मौत से भागती दुल्हन - 4 Sonam Brijwasi द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

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मौत से भागती दुल्हन - 4

शुभिका के हाथ से photo नीचे गिर गई।

वो बोली - 
न… नहीं…

उसकी साँसें टूटने लगीं। वो पीछे हटती गई।

वो बोली - 
ये झूठ है…तुम झूठ बोल रहे हो…

विक्रांत उसे बस देखता रहा। उसकी आँखों में अजीब सी चमक थी।

वो बोला - 
मैं झूठ नहीं बोलता।

वो धीरे-धीरे उठा…और दीवार के पास जाकर एक पुरानी cupboard खोल दी।
चर्ररर…
अंदर दर्जनों files रखी थीं।

सभी पर एक ही नाम लिखा था—
शुभिका

शुभिका का दिल जोर से धड़कने लगा।

वो बोली - 
ये क्या है…?

विक्रांत ने एक file निकाली और उसकी तरफ बढ़ा दी।

वो बोला - 
देख लो।

काँपते हाथों से उसने file खोली।

अंदर पुरानी newspaper cuttings थीं।
Businessman Vikrant Sharma’s wife dies in tragic accident.
नई नवेली दुल्हन की balcony से गिरकर मौत।
Case closed.



शुभिका की आँखें फैल गईं। क्योंकि newspaper में छपी उस लड़की की तस्वीर…सच में उसी जैसी थी। इतनी मिलती-जुलती… कि कोई भी धोखा खा जाए।

वो बोली - 
“ये… ये possible नहीं है…”

उसकी आवाज़ टूट गई।

तभी विक्रांत ने बहुत धीरे कहा—
तुम जानना चाहती हो… मैं तुमसे पहली बार क्यों obsessed हुआ?

वो उसके करीब आया।

वो बोला - 
क्योंकि जब मैंने तुम्हें seminar में देखा…मुझे लगा…

उसने काँपती उंगलियों से शुभिका के चेहरे को छुआ।

वो बोला - 
मेरी मरी हुई पत्नी वापस आ गई है।

शुभिका डरकर पीछे हट गई। अब उसे समझ आ रहा था—
ये प्यार नहीं था। ये पागलपन था। खतरनाक… जानलेवा पागलपन।

━━━━━━━━━━━━━━━

तभी ऊपर से किसी चीज़ के टूटने की आवाज़ आई।
धड़ाम!!
शुभिका चौंक गई।

वो चीखी -
मम्मी-पापा!

वो ऊपर भागने लगी। लेकिन विक्रांत ने उसे नहीं रोका। बल्कि…
वो मुस्कुराने लगा। यही बात सबसे डरावनी थी। शुभिका सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर पहुँची। कमरे का दरवाज़ा आधा खुला था।
अंदर अंधेरा था।

वो बोली - 
पापा…?

उसने धीरे से दरवाज़ा खोला। कमरा खाली था। सिर्फ़ फर्श पर रस्सियाँ पड़ी थीं। मतलब…उसके मम्मी-पापा वहाँ से गायब थे।
अचानक पीछे से दरवाज़ा बंद हो गया।
धड़ाम!!
शुभिका डरकर पलटी। कमरे की सारी lights अपने आप जल उठीं।

और दीवारों पर लिखे शब्द देखकर उसकी चीख निकल गई—
इस बार तुम मुझे छोड़कर नहीं जाओगी।
मरकर भी नहीं।

और तभी…कमरे के कोने में रखा पुराना radio अपने आप चालू हो गया।

खड़खड़ाहट के बीच एक लड़की की धीमी आवाज़ गूँजी—
भाग जाओ शुभिका…विक्रांत फिर से तुम्हें मार देगा…।

Present..
शुभी बेटा… हाथ आगे करो।

हल्दी लगाने वाली औरत की आवाज़ से शुभिका वर्तमान में वापस आई। वो चौंककर इधर-उधर देखने लगी। ढोलक फिर बज रही थी। औरतें गा रही थीं। रिश्तेदार हँस रहे थे। लेकिन शुभिका की दुनिया जैसे रुक चुकी थी।

उसके कानों में अभी भी वही आवाज़ गूँज रही थी—
भाग जाओ शुभिका…विक्रांत फिर से तुम्हें मार देगा…

उसके हाथ काँपने लगे। हल्दी की थाली उसके हाथ से लगभग छूट गई। सामने सोफे पर बैठा विक्रांत उसे लगातार देख रहा था। उसकी आँखें…आज भी वैसी ही थीं। जुनूनी। खतरनाक। पागल।
जैसे वो शुभिका को नहीं…किसी और को देख रहा हो। तभी विक्रांत धीरे-धीरे उठा। पूरा hall शांत हो गया। वो सबके सामने आकर शुभिका के ठीक पास बैठ गया। उसने अपनी उंगलियों से शुभिका की ठुड्डी ऊपर उठाई।

वो बोला - 
इतना डर क्यों रही हो?

