Aarushi Singh Rajput लिखित उपन्यास Maharana Pratap

Maharana Pratap द्वारा  Aarushi Singh Rajput in Hindi Novels
एक बड़े मेले के भीड़-भाड़ वाले प्रांगण के भीतर एक विशाल कक्ष सजा हुआ था। वहां बहुत सारे लोग मौजूद थे। सामने, एक सोने-ओसक...
Maharana Pratap द्वारा  Aarushi Singh Rajput in Hindi Novels
राजमहल की अंतरकथामेवाड़ के राजमहल का एक शांत कक्ष — ऊँची छतों पर टंगे दीपकों की हल्की लौ में झिलमिलाती परछाइयाँ जैसे इति...
Maharana Pratap द्वारा  Aarushi Singh Rajput in Hindi Novels
राजमहल के सभा-कक्ष में सन्नाटा पसरा था। कुंवर प्रताप हल्की सी मुस्कान के साथ बोले,“दाजीराज, मीरा माँ … घर वापस कब आती थी...
Maharana Pratap द्वारा  Aarushi Singh Rajput in Hindi Novels
चित्तौड़ (राजमहल में)राणा उदय सिंह जी गंभीर स्वर में बोले “कुँवर प्रताप, आज जब भी इतिहास में झांकेंगे, तो दादा भाई के लि...
Maharana Pratap द्वारा  Aarushi Singh Rajput in Hindi Novels
द्वारका जाने के रास्ते में दोपहर ढल चुकी थी।कुँवर प्रताप, राजपुरोहितजी और उनके कुछ साथी एक छोटे से गाँव के बाज़ार में रु...