Ek Cup Coffee द्वारा  NooB GURU Ji in Hindi Novels
शाम के ठीक 6 बज रहे थे। बाहर बारिश की हल्की बूंदें गिर रही थीं, वैसी ही जैसी किसी पुराने ज़ख्म पर नमक गिरता है। कैफे का द...