उसकी आवाज़ बेहद धीमी थी।

वो बोला - 
मैंने कहा था ना…

वो हल्का मुस्कुराया।

बोला - 
इस बार तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगा।

शुभिका का दिल जोर से धड़का।

फिर बोला - 
इस बार…

मतलब…उसे भी उस पुरानी शुभिका की मौत याद थी। शुभिका की साँसें भारी होने लगीं। तभी उसकी नज़र विक्रांत के हाथ पर गई।
वहीं पुरानी silver ring। जिस पर अंदर की तरफ कुछ लिखा था।
उसी ring को उसने उस farmhouse वाली photo में देखा था।
मतलब…वो photo नकली नहीं थी।उसकी आँखों में डर उतर आया।

तभी विक्रांत उसके कान के पास झुककर फुसफुसाया—
वैसे…तुम्हारा assistant अभी तक जिंदा है।

शुभिका की आँखें फैल गईं।

वो बोली - 
क… क्या?

विक्रांत हल्का हँसा।

बोला - 
मुझे लगा था वो भागकर सीधे police जाएगा…लेकिन वो तो बड़ा loyal निकला।

शुभिका का दिल बैठ गया।

शुभिका बोली - 
तुमने… अर्णव के साथ क्या किया?

विक्रांत ने जवाब नहीं दिया। बस सामने बैठे अपने आदमी को इशारा किया। अगले ही पल दो आदमी hall के अंदर आए। और उनके बीच… खून से लथपथ अर्णव घुटनों के बल गिरा दिया गया।

शुभिका चीखी -
अर्णव!!

शुभिका चीख पड़ी। अर्णव मुश्किल से सिर उठा पा रहा था।
लेकिन जैसे ही उसकी नज़र शुभिका पर पड़ी…

उसने काँपते हुए कहा—
Ma’am…मत… मत करना ये शादी…

तभी—
धाँय!!!
पूरा hall गोली की आवाज़ से गूँज उठा। और शुभिका की चीख निकल गई…।

वो चीखी -
अर्णव!!!

शुभिका चीखते हुए उसकी तरफ भागी। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।अर्णव की आँखें खुली रह गई थीं…और उसके सीने से लगातार खून बह रहा था।

उसके काँपते होंठ आखिरी बार हिले—
भाग… जाइए…

फिर…सब खत्म हो गया। शुभिका वहीं जमीन पर बैठ गई। उसके हाथ खून से भर चुके थे। आँसू रुक ही नहीं रहे थे। और सामने…
विक्रांत बिल्कुल शांत खड़ा था। जैसे किसी इंसान की मौत नहीं…
बस एक रुकावट हटाई हो।

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उस दिन के बाद…शुभिका अंदर से मर चुकी थी।वो चलती थी…
बोलती थी…साँस लेती थी…लेकिन सिर्फ़ शरीर जिंदा था।आत्मा जैसे कहीं पीछे छूट गई थी। उसने office जाना बंद कर दिया।
लोगों से मिलना बंद कर दिया। उसकी आँखों के नीचे काले घेरे पड़ गए। क्योंकि अब उसे रातों में नींद नहीं आती थी।जैसे ही आँखें बंद होतीं…उसे अर्णव का खून से भरा चेहरा दिखता।

वो आवाज़ सुनाई देती—
Ma’am… मत करना ये शादी…

और फिर गोली चलने की आवाज़। हर रात। हर बार।

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उस रात भी…शुभिका अपने कमरे में बैठी थी। कमरे की सारी lights बंद थीं। सिर्फ़ balcony से आती हल्की चाँदनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी। उसकी आँखें सूजी हुई थीं। Clock में रात के 3 बजे थे। लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी।
तभी—टिक…
उसके phone पर message आया। उसने काँपते हाथों से mobile उठाया।

Unknown Number।

Message था—
नींद नहीं आ रही?

शुभिका का दिल जोर से धड़का। उसने तुरंत balcony की तरफ देखा। और अगले ही पल…उसकी साँस रुक गई। सामने सड़क के उस पार… काली SUV के सहारे कोई खड़ा था। बारिश में भीगा हुआ। और उसकी तरफ देख रहा था।
विक्रांत शर्मा।तभी phone फिर vibrate हुआ।

वो बोला - 
Window से हट जाओ शुभिका…तुम बीमार पड़ जाओगी…

शुभिका के हाथ से phone गिर गया।बक्योंकि…उसका कमरा तीसरी मंजिल पर था। और उसके कमरे की lights बंद थीं।फिर भी…विक्रांत उसे साफ देख रहा था।