Suraj Prakash लिखित उपन्यास ख़्वाबगाह

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ख़्वाबगाह द्वारा  Suraj Prakash in Hindi Novels
एक बार फिर विनय का फोन। अब तो मैं मोबाइल की तरफ देखे बिना ही बता सकती हूं कि विनय का ही फोन होगा। वह दिन में तीस चालीस ब...
ख़्वाबगाह द्वारा  Suraj Prakash in Hindi Novels
बेशक इस पूरे घटनाक्रम में मेरा कुसूर नहीं है लेकिन....। इस लेकिन का मेरे पास कोई जवाब नहीं है। ऐसे कैसे हो गया कि जिस आद...
ख़्वाबगाह द्वारा  Suraj Prakash in Hindi Novels
उसके बाद से विनय के तीस चालीस फोन और इतने ही मैसेज रोज आते हैं। मिलने के लिए न वह आया है और न मैं ही खुद उसके पास जाने क...
ख़्वाबगाह द्वारा  Suraj Prakash in Hindi Novels
उसका बेपनाह मोहब्बत करना, मेरा ख्याल रखना, मेरे लिए महंगे महंगे उपहार लाना, मेरी छोटी से छोटी जिद पूरी करना और मेरी हर ब...
ख़्वाबगाह द्वारा  Suraj Prakash in Hindi Novels
तभी मुझे विनय के शादीशुदा होने का पता चला था। मेरे जन्म दिन के सातवें दिन। हम दोपहर के वक्त यूं ही मालवीय नगर में मटरगश्...