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परिणीता - 1
द्वारा Sarat Chandra Chattopadhyay
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विचारों में डूबे हुए गुरूचरण बापु एकांत कमरे में बेठें थे। उनकी छोटी पुत्री ने आकर कहा-‘बाबू! बाबू। माँ ने एक नन्हीं सी बच्ची को जन्म दिया है।’ यह ...

नियति - 1
द्वारा Seema Jain
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शिखा की सबसे प्रिय सखी दीपा उसे बार-बार अपनी बहन रिया की शादी के लिए इंदौर चलने का आग्रह कर रही थी । शिखा जानती थी अगर विवाह समारोह ...

क्योंकि आय एम मॅरीड - 1
द्वारा Dipti Methe
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ये कहानी है उन शादीशुदा कपल्स की जो अपनी रोज़ मरह की जिंदगी से तंग आ चुके है रेल की पटरी की तरह चलते-चलते थक चुके है ...

कशिश - 1
द्वारा Seema Saxena
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कशिश सीमा असीम (1) गर न होते आँसू आँखों में खूबसूरत इतनी आँखें न होती गर होता न दर्द दिल में कीमत खुशी की पता न होती जीवन में आगे ...

अधूरी हवस
द्वारा Balak lakhani
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   (1)पार्ट प्यार बारे मे कई ग्रंथ लिखे गए, हर ग्रंथ मे प्यार को अलग एंगल से देखा गया, ओर पढ़ने वालो ने भी अपनी अपनी सुहलयत से उसे ...

खेल प्यार का...भाग 1
द्वारा Sayra Khan
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प्रस्तावनायह कहानी वसिम और कायनात की प्रेम कहानी है मैं इस कहानी को आपके समक्ष पहली बार रजू करने जा रही हूं!  लिखना आता है या नहीं वह तो ...

राय साहब की चौथी बेटी - 1
द्वारा Prabodh Kumar Govil
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राय साहब की चौथी बेटी प्रबोध कुमार गोविल 1 कॉलेज की पूरी इमारत जगमगा रही थी। ईंटों से बनी बाउंड्री वॉल को रंगीन अबरियों और पन्नियों से सजाया गया ...

मधुरिमा - भाग (१)
द्वारा Saroj Verma
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चल राजू,जल्दी से खाना खाकर तैयार हो जा,रात को दस बजे हमारी ट्रेन है, मां ने मुझसे कहा____     मैंने कहा ठीक है मां और मैंने अपने कंचे,चंदा-पवआ खेलने ...

डोर – रिश्तों का बंधन - 1
द्वारा Ankita Bhargava
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ढ़ोलकी की थाप पर जैसे ही गीत शुरु हुआ सुरेश की आंखों के कोर भीग गए। कैसा माहौल होता है बेटी की शादी में। घर में रौनक भी होती ...

बड़ी दीदी - 1
द्वारा Sarat Chandra Chattopadhyay
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इस धरती पर एक विशिष्ट प्रकार के लोग भी वसते है। यह फूस की आग की तरह होते हैं। वह झट से जल उठते हैं और फिर चटपट बुझ ...

दो बाल्टी पानी
द्वारा Sarvesh Saxena
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"अरे नंदू… उठ के जरा देख घड़ी में कितना टाइम हो गया है " मिश्राइन ने चिल्ला कर कहा| "अरे मम्मी सोने भी नहीं देती सोने दो ना" नंदू अपनी ...

विवेक और 41 मिनिट - 1
द्वारा S Bhagyam Sharma
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विवेक और 41 मिनिट.......... तमिल लेखक राजेश कुमार हिन्दी अनुवादक एस. भाग्यम शर्मा संपादक रितु वर्मा अध्याय 1 दिसंबर के महीने में एक इतवार की सुबह चेन्नई में पौ- ...

मन कस्तूरी रे - 1
द्वारा Anju Sharma
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सामने खुली किताब के खुले पन्ने को पलटते हुए स्वस्ति अनायास ही रुक गई! उसने एक पल ठहरकर पढ़ना शुरू किया! “प्रेम के अलावा प्रेम की कोई और इच्छा नहीं ...

पहेली - 1
द्वारा Sohail Saifi
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तिथि 31 मार्च 1990एक अज्ञात व्यक्ति एक नवजात शिशु को कुमार फैमिली के घर के बाहर रख कर चला जाता हैँ¡ कुमार फैमिली मे एक अधेड उम्र का जोड़ा ...

योगिनी - 1
द्वारा Mahesh Dewedy
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योगिनी 1 कई बातें ऐसी थीं जो मीता के स्वभाव के प्रतिकूल थीं- उनमे से एक थी ब्राह्मवेला के पश्चात चारपाई तोड़ते रहना। अनुज से इस विषय में अनेक ...

