(जंगल की ठंडी हवा में सिमरन और करण एक सुरक्षित जगह पर बैठे हैं। सिमरन अब कुछ हिम्मत करके करण की तरफ़ देखती है।)
सिमरन (संकोच से, पर गंभीर स्वर में) बोली -
“करण जी... एक बात पूछूँ? आप और रुद्र... इतने अच्छे दोस्त थे... फिर अचानक क्यों दुश्मन बन गए?”
(करण थोड़ी देर चुप रहता है। उसकी आँखों में दर्द और पछतावा झलकता है जब तुम 18 साल की थी, और अपनी नई नौकरी पर आई थी...”
(फ्लैशबैक में समय घूमता है। ऑफिस का दृश्य। सिमरन पहली बार अपने नए ऑफिस में घुसती है, थोड़ी घबराई हुई। करण उसके पास है, उसकी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए। रुद्र पास में खड़ा है, उसकी आँखों में लालच और मोहित भाव।)
“रुद्र... तुम्हारी मासूमियत और खूबसूरती से मोहित हो चुका था। उसका इरादा था कि वो और मैं दोनों तुम्हारा खून एक साथ पिएँ। पर मैं... जिसने पहले ही तुम्हारा ख्याल रखा, अचानक मैं तुम्हारे प्रति अपनी भावनाएँ महसूस करने लगा था । मैने तुमसे शादी कर ली और अपनी लालसा पर काबू पाने की ठानी।”
रुद्र ने मुझे दो ऑप्शन दिए थे। या तो मैं और वो एक साथ तुम्हारा खून पीएं या फिर मैं तुम्हें रुद्र के हवाले कर दूं ताकि वो तुम्हे भी अपना बना के अपने जैसा ही खराब बना लेता या फिर वो तुम्हे कैद कर लेता हमेशा के लिए। क्योंकि रुद्र तुम पर मोहित हो चुका था। वो तुम्हारी मासूमियत पे मारता था। और मैं नहीं चाहता था कि तुम उसके गलत हाथों में जाकर अपनी मासूमियत खो बैठो। मैं नहीं चाहता था कि तुम कैद हो जाओ।
(फिर दृश्य बदलता है, करण और रुद्र आमने-सामने। दोनों की आंखों में गुस्सा और संघर्ष।)
“उस दिन से करण और रुद्र के बीच दुश्मनी शुरू हुई। दोस्ती टूट गई, और एक-दूसरे के खिलाफ़ उनका जुनून ज्वाला बन गया।”
(वापस वर्तमान में, सिमरन करण को देखती है। उसकी आँखों में डर, लेकिन समझदारी भी है।)
सिमरन (धीरे से, हल्की धड़कन के साथ) बोली -
“तो इसलिए... आप मुझसे प्यार करने लगे और रुद्र आपसे लड़ने लगा?”
करण (आँखों में नमी और हल्की मुस्कान के साथ) बोला -
“हाँ... सिमरन। मैं तुम्हें अपनी सुरक्षा और प्यार से कभी नहीं छोड़ सकता। और यही वजह थी कि मैं रुद्र से उलझा।”
“सिमरन ने पहली बार समझा कि करण की इंसानियत और उसका प्यार ही उसे रुद्र के हर खतरे से बचाने वाली शक्ति थी।
लेकिन अब भी खतरे आसपास थे, और समय जल्दी ही उनका परीक्षण लेने वाला था।”
(सिमरन और करण सुरक्षित जगह पर हैं। लेकिन दूर जंगल में अचानक अजीब आवाज़ें गूँजने लगती हैं। पत्तों की खड़खड़ाहट और हवाओं का रौद्र स्वर सुनाई देता है।)
“सुरक्षित समझी जगह अब खतरे का केंद्र बन चुकी थी। रुद्र और उसकी बिरादरी पास आ रही थी, तैयार अपने हर हथियार और शक्ति से हमला करने के लिए।”
(सिमरन चुपचाप करण के पास आकर उसका हाथ पकड़ती है।)
सिमरन (संकुचित स्वर में) बोली -
“करण जी... ये लोग हमारे पीछे हैं... क्या हम लड़ेंगे?”
