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Episode 1शाम का वक्त था और Priyam...
लेखक Raju Kumar Chaudharyश्रेणी: वित्तीय साक्षरता, प्रेरणा, व्यक्तिगत विकासपाठको...
एपिसोड 13: बेअसर दौलत और उम्मीद का कतराअस्पताल के उस कमरे में मौत का साया गहर...
Present Time – Late Nightकमरे में फिर से सन्नाटा छा गया था। Kabir कुछ नहीं बोला।...
अद्वैत राशि को उसके कमरे में ले जाकर बेड पर बैठा देता है और खुद एक स्टूल लेकर उस...
अध्याय 1: सुनहरी राख का सवेराशून्य-प्रस्थ के क्षितिज पर जब सूर्य अपनी पहली किरण...
एक महीना बीत चुका था। सुबह की सड़कें अभी पूरी तरह जागी नहीं थीं। नील दौड़ रहा था...
पुरानी रेलवे स्टेशन की वह सुनसान इमारत, जो बरसों पहले किसी हादसे के बाद बंद कर...
भाग 1: अनजान राहेंइलाहाबाद के पास एक छोटा सा गाँव था—मुरारीपुर। कहने को तो यह गा...
नवंबर की हल्की ठंड...और मीठी-सी धूप में...आँगन में बैठी महक अपने गीले बालों को स...
दरिया, परिंदे और वो अजनबी अज़ीम …. वह ज़ोया को जाते हुए देखता है और सोचता है— "यह कैसी अजनबी थी जो आई तो एक शोर की तरह थी (महंगी गाड़ी, रुतबा), पर छोड़ एक खामोशी गई। क्या यह...
लेकिन ठंडी हवेली, मंडप सजाया गया है, गुलाबी और सुनहरी डेकोर के बीच शहनाई की हल्की धुन। समय: रात 11 बजे। लाल और सुनहरे फूलों से सजी जगह में शहनाई बज रही है। फूलों की खुशबू के...
ट्रैक साँस रोके हुए था। सुपरकार वर्ल्ड चैंपियनशिप की आख़िरी रेस—जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी थीं। एरीना में मौजूद हज़ारों लोग और अपनी टीवी स्क्रीनों से चिपके करोड़ों दर्शक...
"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गह...
कभी-कभी ज़िंदगी वो सवाल पूछ लेती है... जिनका जवाब सिर्फ ख़ामोशी के पास होता है। और मोहब्बत... वो अक्सर वहीं से शुरू होती है, जहाँ लोग टूट कर बिखर जाते हैं। सहर की हल्की सी रौ...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
मौत का दस्तक बनारस की उस रात में गंगा के घाटों पर सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब सी बेचैनी थी। शाम की आरती के बाद जो शांति छा जानी चाहिए थी, वह आज कहीं खो गई थी। मणिकर्णिका घाट पर ज...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जम्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी.मुझे देखकर मेरे माता पीता खुश हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे प...
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