Pradeep Shrivastava लिखित उपन्यास मेरी जनहित याचिका

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मेरी जनहित याचिका द्वारा  Pradeep Shrivastava in Hindi Novels
आम की बाग को आखिरी बार देखने पूरा परिवार गया था। मेरा वहां जाने का मन बिल्कुल नहीं था। मां-पिता जिन्हें हम पापा-अम्मा कह...
मेरी जनहित याचिका द्वारा  Pradeep Shrivastava in Hindi Novels
मंझली भाभी ने थाने में धारा 498। (दहेज प्रताड़ना कानुन)के तहत हम तीनों भाइयों, पापा-अम्मा के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज कराई थी...
मेरी जनहित याचिका द्वारा  Pradeep Shrivastava in Hindi Novels
पापा के साथ खाना खाते समय मेरी बातें होती रहीं। मैंने देखा कि पापा दोनों भाइयों के बारे में बात करने के इच्छुक नहीं हैं।...
मेरी जनहित याचिका द्वारा  Pradeep Shrivastava in Hindi Novels
मैंने सोचा कि यह तो अकेले थी। इसने यह तो बताया ही नहीं कि मुझे दो को सर्विस देनी है। जब एक अंदर घर में थी तो गेट पर बाहर...
मेरी जनहित याचिका द्वारा  Pradeep Shrivastava in Hindi Novels
प्रोफ़ेसर साहब की बात मुझे सही लगी। शंपा जी की कहानी जानने के बाद मेरे मन में उनके लिए सम्मान भाव उत्पन्न हो गया। मैंने क...