sodha iqbal kasam लिखित उपन्यास कोहिनूर: रोशनी के पहाड़ की अदृश्य सिसकियाँ और सदियों का प्रतिशोध.

कोहिनूर: रोशनी के पहाड़ की अदृश्य सिसकियाँ और सदियों का प्रतिशोध. द्वारा  sodha iqbal kasam in Hindi Novels
आंध्र की उस तपती जमीन के नीचे, गोलकुंडा की खदानों में सन्नाटा सिर्फ फावड़ों की आवाज से टूटता था हजारों मजदूर पसीने से तर...
कोहिनूर: रोशनी के पहाड़ की अदृश्य सिसकियाँ और सदियों का प्रतिशोध. द्वारा  sodha iqbal kasam in Hindi Novels
समरकंद की सर्द रातेंतैमूर लंग जब दिल्ली को राख के ढेर में बदलकर समरकंद लौटा, तो उसकी झोली में भारत का वह सूरज था समरकंद...