अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है।
धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है।
करण धीरे-धीरे एक बिल्डिंग की छत पर खड़ा है। उसकी आंखों की पुतलियाँ गहरी लाल चमकती हैं।
करण (मन ही मन) में -
मेरा मिशन साफ है, इंसानों को उनकी असली औक़ात दिखानी है। और किसी ऐसे इंसान को अपने जाल में फंसाना है जो दिल से साफ हो। ताकी मैं उसके भोलेपन का फायदा उठा सकूं।पर ये शहर , ये दिल्ली, यहां कुछ ऐसा है जो मुझे रोक रहा है।
वहीं एक तरफ -
सुबह का टाइम। भीड़भाड़ वाली दिल्ली की सड़कों पर एक मासूम लड़की बैग लेकर खड़ी है। बला सी खूबसूरत लड़की। उसके बाल बड़े ही लंबे थे। नाम था सिमरन ठाकुर।
सिमरन (घबराकर) बोली -
हे भगवान! ये ट्रैफिक तो कभी ख़त्म ही नहीं होगा। रोड कैसे क्रॉस करूँ मैं?
पापा! काश आप यहां होते।
वह बच्चे जैसी मासूमियत से इधर-उधर देखती है। कई बार आगे बढ़कर रुक जाती है।
18 साल की थी वो। पर दिमाग अब भी 13 साल की मासूम बच्ची जैसा।
मम्मी-पापा के दुलार में पली पहली बार अकेली ज़िंदगी का सामना कर रही थी।
उसी दिन -
सिमरन इंटरव्यू देकर बाहर निकल रही है। उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान है, लेकिन मन में डर भी।
सिमरन (मन ही मन) बोली -
पता नहीं जॉब मिलेगी या नहीं, पर मम्मी-पापा को कॉल करके बताऊँगी कि सब ठीक है।
जैसे ही वो मुड़ती है, अचानक सामने से कोई टकरा जाता है। उसका फाइल और बैग गिर जाता है।
सिमरन बोली -
ओह... सॉरी!
वो झुककर फाइलें उठाती है। तभी उसकी नज़र सामने वाले लड़के पर जाती है, और वो जम जाती है।
सामने करण खड़ा है। लंबा, हेंडसम, चेहरे पर रहस्यमयी ठंडापन। उसकी आंखों की लाल पुतलियाँ थीं।
सिमरन (मन ही मन, कांपते हुए) बोली -
ये ये जो भी इसकी आंखे लाल क्यूं हैं?
उसका चेहरा पीला पड़ जाता है। उसके होंठ कांपते हैं।
करण (धीरे से, ठंडी आवाज़ में) बोला -
तुम्हें संभलकर चलना चाहिए, ज़िंदगी हमेशा दूसरों के सहारे नहीं चलती।
सिमरन घबरा जाती है। उसकी मासूम आंखों में डर साफ झलकता है।
सिमरन (हकलाते हुए) बोली -
"म..मुझे जाना है।
वो तुरंत बैग उठाती है और बिना पीछे देखे तेज़ी से चली जाती है। करण उसकी जाती हुई सूरत को गहरी नज़रों से देखता रहता है।
करण रघुवंशी, एक सैतान, जिसे इंसानों से नफरत थी।
और सिमरन ठाकुर, एक मासूम लड़की, जो उसकी आंखों से डर गई।
पर किस्मत ने इन दोनों को सिर्फ टकराया नहीं,बांधा भी है।
रात का समय। करण अपने अपार्टमेंट में अकेला बैठा है। मेज पर एक AI चिप रखी है। उसकी आंखें और ज्यादा लाल हैं।
करण (मन ही मन) बोला -
वो लड़की! कौन थी वो ?
मैं सैतान हूँ, इंसानियत का दुश्मन, पर उसकी मासूम आंखों ने मुझे पहली बार कमजोर किया।
उसके हाथ कांपते हैं। अचानक बिजली कड़कती है। खिड़की से बाहर वही ऑफिस वाली सड़क दिखाई देती है जहाँ सिमरन चली गई थी।
दिल्ली की सड़कों पर रात का समय। चारों तरफ अंधेरा, सिर्फ पीली स्ट्रीट लाइट्स जल रही हैं। सन्नाटा ऐसा कि दूर से कुत्तों के भौंकने की आवाज़ आ रही है।
सिमरन पहली बार अकेले इतनी बड़ी दुनिया में थी।
तीन दिन से ऑफिस कॉल का इंतज़ार कर रही है। और इस दौरान अकेलेपन का डर उसे खाए जा रहा था।
आज रात भी वो अकेली घर लौट रही थी। मगर ये रात उसकी ज़िंदगी बदलने वाली थी।
सिमरन धीरे-धीरे सुनसान सड़क पर चल रही है। उसके हाथ कांप रहे हैं, आँखें इधर-उधर घूम रही हैं।
सिमरन (मन ही मन) बोली -
हे भगवान! जल्दी- जल्दी घर पहुँचा दो। यहाँ तो लगता है जैसे कोई पीछा कर रहा है। मु मुझे बहुत डर लग रहा है। मम्मी....
अचानक पीछे से गाड़ी के ब्रेक की तेज़ आवाज़ आती है। एक काली कार उसके सामने रुक जाती है।
सिमरन (चौंककर) चिल्लाती है -
आह!... मम्मी.....
