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उपन्यास वाली लड़की (अंतिम भाग)
द्वारा किशनलाल शर्मा

"अरे आप तो भीग गई।" सलवार कुर्ता भीगकर उसके गोरे बदन से चिपक गया था।भीगे कपड़ो में उसके शरीर के उभार साफ नजर आ रहे थे।"बरसात से अपने को ...

प्रायश्चित - भाग-3
द्वारा Saroj Prajapati

शिवानी सोने की बहुत कोशिश कर रही थी लेकिन पिछली यादें जिन्हें वह भूलने की कोशिश में इतने सालों से लगी थी मानो आज फिर से जीवित हो उठी ...

कर्मा - 6 - दिस इज़ वन वे रोड
द्वारा Sushma Tiwari

दिस इज़ वन वे रोड... (गतांक से आगे) दूसरे दिन जब सिद्धार्थ चंदन के साथ कॉलेज पहुंचा तो उसका मन भटकते हुए पिछली रात में अटका हुआ था। आरती ...

पृथ्वी के केंद्र तक का सफर - 24
द्वारा Abhilekh Dwivedi

चैप्टर 24 लापता। किसी भी इंसानी भाषा में मेरे दुःख-दर्द व्यक्त नहीं हो सकते थे। मैं जैसे ज़िंदा दफन था; अब धीरे-धीरे भूख प्यास से तड़पकर मरने के अलावा ...

उपन्यास वाली लड़की (भाग 1)
द्वारा किशनलाल शर्मा

"सर् यह जमा कर लीजिए।,आवाज सुनकर मैने किताब से नज़रे उठाकर देखा था।मेरे सामने आकर्षक व्यक्तित्व का युवक सूटकेस लेकर खड़ा था।"लॉक है?"मैं किताब मेज पर रखते हुए बोला"लॉक ...

कर्मा - 5 - जादू है नशा है.. मदहोशियां
द्वारा Sushma Tiwari

जादू है नशा है.. मदहोशियां... (गतांक से आगे) सिद्धार्थ अभी भी उन लड़कों को घूर कर देख रहा था। अब ऐसा भी क्या कह दिया था उसने? मैच में ...

पृथ्वी के केंद्र तक का सफर - 23
द्वारा Abhilekh Dwivedi

चैप्टर 23 अकेलापन। इस बात को सच में स्वीकारना होगा कि अब तक हमारे साथ सब अच्छा ही हुआ था और मैंने भी कुछ ज़्यादा शिकायतें नहीं की थी। ...

कर्मा - 4 - स्वागत नहीं करोगे हमारा
द्वारा Sushma Tiwari

स्वागत नहीं करोगे हमारा... (गतांक से आगे) प्रिया और चंदन सिद्धार्थ को घूर रहे थे। चंदन ने सिद्धार्थ के पीठ पर थपकी देते हुए उसे विचारों के भंवर से ...

पृथ्वी के केंद्र तक का सफर - 22
द्वारा Abhilekh Dwivedi

चैप्टर 22 रविवार, भूमि के नीचे। रविवार की सुबह जब सबकी नींद खुली तो किसी भी चीज़ के लिए कहीं कोई जल्दी या हड़बड़ी नहीं थी। चूंकि पहले से ...

प्रायश्चित - भाग-2
द्वारा Saroj Prajapati

याद करते हुए शिवानी का मन अतीत के गलियारों में पहुंच गया। कितनी चंचल अल्हड़ और बातूनी हुआ करती थी वो। आज से बिल्कुल अलग। घर में सबकी लाडली ...

पृथ्वी के केंद्र तक का सफर - 21
द्वारा Abhilekh Dwivedi

चैप्टर 21 महासागर में। अगले दिन तक हम अपनी सारी थकान भूल चुके थे। सबसे पहले तो मैं प्यासा नहीं महसूस कर रहा था और मेरे लिए ये ताज्जुब ...

कर्मा - 3 - भागता जाए समय का पहिया
द्वारा Sushma Tiwari

भागता जाए ये समय का पहिया... (गतांक से आगे) जसपाल! क्या तुम मुझे साफ-साफ बताओगे कि सिद्धार्थ कहां है? अगर तुम जानते हो तो प्लीज मुझे बता दो.. इस ...

एक फूल दो माली (अंतिम भाग)
द्वारा किशनलाल शर्मा

"मर्द औरत सिर्फ बच्चा पैदा करने के लिए हमबिस्तर नही होते।शारीरिक भूख मिटाना भी जरूरी है।पति पत्नी एक दूसरे की शारीरिक भूख मिटाते है।लेकिन तुम नामर्द हो।मेरे शरीर की ...

पृथ्वी के केंद्र तक का सफर - 20
द्वारा Abhilekh Dwivedi

चैप्टर 20 पानी कहाँ है? उस थकान और बेहोशी की हालत में उस वक़्त मेरे सुस्त दिमाग में कई बार सवाल आ रहे थे कि किस वजह से हैन्स ...

एक फूल दो माली (भाग 2)
द्वारा किशनलाल शर्मा

लेकिन वह औरत कोई अजनबी नही उसके दोस्त की पत्नी यानी उसकी भाभी थी।लेकिन थी तो औरत।और एक कश्मकश उसके दिलोदिमाग में होने लगी।एक तरफ रेवती की देह को ...

पुलिस रिपोर्ट
द्वारा Yogesh Kanava

पुलिस रिपोर्ट पूरा डांग का क्षेत्र, भिण्ड से मुरैना के रास्ते हिचकोले खाती सी बस । यूं समझो चल रही थी वरना तो डांग क्षेत्र में भी ऊॅंट की ...

