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शीर्षक: वल्चर: पंखों के पीछे का सच[दृश्य 1 – अंधेरे से जन्म]कभी एक साधारण ग्रह थ...
गर्मी की दोपहर पूरे उन्माद पर थी। बाज़ार की चहल-पहल धीमी पड़ चुकी थी। श्यामा अपन...
ऋगुवेद सूक्ति-- (१०) की व्याख्या “न रिष्यते त्वावतः सखा” — (जो ईश्वर का सखा/भक्त...
: : प्रकरण - 42 : : उस के बाद ऐसी धारावाहिक प्रदर्शि...
भाग 1दुबई की शामें झूठी होती हैं।खूबसूरत, चमकदार… और भीतर से बेरहम।सूरज समुद्र म...
कुछ कहानियाँ अचानक शुरू नहीं होतीं।वे धीरे-धीरे बनती हैं—दिनों के साथ, आदतों के...
तब संगीता बोली यह नहीं हो सकता निशा तुम समझो लोग क्या कहेंगे समाज क्या कहेगा,,,,...
मीरा की गवाही ने पूरे कोर्टरूम को हिला दिया। वो विटनेस स्टैंड पर खड़ी थी, शांत औ...
---हिन्दी कहानी: तुम बिन(लगभग 1500 शब्दों में) ---प्रस्तावनाकभी-कभी ज़िन्दगी हम...
किडनी तोह्फ़ा का 3...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गह...
घर भरा हुआ था। आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक। शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ। सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई।...
रूहों का सौदा क्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और क्रोध ने विवेक का गला घोंट दिया, तब रुद्र ने उठाया एक ऐसा कदम जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। लेकिन इस श...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
मैं अपने बचपन में दादा-दादी की लाड़ली थी।उनकी आँखों का नूर, उनके आँगन की सबसे प्यारी हँसी।घर में अगर कोई सबसे पहले मेरी ओर देखता था,तो वे दादा-दादी ही होते थे।उनके लिए मैं केवल उनक...
1. प्रारंभिक स्वरूप परंपरागत मानसिकता में पूजा–पाठ धर्म का आरंभिक और सबसे प्रचलित रूप है। यह वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति बाह्य देवताओं या प्रतीकों की आराधना करता है, मंत्रोच्चार औ...
यह शब्द सुना तो बहुत था, बचपन में इस पर निबंध भी बहुत लिखे थे पर मेरे लिए यह शब्द तब तक अस्तित्व में नहीं था जब तक की मुझे मेरी सहेली ने इसका असल अर्थ समझाया नहीं था। मेरे पिताज...
सुनीति ऑफिस से वापस आती है। उसके चेहरे पर थकान और उदासी साफ झलक रही है। आज ऑफिस में बॉस ने उसे डाँट दिया था। पहली बार उसे अपने आप पर भरोसा टूटा हुआ लगा। कमरे में आते ही वो ज़मीन पर...
निधि की नन्ही उम्मीद” (श्रृंखला: निधि – मौन प्रेम की कहानी) सुधांशु की अनुपस्थिति में जब निधि ने बेटी को जन्म दिया, तब पहली बार उसके चेहरे पर शांति की झलक आई थी। वो मुस्कुरा...
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