उसका संतुलन बिगड़ता है और वो गिर जाती है ज़मीन पर। उसके हाथ छिल जाते हैं।
सिमरन (दर्द से कराहते हुए) बोली -
आह... मम्मी...! मर गई मैं तो।
वो बहुत मुश्किल से उठती है। तभी कार का शीशा धीरे-धीरे नीचे होता है। और अंदर बैठा करण दिखाई देता है। उसकी लाल आंखें हल्की रोशनी में और भी डरावनी लग रही हैं।
करण (धीरे से ठंडी आवाज़ में) बोला -
तुम्हें रात में अकेले नहीं निकलना चाहिए। ये शहर तुम्हारे लिए नहीं है।
सिमरन का चेहरा पीला पड़ जाता है। उसकी सांसें तेज़ हो जाती हैं। वो फौरन नज़रें झुकाकर पीछे मुड़ती है और तेज़ कदमों से चलने लगती है।
सिमरन (मन ही मन, कांपते हुए) बोली -
ये वही है! हर बार सामने क्यों आ जाता है?
हे भगवान! ये मुझसे दूर रहे। कितना डरावना है।
करण कार के अंदर बैठा उसकी जाती हुई परछाई को देखता रहता है। उसकी आंखों में गुस्सा और रहस्य दोनों झलकते हैं।
करण (मन ही मन) बोला -
डर तो रही है। मगर ये डर और इसकी मासूमियत ऐसे ही इंसान की तलाश थी मुझे, जिसका मैं खून पीकर अपने मकसद में कामयाब हो सकूं ।
सिमरन अपने रूम में पहुँचती है। दरवाजा बंद करके बिस्तर पर बैठ जाती है। उसके हाथ अब भी कांप रहे हैं।
सिमरन (अपने आप से) बोली -
हे कान्हा जी! वो कौन है? क्यों हर जगह मेरे सामने आ जाता है?
उसकी आंखें, वो लाल आंखें, जैसे मुझे निगल जाएँगी।
वो रोते-रोते सो जाती है। खिड़की के बाहर लाल चमक की हल्की झलक दिखाई देती है, जैसे करण की नज़रें उसे वहीं से देख रही हों।
ये कहानी अब महज़ मुलाक़ातों तक सीमित नहीं रहेगी।
ये कहानी है सैतान और मासूमियत की , डर और आकर्षण की।
और असली दास्तान तो अब शुरू हुई है।
सुबह का समय। एक बड़ी कॉरपोरेट कंपनी का ग्लास बिल्डिंग। सिमरन ने आज अपनी पहली जॉइनिंग की है। उसने हल्का pink सूट और टाउजर पहना है चुन्नी ओढ़ रखी है। चेहरे पर मासूम मुस्कान, लेकिन अंदर से अब भी डर।
Receptionist (मुस्कुराते हुए) बोली -
Congrats मिस ठाकुर! आपकी पोस्ट है Personal Employee मिस्टर करण रघुवंशी की।
सिमरन (हैरानी से) बोली -
करण? कौन करण?
Receptionist (गर्व से) बोली -
वो हमारे कंपनी के सबसे अच्छे AI इंजीनियर हैं। बहुत ही जीनियस, और बहुत ही सीक्रेटिव हैं। आपको सिर्फ उनका काम देखना होगा।
सिमरन थोड़ी नर्वस हो जाती है, लेकिन फिर भी सिर हिलाकर हाँ कर देती है।
सिमरन हाथ में फाइल लेकर करण के कैबिन की ओर बढ़ती है। दरवाजा कांच का है, और एक लकड़ी का छोटा सा बोर्ड लटका है जिस पर नाम लिखा है – KARAN RAGHUVANSHI।
उसका हाथ कांपता है। धीरे से दरवाजा धकेलती है।
अंदर अंधेरा सा माहौल, ब्लैक इंटीरियर, दीवारों पर अजीब सी डिजिटल स्क्रीनें जिन पर लाल-लाल कोड्स चल रहे हैं। बीच में बड़े टेबल पर बैठा है करण। उसकी आंखों का लाल रंग हल्की रोशनी में और भी डरावना दिख रहा है।
सिमरन जैसे ही उसे देखती है, वो और ज्यादा सहम जाती है।
उसका चेहरा सफेद पड़ जाता है, हाथ से फाइल गिर जाती है। उसके माथे पर पसीना आ जाता है। दिल इतनी तेज़ धड़कता है कि मानो अभी रुक जाएगा।
सिमरन, वो मासूम लड़की, जिसको ये भी नहीं पता था कि उसका बॉस वही शैतान है।
और करण, जो हर जगह उसकी किस्मत बनकर सामने आ रहा था।
सिमरन पीछे हटती है। उसकी आंखों में आँसू भर आते हैं। हाथ कांपते हुए दिल पकड़ लेती है।
सिमरन (टूटे हुए स्वर में) बोली -
अ आप य यहाँ?
करण (ठंडी, गहरी आवाज़ में) बोला -
हाँ !और अब तुम मेरी parsonal employee हो।
वो धीरे-धीरे खड़ा होता है। उसकी नज़रें सिमरन पर टिकी हैं।
सिमरन इतनी डर जाती है कि उसके पैरों में जान ही नहीं बचती। वो चक्कर खाकर लगभग गिरने वाली होती है।
करण (हल्की मुस्कान के साथ पास जाकर) बोला -
डर रही हो? डरना चाहिए भी। मगर अब भाग नहीं सकती।
उसकी आँखों का लाल रंग सीधा सिमरन की आँखों में पड़ता है। सिमरन काँपती है, दिल थाम लेती है।
उस पल सिमरन का दिल रुकने ही वाला था।
मानो मौत उसके सामने खड़ी हो।
मगर कहानी की असली शुरुआत अभी बाकी थी।
आखिर करण ने सिमरन को ही क्यों चुना? सिमरन पहली नजर मे ही क्यों डर गई थी उससे? क्या करन सिमरन को मार डालेगा? क्या सिमरन निकल पाएगी करण के चंगुल से ?