिन सामने खड़ा करण...
उसकी सुरक्षा और खतरनाक आकर्षण दोनों को एक साथ महसूस कर रही थी।
और यह पल... दोनों के बीच का खेल और गहरा कर रहा था।

(सिमरन अपनी मासूमियत और डर के बीच कांपती है। करण उसे ध्यान से देखता है, खुद पर काबू रखते हुए।)

Simran (मन ही मन, डर और जिज्ञासा में) बोली - 
"ये boss... डरावने हैं, खतरनाक हैं...
फिर भी, मैं अजीब सा सुरक्षित महसूस कर रही हूँ इनके पास।"

(रात का समय। सिमरन सड़क पर चल रही है। अचानक अँधेरे से एक चुड़ैल प्रकट होती है और सिमरन को हवा में उठा लेती है।)

"सिमरन अब पूरी तरह असहाय थी।
और तभी सामने आया एक और खतरा – एक खतरनाक चुड़ैल।
जो मासूम सिमरन को पकड़कर उड़ जाती है।"

( करण सड़क पर खड़ा। उसकी लाल आँखें गुस्से से जल रही हैं।)

Karan (गहरी, धमकाने वाली आवाज़ में) बोला - 
"क्या! ये कैसे हो सकता है?
तुम उसे छू भी सकती हो?"

(चुड़ैल हवा में सिमरन को पकड़े हुए हँसती है।)

Chudail (ठहाका मारते हुए) बोली - 
"तुम तो देर कर रहे हो,
मैं ही कर दूँगी इसका काम पूरा।
आधा खून तुम पियो, आधा मैं!
बच्चों का खून सबसे स्वादिष्ट होता है।"

(करण गुस्से में लाल आँखों के साथ चिल्लाता है।)

Karan (गुस्से में, नियंत्रित लेकिन धमकाते हुए) बोला - 
" तुमसे साझा नहीं करूंगा!
इसका पूरा खून मेरा होगा, एक बूंद भी तुम्हें नहीं दूँगा!
और अब मैं पीने नहीं जा रहा हूँ… बल्कि तुम्हें रोकने आया हूँ!"

(करण अपने पंख फैलाता है और हवा में चढ़कर चुड़ैल की तरफ़ उड़ता है। उसकी शक्ति और गुस्सा दोनों चरम पर हैं।)

करण ने सिमरन को चुड़ैल से छुड़ा लिया और जमीन पे खड़ा कर दिया। सिमरन खड़ी खड़ी देख रही थी।

"करण अब अपनी पूरी शक्ति के साथ लड़ा।
सिमरन की सुरक्षा उसके लिए सब कुछ थी।
और उसकी लाल आँखों की चमक अब सिर्फ प्यास के लिए नहीं, बल्कि गुस्से और ताकत के लिए थी।"

(हवा में लड़ाई। करण और चुड़ैल आमने-सामने। करण का हर वार और झटका चुड़ैल को चुनौती दे रहा है।)

Karan (मन ही मन) बोला - 
"सिमरन को छूने नहीं दूँगा।
और इस डरावनी चुड़ैल को सबक सिखाऊँगा।
आज उसका अंत तय होगा।"

"अब इस लड़ाई में सिर्फ ताकत ही नहीं,
करण का गुस्सा, प्यास और उसकी मासूम की सुरक्षा का संघर्ष भी शामिल था।
और इस रात… खतरनाक लड़ाई का अंत अभी दूर था।"


(रात का समय। हवा में। करण और चुड़ैल आमने-सामने हैं। करण के पंख फैलें हुए हैं, उसकी लाल आँखें गुस्से से चमक रही हैं।)

"अब लड़ाई चरम पर थी।
करण की लाल आँखों की चमक और शक्ति चुड़ैल के अंधेरे जादू का सामना कर रही थी।
और सिमरन की मासूमियत अब उसकी ताकत का केंद्र बन चुकी थी।"

(करण तेजी से उड़ता है और चुड़ैल की तरफ़ बढ़ता है। चुड़ैल उसका सामना करती है और जादुई ऊर्जा से हमला करती है।)

Chudail (गुर्राती हुई) बोली - 
"तुम नहीं रोक सकते मुझे!
आज सिमरन का खून मेरा होगा!"

Karan (गहरी, धमकाने वाली आवाज़ में) बोला - 
"कोई भी सिमरन को छू नहीं सकता !
आज तुम मेरी नजरों के सामने हारोगी!"

(करण अपने पंखों से चुड़ैल को हवा में घेर लेता है। उसकी शक्ति और गुस्सा चरम पर है। एक तेज झटका मारता है और चुड़ैल संतुलन खो देती है।)

"करण ने चुड़ैल को उसके जादू से मात दी।
सिमरन सुरक्षित थी।
लेकिन इस लड़ाई ने करण की लाल आँखों में प्यास और गुस्से को और बढ़ा दिया था।"


( करण सिमरन के पास आता है। सिमरन डर के मारे काँप रही है।)

Simran (घबराकर, धीमे स्वर में) बोली - 
"आप... आपने उसे रोका..."

Karan (धीमी, गंभीर आवाज़ में) बोला - 
"हाँ, ।
अब तुम सुरक्षित हो।
लेकिन याद रखो, मेरी प्यास अभी भी मौजूद है।
एक दिन तुम्हारा खून मेरा होगा।"

(सिमरन धीरे-धीरे करण की ओर झुकती है, डर और सुरक्षा के बीच उलझी हुई।)

"सिमरन अब डर और आकर्षण दोनों महसूस कर रही थी।
करण ने उसे बचा लिया था, लेकिन उसकी लाल आँखों की चमक और खतरनाक आकर्षण अभी भी मौजूद था।
और यह रात… उनके बीच की नज़दीकियों और रोमांच का नया अध्याय लेकर आई थी।"