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मोतीबाई--(एक तवायफ़ माँ की कहानी)--भाग(३)
द्वारा Saroj Verma

कुछ ही दिनों में मोतीबाई उस कोठे की सबसे मशहूर तवायफ़ बन गई,अपनी गायकी और नाच से वो सबकी दिलअजीज बन गई,उसकी आवाज़ का जादू अच्छे अच्छो का मन ...

मोतीबाई--(एक तवायफ़ माँ की कहानी)--भाग(२)
द्वारा Saroj Verma

कमरें में बंद महुआ दिनभर रोती रहीं,शाम होने को आई लेकिन मधुबनी ने दरवाजा नहीं खोला,रात भी हो गई और रात को मधुबनी ने महुआ को ना खाना दिया और ...

मोतीबाई--(एक तवायफ़ माँ की कहानी)--भाग(१)
द्वारा Saroj Verma

"माँ"  मेरे हिसाब से ये एक ही ऐसा शब्द है,जिस पर दुनिया टिकी हुई है,मानव इतिहास के जन्म के समय से ही स्त्री माँ बनती आई है और मातृत्व ...

तपस्या--एक सुहागन की....
द्वारा Saroj Verma

नीरजा ने अपनी सामने वाली पड़ोसन के दरवाजे पर लगी घंटी बजाई..... पड़ोसन ने दरवाज़ा खोला और मुस्कुरा दी फिर बोली.... अरे! आप अन्दर आइए ना! जी! अभी टाइम ...

सास-बहू...एक रिश्ता उलझा सा। - 3 - अंतिम भाग
द्वारा निशा शर्मा

तुम्हें सासू माँ से ऐसा नहीं कहना चाहिए था ! आखिर क्या जरूरत थी तुम्हें बोलने की ? वो तो मुझे सुना रही थीं और मैं सुन रही थी ...

माँ को लिखा एक ख़त
द्वारा Neelima Sharrma Nivia

माँ!!!  तुम्हे तो पता भी नही होगा आज माँ-दिवस हैं  .जब सुबह बहुए आकर पैर छू  कर कहेगी मम्मी  हैप्पी मदर डे  तब तुम मुस्स्कुराकर कहोगी  तुम को   भी ... ...

कैसे लिखूँ उजली कहानी
द्वारा Ranjana Jaiswal

मुझे माफ करना इला , मैं तुम्हारा साथ न दे सकी । चाहती थी देना ....बहुत….बहुत दूर तक साथ देना पर ... मैंने खुद भी तुम्हें गलत कहा, बुरा ...

वीरा हमारी बहादुर मुखिया - 2
द्वारा Pooja Singh

"हम आपको सब से मिलवाते है ........पहले इनसे मिलिए ये है हमारे मेयर जी हममे सबसे बहादुर ...पर गांव के दुश्मनो ने इन्हे आज इस हाल में पहुंचा दिया ...

सास-बहू...एक रिश्ता उलझा सा। - 2
द्वारा निशा शर्मा

"अरे भाई आज कोई उठेगा भी या नहीं ? अरे ! सूरज देखो कहाँ चढ़ गया है और आज तो मेरा बेटा बेचारा बिना कुछ खाए पिए ही ऑफिस ...

कैसे कैसे दुष्चक्र
द्वारा Ranjana Jaiswal

मालती देवी इतना तो जानती थीं कि स्त्री के लिए किसी न किसी मर्द का संरक्षण जरूरी होता है ,पर इस संरक्षण की इतनी बड़ी कीमत देनी पड़ती है ...

नारी सम्मान
द्वारा शाश्वत चौबे

अपमान मत करना नारियोंं का, इनके बल पर जग चलता है पुरूष जन्म लेकर तो इन्ही के गोद में पलता है आज हमारा देश गणतंत्र है, देश मे लिखित संविधान भी है, समस्त ...

वीरा हमारी बहादुर मुखिया - 1
द्वारा Pooja Singh

"हैलो !इशिता""हाय!पायल ""तेरी फाइटींग की ट्रेनिंग पूरी हो गयी""हां!""अब क्या करगी ""मैं सोशल वर्क करूंगी मां की यही इच्छा थी""अच्छा है!तो तू अचलापूर में काम कर ले वहां की ...

सास-बहू...एक रिश्ता उलझा सा। - 1
द्वारा निशा शर्मा

ओफ्फो! चीकू बेटा हर जगह तुमने ये अपना सामान बिखेरकर रखा हुआ है। अरे बेटा कम से कम अपनी किताब निकालते समय तो थोड़ा ध्यान दिया करो। पता है, ...

कुछ अल्फाज खामोश क्यों? - 2 - क्या अंत भला तो सब भला ??
द्वारा Bushra Hashmi

मैं जब छोटा था तो मैंने कई टेलीविजन प्रोग्राम में कहते सुना था कि अंत भला तो सब भला । कई बार ये ख्याल आता था क्या सच में ऐसा ...

कार्यालय के शालीन वातावरण निर्माण में महिलाओं की भूमिका
द्वारा Dr Mrs Lalit Kishori Sharma

विश्व का प्रत्येक व्यक्ति सुख शांति चाहता है। जीवन के परम लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि उसके आसपास का वातावरण सकारात्मक हो। व्यक्ति के आस ...