प्रेम मोक्ष - 1
द्वारा अ, का, पुत्र
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                     दुर्घटना संध्या समय की चंचलता अपने मोहक वातावरण मे सूर्य की लाली संग एक अद्धभुत नजारे मे ढल रही हैँ इस ...

चोखेर बाली - 1
द्वारा Rabindranath Tagore
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विनोद की माँ हस्मिती महेन्द्र की माँ राजलक्ष्मी के पास जाकर धरना देने लगी। दोनों एक ही गाँव की थीं, छुटपन में साथ खेली थीं। राजलक्ष्मी महेन्द्र के पीछे पड़ ...

ततइया - 1
द्वारा Nasira Sharma
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ततइया (1) शन्नो बारिन कमर के नीचे चाँदी की चौड़ी करधनी कसे अलता लगे पैरों में पड़ी पायल की मधुर लय के संग जब बाल्टी उठाए गुजरिया बनी म्यूनिस्पैलिटी ...

चौपड़े की चुड़ैलें - 1
द्वारा PANKAJ SUBEER
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चौपड़े की चुड़ैलें (कहानी : पंकज सुबीर) (1) हवेली वैसी ही थी जैसी हवेलियाँ होती हैं और घर वैसे ही थे, जैसे कि क़स्बे के घर होते हैं। कुछ ...

डिटेक्टिव विक्रम - 1 - बिगिनिंग
द्वारा VIKAS BHANTI
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"हेलो, क्या म्हारि बात विक्रम गोस्वामी से हो री से? फ़ोन के उस पार बैठे शख्स ने हरयाणवी टोन में बोला । " जी, बोल रहा हूँ, कहिये ।" ...

कौन दिलों की जाने! - 1
द्वारा Lajpat Rai Garg
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कौन दिलों की जाने! एक दीपावली के पश्चात्‌ शादी—विवाह के लिये शुभ मुहूर्त आरम्भ हो जाता है। नवम्बर मास के अन्तिम दिनों में ‘महफिल' बैंक्वट, जो सम्भवतः ट्राईसिटी का ...

आसपास से गुजरते हुए - 1
द्वारा Jayanti Ranganathan
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मुझे पता चल गया था कि मैं प्रेग्नेंट हूं। मैं शारीरिक रूप से पूरी तरह सामान्य थी। ना शरीर में कोई हलचल हो रही थी, ना मन में। मैं ...

दो अजनबी और वो आवाज़ - 1
द्वारा Pallavi Saxena
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दो अजनबी और वो आवाज़ जीवन में जब आपके किसी अपने की कोई परेशानी आपके सर चढ़कर बोलती है तो क्या होता है ? जाहीर सी बात है मन ...

स्टॉकर - 1
द्वारा Ashish Kumar Trivedi
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                                            स्टॉकर                 ...

अच्छाईयां
द्वारा Dr Vishnu Prajapati
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लेखांक – १ मुंबई से रात को निकली बस की ये सवारी सुबह की पहली किरन के साथ अपने आखरी मुकाम तक पहुच चुकी थी |  शहर की भीड़ ...

चंद्रगुप्त - प्रथम अंक - 1
द्वारा Jayshankar Prasad
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चंद्रगुप्त - प्रथम अंक - 1 (स्थान - तक्षशिला के गुरुकुल का मठ) चाणक्य और सिंहरण के बीच का संवाद - उस समय आम्भिक और अलका का प्रवेश होता है - ...

आषाढ़ का फिर वही एक दिन - 1
द्वारा PANKAJ SUBEER
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आषाढ़ का फिर वही एक दिन (कहानी: पंकज सुबीर) (1) टिंग-टिड़िंग टिड़िंग-टिड़िंग, टिंग-टिड़िंग टिड़िंग-टिड़िंग, ये मोबाइल का अलार्म है । जो रोज़ सुबह खंडहर हो चुके सरकारी आवासों वाली ...

वो कौन थी..
द्वारा SABIRKHAN
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  (अपने अंदाज को बरकरार रखते हुये एक और कहानी लेकर हाजिर हुं  )                                 १ मकान हवा उजास वाला और काफी बडा है जिजु..! निगाहने सारे कमरे का मुआयना ...

खट्टी मीठी यादों का मेला - 1
द्वारा Rashmi Ravija
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गहरी नींद में थीं वे, लगा कहीं दूर कोई गाना बज रहा है, पर जैसे जैसे नींद हलकी होती गयी, गाने का स्वर पास आता प्रतीत हुआ, पूरी तरह ...