Rahul Haldhar लिखित उपन्यास जीवित मुर्दा व बेताल

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जीवित मुर्दा व बेताल द्वारा  Rahul Haldhar in Hindi Novels
अब्बा आपको यह काम अपने ऊपर नहीं लेना था । " " क्या करूं बेटा पेट का सवाल है और तो और ऊपर से यह काम जमींदार साहब ने दिया...
जीवित मुर्दा व बेताल द्वारा  Rahul Haldhar in Hindi Novels
इसी वक्त नाव घर के अंदर से एक हंसी की आवाज सुनाई देने लगा । बहुत तेज नहीं कोई धीरे-धीरे हंस रहा है । इस अंधेरी रात को नद...
जीवित मुर्दा व बेताल द्वारा  Rahul Haldhar in Hindi Novels
उस दिन कुछ ज्यादा ही अंधेरा हो गया था । गांव के रास्ते शाम होते ही सुनसान हो जाते हैं तथा जिस कच्चे मिट्टी के रास्ते से...
जीवित मुर्दा व बेताल द्वारा  Rahul Haldhar in Hindi Novels
आज आसमान में काले बादल हैं । घर लौटने के बाद गोपाल खाना लेकर दुकान की तरफ चल पड़ा । एक हाथ में लालटेन और एक हाथ में खाने...
जीवित मुर्दा व बेताल द्वारा  Rahul Haldhar in Hindi Novels
महोबा गांव का परिवेश इस वक्त बहुत कौतूहल भरा है । गांव की सभी खबरें जमींदार रामनाथ तक पहुंचने पर वो बहुत ही आश्चर्य होते...