महिला विशेष कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Women Focused in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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Featured Books

मछलीवाली By Alok Mishra

मछलीवाली          "मच्छी लेलो मच्छी......... । "  उमा जोर से हांका  लगाती हुई मछली बाज़ार से निकल कर बस्ती की ओर बढ़ने लगी। उमा के सर पर मछली की टोकरी है;जिसे एक हाथ से पकड़ा है।दू...

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तुम एक चेतना हो, देह नहीं! By Shivraj Bhokare

तुम एक चेतना हो, देह नहीं! १. देह का पिंजरा और समाज की साज़िशयुगों-युगों से स्त्रियों को एक गहरे भ्रम में जिया जााया गया है। जैसे ही एक बच्ची इस दुनिया में आँखें खोलती है, पूरा समा...

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इस घर में प्यार मना है - 34 By Sonam Brijwasi

रात का समय था। बाहर ठंडी हवा चल रही थी और खिड़की के शीशों पर हल्की-हल्की बर्फ जमने लगी थी। घर के अंदर चारों लोग डिनर के बाद बैठकर बातें कर रहे थे। मोहन अभी भी पेट के पास बैठकर बच्च...

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ममतामयी माँ By Sunita Bapna

                 ममतामयी माँ शीर्षक लगते हुए मन में आया मेरी मामतमायी  माँ लिखूँ ,तब मेरे अन्तर्मन ने मुझे टोका कि इतनी विराट ममता कि धारिणी  को मेरी कह कर सीमित क्यूँ करूँ| जिसके ...

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मौत से भागती दुल्हन - 3 By Sonam Brijwasi

शुभिका लगभग चीख पड़ी -अर्णव भागो!!उसकी आँखों में डर साफ था। लेकिन उससे ज्यादा डर अर्णव के लिए था। अर्णव ने सिर हिलाया।वो बोला - नहीं Ma’am!मैं आपको छोड़कर नहीं जा सकता!उसकी आवाज़ क...

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ज़ख्मों की शादी - 23 By Sonam Brijwasi

सुबह की हल्की रोशनी कमरे में फैल चुकी थी। सृष्टि अभी भी थोड़ी झिझकी हुई थी। वो उठकर बैठ गई। बाल बिखरे हुए। चेहरे पर हल्की थकान। कबीर भी उठकर बैठ गया, पर उसने दूरी बनाए रखी। कुछ पल...

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दोस्ती By Alok Mishra

     सुभम एक कंपनी में काम करता है। हंसमुख, सरल और कर्तव्यनिष्ठा के कारण जाना जाने वाला सुभम अपने आफिस सब का चहीता  था। वह विवाहित तो था लेकिन जहां भी जाता महिलाओं आकर्षण का केंद्र...

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भंवर - भाग 1 By Anil Kundal

़ं एक ़ं मैंने कब चाहा था कि उससे मिलूँ? और मिल ही गया था वह किसी यायावर की तरह एकाएक एक अनजाने सफ़र पर निकले हुए, तो मैंने कब यह भी कभी चाहा था कि वो मुझसे प्रेम करे? फिर भी प्राय...

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गाठें By Alok Mishra

     उमा को आज अचानक ही अनिल मिल गया। ये उसके साथ कालेज में पढ़ता था। उमा से अक्सर उसकी सहेलियाँ कहती कि अनिल हमेशा ही उमा को देखता रहता है। उसे भी लगता कि अनिल उससे कुछ कहना चाहता...

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आखिर कातिल कौन..?! By softrebel

_"कहल जाला नीमन घर बर खोजत खोजत बाप के एड़ी खिया जाला।बाकि अब से कहल जाई की बाप के एड़ी दू बार खियाला एक बार नीमन घर बर खोजे मे तऽ दोसर नीमन घर बर मे घटियावल बेटी के न्याय दियावे म...

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जंगल - 39 By Neeraj Sharma

39 वा धारावाहिक ईश्वर की प्राप्ति के लिए कितना संघर्च करना पड़ता है तुम जानते भी हो ---- बहुत लोग ईश्वर को प्रश्न चिन से देखते है --- हे भी कि फिर....ये उपन्यास यही से शुरू हो रहा ह...

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पंछी का पिंजरा - भाग 4 By Anil Kundal

मुझे दो दिन बाद होश आया था। डाक्टर नर्सस और जान पहचान के सभी लोगों ने मेरी बचने की उम्मीद पूरी तरह से खो दी थी। जैसे कि बीच नदी के पहुँचते ही भंवर उठने पर मल्लाहें सभी तरह की आशाओं...

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त्रिशा... - 48 By palvisha

त्रिशा ने एक बार गाड़ी में बैठे राजन को देखा और देखती रह गई। फिर उसकी नजर वहां खड़े उन सभी लोगों पर गई जो उसे ही घूर के देख रहे है और अचानक ही त्रिशा का उन लोगों की तरफ देखने का सा...

