Best Stories Free PDF Download | Matrubharti

मनचाहा - 12
by V Dhruva
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निशा अंकल और आंटी के साथ हमारे पास आई। भरत अंकल (निशा के पापा)- कैसे हो सब बेटा? दिशा- सब एकदम अच्छे हैं मेरे सिवा। गायत्री आंटी (निशा की ...

हिमाद्रि - 1
by Ashish Kumar Trivedi
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                                       हिमाद्रि(1)उमेश परेशान सा बंगले के हॉल में बैठा था। वह समझ ...

जिन की मोहब्बत.. - भाग 4
by Sayra Khan
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ज़ीनत ने सबा की अम्मी को कहा ।"खालाजान में घर जा रही हूं मेरी तबियत ठीक नहीं लग रही , आप सबा को बोल देना l"ज़ीनत वहा से चली ...

मन्नू की वह एक रात - 2
by Pradeep Shrivastava
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‘बिब्बो मेरी शादी कैसे हुई यह तो तुम्हें याद ही होगा ? पैरों की तीन अंगुलिया कटी होने के चलते जब शादी होने में मुश्किल होने लगी तो बाबू ...

कमसिन - 9
by Seema Saxena
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देखो वो आ गया स्वर्ग तालाब ! देव ने दूर से इशारा करते हुए कहा ! उसने अपनी नजरे उसी तरफ करते हुए देखा ! एक छोटे से कुंड ...

अदृश्य हमसफ़र - 24
by Vinay Panwar
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अनुराग का चेहरा उतर गया। ममता की सभी बातों को हंसी में झटकने वाले अनुराग आज उसका किया मजाक नही सह पा रहे थे। बीमारी की वजह से शायद ...

जीन्न का तोहफा
by Khushi Saifi
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कहानी एक आदमी की है जिस पर जिन्न मेहरबान हो जाता है, उसकी मदद करता है लेकिन उस आदमी की सिर्फ एक गलती से नाराज़ हो कर जिन्न क्या ...

मिस्टर हमीदा
by Saadat Hasan Manto
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रशीद ने पहली मर्तबा उस को बस स्टैंड पर देखा जहां वो शैड के नीचे खड़ी बस का इंतिज़ार कर रही थी रशीद ने जब उसे देखा तो वो ...

‘केसरी’ फिल्म रिव्यू- सारागढी की गौरव गाथा…
by Mayur Patel
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वो केवल 21 थे और सामने पूरे 10000 की फौज. जीत नामूमकिन थी. लेकिन उन 21 जांबाज सिपाहीयों के हौसले बुलंद थे. इतने बुलंद की उनकी सरफरोशी इतिहास के ...

रेलगाड़ी
by MB (Official)
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Railgadi - Ajay Kumar Gupta

रीति रिवाज को अनुकूल बनाएं
by r k lal
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रीति रिवाज को अनुकूल बनाएं आर 0 के 0 लाल   तुम यहां सोई हुई हो। तुम्हें पता भी नहीं  कि मेहमान चले गए हैं। तुम बड़ी हो गई ...

देह के दायरे - 18
by Madhudeep
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देह के दायरे - 18 पूजा को स्टूल पे बिठाके पंकज किसी बोर्ड पर ब्रश चलाने लगा - पूजा की तस्वीर बनते ही उसकी और से पंकज को चाय की ...

बरसात के दिन - 8
by Abhishek Hada
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उसी समय बरसात शुरू हो गई। उसने अपने रूम की खिड़की खोल दी। ठंडी ठंडी बरसात की फुहारे उसके कमरे में आने लगी। उसी समय वहां से साइकिल पर ...

ROYAL COLLEGE 1992 - 2
by Urvil V. Gor
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पिछले पार्ट में देखा कि केसे कॉलेज के ग्राउंड में फुटबॉल गोलपोस्ट के उपर एक लाश लटकती मिली। ओर अभि रोनाल्ड ओर रॉनी को छोड़ कर सब होटल ग्रीन ...

The Seven Doors - 3
by Sarvesh Saxena
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कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि एंजल और रशेल जैसे ही कहानी पढ़ना शुरू करते हैं, दूसरी दुनिया में पहुंच जाते है जहां उन्हें एक उदास बुढ़िया ...

