हिंदी कहानियां मुफ्त में पढ़ें और PDF डाउनलोड करें

नया क़ानून
द्वारा Saadat Hasan Manto
  • (28)
  • 10.1k

मंगू कोचवान अपने अड्डे में बहुत अक़लमंद आदमी समझा जाता था। गो उस की तालीमी हैसियत सिफ़र के बराबर थी और उस ने कभी स्कूल का मुँह भी नहीं ...

दास्तान-ऐ अश्क-1
द्वारा SABIRKHAN
  • (86)
  • 4.1k

आज से आपके लिए पेश कर रहा हूं एक ऐसी लडकी की कहानी जिसने अपनी जिंदगी में कभी हार नहीं मानी मुश्किले चट्टानों की तरह उसकी जिंदगी में थी ...

वो कौन थी..
द्वारा SABIRKHAN
  • (280)
  • 7.5k

  (अपने अंदाज को बरकरार रखते हुये एक और कहानी लेकर हाजिर हुं  )                                 १ मकान हवा उजास वाला और काफी बडा है जिजु..! निगाहने सारे कमरे का मुआयना ...

कहाँ गईं तुम नैना - 1
द्वारा Ashish Kumar Trivedi
  • (48)
  • 6.5k

          कहाँ गईं तुम नैना  (1)आदित्य अपने जिम में वर्कआउट कर रहा था। उसका मोबाइल वाइब्रेट करने लगा। ट्रेडमिल पर भागते हुए उसने चेक किया ...

काँटों से खींच कर ये आँचल - 1
द्वारा Rita Gupta
  • (20)
  • 5.5k

क्षितीज पर सिन्दूरी सांझ उतर रही थी और अंतस में जमा हुआ बहुत कुछ जैसे पिघलता जा रहा था. मन में जाग रही नयी-नयी ऊष्मा से दिलों दिमाग पर ...

देह की दहलीज पर - 1
द्वारा Kavita Verma
  • (47)
  • 3.6k

साझा उपन्यास  देह की दहलीज पर लेखिकाएँ  कविता वर्मा  वंदना वाजपेयी  रीता गुप्ता  वंदना गुप्ता  मानसी वर्मा  *** कथा कड़ी 1 सुबह की पहली किरण के साथ कामिनी की नींद खुल ...

बात एक रात की - 1
द्वारा Aashu Patel
  • (51)
  • 13.3k

बात एक रात की अनुवाद: डॉ. पारुल आर. खांट सी - 1 'दीदी, आज मुझे पावरफुल प्रोड्यूसर-डिरेक्टर अमन कपूर को मिलने जाना है|' स्ट्र्गलिंग एक्ट्रेस मयूरी माथुर अपनी बड़ी ...

उदासियों का वसंत - 1
द्वारा Hrishikesh Sulabh
  • 307

उदासियों का वसंत हृषीकेश सुलभ (1) वे चले जा रहे थे।  श्लथ पाँव। छोटी-सी मूठवाली काले रंग की छड़ी के सहारे। यह छड़ी कुछ ही दिनों पहले, ......कल ही, ...

पहली हवाई यात्रा
द्वारा Lalit Rathod
  • 412

मैं वर्तमान को खुलकर जीने और कल्पना को सच मानने में विश्वास करता हूँ. जब भी किसी यात्रा में जाता हूँ उस वर्तमान की ढेरों कल्पना करता हूँ, जिसे ...

कलियुग का मित्र - INTERNET - 1
द्वारा आदर्श प्रताप सिंह
  • 302

आइये हम जानते है कि इस कलियुग में बन रहे नए मित्र जैसे “INTERNET” दौर कलियुग का है जहाँ व्यक्ति ही असुर है और वही देवता है। भेदभाव करने ...

एक मेसेज कहानी ख़त्म - 1
द्वारा Prit_ki_lines
  • 326

एक मेसेेज कहानी ख़त्म - भाग-1 असल जिन्दगी की यह ऐसी कहानी है,छोटे से शहर से भाग कर महानगरी मुंबई में रहने वाले  पति-पत्नी खुशाल जिंदगी जी रहे थे, ...

कोरोना वोरीयर्स
द्वारा #Krishna Solanki
  • 289

‌‌                कहता  है  ? तुम  पुलिस  ,डॉक्टर  या  फौज  वाले  हो !                       ...

भगतसिंह
द्वारा Bhavin Raghuvanshi
  • 310

यह नारा जिसने दिया वो भगतसिंह के बारे मे आज कुछ लिखने का मन है मे आज उसके बारे मे एक पुस्तक पढ़ रहा तब सच मे मैं हैरान ...

आजादी - भाग 1
द्वारा राज कुमार कांदु
  • 286

राहुल बारह बरस का हो चला था । सातवीं कक्षा का विद्यार्थी था । पढाई के साथ सभी गतिविधियों में औसत ही था । खाना खाने में भी उसके ...

परिस्थिति - कुछ सवाल और एक सोच
द्वारा priya saini
  • 268

हम  सदा परिस्थितियों पर ही निर्भर रहते हैं। परिस्थिति हमारे अनुकूल हो तो सब अच्छा लगता है और विपरीत हो तो वक़्त खराब लगता है। क्या परिस्थिति के खिलाफ़ ...

