मौत से भागती दुल्हन - 5 Sonam Brijwasi द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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मौत से भागती दुल्हन - 5

मेहँदी की खुशबू पूरे घर में फैली हुई थी। औरतें गाने गा रही थीं।
ढोलक की थाप लगातार गूँज रही थी।लेकिन दुल्हन…बिल्कुल खामोश बैठी थी। शुभिका। हरे रंग के भारी लहंगे में सजी हुई…
लेकिन चेहरा ऐसा जैसे कई दिनों से रोती आ रही हो।
उसकी आँखें सूनी थीं। जैसे अब उसे किसी चीज़ से फर्क ही नहीं पड़ता।

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मेहँदी वाली लड़की उसके हाथों पर बारीक design बना रही थी।

वो बोली - 
दुल्हन जी…

मेहंदी वाली मुस्कुराई।

वो बोली - 
पति का नाम क्या लिखना है?

शुभिका चुप रही। उसने कोई जवाब नहीं दिया। क्योंकि उसके लिए “पति” शब्द ही डर बन चुका था।

मेहँदी वाली ने फिर पूछा—
मैडम नाम बताइए ना…

लेकिन तभी—

पीछे से एक लड़की की धीमी आवाज़ आई—
किशिराज…

आवाज़ बहुत धीमी थी...लेकिन साफ। मेहँदी वाली का ध्यान नीचे था। उसे पता ही नहीं चला कि आवाज़ किसने दी।

उसने तुरंत मुस्कुराकर कहा—
अच्छा… Kishiraj।

और वही नाम मेहँदी में लिख दिया। शुभिका का दिल धक से रह गया। उसने तुरंत सिर उठाया।

वो बोली - 
क्या…?

उसकी साँस अटक गई।

वो बोली - 
तुमने कौन सा नाम लिखा?

मेहँदी वाली हँस दी।

महंदी वाली बोली - 
अरे वही जो अभी पीछे से किसी ने बताया…किशिराज।

शुभिका का चेहरा सफेद पड़ गया। क्योंकि…उसने ये नाम पहले कभी नहीं सुना था। घर में अचानक ठंडी हवा चलने लगी। ढोलक अपने आप रुक गई। और तभी…शुभिका की नज़र कमरे के कोने में खड़ी एक लड़की पर गई। लाल साड़ी… खुले बाल…और चेहरे पर अजीब सी मुस्कान। वही लड़की…जो उसने farmhouse की balcony पर देखी थी। शुभिका डरकर खड़ी हो गई।

वो बोली - 
त… तुम…!

लेकिन अगले ही पल वो लड़की गायब हो चुकी थी।

सिर्फ़ उसकी धीमी फुसफुसाहट कमरे में गूँजी—
इस बार दुल्हन किसी और की होगी…।

शुभिका अपने कमरे में अकेली बैठी थी। कमरे की lights बंद थीं।
सिर्फ़ table lamp की हल्की रोशनी उसके हाथों पर पड़ रही थी।
और उन्हीं हाथों में…

मेहँदी से लिखा था—
Kishiraj

शुभिका बार-बार उस नाम को देख रही थी।

वो बोली - 
ये कौन है…?

उसका दिमाग सुन्न पड़ चुका था। उसे याद था…उसने कोई नाम नहीं बताया था। फिर वो आवाज़ किसकी थी?और सबसे बड़ी बात क्यों लग रहा था जैसे ये नाम उसने पहले कहीं सुना है…?

तभी टिंग। उसका phone vibrate हुआ।
स्क्रीन पर नाम चमका—
Vikrant
शुभिका का दिल धड़क उठा।

Message था—
मेहँदी का photo भेजो।

उसके हाथ काँप गए।

वो बोली - 
नहीं…

अगर विक्रांत ने हाथों में लिखा नाम देख लिया…तो वो पागल हो जाएगा। शुभिका जल्दी-जल्दी dupatta से नाम छिपाने लगी।
उसने camera खोला…लेकिन कोई angle ऐसा नहीं मिल रहा था जिसमें “Kishiraj” ना दिखे। तभी वीडियो call आने लगी।
शुभिका का गला सूख गया। Screen पर लगातार Vikrant Calling…उसने call काटने की कोशिश की।

लेकिन अगले ही पल message आया—
Call उठाओ।

उसके बाद दूसरा message—
या मैं खुद ऊपर आ रहा हूँ।

शुभिका डर गई। उसने काँपते हाथों से video call उठा ली। Screen पर विक्रांत दिखाई दिया। काले shirt में…आँखों में वही खतरनाक जुनून। लेकिन इस बार वो मुस्कुरा नहीं रहा था।

वो बोला - 
Camera नीचे करो।

उसकी आवाज़ बेहद ठंडी थी। शुभिका का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।

वो बोली - 
व… वो अभी design पूरा नहीं हुआ…

वो बोला - 
मैंने क्या कहा?

इस बार उसकी आवाज़ और भारी हो गई।

वो बोला - 
Camera. नीचे 

काँपते हाथों से शुभिका ने phone नीचे किया। जैसे ही camera हाथों पर गया Screen पर कुछ सेकंड के लिए खामोशी छा गई।
विक्रांत की आँखें उस नाम पर टिक गईं।
Kishiraj
उसका चेहरा धीरे-धीरे बदलने लगा। जबड़ा कस गया। आँखें लाल हो उठीं।
और फिर—
धड़ाम!!!
Screen हिल गई। उसने गुस्से में सामने रखा glass तोड़ दिया था।

वो बोला - 
ये नाम किसने लिखा?

