Nitya Oswal लिखित उपन्यास अमृत वाणी

अमृत वाणी द्वारा  Nitya Oswal in Hindi Novels
“माटी कहै कुम्हार सों, तू क्या रौंदे मोहि।इक दिन ऐसा होयगा, मैं रौंदूगी तोहि।।”संत कबीर जी के इस दोहे को अक्सर लोग गलत स...
अमृत वाणी द्वारा  Nitya Oswal in Hindi Novels
संत रहीम दास जी का यह दोहा समाज में ऊंच-नीच के भेद को मिटाकर हर व्यक्ति का सम्मान करना सिखाता है। “रहिमन देखि बड़ेन को,...
अमृत वाणी द्वारा  Nitya Oswal in Hindi Novels
संत तुलसीदास जी की यह अमर चौपाई जीवन में सबसे बड़ा पुण्य और सबसे बड़ा पाप क्या है, इसे बहुत ही सीधे और तार्किक तरीके से...