करण (गंभीर स्वर में, आंखों में लाल चमक लिए) बोला -
“हाँ... सिमरन। अब कोई और रास्ता नहीं है। तुम मेरी हिफाज़त हो, और मैं तुम्हें किसी कीमत पर किसी को नहीं दूँगा।”
(जंगल में अंधेरा गहरा होता है। रुद्र और तीन अन्य डेविल्स दिखाई देते हैं। उनके चेहरों पर लाल चमक, हाथ में हथियार। रुद्र आगे बढ़ता है।)
रुद्र (घमंड और क्रोध में) बोला -
“करण! ये बच्ची अब तुम्हारे पास नहीं रहेगी। आज मैं उसे अपने लिए ले लूंगा, और तुम्हारी हार तय है। अब सिमरन मेरी होगी सिर्फ मेरी।”
(करण सिमरन को अपने पीछे खींचते हुए खड़ा होता है। उसका शरीर घायल है, लेकिन आँखों में जुनून है।)
करण (गहरी आवाज़ में) बोला -
“तुम गलत सोच रहे हो रुद्र... ये बच्ची मेरी है, और मैं किसी को भी इसे लेने नहीं दूँगा!”
(जंगल की हवाओं के साथ, दोनों पक्ष तैयार हो जाते हैं। करण अपने पंख फैलाता है, लाल आँखों में आग झलकती है। सिमरन उसके पीछे छिपी, लेकिन उसकी आँखों में हिम्मत है। 18 साल की सिमरन ना जाने क्या क्या देख रही थी। उसका 21 साल का पति क्या क्या सह रहा था।)
“जंगल में रात का सन्नाटा टूट चुका था। अब लड़ाई सिर्फ़ शक्ति की नहीं, बल्कि प्यार और इंसानियत की भी थी।
करण और सिमरन का बंधन अब उनकी सबसे बड़ी ताकत बन चुका था। और रुद्र, जो कभी दोस्त था, अब उनका सबसे बड़ा खतरा था।”
जंगल में हवा तेज़ चल रही है। पत्ते उड़ रहे हैं। करण अपने पंख फैलाए खड़ा है, लाल आँखें चमक रही हैं। रुद्र और उसके तीन डेविल्स करीब आते हैं।)
रुद्र (गुस्से में) बोला -
“करण! तुम्हारा समय खत्म हो गया। ये अब मेरी होगी!”
करण (सख्त आवाज़ में) बोला -
“कभी नहीं! तुम्हें इस तक नहीं पहुंचने दूँगा मैं!”
(रणभूमि की तरह दोनों एक-दूसरे की ओर झपटते हैं। करण की चोटें भारी हैं लेकिन उसकी ताकत अब उसके प्यार और हिफाज़त की वजह से बढ़ गई है।)
(सिमरन डरते हुए पीछे खड़ी है। लेकिन अचानक उसकी हिम्मत जागती है।)
सिमरन (जोशीले स्वर में) बोली -
“करण जी! रुकिए! आप क्यों लड़ रहे हैं? अगर आप उसे मेरे लिए छोड़ दो तो हम जीत सकते हैं।”
(रुद्र चौंक जाता है। सिमरन आगे बढ़ती है, डर के बावजूद करण के पास खड़ी होती है।)
सिमरन (निर्धारित स्वर में) बोली -
“करण जी ने मुझे हमेशा बचाया। अब मैं उनकी हिफाज़त खुद करूँगी। आप उसे परेशान नहीं कर सकते!”
(करण उसकी बात सुनकर उसकी तरफ देखता है। सिमरन के दृढ़ निश्चय से उसका मन और मजबूत हो जाता है। वो रुद्र और डेविल्स पर झपटता है।)
“सिमरन की मासूमियत और हिम्मत ने करण में एक नई ऊर्जा भर दी। प्यार और भरोसे की ताकत ने, उसके भीतर की शक्ति को जागृत कर दिया।
अब लड़ाई सिर्फ़ शारीरिक नहीं, बल्कि भावनाओं और इरादों की भी थी।”
(रणभूमि में करण और रुद्र आमने-सामने, लाल आँखें चमक रही हैं। सिमरन उनके पीछे खड़ी है, उसके हाथ काँप रहे हैं लेकिन हिम्मत नहीं हारी।)