दादी मां...
द्वारा Saroj Verma

बहुत दिन हो गए थे स्टोररूम की सफाई किए हुए तो सोचा चलो आज स्टोररूम की सफाई करती हूँ,स्टोररूम साफ करते वक्त एक तस्वीर मिली ,जो मैने हाँल में ...

एक सबक उनके जीवन से
द्वारा Jyoti Prajapati

"आज लगभग छह साल बाद देखा था मैंने सरिता भाभी को..!! हालत में पहले से काफी अंतर आ गया था !! दुबली तो तब भी थी...लेकिन अब कुछ ज़्यादा ...

मैं बेकसूर हूँ....
द्वारा Saroj Verma

अग्रणी! बेटा!तैयार हो गई...एकाध घंटे में बस बारात दरवाज़े पर पहुँचती ही होगी.... किशनलाल जी ने अपनी भाँजी अग्रणी से कहा..... जी! मामाजी! बस!चूडियाँ पहननी बाकी़ रह गई हैं,मामी ...

एक रिश्ता ऐसा भी - (अंतिम भाग)
द्वारा Ashish Dalal

एक रिश्ता ऐसा भी (अंतिम भाग)  उत्तरा के बारें में जानकर मयंक और भी व्यथित हो गया । अपने जिस अतीत को पीछे छोड़ अपने जीने की एक अलग ...

जिल्लत़....
द्वारा Saroj Verma

उपासना.... ओ उपासना.... कहां मर गई? कहा था ना कि पूजा की थाली और लोटा मांजकर रखना लेकिन मैं नहाकर आ भी गई और तूने मेरा काम नहीं किया.... ...

एक रिश्ता ऐसा भी - (भाग ४)
द्वारा Ashish Dalal

एक रिश्ता ऐसा भी (भाग ४) अगले दिन नलिनी की तबियत ज्यादा खराब होने से अपने बेटे को स्कूल छोड़ आने के बाद वह उसे लेकर पास के ही ...

एक रिश्ता ऐसा भी - (भाग ३)
द्वारा Ashish Dalal

एक रिश्ता ऐसा भी (भाग ३) ऑफिस के अलावा दोनों का बाहर मिलना कम ही हो पाता था । उत्तरा रोज ठीक ६ बजे ऑफिस से निकल जाती पर ...

एक रिश्ता ऐसा भी (भाग २)
द्वारा Ashish Dalal

एक रिश्ता ऐसा भी (भाग २) मयंक, जानती हूं पत्र पढ़कर तुम्हें बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा । वैसे भी पिछले पत्र का भी तुमने कोई जवाब नहीं दिया ...

एक रिश्ता ऐसा भी (भाग १)
द्वारा Ashish Dalal

एक रिश्ता ऐसा भी (भाग १) स्कूल प्रांगण में प्रवेश करने का एक मात्र यही रास्ता था । पिछली रात हुई जोरदार बारिश की वजह से पूरा रास्ता टूट ...

अभिव्यक्ति - दहलीज के पार
द्वारा Yatendra Tomar

एक आम भारतीय गृहिणी की तरह रजनी भी अपने घर को पूरी जिम्मेदारी के साथ संभालतीं है हर दिन सुबह सूरज से पहले उठ कर देर रात तक घर ...

यह मेरा हक़ है
द्वारा किशनलाल शर्मा

"भाभी ----इरफान  हांफता हुआ दौड़ा दौड़ा आया था,"अनवर ज़िंदा है।""कौन अनवर?""अनवर को नही जानती।भूल गई।तुम्हारा पहला शौहर।""भाभी से मजाक कर रहे हो।"सलमा जानती थी उसका देवर इरफान मजाकिया है ...

दुल्हन....
द्वारा Saroj Verma

रिमझिम के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे,वो बस में बैठी यही सोच रही थी कि काश आज उसके पास पंख होते तो वो  उड़कर अपने ननिहाल ...

आभा.…...( जीवन की अग्निपरीक्षा ) - 9
द्वारा ARUANDHATEE GARG मीठी

स्तुति के आसूं भरे चेहरे पर, सुनीता जी अपने आसुओं से भरी आंखों में प्यार भरकर , उसे प्यार से देखती है और फिर उसे गले से लगा लेती ...

आखिर क्यों ?
द्वारा Sunita Agarwal

पंद्रह लोगों का भरा पूरा परिवार था, जिस घर में सीमा ब्याहकर आई थी।सुबह पांच बजे से चूल्हा जलता तो दिन के दो बजे तक जलता ही रहता और ...

आभा.…...( जीवन की अग्निपरीक्षा ) - 8
द्वारा ARUANDHATEE GARG मीठी

आखिरी लाइन कहकर सुनीता जी फिर शांत हो जाती हैं , तो स्तुति उन्हें आगे बताने के लिए कहती है । वो अपने आसूं साफ कर आगे कहती हैं ...

मुक्ति
द्वारा Rohit Kishore

भाग 1.) सुहाना सफर दिल्ली की सर्दियों की सुहानी सुबह की बात ही कुछ और है,आपको लेकर चलते है एक मल्टी नेशनल कंपनी Comsoft प्राइवेट लिमिटेड में जिसके CEO है ...

आभा.…...( जीवन की अग्निपरीक्षा ) - 7
द्वारा ARUANDHATEE GARG मीठी

सुनीता जी अपने आखों के किनारे साफ करती हैं और फिर स्तुति से बताती हैं । सुनीता जी - तुम्हारी दोस्त ( आभा ) छः महीने की थी बेटा ...