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तीसरा हिस्सा“अब तीन हैं।”दीवार पर लिखे ये तीन शब्द अभी भी चमक रहे थे।आरव उन्हें...
बब्बू ने ख्वाब में देखा कि बनवाड़ी के झोपड़ी की परछी में कुत्ता ऐसा उछलकूद मचाने ल...
बाबा की आवाज़ सुनते ही जैसे विवेक को होश आया। उसने तुरंत अपनी जेब से मोबाइल निका...
14 मर्डर की तहकीकात ️इसी बीच जेनिफर को होश आता है और वह दोनों को लड़ता देख जोर स...
भाग 4: चेहरे पर से हटता नकाबकमरे की हवा अचानक इतनी भारी हो गई थी कि मुस्कान को ल...
एपिसोड 36— पंद्रह साल पुरानी तस्वीरगौरव का फोन कटने के बाद अर्जुन कुछ सेकंड तक ब...
ध्रुव की ताराभाग - ८लेखिका "अनामिका" तारा के घर से ध्रुव के घर तक का सफर सिया क...
समय बहुत कुछ सहारा होगा लेखक ने, तभी वो समय को जान सका शायद यह...
इंसानियत का हिसाबलोगों की सोच और मेरी सोच में शायद जमीन-आसमान का फर्क है।मैं अक्...
अध्याय-२४शोभाबहन एकदम गुस्से में घर के गेट से बाहर निकल गईं और बहुत तेज़ी से चलन...
यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक...
सूरज की गुनगुनी धूप में सामान से भरी पिकअप वैन नई सोसाइटी के गेट पर आकर रुकी। आज से सात साल की तारा की दुनिया बदलने वाली थी। "अरे विजय! वक्त पर पहुँच गया यार," तारा के पा...
बात उन दिनों की है, एक मकान बना कर रहना, एक मिसाल और योग्यता थी। मकान अगर मंजिले हो, तो कया बात, बहुत अमीर समझे जाने वाला शक्श....." हाहाहा, "हसता हुँ, आपने पर.... ये दोगल...
जन्म से कॉलेज तक मेरा नाम अंकित है। मैं उत्तराखंड के चमोली जिले के एक छोटे से गाँव, त्रिकोट, का रहने वाला हूँ। मेरा जन्म 29 दिसंबर को मेरे मामा के गाँव में हुआ था। मेरे नाम की...
समर्पित उन सभी स्त्रियों को जो किसी न किसी बंधन में जकड़ी हुई हैं। प्रस्तावना यह कहानी मेरा पहला सह-लेखन प्रयास है। मेरे और पृथ्वी गोहेल के विचारों को प्रस्तुत करने की एक...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
गंगा के किनारे बसा वह छोटा-सा गाँव सूर्योदय के साथ ही जाग जाता था। सुबह के पाँच बजे थे। आसमान अभी अँधेरा था, लेकिन पूरब की दिशा में हल्की लालिमा दिखाई देने लगी थी। दूर मंदिर...
भाग 1: देवपुर रियासत सन 1926, भारत भूमि पर फिरंगियों का क्रूर शासन अपने चरम पर था। चारों ओर गुलामी की ज़ंजीरें जकड़ी हुई थीं, लेकिन उसी दौर में राजपूताने और जंगलों के बीच ब...
एक कर्तव्य ऐसा भी स्वामी हरि प्रपन्नाचार्य हरिद्वार में वैष्णव सम्प्रदाय के प्रसिद्ध व तपस्वी आचार्य थे । उनके प्रसिद्ध राधा स्वामी आश्रम तीर्थयात्रियों व भक्तों के ठहरने व खा...
बहुत पुरानी बात नहीं है, यह उस दौर की कहानी है जब लोग आँखों से दिलों का हाल पढ़ लिया करते थे। शहर के बीचों-बीच बसा पुराना कॉलेज, जिसकी दीवारों पर इतिहास की परतें जमी थीं और गलियारो...
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