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मुझे क्या बेचेगा रुपैया By Virrajsinh jadeja

मुझे क्या बेचेगा रुपैया" सिर्फ एक गाना नहीं है। ये उस हर लड़की की आवाज़ है जिसे दहेज, समझौता और 'बोझ' जैसे शब्दों से बाँधने की कोशिश की गई। इस गाने के बोल सीधे दिल पर वार क...

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जीवन की नई डोर - भाग 1 By prem chand hembram

दीक्षा — भाग १ अंधकार से प्रथम परिचयधनबाद जिले की कोयला नगरी के समीप बंगालियों की एक बड़ी कॉलोनी थी।उसके चारों ओर टीन, प्लास्टिक और खपरैल से बने कई झोपड़ीनुमा घर बिखरे पड़े थे।सुबह...

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Counterfeit Coin By Alok Mishra

        Evening was falling. The chill in the air was sharp, the winds howling fiercely. Drawn by a craving for a cigarette, Ashok left his room at Ashok Lodge and wandered down to...

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बिल्ली जो इंसान बनती थी - 21 By Sonam Brijwasi

तांत्रिक जैसे ही तलवार शानवी की ओर उठाने वाला था…पूरा कमरा सन्न हो गया। लेकिन तभी—एक तेज़, गूंजती हुई आवाज़ आई—रुक जाओ!सभी की नज़र पीछे मुड़ी। दरवाज़े पर खड़ा था… कार्तिकेय। उसकी...

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खोंटा सिक्का By Alok Mishra

शाम हो रही थी। ठंड़ी हवाऐं बहुत तेज बह रहीं थी। ऐसे में अशोक लाज का कमरा छोड़ कर सिगरेट की तलब में नीचे चौराहे पर गुमटी तक आया। एक सिगरेट जला कर खुद को हलका और गर्म महसूस करने लगा।...

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 24 By Sonam Brijwasi

Shreya सोफे पर अकेली बैठी थी।उसके चेहरे पर आँसू सूखते-सूखते फिर बह जाते।कमरा पहले जैसा नहीं था…ना वही गर्माहट, ना वही हँसी।तभी—उसके फोन पर एक टन की आवाज़ आई।वह चौंककर उठी।फोन में उ...

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तपती दोपहरी By prem chand hembram

तपती दोपहरी बैसाख की तपती दोपहरी…आसमान से आग बरस रही थी।ऐसा समय, जब लोग घर से बाहर निकलने से भी कतराते हैं।पुराने बाज़ार के एक कोने में राजू अपनी रिक्शा लेकर खड़ा था।सामने सत्तू की...

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ममता ...एक अनुभूति... - 5 By kalpita

थकान और कमजोरी से लड़की की  आँखें भारी होने लगीं। नींद और बेहोशी के बीच  बड़बड़ाई—“माता रानी… मैंने कभी किसी माँ की झोली खाली करने का इरादा नहीं किया था… सुनीता पर दया करो… उसकी ममत...

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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 41 (अंतिम भाग) By Jyoti Prajapati

ये मेरी चार साल पुरानी रचना थी। जिसे मैने तब पब्लिश नहीं किया था क्योंकि लैपटॉप खराब हो गया था। उस समय मेरी ज्यादातर कहानियां फैमिली पर ही होती थी। शहर की चकाचौंध से दूर, उस पुराने...

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सपनों की डोली। - 5 By softrebel

__मौन के पार से आई खबर___बच्चों के मन में उत्पन्न सवालों को नारायणी अक्सर इधर उधर की बातें कर टालने का प्रयास करती।नारायण के बिन पहले कुछ दिन बीते, फिर सप्ताह और महीने...धीरे-धीरे...

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चण्डी-दल By कमल चोपड़ा

चण्डी-दलकमल चोपड़ा​बंसी पानवाले से लेकर अमर टेलर तक और शामलाल सब्जीवाले की रेहड़ी से कमेटी के नल तक लोकपुरी में एक ही चर्चा थी—कल रात को दो-तीन औरतों ने रामरतन को बुरी तरह धुन के रख...

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दोष बताओ By कमल चोपड़ा

​दोष बताओकमल चोपड़ा​पति के माथे पर बल पड़ गये थे, "महिलाएँ तो हमारे ऑफिस में भी हैं। छेड़ना तो दूर उनसे मजाक करने की भी हिम्मत कोई नहीं कर सकता। जो ज्यादा चालू हो... चालाक बने या न...

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मुजरिम By कमल चोपड़ा

​मुजरिमकमल चोपड़ा​शोर-शराबा तो ऐसे मचा था जैसे कोई जीता-जागता आतंक गाँव में घुस आया हो, अपना-अपना काम वहीं छोड़कर बच्चे-बूढ़े बाहर निकल पड़े थे, देखा तो सामने से एक अधबूढ़ा-सा आदमी च...

