हिंदी प्रेरक कथा कहानियाँ मुफ्त में पढ़ेंंऔर PDF डाउनलोड करें

जुनून
द्वारा Anand M Mishra

जुनून शब्द का अर्थ कुछ लोग पागलपन से लगाते हैं। बात सही भी लगती है। जब तक किसी कार्य के प्रति पागलपन नहीं आएगा तब तक वह कार्य नहीं ...

आधार - 23 - आत्म-साक्षात्कारसफलता का प्रथम अध्याय है।
द्वारा Krishna Kant Srivastava

आत्म-साक्षात्कारसफलता का प्रथम अध्याय है।साक्षात्कार शब्द से हम सभी भलीभांति परिचित हैं। सभी ने अपने जीवन में अनेकों साक्षात्कार दिए होंगे। कई साक्षात्कारों के परिणाम स्वरुप आपको जीवन पथ ...

मैं अकेला ही काफी हूँ
द्वारा Mohit Rajak

दोस्तों हमारे साथ अक्सर ऐसा है, होता जब हमे कोई नहीं समझता है । हमारे साथ कोई भी नहीं होता है, हमे हमारी मंजिलो तक खुद ही चलना पड़ता ...

पापा
द्वारा Keval Makvana

                                 "गुड मॉर्निंग डैड।"  विशाल अपने पिता विराटभाई के पास गया और बोला।  विराटभाई ने कहा, ...

एक नया सफ़र रेगिस्तान की ओर
द्वारा Priyanka Patel

नई जगह नए लोग,खामोश हूं में बोल रही खामोशियाँ।चार दीवालों से निकलकर चली जैसलमेर के रेगिस्तान में,चार दिन के इस सफर में जाने पूरा जहा जी आई में।।रेगिस्तान की ...

उजाले की ओर - संस्मरण
द्वारा Pranava Bharti

    उजाले की ओर ---संस्मरण --------------------------      मित्रों ! सस्नेह नमस्कार !     पिछली बार मैंने आप सबसे  कोलकता की उड़ान में बैठकर मेडिटेशन की बात साझा की ...

आधार - 22 - आत्म-निर्माणजीवन का प्रथम सोपान है।
द्वारा Krishna Kant Srivastava

आत्म-निर्माणजीवन का प्रथम सोपान है।संसार में उपस्थित समस्त प्राणी अपने अस्तित्व को संरक्षित करते हुए अपने विकास के मार्ग पर अग्रसर रहते हैं। बौद्धिक विश्लेषण की दुर्लभ शक्ति होने ...

उजाले की ओर - संस्मरण
द्वारा Pranava Bharti

उजाले की ओर ---संस्मरण --------------------------      वह हवाई-यात्रा बहुत अजीब थी ,अजीब क्या !कभी सोचा ही न था कि इतने ऊपर आकाश में कोई इस प्रकार की सोच या ...

त्रिजटा बोली
द्वारा Ana AT

                         रावण के जाने का आभास होते ही सीता की आँखों से अश्रुधारा प्रवाहित होने लगी। अभी तक जिस ...

आधार - 21 - परिश्रम-शीलताउन्नति की प्रथम सीढ़ी है।
द्वारा Krishna Kant Srivastava

परिश्रम-शीलताउन्नति की प्रथम सीढ़ी है।परिश्रम का विशेष महत्व है। परिश्रम के बिना मनुष्य तो क्या पशु पक्षियों का भी जीवन संभव नहीं है। प्रकृति का प्रत्येक प्राणी निर्धारित नियम ...

रमा का संविधान
द्वारा Bhavna Shekhar

आज उमा बहुत उदास है। पति के जाने के बाद दो ही सहारे थे ज़िन्दगी का सूनापन काटने के -- कॉलेज की नौकरी और नेहा। नेहा अब बारहवीं पास ...

आधार - 20 - ईमानदारी, राज शक्ति का अंश है।
द्वारा Krishna Kant Srivastava

ईमानदारी, राज शक्ति का अंश है।आज के युग में रत्नों की कीमत करोड़ों में आंकी जाती है। आधुनिक इंसान इन रत्नों को खरीदने के लिए ऊंची से ऊंची बोली लगाता ...

लक्ष्मी का वरदान
द्वारा Kamal Maheshwari

किसी नगर में एक धनलाल नाम का सेठ था । धन के देवता कुबेर जी उनसे बहुत प्रसन्न थे। घर मे किसी भी चीज की कोई कमी नही थी। ...

भविष्य
द्वारा Nidhi Makwana

हम सोचते है हमारे भविष्य के बारे में ओर फिर हम उस भविष्य को सच करने के लिए हम मेहनत करते है।लेकिन जब हम अपनेे करियर केे बारे में ...

उजाले की ओर - संस्मरण
द्वारा Pranava Bharti

उजाले की ओर--संस्मरण  -----------------------      कुछ बातें ऐसी कि साझा करनी  ज़रूरी लगती हैं नहीं तो कहते हैं न कि असहज हो जाता है मनुष्य ! अरे ! ...

आधार - 19 - कार्यावकाश, उन्नति का बाधक है।
द्वारा Krishna Kant Srivastava

कार्यावकाश, उन्नति का बाधक है।कार्य में सफलता और जीवन में उन्नति का मूल मंत्र श्रम है। श्रम के बिना सफलता प्राप्ति की कामना पूर्णतया असंभव है। जिंदगी में आगे बढ़ने, ...

