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सविता ने तली हुयी मछली का एक बड़ा सा टुकड़ा मुंह में डाला था. मछली बेह्द स्वाद बनी हुयी थी. वह जल्दी जल्दी खा रही थी. सविता खाना हमेशा बहुत जल्दी में खाती है. जैसे कहीं भागना हो. इसी ...और पढ़े

रेचल ने देखा है कई बार औरतें ग़लत आदमी का चुनाव कर लेती हैं और फिर ज़िन्दगी भर अपमान के घूँट पीती हुयी मरती रहती हैं तिल-तिल कर के. लेकिन यहाँ तो माजरा ही कुछ और है. सविता के ...और पढ़े

सविता को ज़िंदगी ने कई रंग दिखाए हैं. उसका बचपन रिश्तेदारों के रहमो-करम और हॉस्टल की डोरमेट्री में गुज़रा है. सविता का जब जन्म हुआ तो उसकी माँ गिरिजा देवी लगभग मरते-मरते बचीं. उससे पहले गिरिजा देवी के एक ...और पढ़े

जून के पहले इतवार का तपता वह दिन सविता के जीवन में एक नया मोड़ ले कर आया. पहले तो वह बदहवास हो कर चिल्लाने लगी. फिर देखा कि घर में कोई उस पर ध्यान नहीं दे रहा तो ...और पढ़े

इसके बाद क्या हुआ सविता को कुछ भी याद नहीं. सिर्फ देखने वाले बता सकते हैं कि उसने सर उठा कर देखा लेकिन आंसुओं से भरी उसकी आँखों को शायद कुछ दिखाई नहीं दिया. वह रोशनी में नहाए घबराए ...और पढ़े

गाडी कनौट प्लेस के इनर सर्किल में पहुँच चुकी थी. अब तक चुपचाप बैठे अरुण ने ही पूछा, “सविता कहाँ खाना पसंद करोगी?” सविता अब तक काफी संभल चुकी थी. फ़ौरन एक मशहूर और महंगे चायनीस रेस्तरां का नाम उसकी ...और पढ़े

फिर रेचल को ख्याल आया अभी सविता किस दौर से गुज़री है. दिल तो रेचल का भी उदास था ही इस पूरे वाकये से. वो भी चाहती थी कि उसकी दोस्त इसे भूल कर नार्मल हो जाए. दोनों जब ...और पढ़े

सविता ने वो रात तो अकेले काट ली थी लेकिन अगली ही सुबह अपने उस फ्लैट में जब उसे अकेलापन काटने लगा तो अपने फ़ोन की एड्रेस बुक की पड़ताल शुरू कर दी थी. वह अभी नाम पढ़ रहा ...और पढ़े

वो सुबह रमणीक और रेखा के घर में कयामत की सुबह बन कर आयी थी. रेखा को जैसे आग लगी हुयी थी. वह पूरे घर में तिलमिलाती हुयी तेज़-तेज़ इधर से उधर आ जा रही थी. उसे समझ नहीं ...और पढ़े

सविता आज फिर वहीं खडी थी जहाँ चैनल से नौकरी छूटने पर थी, या उससे पहले जब अरुण उसके साथ रात बिताने के बाद उसे हाथ में पकडे चाय के कप के साथ छोड गया था या फिर तब ...और पढ़े

दोनों दोस्तों की नज़रें फ़ोन पर पडी जो डाइनिंग टेबल पर सामने ही रखा था. फ़ोन से नज़रें उठा कर रेचल ने देखा तो सविता दहशत ज़दा चेहरे से आँखें गडाए फ़ोन को घूर रही थी. उसका चेहरा काला ...और पढ़े

शाम आयी और चली गयी. सविता का दिन खाना बनाने, नहाने धोने, खा कर एक लम्बी दोपहर की नींद लेने में निकल गया. जब नींद खुली तो शाम गहरा चुकी थी. बाहर भीतर सब जगह अँधेरा था. कुछ् देर ...और पढ़े

पता नहीं कितनी देर नींद में गाफिल रही सविता. डोर बेल बजी तो चौंक कर उठ बैठी. टेढ़ी हो कर सोफे पर लेटी रहने से गर्दन और कम में दर्द हो रहा था. एक अंगडाई ली तो बेल दोबारा ...और पढ़े

सविता दरवाज़े पर ही खड़ी थी. जैसे ही उसने लिफ्ट खुलने की आहट महसूस की उसके पांच सेकंड बाद उसने हलके से दरवाजा खोल कर बाहर झांका तो रमणीक आता हुआ दिखाई दिया. उसका मन एक ही झटके में ...और पढ़े

रेचल शाम तक ऑफिस में बिजी रही. पहला दिन था. कितने ही लोगों से पहली मुलाकात. अपना काम समझना. नयी जगह को समझना. खुद को सही तरीके से प्रेजेंट करना. शाम को थकी हारी घर आयी तो इतनी हिम्मत ...और पढ़े

सविता उस रात सड़कों पर घूमती रही. गाडी में पेट्रोल फुल था. मन में अशांति असीम थी. हाथों में स्टीयरिंग था. हर मर्ज़ की दवा का इलाज. जिस सड़क पर जहाँ दिल करता मुड़ जाती. भूख लगी तो एक सड़क ...और पढ़े