एक प्रेम कहानी
द्वारा Navdeep
  • 266

ये कहानी कॉलेजिएट स्कूल के लड़के की  है। वे लड़का बोहात ही सुंदर और स्मार्ट  और टैलेंटेड वी होता था ।उस लड़के  का स्कूल में पहला दिन था।और उस ...

दादा
द्वारा Shilpa Sharma
  • 325

‘‘न जाने क्यों इतना दिल पसीज जाता है तुम्हारा? ऐसे ही चलता रहा तो मदद मांगनेवालों की लाइन लग जाएगी हमारे यहां. हर किसी की समस्या सुलझाने बैठ जाते ...

शापित - 1
द्वारा Ashish Dalal
  • 316

शापित आशीष दलाल [बचपन में यौनउत्पीड़न का शिकार हुए युवक की अपराधी से बदला लेने की भावना और अंतर्द्वंद पर आधारित अपराध कथा] (१) ‘अंकल ! आपकी दाढ़ी चुभती ...

रोकेन अध्याय - 1
द्वारा Nish
  • (22)
  • 386

यह कहानी है एक दैवीय विनाशक की जो सदियों से पृथ्वी पर हर एक विनाश का कर्ता है। लेकिन क्या होगा जब वो इंसानी जज्बातों में उलझ जाएगा??? क्या ...

ब्राह्मण की बेटी - 1
द्वारा Sarat Chandra Chattopadhyay
  • (47)
  • 16.8k

मुहल्ले में घूमने-फिरने के बाद रासमणि अपनी नातिन के साथ घर लौट रही थी। गाँव की सड़क कम चौड़ी थी, उस सड़क के एक ओर बंधा पड़ा मेमना (बकरी ...

भूख
द्वारा Kumar Kishan Kirti
  • 334

"अरे मोहन बेटा, यह क्या कर रहे हो?"प्रोफेसर डॉ०विनय शर्मा अपने पाँच साल के बेटे को देखकर थोड़ा गुस्से के साथ पूछ बैठे,दरअसल उनका पाँच साल का बेटा मोहन ...

जीवन अभी बाकी है...
द्वारा Shivani Verma
  • 242

"जीवन अभी बाकी है” वृद्धाश्रम में सुबह से ही काफी चहल पहल है. सभी लोग शाम को होने वाले समारोह की तयारी में जुटे है, और कुछ दिव्यांग और ...

एक पिता की व्यथा
द्वारा Sanjay Prajapati
  • 383

इस लोकडाउन मे बात एक पिता की भी होनी ज़रूरी है जो पिता रात दिन काम करता था आज वो घर पे बिना काम के बेठा हे फिर भी मुस्कुरा ...

Aashiqi - An Un Told Love Story 1
द्वारा zeba praveen
  • 264

कहानी के मुख्यपात्र   आरुषि रॉय दीवांक शर्मा आरुषि की फॅमिली माँ पापा दो बहनें दीवांक की फॅमिली माँ पापा एक बहन आरुषि के दोस्त - सौम्या और रोहित असिस्टेंट - रिया ...

अनकही
द्वारा Ashish Saxena
  • 324

" हेलो अक्षय " "क्या हाल हैं ? इतने दिनों बाद कैसे याद आ गयी |" अक्षय ने फ़ोन उठाते ही पूछा  . "ठीक हूँ , क्या तुम्हे याद ...

श्री मद्भगवतगीता माहात्म्य सहित (अध्याय-१)
द्वारा Durgesh Tiwari
  • (16)
  • 688

जय श्रीकृष्ण बंधु-बांधवोंबहुत समय उपरांत फिर एक लेख लेके आपके सम्मुख उपस्थित हूँ। आप सब के स्नेह की अभिलाषा है।बंधुओ मैन श्री मद्भगवतगीता जी को  पढ़ा और मुझे ह्रदय ...

रहस्य - 1
द्वारा Prajkta B Jadhav
  • 256

     "कोई तो बचाओ मुझे, कोई तो मदत करो मेरी, क्यों मारना चाहते हो मुझे, छोड दो मुझे, मुझे जीना हैं, छोड दो मुझे" ये सपना देखते हुए ...

बन्धन--भाग(१)
द्वारा Saroj Verma
  • (11)
  • 355

आइए ठाकुर साहब!! पधारिए,       कहिए क्या लेना चाहते हैं? दुकान के मालिक सेठ मगनलाल ने ठाकुर राघव प्रताप सिंह से पूछा!!   बस,सेठ जी कुछ कम्बल खरीदने है, ...

तस्वीर में अवांछित - 1
द्वारा PANKAJ SUBEER
  • 239

तस्वीर में अवांछित (कहानी - पंकज सुबीर) (1) ‘‘रंजन जी, आ रहे हैं ना आप ?’’ उधर से फ़ोन पर आयोजक ने शहद घुली आवाज़ में पूछा। ‘‘नहीं भाई ...

महामाया - 1
द्वारा Sunil Chaturvedi
  • 254

महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – एक आधी रात से ही हरिद्वार के कनखल घाट पर लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी। गंगाजी के ठंडे पानी में जैसे ही ...