दाँ एण्ड....
द्वारा Saroj Verma

क्या दादाजी! आप फिर से आज सिगरेट लेकर बैठ गए,तरुन ने अपने दादाजी से कहा।। इतने दिन हो गए,तुम लोगों के मना करने पर मैनें सिगरेट को हाथ नहीं ...

उजाले की ओर - संस्मरण
द्वारा Pranava Bharti

उजाले की ओर ---संस्मरण  ------------------------       कई बार बहुत से लोग बहुत सुंदर लगते हैं ,आकर्षित करते हैं ,मित्रता भी हो जाती है किन्तु कुछ दिनों बाद ...

खुशी का रिमोट
द्वारा Roop Kishore

                    आधुनिक जीवन की स्पर्धा में हम भागते जा रहे हैं। इस भाग दौड़ में हम अपने उद्देश्य को भूल गए। ...

आधार - 18 - क्रोध, मानसिक दुर्बलता का प्रतीक है।
द्वारा Krishna Kant Srivastava

क्रोध, मानसिक दुर्बलता का प्रतीक है।जीवन में प्रत्येक व्यक्ति नित्यप्रति अनेकों व्यक्तियों से मिलता है व अनेकों परिस्थितियों का सामना करता है। ऐसे में सभी परिस्थितियां आपके अनुकूल होगी या ...

उजाले की ओर - संस्मरण
द्वारा Pranava Bharti

उजाले की ओर—संस्मरण -------------------------- स्नेही मित्रों सस्नेह नमस्कार       हमारे ज़माने में बच्चे इतनी जल्दी बड़े नहीं हो जाते थे | आप कहेंगे ,उम्र तो अपना काम करती है ...

सच का सामना
द्वारा राज कुमार कांदु

कई दिनों से अमर की रजनी से बात नहीं हो पा रही थी । उम्र का अर्ध शतक लगाने के बाद उसकी मुुुलाकात आभासी दुनिया में एक आकर्षक महिला ...

आधार - 17 - मैत्री-भावना, व्यक्तित्व की प्यास है।
द्वारा Krishna Kant Srivastava

मैत्री-भावना, व्यक्तित्व की प्यास है।मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। जिसको सुखमय जीवन व्यतीत करने के लिए संबंधों की आवश्यकता होती है। दैनिक और पारिवारिक जीवन में एक व्यक्ति को अनेकों ...

आप हमारे हिस्से में नहीं
द्वारा Swati Kumari

               आप हमारे हिस्से में नहींमैं गणेश प्रसाद उम्र लगभग 65 या 70 के आसपास होगा। घर...., छोड़िए क्या फायदा बता कर पर ...

उजाले की ओर (संस्मरण )
द्वारा Pranava Bharti

उजाले की ओर (संस्मरण ) --------------      जीवन का एक शाश्वत सत्य ! आने वाला जाने का समय लिखवाकर ही अपने साथ इस दुनिया में अवतरित होता है | ...

...और इंसानियत मुस्कुरा उठी
द्वारा राज कुमार कांदु

 कोरोना ने अपने विकराल स्वरूप में पूरे देश में दुबारा दस्तक दे दिया था और हजारों जिंदगियों को लील कर अपने भयानक इरादे का परिचय दे रहा था।  पचासी वर्षीय ...

आधार - 16 - मस्तिष्क, आचरण का निर्माता है।
द्वारा Krishna Kant Srivastava

मस्तिष्क, आचरण का निर्माता है।मनुष्य का मस्तिष्क दुनिया के आधुनिकतम सुपर कंप्यूटर से भी लाखों गुना तीव्र गति से कार्य करता है। मस्तिष्क में दिन रात विचार उत्पन्न होते रहते ...

ट्रेन्ड
द्वारा Divya

     "चलो... चलो... सभी को डिन मेम साहब ने बुलाया है। सभी को कंपल्सरी आना है, जल्दी से सभी सेमिनार होल में जाओ कोई फेमस वकता आए हैं। ...

जीवन का आधार कर्म
द्वारा Roop Kishore

श्रीमद भगवत गीता के दूसरे अध्याय के 47वें श्लोक "कर्मण्य वाधिकारस्ते माँ फलेशु कदाचन" के अनुसार  मनुष्य का अधिकार केवल उसके कर्मो पर है ।  यूं तो कर्मों की  ...

मेरी अकेली रात
द्वारा नाथूराम जाट

 बस बस बस बस बस बस करो अब थक गईं हूँ ।मैं तुम से प्यार की उम्मीद रखना, अब नहीं शहा जाता की ख़ुदा कभी मेरी झोली मैं खुशियाँ ...

स्वर्गारोहण प्रकृति पुरुष का
द्वारा Anand M Mishra

ऋषिपुरुष एक सच्चा प्रकृति प्रेमी ! श्री सुन्दरलाल बहुगुणा - महान पर्यावरणविद! हिमालय के महत्त्व को समझने-समझाने वाले तथा रक्षक। उनके स्वर्गारोहण के समाचार से देश स्तब्ध! पेड़ बचाओ-पेड़ ...

सूरत और सीरत
द्वारा S Sinha

                   कहानी - सूरत  और सीरत                                       मनोज बाबू घर में प्रवेश कर कुर्सी पर बैठ अपने जूते खोल रहे थे . जूते ...