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नया क़ानून
द्वारा Saadat Hasan Manto
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मंगू कोचवान अपने अड्डे में बहुत अक़लमंद आदमी समझा जाता था। गो उस की तालीमी हैसियत सिफ़र के बराबर थी और उस ने कभी स्कूल का मुँह भी नहीं ...

दास्तान-ऐ अश्क-1
द्वारा SABIRKHAN
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आज से आपके लिए पेश कर रहा हूं एक ऐसी लडकी की कहानी जिसने अपनी जिंदगी में कभी हार नहीं मानी मुश्किले चट्टानों की तरह उसकी जिंदगी में थी ...

बात एक रात की - 1
द्वारा Aashu Patel
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बात एक रात की अनुवाद: डॉ. पारुल आर. खांट सी - 1 'दीदी, आज मुझे पावरफुल प्रोड्यूसर-डिरेक्टर अमन कपूर को मिलने जाना है|' स्ट्र्गलिंग एक्ट्रेस मयूरी माथुर अपनी बड़ी ...

देह की दहलीज पर - 1
द्वारा Kavita Verma
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साझा उपन्यास  देह की दहलीज पर लेखिकाएँ  कविता वर्मा  वंदना वाजपेयी  रीता गुप्ता  वंदना गुप्ता  मानसी वर्मा  *** कथा कड़ी 1 सुबह की पहली किरण के साथ कामिनी की नींद खुल ...

ब्राह्मण की बेटी - 1
द्वारा Sarat Chandra Chattopadhyay
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मुहल्ले में घूमने-फिरने के बाद रासमणि अपनी नातिन के साथ घर लौट रही थी। गाँव की सड़क कम चौड़ी थी, उस सड़क के एक ओर बंधा पड़ा मेमना (बकरी ...

काँटों से खींच कर ये आँचल - 1
द्वारा Rita Gupta
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क्षितीज पर सिन्दूरी सांझ उतर रही थी और अंतस में जमा हुआ बहुत कुछ जैसे पिघलता जा रहा था. मन में जाग रही नयी-नयी ऊष्मा से दिलों दिमाग पर ...

मुक्ति कि मोह कथा
द्वारा Meenakshi Dikshit
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This is a short story, based on relationships developing in cyber space or social media and the pain they cause to sensitive people. Story unfolds a friendship developed between ...

वह भाग रहा था
द्वारा S. S. Husain
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the story is based on the concept that thought is invincible and prevails after initial struggle.the main character is a metaphor representing an independent thinker who goes ...

मूड्स ऑफ़ लॉकडाउन - 1
द्वारा MB Publication
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क्वारंटाइन...लॉक डाउन...कोविड 19... कोरोना के नाम रहेगी यह सदी। हम सब इस समय एक चक्र के भीतर हैं और बाहर है एक महामारी। अचानक आई इस विपदा ने हम ...

किसी ने नहीं सुना - 1
द्वारा Pradeep Shrivastava
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किसी ने नहीं सुना -प्रदीप श्रीवास्तव भाग 1 रक्षा-बंधन का वह दिन मेरे जीवन का सबसे बड़ा अभिशप्त दिन है। जो मुझे तिल-तिल कर मार रहा है। आठ साल ...

वो कौन थी..
द्वारा SABIRKHAN
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  (अपने अंदाज को बरकरार रखते हुये एक और कहानी लेकर हाजिर हुं  )                                 १ मकान हवा उजास वाला और काफी बडा है जिजु..! निगाहने सारे कमरे का मुआयना ...

अथ लेखन चालीसा
द्वारा dilip kumar
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अथ लेखन चालीसाचुनाव के विशेष शस्त्रों यानी नारों की दुकान में आपका हार्दिक स्वागत है। दुकान पर न भी आएँ तो भी दूसरे विकल्प उपलब्ध हैं। इस हेतु हमारा ...

स्वाभिमान - लघुकथा - 30
द्वारा Madhu Jain
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शाम होने को आई, शोभा सुबह से बिन कुछ खाये पिये ही अपने कमरे में लेटी है। कोई भी उसके कमरे में नहीं आया। न ही आज खाने के लिए ...

वसुंधरा गाँव - 1
द्वारा प्रेम पुत्र
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एक 12 वर्ष का बालक डरा सहमा खुद को एक अंधेरे स्टोर रूम  बन्द करके बैठा है। उससे देख कर पता लगता है। वो किसी के भय से छुपा ...

स्वाभिमान - लघुकथा - 25
द्वारा Kanta Roy
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स्कूल से आते ही उस दिन लड़का देर तक चिल्लाता रहा कि उसे पॉकेट मनी चाहिए ही चाहिए! क्योंकि उसके सभी सहपाठियों को उनके पिता पॉकेट मनी देते हैं। ...

सलाह
द्वारा Harsh Bhatt
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हर्निल_हरि की पहली स्टोरी      कॉलेज से वापसी के वक्त हर दिन की तरह आज भी पूरा ग्रुप साथ था,हरि इस ग्रुप का एंटरटेनर ओर ज्ञानी बाबा बन गया ...