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मछलीवाली By Alok Mishra

मछलीवाली          "मच्छी लेलो मच्छी......... । "  उमा जोर से हांका  लगाती हुई मछली बाज़ार से निकल कर बस्ती की ओर बढ़ने लगी। उमा के सर पर मछली की टोकरी है;जिसे एक हाथ से पकड़ा है।दू...

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तुम एक चेतना हो, देह नहीं! By Shivraj Bhokare

तुम एक चेतना हो, देह नहीं! १. देह का पिंजरा और समाज की साज़िशयुगों-युगों से स्त्रियों को एक गहरे भ्रम में जिया जााया गया है। जैसे ही एक बच्ची इस दुनिया में आँखें खोलती है, पूरा समा...

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इस घर में प्यार मना है - 34 By Sonam Brijwasi

रात का समय था। बाहर ठंडी हवा चल रही थी और खिड़की के शीशों पर हल्की-हल्की बर्फ जमने लगी थी। घर के अंदर चारों लोग डिनर के बाद बैठकर बातें कर रहे थे। मोहन अभी भी पेट के पास बैठकर बच्च...

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ममतामयी माँ By Sunita Bapna

                 ममतामयी माँ शीर्षक लगते हुए मन में आया मेरी मामतमायी  माँ लिखूँ ,तब मेरे अन्तर्मन ने मुझे टोका कि इतनी विराट ममता कि धारिणी  को मेरी कह कर सीमित क्यूँ करूँ| जिसके ...

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मौत से भागती दुल्हन - 3 By Sonam Brijwasi

शुभिका लगभग चीख पड़ी -अर्णव भागो!!उसकी आँखों में डर साफ था। लेकिन उससे ज्यादा डर अर्णव के लिए था। अर्णव ने सिर हिलाया।वो बोला - नहीं Ma’am!मैं आपको छोड़कर नहीं जा सकता!उसकी आवाज़ क...

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ज़ख्मों की शादी - 23 By Sonam Brijwasi

सुबह की हल्की रोशनी कमरे में फैल चुकी थी। सृष्टि अभी भी थोड़ी झिझकी हुई थी। वो उठकर बैठ गई। बाल बिखरे हुए। चेहरे पर हल्की थकान। कबीर भी उठकर बैठ गया, पर उसने दूरी बनाए रखी। कुछ पल...

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दोस्ती By Alok Mishra

     सुभम एक कंपनी में काम करता है। हंसमुख, सरल और कर्तव्यनिष्ठा के कारण जाना जाने वाला सुभम अपने आफिस सब का चहीता  था। वह विवाहित तो था लेकिन जहां भी जाता महिलाओं आकर्षण का केंद्र...

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भंवर - भाग 1 By Anil Kundal

़ं एक ़ं मैंने कब चाहा था कि उससे मिलूँ? और मिल ही गया था वह किसी यायावर की तरह एकाएक एक अनजाने सफ़र पर निकले हुए, तो मैंने कब यह भी कभी चाहा था कि वो मुझसे प्रेम करे? फिर भी प्राय...

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गाठें By Alok Mishra

     उमा को आज अचानक ही अनिल मिल गया। ये उसके साथ कालेज में पढ़ता था। उमा से अक्सर उसकी सहेलियाँ कहती कि अनिल हमेशा ही उमा को देखता रहता है। उसे भी लगता कि अनिल उससे कुछ कहना चाहता...

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आखिर कातिल कौन..?! By softrebel

_"कहल जाला नीमन घर बर खोजत खोजत बाप के एड़ी खिया जाला।बाकि अब से कहल जाई की बाप के एड़ी दू बार खियाला एक बार नीमन घर बर खोजे मे तऽ दोसर नीमन घर बर मे घटियावल बेटी के न्याय दियावे म...

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जंगल - 39 By Neeraj Sharma

39 वा धारावाहिक ईश्वर की प्राप्ति के लिए कितना संघर्च करना पड़ता है तुम जानते भी हो ---- बहुत लोग ईश्वर को प्रश्न चिन से देखते है --- हे भी कि फिर....ये उपन्यास यही से शुरू हो रहा ह...

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पंछी का पिंजरा - भाग 4 By Anil Kundal

मुझे दो दिन बाद होश आया था। डाक्टर नर्सस और जान पहचान के सभी लोगों ने मेरी बचने की उम्मीद पूरी तरह से खो दी थी। जैसे कि बीच नदी के पहुँचते ही भंवर उठने पर मल्लाहें सभी तरह की आशाओं...

