मौत से भागती दुल्हन - 12 Sonam Brijwasi द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

मौत से भागती दुल्हन - 12

मैदान में चारों तरफ अफरा-तफरी मची हुई थी…धूल, चीखें और गोलियों की गूंज के बीच लड़ाई अपने चरम पर थी।

━━━━━━━━━━━━━━━

और तभी—
धाँय!!!
एक तेज़ गोली की आवाज़ आई। पूरा माहौल एक सेकंड के लिए थम गया।

━━━━━━━━━━━━━━━

विक्रांत का शरीर अचानक झटका खाकर पीछे गिरा। उसके हाथ से gun छूट गई…और वो ज़मीन पर घुटनों के बल आ गया। उसकी आँखें चौड़ी थीं… जैसे उसे खुद यकीन नहीं हो रहा था।

━━━━━━━━━━━━━━━

किशिराज तुरंत उसकी तरफ बढ़ा…

लेकिन विक्रांत ने कांपती आवाज़ में कहा—
मैं… वापस आऊंगा…

━━━━━━━━━━━━━━━

उसके होंठों पर एक आखिरी मुस्कान आई…और फिर उसका शरीर ढीला पड़ गया।

━━━━━━━━━━━━━━━

कुछ सेकंड तक सिर्फ़ सन्नाटा रहा। फिर हवा चलने की आवाज़… और दूर से आती पुलिस सायरन की ध्वनि।

━━━━━━━━━━━━━━━

विक्रांत शर्मा…खत्म हो चुका था।

━━━━━━━━━━━━━━━

गुंडे धीरे-धीरे भागने लगे… कुछ हथियार फेंककर घुटनों पर बैठ गए। लड़ाई रुक चुकी थी।

━━━━━━━━━━━━━━━

शुभिका दूर खड़ी ये सब देख रही थी। उसकी आँखों में आँसू थे…डर के… दर्द के… और एक अजीब सी राहत के भी।

━━━━━━━━━━━━━━━

किशिराज धीरे-धीरे उसकी तरफ आया। उसकी साँस अभी भी भारी थी… लेकिन चेहरे पर सुकून था।

वो बोला - 
अब खतरा खत्म हो गया…

━━━━━━━━━━━━━━━

शुभिका कुछ पल चुप रही…

फिर कांपती आवाज़ में बोली—
क्या सच में… सब खत्म हो गया?

━━━━━━━━━━━━━━━

किशिराज ने उसकी तरफ देखा।

फिर हल्के से सिर हिलाया—
हां…इस बार हमेशा के लिए।

━━━━━━━━━━━━━━━

और उसी पल…बारिश की हल्की बूंदें फिर से गिरने लगीं…जैसे आसमान भी इस कहानी के खत्म होने पर चुपचाप रो रहा हो।

पुलिस की गाड़ियाँ आखिरकार पूरे इलाके में फैल चुकी थीं। सायरन की आवाज़ें अब तेज़ थीं… लेकिन माहौल पहले से शांत हो चुका था। कुछ पुलिस अफसर मौके पर उतरे, चारों तरफ नज़र दौड़ाई…और फिर एक सीनियर अफसर ने गहरी सांस ली।

एक बोला - 
अच्छा हुआ मर गया साला…

उसकी आवाज़ में थकान भी थी और गुस्सा भी।

दूसरा बोला - 
नाक में दम करके रखा था इसने पूरे शहर का।

━━━━━━━━━━━━━━━

बाकी पुलिसकर्मी भी धीरे-धीरे रिलैक्स होने लगे। कुछ ने हथियार नीचे कर दिए…कुछ घायलों को संभालने लगे… अब वो डर जो विक्रांत के नाम से था, वो धीरे-धीरे खत्म हो रहा था।

━━━━━━━━━━━━━━━

किशिराज आगे खड़ा था। वो सब सुन रहा था… लेकिन उसकी आँखें अभी भी शांत नहीं थीं। उसने विक्रांत की तरफ देखा जो अब ज़मीन पर पड़ा था। उसके चेहरे पर कोई जीत का भाव नहीं था…
सिर्फ़ एक लंबी खामोशी थी।

━━━━━━━━━━━━━━━

शुभिका धीरे-धीरे उसके पास आई।

उसकी आवाज़ काँप रही थी और बोली—
अब… सच में खत्म हो गया?

━━━━━━━━━━━━━━━

किशिराज ने कुछ सेकंड बाद जवाब दिया।

वो बोला - 
हां…लेकिन इसकी कीमत बहुत बड़ी थी।

━━━━━━━━━━━━━━━

शुभिका ने उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में अब डर थोड़ा कम था…लेकिन दर्द अब भी बाकी था।

━━━━━━━━━━━━━━━

दूर पुलिस विक्रांत के body को घेर रही थी…

और एक अफसर रेडियो पर रिपोर्ट भेज रहा था—
Target down… operation complete.