स्वाभिमान - लघुकथा - 33
द्वारा Rachana Agarwal Gupta
  • 348

आज बच्चों को पढ़ाते वक़्त, अचानक अपने आप से मुलाकात हो गई। अरे सुमन क्या हुआ, सिर्फ दस मिनट बचे हैं टेस्ट खत्म होने में, जल्दी पूरा करो ...

बटोरनी की शादी
द्वारा Shailendra Bharti
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बटोरनी अपने बॉयफ्रेंड बटोरन से बोलती है मेरी शादी ठीक हो रहा है। सब को लड़का पसन्द है।मैं कुछ बोल भी नहीं सकती घर में क्यों कि मैं लड़की ...

मा भारती - गुलामी के बाद का भारत
द्वारा all FAN club
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जिन्होंने हमारे भारत देश को गुलाम बनाया और देशवासियों पर भयंकर अत्याचार किये, उन अंग्रेजों की नई साल को न मनाने पर तर्क प्रस्तुत करती मेरी कविता........------------------------------------------------नये साल के ...

बिराज बहू - 1
द्वारा Sarat Chandra Chattopadhyay
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हुगली जिले का सप्तग्राम-उसमें दो भाई नीलाम्बर व पीताम्बर रहते थे। नीलाम्बर मुर्दे जलाने, कीर्तन करने, ढोल बजाने और गांजे का दम भरने में बेजोड़ था। उसका कद लम्बा, बदन ...

कुलधरा गांव की खौफनाक रात
द्वारा Renu Jindal
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बात उस समय की है जब हमने गांव छोड़ा , मानो तकरीबन 15-20 साल पहले  की। तब मैं और मेरा भाई इतने छोटे थे कि सही से चल भी ...

स्वाभिमान - लघुकथा - 44
द्वारा Sunita Tyagi
  • 312

काफी देर से बिस्तर पर लेटे हुए वे दोनों गहन चिंता में डूबे हुए एकटक छत की ओर ताक रहे थे । सुनो जी !आपकी फैक्ट्री में हड़ताल कब ...

उसकी मौत
द्वारा Ashok Pruthi Matwala
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सहसा, सभा में मौजूद एक सज्जन ने मौत का कारण जानते हुये भी अपने पास बैठे दूसरे सज्जन से औपचारिकतावश अपनी सहानुभूति दर्शाते हुये वार्तालाप शुरू किया, वाकई ...

ग्यारह वर्ष का समय
द्वारा Ramchandra Shukla
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दिन-भर बैठे-बैठे मेरे सिर में पीड़ा उत्‍पन्‍न हुई : मैं अपने स्‍थान से उठा और अपने एक नए एकांतवासी मित्र के यहाँ मैंने जाना विचारा। जाकर मैंने देखा तो ...

स्वाभिमान - लघुकथा - 24
द्वारा kanak harlalka
  • 297

मां कहां हो आप, और यह क्या कर रहीं है ? आपको किस चीज की कमी है । जरा मेरी पोजीशन का भी खयाल रखना चाहिए था । मैं ...

वो एक फैसला... दीपा का
द्वारा Neha
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हर फैसला सोच समझकर करो। उसके बाद खुद को इतना मजबूत बना लो कि उसे बदलने के लिए एक और फैसला लेना पड़े, लेकिन तुम्हारा फैसला गलत ना हो। ...

स्वाभिमान - लघुकथा - 26
द्वारा Kapil Shastri
  • 342

ऐ.सी.थ्री टायर की साइड अपर बर्थ पर उनींदी हो रही प्रभा को आभास था कि कुछ छोटे मोटे स्टेशन्स चुपके से गुजर चुके हैं और अब चाय, गरमागरम ...

मंझली दीदी - 1
द्वारा Sarat Chandra Chattopadhyay
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किशन की मां चने-मुरमुचे भून-भूनकर और रात-दिन चिन्ता करके वहुत ही गरीबी में उसे चौदह वर्ष का करके मर गई। किशन के लिए गांव में कही खडे होने के ...

स्वाभिमान - लघुकथा - 37
द्वारा Sangita Mathur
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प्रोफेसर नरेन्‍द्र शर्माजी गांव बडे भाई के पास गए तो वहां उनकी पुश्‍तैनी खेती बाड़ी और दुकान जोरों से चलते देख अत्‍यंत प्रभावित हुए। वैसे तो नरेन्‍द्रजी अपना हिस्‍सा ...

स्वाभिमान - लघुकथा - 2
द्वारा Kamal Kapoor
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मुग्ध मन से गुलदान में फूल सज़ा रही थी सुमन कि ‘डोर-बेल’बजी।द्वार खोला तो दिल खिल उठा…माँ-पापा खड़े थे सामने।वह माँ से गले मिलने के लिये आगे बढ़ी परंतु ...