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एक बार फिर विनय का फोन। अब तो मैं मोबाइल की तरफ देखे बिना ही बता सकती हूं कि विनय का ही फोन होगा। वह दिन में तीस चालीस बार फोन करता है। कभी यहां संख्या पचास पार कर ...और पढ़े

बेशक इस पूरे घटनाक्रम में मेरा कुसूर नहीं है लेकिन....। इस लेकिन का मेरे पास कोई जवाब नहीं है। ऐसे कैसे हो गया कि जिस आदमी के लिए मैंने अपना सर्वस्व निछावर कर दिया, अपना दीन ईमान, चरित्र, परिवार, ...और पढ़े

उसके बाद से विनय के तीस चालीस फोन और इतने ही मैसेज रोज आते हैं। मिलने के लिए न वह आया है और न मैं ही खुद उसके पास जाने की हिम्मत जुटा पायी हूं। उसका फोन मैंने एक ...और पढ़े

उसका बेपनाह मोहब्बत करना, मेरा ख्याल रखना, मेरे लिए महंगे महंगे उपहार लाना, मेरी छोटी से छोटी जिद पूरी करना और मेरी हर बत्तमीजी को हंसते हंसते झेल जाना, और इन सबके ऊपर उसका अपनेपन से सराबोर व्यवहार मुझे ...और पढ़े

तभी मुझे विनय के शादीशुदा होने का पता चला था। मेरे जन्म दिन के सातवें दिन। हम दोपहर के वक्त यूं ही मालवीय नगर में मटरगश्ती कर रहे थे। तभी एक गोलगप्पे वाले को देख कर विनय ने कहा ...और पढ़े

मेरी शादी के एक बरस बाद की बात है। एक दिन सुबह सुबह ही विनय का मैसेज आया था - आज चार बजे कनॉट प्लेस में मिलो। उसके संदेश हमेशा इतने ही शब्दों के होते कि बात पहुंच जाए। ...और पढ़े

मैंने उसी दिन से लिस्ट बनानी शुरू की दी थी कि कौन कौन सी चीजें इस ख़्वाबगाह में आयेंगी। ड्राइंग रूम बीस फुट लंबा और बारह फुट चौड़ा था। दरवाजा खोलते ही सामने शो केस रखने की जगह और ...और पढ़े

ख़्वाबगाह में जब मैंने पहली बार सारी घंटियां बजती सुनीं तो मेरी सांस एकदम तेज हो गयी थी। मैंने बेशक दुल्हन की तरह भारी गहने और साड़ी वगैरह नहीं पहने थे लेकिन मेकअप और पहनी हुई लाल साड़ी में ...और पढ़े

तभी मैंने विनय को अपनी इस हसरत के इस तरह से पूरी होने के बारे में कहा था - विनय, शादी से पहले से और तुमसे मिलने से भी पहले से मैं कई हसरतें पाले हुए थी और तुम्हारे ...और पढ़े

आधी रात को तेज गड़गड़ाहट से मेरी नींद खुली। बांसुरी जैसे हवा में डोल रही थी और चीख रही थी। मैं घबरा गयी थी कि पता नहीं क्या हो गया है। उठ कर बाल्कनी तक आयी तो देखा आसमान ...और पढ़े

अंधेरे में कालीन पर लेटे लेटे मैंने विनय को याद दिलाया कि बकेट लिस्ट की एक आइटम एक दूजे की मसाज करने की भी है। पहले कौन करेगा। विनय ने पहले मसाज करने का ऑफर दिया और इतनी शानदार ...और पढ़े

इसके बाद भी हम गाहे बगाहे अपनी ख़्वाबगाह में मिलते रहे थे, लेकिन मैं कभी रात भर के लिए वहां नहीं रुक पायी थी। बेशक विनय अक्सर वहाँ अकेले भी चला जाता और रात भर ठहर भी जाता।

तभी वह हादसा हुआ था। मालती अग्रवाल वाला मामला। बेशक वे विनय के लिए आनंद और बदलाव के या मौज मजे के मौके रहे हों, मेरे लिए किसी हादसे से कम नहीं था। तब मैं अपने घर पर ही थी।