━━━━━━━━━━━━━━━

लेकिन उसी भीड़ के बीच…किशिराज का ध्यान एक चीज़ पर अटका रहा वो लड़की जो खुद को “शुभिका” की कहानी का हिस्सा बता रही थी…अब कहीं गायब हो चुकी थी।

━━━━━━━━━━━━━━━

किशिराज ने धीमे से खुद से कहा—
ये अंत नहीं है…बस एक chapter खत्म हुआ है।

━━━━━━━━━━━━━━━

और शुभिका उसके पास खड़ी थी…अपने नए जीवन की शुरुआत और पुराने डर के बीच फँसी हुई।

उस दिन के बाद…उस रहस्यमयी लड़की का कोई पता नहीं चला।
न वो कहीं दिखी…न किसी ने उसका नाम फिर सुना…जैसे वो लड़ाई के बाद हवा में घुल गई हो।

━━━━━━━━━━━━━━━

कुछ दिनों तक माहौल शांत रहा। विक्रांत के खत्म होने के बाद शहर में डर धीरे-धीरे कम होने लगा था। पुलिस ने केस बंद कर दिया था…और सब कुछ “end of gangster era” मान लिया गया था।

━━━━━━━━━━━━━━━

किशिराज और शुभिका अब एक सुरक्षित जगह पर थे। लेकिन उनके बीच की दुनिया अब बदल चुकी थी।

━━━━━━━━━━━━━━━

किशिराज ने शुभिका की तरफ देखा। उसकी आवाज़ इस बार पहले जैसी सख्त नहीं थी…

वो बोला - 
अब तुम सिर्फ एक जिम्मेदारी नहीं हो…

वो थोड़ा रुका और बोला - 
तुम मेरी पत्नी हो।

━━━━━━━━━━━━━━━

शुभिका चुप थी। उसके मन में बहुत कुछ चल रहा था डर, अतीत, और एक अनजान सुकून भी।

━━━━━━━━━━━━━━━

किशिराज ने धीरे से कहा—
मैंने तुम्हें सिर्फ बचाया नहीं है…मैंने तुम्हें अपनी जिंदगी में स्वीकार किया है।

━━━━━━━━━━━━━━━

शुभिका ने उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में अब पहले जैसा आतंक नहीं था…लेकिन पूरी तरह भरोसा भी नहीं आया था।

━━━━━━━━━━━━━━━

वो धीरे से बोली—
और अगर अतीत वापस आया तो?

━━━━━━━━━━━━━━━

किशिराज ने हल्की मुस्कान दी।

वो बोला - 
जो लड़ाई हमने लड़ी…उसके बाद अब कोई अतीत हमें नहीं रोक सकता।

━━━━━━━━━━━━━━━

शुभिका ने पहली बार चुपचाप सिर झुका लिया।

━━━━━━━━━━━━━━━

और इस तरह…एक खतरनाक कहानी खत्म होकर…एक नई, अनिश्चित लेकिन शांत शुरुआत में बदल गई। आख़िरी एपिसोड में…अब माहौल पूरी तरह बदल चुका था। जो जिंदगी कभी डर, भागने और खून-खराबे से भरी थी… वो अब धीरे-धीरे सुकून में बदल रही थी।

━━━━━━━━━━━━━━━

शुभिका और किशिराज एक साथ नए घर में थे। सुबह की धूप खिड़की से अंदर आ रही थी…चाय की हल्की खुशबू कमरे में फैली थी…और पहली बार शुभिका के चेहरे पर सच में मुस्कान थी।

━━━━━━━━━━━━━━━

किशिराज उसके पास बैठा था।

वो बोला - 
अब डरने की जरूरत नहीं है…

शुभिका हल्के से मुस्कुराई।

वो बोली - 
अब सच में?

किशिराज ने सिर हिलाया।

वो बोला - 
अब सच में।

━━━━━━━━━━━━━━━

दोनों एक-दूसरे के करीब आए…इस बार कोई भागना नहीं था…
कोई खतरा नहीं था…कोई पीछा नहीं कर रहा था। सिर्फ एक सुकून था…और एक नया प्यार।

━━━━━━━━━━━━━━━

शुभिका ने हल्के से कहा—
तुम सच में बदल गए हो…

किशिराज मुस्कुराया।

वो बोला - 
तुम्हारे लिए ही तो।

और दोनों हल्के से हँस पड़े।

━━━━━━━━━━━━━━━

दिन गुजरने लगे…अब जिंदगी सामान्य थी। हँसी थी… साथ था… और एक नया घर था।

━━━━━━━━━━━━━━━

लेकिन कहीं न कहीं…कहानी के एक कोने में…वो रहस्यमयी लड़की…आज भी एक सवाल बनकर अधूरी थी। न उसका नाम मिला…न उसका सच…न उसका अंत।

━━━━━━━━━━━━━━━

कभी-कभी शुभिका खिड़की से बाहर देखती…

और बस इतना सोचती—
क्या वो सच में खत्म हो गई… या अभी भी कहीं है?

━━━━━━━━━━━━━━━

लेकिन किशिराज उसके पास आकर उसका हाथ पकड़ लेता…

और कहता—
जो हमारी जिंदगी में होना था… वो हो चुका है।

━━━━━━━━━━━━━━━

और फिर दोनों मुस्कुरा देते…क्योंकि अब उनके पास डर नहीं था…
सिर्फ एक नई शुरुआत थी।

━━━━━━━━━━━━━━━

THE REAL END