बारिश इतनी तेज़ थी कि सड़कें धुंधली पड़ चुकी थीं…लाल जोड़े में लिपटी एक लड़की नंगे पाँव भाग रही थी…उसकी पायल बार-बार टूटे रास्तों में अटक रही थी… सांसें बिखर चुकी थीं… आँखों में डर साफ दिख रहा था…पीछे से कई गाड़ियों की हेडलाइट्स उसकी तरफ बढ़ रही थीं।
एक भारी आवाज़ रात में गूँजी -
भागो मत शुभिका…!
आज के बाद तुम सिर्फ़ विक्रांत शर्मा की हो…
लड़की और तेज़ भागी। उसके हाथों की मेहँदी अभी गीली थी… माथे का सिंदूर बारिश में बहकर उसके चेहरे पर फैल चुका था…
अचानक एक तेज़ ट्रक उसकी तरफ आया ब्रेक की कान फाड़ देने वाली आवाज़…और फिर धड़ाम!!! उसकी चीख रात में गूँज गई…
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शुभी… उठो बेटा।
मम्मी की आवाज आई। शुभिका झटके से उठ बैठी।साँसें तेज़ थीं… पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ…उसने घबराकर इधर-उधर देखा। वो अपने कमरे में थी। अपने घर में। और आज… उसकी शादी थी। उसके हाथ काँप उठे।
उसने धीरे से फुसफुसाया -
नहीं…ये… फिर से नहीं हो सकता…
उसकी नज़र कैलेंडर पर गई। 17 जुलाई। वही तारीख। वही दिन।
उसकी आँखों में डर उतर आया। क्योंकि उसे सब याद था…उसकी मौत। और उससे भी खतरनाक बात वो ये दिन पहले भी जी चुकी थी।
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शुभिका ठाकुर। उम्र 23 साल।नएक बेहद intelligent लड़की।एक बड़ी IT company में Senior Engineer। ठाकुर परिवार की इकलौती बेटी। उसकी जिंदगी बिल्कुल normal चल रही थी…
जब तक कि एक दिन उस पर शहर के सबसे खतरनाक गैंगस्टर…
विक्रांत शर्मा की नज़र नहीं पड़ी।
उस एक नज़र ने उसकी पूरी जिंदगी बदल दी…। घर लोगों से भरा हुआ था…ढोलक की आवाज़ें… रिश्तेदारों की हँसी… हल्दी की खुशबू… सब कुछ एक शादी जैसा था। सिर्फ़ दुल्हन की आँखों में खुशी नहीं थी। शुभिका आईने के सामने बैठी थी। पीले रंग का सूट… हाथों में हल्दी की हल्की परत… लेकिन चेहरा बिल्कुल सफेद पड़ा हुआ।
उसकी उंगलियाँ काँप रही थीं।
नीचे आँगन में औरतें गा रही थीं—
पीतल की थाली में हल्दी सजाई रे…
और ऊपर कमरे में शुभिका की साँसें अटक रही थीं। उसे ये शादी नहीं करनी थी। बिल्कुल नहीं। लेकिन वो मना भी नहीं कर सकती थी। क्योंकि विक्रांत शर्मा सिर्फ़ एक आदमी नहीं था…
वो डर था। पूरा शहर उसका नाम सुनकर रास्ता बदल लेता था।
लोग उसे businessman कहते थे…पर असल में वो अंडरवर्ल्ड का राजा था। और अब…वो शुभिका को अपनी बीवी बनाना चाहता था।
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शुभिका की मां बोलीं -
शुभी…
उसकी माँ धीरे से कमरे में आईं। आँखें सूजी हुई थीं… जैसे कई रातों से सोई ना हों। उन्होंने दरवाज़ा बंद किया और काँपते हाथों से शुभिका का चेहरा छुआ।
मां बोलीं -
बेटा… थोड़ा नीचे आ जाओ। सब पूछ रहे हैं।
शुभिका की आँखें भर आईं।
वो बोली -
मम्मी… प्लीज़ रोक दीजिए ये शादी…
उसकी आवाज़ टूट गई।
वो बोली -
मैं उससे शादी नहीं कर सकती…
माँ की आँखों में आँसू आ गए। लेकिन अगले ही पल उन्होंने डरकर खिड़की की तरफ देखा… जैसे कोई सुन रहा हो।
फिर धीमे से बोलीं—
हम मजबूर हैं शुभी…वो लोग तुम्हारे पापा को मार देंगे…
शुभिका का दिल काँप गया। उसे याद आया…दो दिन पहले विक्रांत के आदमी घर आए थे। उन्होंने dining table पर चुपचाप एक gun रखी थी।
और मुस्कुराकर कहा था—
शादी अच्छे से हो जानी चाहिए… वरना श्मशान का खर्चा भी हम ही उठाएँगे।
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नीचे अचानक गाड़ियों के रुकने की आवाज़ आई। पूरा घर एकदम शांत हो गया।
एक नौकर भागता हुआ ऊपर आया और बोला—
व… वो… विक्रांत सर आए हैं…
शुभिका के हाथ से कंगन छूटकर जमीन पर गिर पड़ा। उसकी माँ का चेहरा डर से सफेद पड़ गया। क्योंकि…विक्रांत शर्मा बिना बताए कभी नहीं आता था। और जब भी आता था…कुछ बुरा जरूर होता था। नीचे पूरा माहौल अचानक बदल चुका था। जो लोग अभी तक हँस रहे थे…अब धीरे-धीरे चुप होने लगे।
मुख्य दरवाज़े से काले कपड़ों में कई आदमी अंदर आए।
सबके कानों में bluetooth… कमर पर हथियार… आँखों में खौफ। और उनके बीच…विक्रांत शर्मा। काले रंग का कुर्ता… हाथ में महँगी घड़ी… चेहरे पर हल्की मुस्कान। लेकिन उसकी आँखें…इतनी ठंडी थीं कि सामने वाला काँप जाए। जैसे ही वो अंदर आया…शुभिका के पिता तुरंत खड़े हो गए।
वो बोले -
आ… आइए…
विक्रांत हल्का सा मुस्कुराया।
बोला -
कैसे हैं ठाकुर साहब?
