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तुम और मैं - 1
द्वारा Rahul Pandey
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तुम और मैं - अध्याय - 1 (उनसे मुलाकात) — बचपन के कुछ किस्सों और कहानियों से निकाली गई एक छोटी सी लेखनी है। मैं Rahul Pandey ( ...

फिर भी शेष - 1
द्वारा Raj Kamal
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हिमानी अंदर से दरवाज़ा बंद करना भूल गई थी। जैसे ही नशा टूटा, सुखदेव को हिमानी की देह की तलब लगी तो जा घुसा उसके कमरे में। भयभीत हिरनी—सी ...

पूर्ण-विराम से पहले....!!! - 1
द्वारा Pragati Gupta
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पूर्ण-विराम से पहले....!!! 1 "सुभोर प्रखर! कल रात तुमने मेरे व्हाट्सप्प मैसेज को देखा.. पर तुमने कोई जवाब लिखकर नहीं भेजा| तुम मेरे किसी भी मैसेज को बगैर पढ़े-लिखे ...

एक बूँद इश्क - 1
द्वारा Chaya Agarwal
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एक बूँद इश्क (1) बहुत ही खूबसूरत अहसास है उसमें खो जाना। एक तरफ हरे-हरे पत्तों की वन्दनवार से सजी, लहराती, घुमावदार, संकरी सड़कें तो दूसरी ओर गहरी खाई ...

बरसात की काली रात
द्वारा Ankusha Bulkunde
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       शाम का वक़्त था| मैं घर के गार्डन में टहलने  निकला |मंद-मंद  हवा चल रही थी |पेड़ पैर बैठे पक्षियों की चिलचिलाहट मुझे बड़े ही बारीकी ...

चोखेर बाली - 1
द्वारा Rabindranath Tagore
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विनोद की माँ हस्मिती महेन्द्र की माँ राजलक्ष्मी के पास जाकर धरना देने लगी। दोनों एक ही गाँव की थीं, छुटपन में साथ खेली थीं। राजलक्ष्मी महेन्द्र के पीछे पड़ ...

शकुंतला देवी फ़िल्म रिव्यू
द्वारा Mahendra Sharma
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हां मुख्य भूमिका में मतलब शकुंतला देवी के किरदार में हैं विद्या बालन। विद्या का एक खास अंदाज़ है जिसमें वह दिन प्रतिदिन निखरती जा रहीं हैं। जहां हिंदी ...

मिले जब हम तुम - 1
द्वारा Komal Talati
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                              part -1              शालिनी ने फोन पर बात करते हुए कहा, - " देव तुम जल्दी ...

अधूरी हवस
द्वारा Balak lakhani
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   (1)पार्ट प्यार बारे मे कई ग्रंथ लिखे गए, हर ग्रंथ मे प्यार को अलग एंगल से देखा गया, ओर पढ़ने वालो ने भी अपनी अपनी सुहलयत से उसे ...

फौजी का प्रेम
द्वारा RISHABH PANDEY
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बस मे बंधे नजरबट्टू के छल्ले की आवाज में मधु की चूड़ियों की मधुर संगीत को महसूस करता हुआ स्पोई रवि आज छुट्टियों के बाद वापस लेह के किसी ...

ब्राह्मण की बेटी - 1
द्वारा Sarat Chandra Chattopadhyay
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मुहल्ले में घूमने-फिरने के बाद रासमणि अपनी नातिन के साथ घर लौट रही थी। गाँव की सड़क कम चौड़ी थी, उस सड़क के एक ओर बंधा पड़ा मेमना (बकरी ...

कब्रस्तान की आवाज - 1
द्वारा Henna pathan
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कब्रस्तान लफ्ज सुनते ही हमारे जहन मे एक ही ख्याल आता है " खौफ" से रूह कांप जाती है ऐसी ही एक खौफ से भरी कहानी है एक शहर ...

घर की मुर्गी - प्रस्तावना
द्वारा AKANKSHA SRIVASTAVA
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अक्सर ससुराल में नई बहू के आते ही उसे जिम्मेदारी के नाम पर अकेले ही हजारों कामो के लिए सौप दिया जाता हैं। बिना यह सोचें कि वह अभी ...

अधूरी कहानी - 1
द्वारा Heena katariya
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कहानी है विशाल और लता की विशाल एक एसा लडका जो की कभी अपनी लाईफ़ में सीरीयस नहीं था उसे सारी बाते मजाक से ही शुरू होती और उसी ...

एक ही भूल, भाग १
द्वारा Saroj Prajapati
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तुम्हारी इस नौकरी ने तो हमे खानाबदोश बनाकर रख दिया है। हर तीन चार साल बाद उठाओ समान और चल दो दूसरी जगह । ये भी कोई जिंदगी है?" ...