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त्रिशा... - 48 By palvisha

त्रिशा ने एक बार गाड़ी में बैठे राजन को देखा और देखती रह गई। फिर उसकी नजर वहां खड़े उन सभी लोगों पर गई जो उसे ही घूर के देख रहे है और अचानक ही त्रिशा का उन लोगों की तरफ देखने का सा...

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मुझे क्या बेचेगा रुपैया By Virrajsinh jadeja

मुझे क्या बेचेगा रुपैया" सिर्फ एक गाना नहीं है। ये उस हर लड़की की आवाज़ है जिसे दहेज, समझौता और 'बोझ' जैसे शब्दों से बाँधने की कोशिश की गई। इस गाने के बोल सीधे दिल पर वार क...

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जीवन की नई डोर - भाग 1 By prem chand hembram

दीक्षा — भाग १ अंधकार से प्रथम परिचयधनबाद जिले की कोयला नगरी के समीप बंगालियों की एक बड़ी कॉलोनी थी।उसके चारों ओर टीन, प्लास्टिक और खपरैल से बने कई झोपड़ीनुमा घर बिखरे पड़े थे।सुबह...

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Counterfeit Coin By Alok Mishra

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तांत्रिक जैसे ही तलवार शानवी की ओर उठाने वाला था…पूरा कमरा सन्न हो गया। लेकिन तभी—एक तेज़, गूंजती हुई आवाज़ आई—रुक जाओ!सभी की नज़र पीछे मुड़ी। दरवाज़े पर खड़ा था… कार्तिकेय। उसकी...

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खोंटा सिक्का By Alok Mishra

शाम हो रही थी। ठंड़ी हवाऐं बहुत तेज बह रहीं थी। ऐसे में अशोक लाज का कमरा छोड़ कर सिगरेट की तलब में नीचे चौराहे पर गुमटी तक आया। एक सिगरेट जला कर खुद को हलका और गर्म महसूस करने लगा।...

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 24 By Sonam Brijwasi

Shreya सोफे पर अकेली बैठी थी।उसके चेहरे पर आँसू सूखते-सूखते फिर बह जाते।कमरा पहले जैसा नहीं था…ना वही गर्माहट, ना वही हँसी।तभी—उसके फोन पर एक टन की आवाज़ आई।वह चौंककर उठी।फोन में उ...

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तपती दोपहरी By prem chand hembram

तपती दोपहरी बैसाख की तपती दोपहरी…आसमान से आग बरस रही थी।ऐसा समय, जब लोग घर से बाहर निकलने से भी कतराते हैं।पुराने बाज़ार के एक कोने में राजू अपनी रिक्शा लेकर खड़ा था।सामने सत्तू की...

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ममता ...एक अनुभूति... - 5 By kalpita

थकान और कमजोरी से लड़की की  आँखें भारी होने लगीं। नींद और बेहोशी के बीच  बड़बड़ाई—“माता रानी… मैंने कभी किसी माँ की झोली खाली करने का इरादा नहीं किया था… सुनीता पर दया करो… उसकी ममत...

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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 41 (अंतिम भाग) By Jyoti Prajapati

ये मेरी चार साल पुरानी रचना थी। जिसे मैने तब पब्लिश नहीं किया था क्योंकि लैपटॉप खराब हो गया था। उस समय मेरी ज्यादातर कहानियां फैमिली पर ही होती थी। शहर की चकाचौंध से दूर, उस पुराने...

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सपनों की डोली। - 5 By softrebel

__मौन के पार से आई खबर___बच्चों के मन में उत्पन्न सवालों को नारायणी अक्सर इधर उधर की बातें कर टालने का प्रयास करती।नारायण के बिन पहले कुछ दिन बीते, फिर सप्ताह और महीने...धीरे-धीरे...

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चण्डी-दल By कमल चोपड़ा

चण्डी-दलकमल चोपड़ा​बंसी पानवाले से लेकर अमर टेलर तक और शामलाल सब्जीवाले की रेहड़ी से कमेटी के नल तक लोकपुरी में एक ही चर्चा थी—कल रात को दो-तीन औरतों ने रामरतन को बुरी तरह धुन के रख...

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दोष बताओ By कमल चोपड़ा

​दोष बताओकमल चोपड़ा​पति के माथे पर बल पड़ गये थे, "महिलाएँ तो हमारे ऑफिस में भी हैं। छेड़ना तो दूर उनसे मजाक करने की भी हिम्मत कोई नहीं कर सकता। जो ज्यादा चालू हो... चालाक बने या न...

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मुजरिम By कमल चोपड़ा

​मुजरिमकमल चोपड़ा​शोर-शराबा तो ऐसे मचा था जैसे कोई जीता-जागता आतंक गाँव में घुस आया हो, अपना-अपना काम वहीं छोड़कर बच्चे-बूढ़े बाहर निकल पड़े थे, देखा तो सामने से एक अधबूढ़ा-सा आदमी च...

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