उसकी आवाज़ बहुत शांत थी। इतनी शांत… कि डर और बढ़ जाए।
विक्रांत बोला -
उम्मीद है शादी की तैयारी में कोई कमी नहीं होगी।
शुभिका के पापा ने जबरदस्ती मुस्कुराने की कोशिश की।
वो बोले -
न… नहीं बेटा… सब ठीक है…
विक्रांत की नज़र पूरे घर पर घूमी।
फिर उसने धीरे से कहा—
अच्छा है।
क्योंकि मुझे अधूरी चीज़ें बिल्कुल पसंद नहीं।
ये कहते हुए उसने सोफे पर बैठते-बैठते अपनी jacket थोड़ी हटाई। कमर पर लगी pistol साफ दिखाई दी। कमरे में बैठे रिश्तेदारों ने तुरंत नज़रें झुका लीं।
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ऊपर कमरे में खड़ी शुभिका खिड़की से सब देख रही थी। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो कोई इंसान नहीं…
बल्कि मौत को नीचे बैठे देख रही हो।
तभी उसकी माँ घबराकर बोलीं—
शुभी… नीचे चलो…वो तुम्हें बुला रहा है…
शुभिका बोली -
मुझे नहीं जाना…
शुभिका पीछे हट गई।
वो बोली थी
मम्मी प्लीज़…
लेकिन तभी नीचे से विक्रांत की आवाज़ आई—
ठाकुर साहब… अपनी बेटी से नहीं मिलवाएँगे?
पूरा घर फिर शांत हो गया। शुभिका के पापा ने काँपते हुए ऊपर देखा। उनकी आँखों में बेबसी साफ थी। और शुभिका समझ गई…
अगर वो नीचे नहीं गई…तो आज फिर कुछ बुरा होगा। उसने धीरे से अपनी आँखों के आँसू पोंछे…और काँपते कदमों से सीढ़ियों की तरफ बढ़ गई। जैसे कोई लड़की अपनी ही सज़ा की तरफ जा रही हो…। सीढ़ियों पर उसके पायल की आवाज़ धीरे-धीरे गूँज रही थी…पूरा हॉल खामोश था। सबकी नज़रें सिर्फ़ शुभिका पर टिक गईं।
पीले रंग के सूट में… हल्दी से सजा चेहरा… लेकिन आँखों में साफ डर। विक्रांत सोफे पर आराम से बैठा उसे देख रहा था। ऐसे… जैसे कोई शिकारी अपने शिकार को देखता है।जैसे ही शुभिका नीचे पहुँची…उसने नज़रें झुका लीं। विक्रांत हल्का सा मुस्कुराया।
वो बोला -
तो ये हैं हमारी होने वाली बीवी…
उसकी आवाज़ में अजीब सा अधिकार था। शुभिका के हाथ अपने आप भींच गए। विक्रांत धीरे-धीरे उठा… और उसके बिल्कुल सामने आकर रुक गया। पूरा घर साँस रोके खड़ा था। फिर उसने अपना हाथ बढ़ाया…और शुभिका के गाल पर लगी हल्दी को उंगलियों से छुआ। शुभिका डरकर एक कदम पीछे हट गई। बस यही गलती हो गई। कमरे का माहौल अचानक बदल गया। विक्रांत की मुस्कान धीरे-धीरे गायब हुई। उसने बिना कुछ कहे बगल में खड़े अपने आदमी की तरफ देखा।
अगले ही पल—
धड़ाम!!!
गोली की आवाज़ पूरे घर में गूँज गई।
और शुभिका चीख उठी—
पापा…!!
उसके पिता जमीन पर गिर चुके थे। उनके कंधे से खून बह रहा था।
पूरा घर चीखों से भर गया। शुभिका रोती हुई उनकी तरफ भागी।
वो बोली -
पापा!!
लेकिन तभी विक्रांत ने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया। इतना कसकर… कि उसकी चूड़ियाँ टूट गईं।
वो उसके कान के पास झुककर बहुत धीरे बोला—
मैंने सिर्फ़ warning दी है…अगली बार गोली कंधे पर नहीं लगेगी…।
शुभिका की आँखों से आँसू बहने लगे।।विक्रांत ने उसके आँसू अंगूठे से पोंछे…
और मुस्कुराकर बोला—
अब अच्छे से शादी होगी… है ना?
तभी ट्रिन… ट्रिन…अचानक शुभिका का फोन बज उठा।
सबकी नज़र उस फोन पर गई। स्क्रीन पर सिर्फ़ एक unknown number चमक रहा था। लेकिन जो चीज़ देखकर शुभिका के पैरों तले जमीन खिसक गई…
वो था उस नंबर के नीचे लिखा एक message—
अगर जिंदा रहना चाहती हो… तो आज रात 11 बजे भाग जाओ और मुंबई में होटल में मिलो।
और सबसे डरावनी बात…
उस message के नीचे भेजने वाले का नाम लिखा था—
तुम्हारा असली पति।