डोर – रिश्तों का बंधन - 1
द्वारा Ankita Bhargava
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(1)      साडा चिड़िया दा चंबा वे       बाबुल असां उड़ जाना      साडी लंबी उडारी वे      बाबुल मुड़ नहीं आना'          ढ़ोलकी की थाप पर जैसे ही गीत शुरु हुआ सुरेश की आंखों के कोर भीग गए। ...

ये कैसा संन्यास
द्वारा Neerja Pandey
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कान्ता बार बार दरवाजे तक आती और घूंघट से झांक कर देखती पर दूर दूर भी कही आनंद नहीं दिखाई दे रहा था। ये इंतजार की घड़ियां बढ़ती ही ...

मंझली दीदी - 1
द्वारा Sarat Chandra Chattopadhyay
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किशन की मां चने-मुरमुचे भून-भूनकर और रात-दिन चिन्ता करके वहुत ही गरीबी में उसे चौदह वर्ष का करके मर गई। किशन के लिए गांव में कही खडे होने के ...

बेताल पच्चीसी - 1
द्वारा Somadeva
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बहुत पुरानी बात है। धारा नगरी मे ने उसे मार डाला और स्वयं राजा बन बैठा। उसका राज्य दिनोंदिन बढ़ता गया और वह सारे जम्बूद्वीप का राजा बन बैठा। ...

बिराज बहू - 1
द्वारा Sarat Chandra Chattopadhyay
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हुगली जिले का सप्तग्राम-उसमें दो भाई नीलाम्बर व पीताम्बर रहते थे। नीलाम्बर मुर्दे जलाने, कीर्तन करने, ढोल बजाने और गांजे का दम भरने में बेजोड़ था। उसका कद लम्बा, बदन ...

सेंधा नमक - 1
द्वारा Sudha Trivedi
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सेंधा नमक सुधा त्रिवेदी (1) यह पहला ही मौका था वन्या के लिए जब किसी इतने बडे कार्यक्रम में जाने का उसे मौका मिल रहा था । फिल्मी स्टार, ...

एक मुट्ठी इश़्क--भाग (१)
द्वारा Saroj Verma
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एक मुट्ठी इश्क़...!!--भाग(१) सरकारी अस्पताल  का कमरा,कमरे मे पडे़,सफ़ेद रंग के आठ दस बिस्तर और उन्हीं बिस्तरों में से एक बिस्तर जीनत का भी हैं, महीनों से बिस्तर पर ...

कर्म पथ पर - 1
द्वारा Ashish Kumar Trivedi
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            ‌             Chapter 1सन 1942 का दौर था। सारे देश में ही अंग्रेज़ों को देश से बाहर कर स्वराज लाने ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 1
द्वारा harshad solanki
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राजू के हाथों में आज उसके पिताजी का सामान शिफ्ट करते वक्त एक छोटी, मगर बहुत पुराणी डायरी आई थी. उसने वह डायरी पर नजर डाली. उस पर हाथ ...

सोलहवाँ साल (1)
द्वारा ramgopal bhavuk
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  उपन्यास   सोलहवाँ साल                                                                                                                                            रामगोपाल भावुक                 सम्पर्क सूत्र-   कमलेश्वर कॉलोनी (डबरा) भवभूति नगर, जिला ग्वा

सिंदूरी मांग
द्वारा Deepika Mona
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नमस्कारलॉकडाउन में इतने दिन हो गए घर पर गए हुए पूरे 5 महीने, आज पापा मम्मी मेरे घर पे ही मिलने आ गए बहुत दिनों के बाद उन्हें देखा ...

अन्जान रिश्ता - 1
द्वारा suraj sharma
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           बरसात की रात थी, पूरे गांव को मानो खामोशी ने अपने आगोश में लिया हुआ था !! बारिश की बूंदों की आवाज़ तो मानो ...

Chandragupt
द्वारा Jayshankar Prasad
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चन्द्रगुप्त (सन् 1931 में रचित) हिन्दी के प्रसिद्ध नाटककार जयशंकर प्रसाद का प्रमुख नाटक है। इसमें विदेशियों से भारत का संघर्ष और उस संघर्ष में भारत की विजय की ...

उर्वशी - 1
द्वारा ज्योत्सना कपिल
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उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 1 " यह क्या कर डाला तुमने " उसने एक बार विस्फारित नेत्रों से भूमि पर पड़ा भाई का मृत शरीर देखा और एक ...

रहस्यों से भरा ब्रह्माण्ड - 1 - 1
द्वारा प्रेम पुत्र
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रहस्यों से भरा ब्रह्माण्ड इस किताब के माध्यम से हमने कुछ विभिन्न प्रकार की थ्योरीस को आपके लिए प्रस्तुत किया है इस किताब में कुल तीन कहाँनी है। प्रथम ...