बिन तेरे...! भाग 2
by Dipti Methe
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Continue....... ..."आय लव्ह यू टू, शिवा..! पर क्या शादी करना ही सॉल्यूशन होगा..?"- राजीव सोच में डूब गया |"और कोई रास्ता हो तो बताओ..? बस..! सोसायटी की नजरों में ...

शापित मूर्ति
by Roshan Jha
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 मेरा नाम राहुल है और मैं आपको आज एक कहानी बताने जा रहा हूं जो मेरे ही जीवन की एक सच्ची घटना है यह कहानी आज से करीब कुछ ...

अनजान रीश्ता - 2
by Heena katariya
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पारुल उसकी तसवीर बस मे देखकर वहि रुक जाती हे तभी नैना उसे फ़िर से अपने विचार से बहार ले आती हे और एसे देखकर वह गुस्सा हो जाती ...

द टेल ऑफ़ किन्चुलका - पार्ट - 1
by VIKAS BHANTI
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डिसक्लेमर: यह कहनी पूरी तरह काल्प्निक है, इसका किसी धर्म, जगह, समय या धर्मग्रन्थ से कोई वास्ता नहीं है । इसका कोई एतिहासिक महत्व भी नहीं है । इसका ...

हमें भूत देखना है।
by Vijit Sharma
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सन 2017 का अक्टूबर का महीना चल रहा था वातावरण में हल्की हल्की ठंड शुरू हो गई थी। इस हल्की-हल्की ठंडे वातावरण में स्कूली बच्चे आपस में हंसी मजाक ...

माँमस् मैरिज - प्यार की उमंग - 7
by Jitendra Shivhare
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सुगंधा के पिता गणेशराम चतुर्वेदी एक सेवानिवृत्त स्कूल टीचर है। बड़े भाई संजीव चतुर्वेदी की शादी शहर के दाल मील (फ्रेक्ट्री) मालिक राजाराम असावा जी की बड़ी बेटी शालिनी ...

खट्टी मीठी यादों का मेला - 3
by Rashmi Ravija
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(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से वे जग जाती हैं, और पुराना जीवन याद करने लगती हैं कि कैसे वे चौदह बरस की उम्र में शादी कर ...

वक्त है मदारी
by Ajay Kumar Awasthi
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पिछले 30 सालों से मेरा उनसे परिचय है । मैंने कभी उन्हें उदास या दुःखी नही देखा । वो हमेशा आक्रामक रहते थे ।    तावबाज सजल दा को ...

पश्चाताप - 2
by Meena Pathak
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शहर के पॉश एरिया में भव्य और सुंदर सा बंगला, नौकर-चाकर, हर सुख-सुविधा और क्या चाहिए था उसे ! गेट से प्रवेश करते ही बड़ा सा बगीचा जिसमे देशी-विदेशी ...

वैश्या वृतांत - 15
by Yashvant Kothari
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लक्ष्मी बनाम गृहलक्ष्मी यशवन्त कोठारी      दीपावली के दिनों मे गृहलक्ष्मियों का महत्व बहुत ही अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि वे अपने आपको लक्ष्मीजी की डुप्लीकेट मानती हैं ...

दस दरवाज़े - 12
by Subhash Neerav
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मेरे स्टोर के करीब ही एक पब है। पब जाने वाले सभी लोग मेरे ग्राहक भी हैं। छोटी-मोटी वस्तु लेने आए ही रहते हैं। मैं कभी-कभी इस पब में ...

गुमशुदा की तलाश - 1
by Ashish Kumar Trivedi
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              गुमशुदा की तलाश                          (1)रंजन चर्च में प्रार्थना कर बाहर निकल रहा ...

आइना सच नहीं बोलता - 19
by Neelima sharma Nivia
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नंदिनी की चुप को सौ बरस हो गये हैं. ये वो चुप है जो कुछ घंटों में सौ बरस लाँघ लेती है. ये लंबाई में नहीं गहराई में नापी ...

ख्वाबों कि क़ीमत - 2
by Khushi Saifi
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“मेरा सामान.. मेरा कमरा” ये लफ्ज़ बार बार अवनि के दिल पर घूंसा बन कर लग रहे थे, क्या उसका कुछ भी नही.. उसे यूँ महसूस हुआ कि सौरभ ...

sarvajanik vahan se yatra
by Ved Prakash Tyagi
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this is my personal experience travelled by a public conveyance leaving my own car at home