पृथ्वी के केंद्र तक का सफर - 19
द्वारा Abhilekh Dwivedi

चैप्टर 19 पश्चिमी सुरंग - नया रास्ता। अब हमारा प्रस्थान दूसरे गलियारे की तरफ हो चुका था। हैन्स ने पहले की तरह आगे रहते हुए मोर्चा संभाला। हम सौ ...

एक फूल दो माली (भाग 1)
द्वारा किशनलाल शर्मा

"मुझे बच्चा  चाहिए।अपना बच्चा"दीना नामर्द था।फिर भी  चाहता था।उसकी पत्नी रेवती अपनी कोख से उसे बच्चा  पैदा करके दे।पति की बात सुुुनकर रेेवती बोली,"तुम जानते हो  नामर्द हो।फिर  मेरी ...

रहस्यमयी टापू--(अंतिम भाग)
द्वारा Saroj Verma

रहस्यमयी टापू--(अंतिम भाग) राजकुमारी सारन्धा की अवस्था बहुत ही गम्भीर थी और सारन्धा की अवस्था देखकर राजकुमार विक्रम बहुत ही विचलित थे,अघोरनाथ जी ने शीघ्रता से अपने अश्रु पोछे ...

कर्मा - 2 (पैसा ये पैसा)
द्वारा Sushma Tiwari

पैसा ये पैसा.. हाय पैसा... (गतांक से आगे) जसपाल फोन पर सिर्फ ह्म्म ह्म्म करता है.. जी भाई, हाँ भाई के अलावा पूनम को कुछ सुनाई नहीं दे रहा ...

रहस्यमयी टापू--भाग (१९)
द्वारा Saroj Verma

रहस्यमयी टापू--भाग(१९) शाकंभरी की बात सुनकर सब विश्राम करने लगें और अर्धरात्रि के समय सब जाग उठे,जिससे जो बन पड़ा वैसे अस्त्र शस्त्र लेकर शंखनाद से प्रतिशोध लेने निकल ...

पृथ्वी के केंद्र तक का सफर - 18
द्वारा Abhilekh Dwivedi

चैप्टर 18 वो अनुचित मार्ग। अगले दिन तड़के ही हमने शुरुआत कर दी थी। हम समय बर्बाद नहीं कर सकते थे। मेरे हिसाब से हमें पाँच दिन लगने थे ...

प्रायश्चित भाग-1
द्वारा Saroj Prajapati

अक्टूबर का महीना आते आते अंधेरा कुछ जल्दी ही घिरने लगता है। ऊपर से इस महीने में त्योहारों की भरमार। कितना भी समय ज्यादा लेकर चलो बाजार में, फिर ...

पृथ्वी के केंद्र तक का सफर - 17
द्वारा Abhilekh Dwivedi

चैप्टर 17 गहराई में - कोयले की खदान। हम सच में सीमित राशन पर निर्भर रहना था। हमारे रसद मुश्किल से तीन दिन के लायक थे। इसका एहसास मुझे ...

रहस्यमयी टापू--भाग (१८)
द्वारा Saroj Verma

रहस्यमयी टापू....!!--भाग(१८) घगअनंग जी के निवास स्थान पर सभी  रात्रि को विश्राम करने लगें, तब घग अनंग जी बोले_____        मैं अब आप सब को शंखनाद के सभी रहस्यों ...

रहस्यमयी टापू--भाग (१७)
द्वारा Saroj Verma

रहस्यमयी टापू--भाग(१७) इसका तात्पर्य है कि शंखनाद ने सबके जीवन को हानि पहुंचाई हैं,अब हम सबके प्रतिशोध लेने का समय आ गया है, शंखनाद और  चित्रलेखा ने बहुत पाप ...

पृथ्वी के केंद्र तक का सफर - 16
द्वारा Abhilekh Dwivedi

चैप्टर 16 पूर्वी सुरंग। अगले दिन मंगलवार 20 जून, सुबह छः बजे हम अपने आगे के सफर के लिए फिर से तैयार थे।अब हम आगे जिन रास्तों पर बढ़ ...

रहस्यमयी टापू--भाग (१६)
द्वारा Saroj Verma

रहस्यमयी टापू--भाग(१६)  राजकुमारी सारन्धा की आंखें क्रोध से लाल थीं और उनसे अश्रुओं की धारा बह रहीं थीं, उनकी अन्त: पीड़ा को भलीभाँति समझकर नीलकमल आगें आई और सारन्धा ...

पृथ्वी के केंद्र तक का सफर - 15
द्वारा Abhilekh Dwivedi

चैप्टर 15 नीचे उतरना जारी रहा। अगले दिन, सुबह 8 बजे, भोर जैसे दिन ने हमें जगाया। अंदर रोशनी छन कर ऐसे आ रही थी जैसे किसी प्रिज्म से ...

रहस्यमयी टापू--भाग (१५)
द्वारा Saroj Verma

रहस्यमयी टापू--भाग(१५)   सब आगे बढ़ चले उस जंगल की ओर शाकंभरी की सहायता करने,आगे बढ़ने पर रानी सारन्धा किसी पत्थर की ठोकर से गिर पडी़, उनके पैर में चोट ...

कर्मा - 1
द्वारा Sushma Tiwari

दिलवालों के शहर में सपनों की उड़ानदेश का दिल दिल्ली, कई सपनों का रंग महल.. सत्ता के गलियारों से लेकर तंग गलियों तक.. कई जिन्दगियों की गवाह दिल्ली, आज ...

हमसाया
द्वारा Rita Gupta

  कहानी-  हमसाया   कुछ ही दिन हुए थे उस नए शहर में मुझे नौकरी ज्वाइन किये। हर दिन लगभग पांच-छः बजे मैं अपने ठिकाने यानि वर्किंग गर्ल्स हॉस्टल पहुँच जाती ...