अमृत वाणी - संत वाणी - 2 Nitya Oswal द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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अमृत वाणी - संत वाणी - 2

संत रहीम दास जी का यह दोहा समाज में ऊंच-नीच के भेद को मिटाकर हर व्यक्ति का सम्मान करना सिखाता है। 

“रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।
जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तरवारि।।”

अक्सर लोग इस दोहे को पढ़कर सोचते हैं कि क्या बड़े लोगों या बड़ी चीज़ों का कोई महत्व नहीं है? लेकिन रहीम जी यहाँ बड़े लोगों का अपमान नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे हमें हर छोटी-से-छोटी चीज़ और छोटे व्यक्ति की अनूठी कीमत (Value) समझा रहे हैं।

गहरे अर्थ की व्याख्या :
इस संसार में जब किसी व्यक्ति को बड़ा पद, पैसा या प्रभाव मिल जाता है, तो वह अक्सर अपने से छोटे या साधारण लोगों को बेकार समझने लगता है। रहीम जी कहते हैं कि बड़ों का साथ मिलने पर कभी भी छोटों का साथ मत छोड़ो। हर इंसान और हर वस्तु का अपना एक विशेष महत्व होता है। जो काम एक छोटी सी चीज़ कर सकती है, वह बहुत बड़ी और शक्तिशाली चीज़ भी नहीं कर सकती।

व्यावहारिक उदाहरण :
इसे आप एक बहुत ही सरल और दैनिक जीवन के उदाहरण से समझ सकते हैं। आपके पास एक बहुत ही महँगी, तेज़ और चमचमाती हुई ‘तलवार’ है। लेकिन अगर आपके कुर्ते का एक बटन टूट जाए या कपड़ा फट जाए, तो क्या आप उस कीमती तलवार से कपड़ा सी सकते हैं? बिल्कुल नहीं। वहाँ आपको लोहे के एक छोटे से टुकड़े यानी ‘सुई’ की ही ज़रूरत पड़ेगी। तलवार कितनी भी बड़ी और शक्तिशाली क्यों न हो, वह सुई का काम कभी नहीं कर सकती।

ठीक इसी तरह, समाज में एक बहुत बड़ा अफ़सर या उद्योगपति हो सकता है। लेकिन रात के समय यदि घर का नल खराब हो जाए, तो एक साधारण ‘प्लंबर’ ही काम आएगा, कोई बड़ा अफ़सर नहीं। सुबह कचरा उठाने आने वाला सफ़ाईकर्मी यदि दो दिन न आए, तो पूरा मोहल्ला परेशान हो जाता है। इसलिए पद या पैसे में कोई कितना भी छोटा हो, समाज को चलाने में उसका योगदान बहुत बड़ा है।

विरोधाभास का समाधान :
यहाँ मन में यह शंका आ सकती है कि “क्या फिर हमें बड़ा बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए?” रहीम जी बड़ा बनने से मना नहीं करते। वह सिर्फ यह समझा रहे हैं कि आपकी तरक्की तब तक अधूरी है, जब तक आपके मन में दूसरों के प्रति सम्मान न हो। बड़ा बनने का मतलब दूसरों को छोटा दिखाना नहीं है। असली बड़ा वह है, जो ऊंचे पद पर बैठकर भी जमीन से जुड़े लोगों का आदर करना जानता है।

जीवन के लिए मुख्य सीख :
★ किसी भी व्यक्ति के काम को छोटा न समझें। चाहे वह घर का नौकर हो, चौकीदार हो या कोई छोटा दुकानदार, सबका सम्मान करें।
★ जब हमें यह समझ आ जाता है कि हर व्यक्ति की अपनी एक ज़रूरत है, तो हमारे भीतर का यह घमंड टूट जाता है कि “मैं ही सब कुछ हूँ।”
★ अपने से कमज़ोर व्यक्ति को सम्मान देना और उसकी मेहनत की कद्र करना ही ईश्वर की सच्ची भक्ति और पुण्य है।

आज का संकल्प:
“मैं जीवन में कितना भी बड़ा बनूँ, कभी किसी छोटे या साधारण व्यक्ति का अनादर नहीं करूँगा।” 🙏