उसकी आवाज़ इतनी खतरनाक थी कि शुभिका काँप उठी।

वो बोली - 
म… मुझे नहीं पता…

वो दहाड़ा -
झूठ मत बोलो!!
कौन है किशिराज?!

शुभिका रो पड़ी।

बोली - 
मैं सच कह रही हूँ…

लेकिन तभी Call पर अचानक पीछे से किसी आदमी की आवाज़ आई—
Boss…वो पुरानी file फिर से खुल गई है…

विक्रांत का चेहरा एकदम बदल गया।

वो बोला - 
क्या?

उस आदमी ने घबराकर कहा—
किशिराज वापस आ गया…

और उसी पल…शुभिका के कमरे की खिड़की अपने आप खुल गई। हवा का तेज़ झोंका आया। विक्रांत ने तुरंत video call काट दी। Screen black हो गई। लेकिन शुभिका का दिल अब भी जोर-जोर से धड़क रहा था। कमरे की खुली खिड़की से तेज़ हवा अंदर आ रही थी। परदे बुरी तरह उड़ रहे थे। 

शुभिका बहुत डरी हुई थी। किसी ने उसे खिड़की से चिट्ठी फेंकी थी।

जिसपे लिखा था -
मैं आ गया शुभी!
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उधर विक्रांत शर्मा अपनी study room में खड़ा था। उसके हाथ की नसें गुस्से से उभर चुकी थीं।
धड़ाम!!!
उसने सामने रखा table लात मारकर पलट दिया।

वो बोला - 
वो वापस कैसे आ सकता है?!

उसकी दहाड़ पूरे कमरे में गूँज गई। उसके आदमी डरकर सिर झुकाकर खड़े थे। विक्रांत की आँखें खून उतर आई थीं।

वो बोला - 
उसे तो मैंने अपने हाथों से पुल से नीचे गिराकर मारा था…!

कमरे में सन्नाटा छा गया। किसी की हिम्मत नहीं हुई कुछ बोलने की।क्योंकि वो नाम…विक्रांत के लिए सिर्फ़ दुश्मन नहीं था।
वो उसका डर था।

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कुछ साल पहले…
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एक लड़का हुआ करता था। नाम किशिराज सिंह चौहान। पेशे से engineer। लेकिन बाकी engineers जैसा बिल्कुल नहीं। वो सिर्फ़ machines और coding तक सीमित नहीं था। उसके अंदर एक अजीब सा जुनून था गलत के खिलाफ खड़े होने का।
और यही जुनून उसे विक्रांत शर्मा तक ले आया।

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रात का समय। बारिश लगातार हो रही थी। एक black bike सुनसान सड़क पर दौड़ रही थी। Bike चला रहा था— किशिराज।
लेकिन उसका चेहरा अब भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था।

सिर्फ़ उसकी भारी आवाज़ सुनाई दे रही थी—
आज सारे proofs police तक पहुँच जाएंगे…

उसके bag में कुछ important files और pen drive थी।
विक्रांत शर्मा के illegal business… murders…और trafficking के सबूत। तभी पीछे से कई SUVs उसकी तरफ बढ़ने लगीं। हेडलाइट्स लगातार blink कर रही थीं। किशिराज समझ गया।

वो बोला - 
विक्रांत…

उसने bike की speed बढ़ा दी। बारिश और तेज़ हो चुकी थी।
सामने लंबा पुल था। और पीछे…मौत।

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अचानक—
धड़ाम!!!
एक SUV ने उसकी bike को जोरदार टक्कर मारी। Bike सड़क पर घिसटती चली गई। किशिराज भी पुल पर दूर तक फिसला।
उसके हाथ से bag छूट गया। Pen drive सड़क पर जा गिरी।
तभी भारी कदमों की आवाज़ उसकी तरफ बढ़ी।
टक… टक… टक…
विक्रांत शर्मा। वो धीरे-धीरे उसके सामने आकर खड़ा हो गया।
बारिश में उसका चेहरा और भी खतरनाक लग रहा था। उसने pen drive उठाई…और मुस्कुराया।

वो बोला - 
Engineer बनकर मुझे खत्म करोगे?

किशिराज घायल हालत में भी हँसा। उसने halmet पहना था।

वो बोला - 
तुम बचोगे नहीं…एक दिन कानून तुम्हें घसीटेगा…

विक्रांत की आँखें ठंडी पड़ गईं।

विक्रांत बोला - 
कानून?

वो उसके करीब झुका।

वो बोला - 
इस शहर में कानून मैं हूँ।

फिर उसने धीरे से किशिराज का collar पकड़ा…और पुल की railing तक घसीट ले गया। नीचे नदी का तेज़ बहाव था। अंधेरा इतना कि कुछ दिखाई ना दे। किशिराज मुश्किल से खड़ा था।

लेकिन उसकी आवाज़ अब भी नहीं काँपी—
तुम्हारा अंत… एक लड़की बनेगी विक्रांत…

विक्रांत हँस पड़ा।

वो बोला - 
मरते वक्त भविष्यवाणी?

और अगले ही पल उसने किशिराज को जोर से धक्का दे दिया।

नहीं!!

Body सीधे पुल के नीचे उफनती नदी में गिर गई।
छपाक!!!
कुछ सेकंड तक सिर्फ़ बारिश की आवाज़ आती रही।

फिर विक्रांत ने नीचे अंधेरे पानी को देखते हुए कहा—
Game over, Kishiraj…

लेकिन उसे क्या पता था…असल खेल तो अब शुरू होने वाला था। अभी तक किशीराज का face reveal नहीं हुआ था।