बाथरूम का दरवाज़ा पूरा खुल चुका था। कमरे में भाप धीरे-धीरे फैल रही थी…और फिर एक आदमी बाहर आया। उसके बाल गीले थे, कंधे पर टॉवेल पड़ा था। चेहरा साफ नहीं दिख रहा था, लेकिन आवाज़ बिल्कुल शांत थी। वो कुछ पल कमरे में इधर-उधर देखता रहा। फिर उसकी नज़र सीधे बेड की तरफ गई।
और उसने बहुत ठंडे लहजे में कहा—
मुझे पता है तुम बेड के नीचे छुपी हो।
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शुभिका का दिल जैसे रुक गया। उसकी साँस अटक गई।
वो खुद से बोली -
नहीं… नहीं… ये मुझे नहीं देख सकता…
वो अपने मुँह पर हाथ रखकर और अंदर सिमट गई।
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कमरे में सन्नाटा था। सिर्फ़ AC की हल्की आवाज़… और दीवार घड़ी की टिक-टिक। टिक… टिक… टिक…आदमी धीरे-धीरे बेड की तरफ बढ़ा। हर कदम के साथ शुभिका की धड़कन तेज़ हो रही थी।
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वो बेड के बिल्कुल सामने रुक गया। झुका…
और फिर हल्की मुस्कान के साथ बोला—
डर लग रहा है?
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शुभिका ने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं। तभी उस आदमी ने झुककर बेड के नीचे झाँका…और अगले ही पल कमरे का माहौल बदल गया। उसकी आवाज़ हल्की हो गई।
वो बोला -
शुभिका…मैं तुम्हें मारने नहीं आया हूँ।
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शुभिका की आँखें खुल गईं। वो धीरे-धीरे बाहर आई…
काँपते हुए पूछा—
तुम… कौन हो?
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आदमी सीधा खड़ा हुआ। उसने टॉवेल कंधे से हटाया…
और गंभीर आवाज़ में कहा—
मैं वो इंसान हूँ…जो विक्रांत को रोक सकता है।
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शुभिका एकदम stunned हो गई।
वो बोली -
तुम… उसे जानते हो?
आदमी ने सिर हिलाया और बोला -
बहुत अच्छे से।
फिर उसने उसकी तरफ देखा—
और अभी तुम उसी की वजह से मरने के बहुत करीब हो।
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तभी बाहर गलियारे में हलचल हुई।
आवाज आई -
यहीं अंदर गई है!!
पूरा होटल घेर लो!!
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आदमी ने तुरंत दरवाज़े की तरफ देखा। उसकी आँखें सख्त हो गईं।
वो बोला -
अब फैसला तुम्हें करना है शुभिका…या तो मेरे साथ आओ…
या फिर विक्रांत तुम्हें यहीं ढूंढ लेगा…
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शुभिका के लिए ये एक और जाल जैसा था…बाहर विक्रांत के आदमी…अंदर एक अजनबी आदमी…और बीच में सिर्फ़ एक ही सच अब वो कहीं भी सुरक्षित नहीं थी।
शुभिका अभी भी हांफ रही थी… उसका दिमाग समझ नहीं पा रहा था कि वो किस पर भरोसा करे। तभी वह आदमी धीरे-धीरे मुड़ा।
उसने गीले झटका को पीछे किया और शांत होकर अपनी white shirt उठाई। कमरे में हल्की रोशनी पड़ परही थी… और अब उसका चेहरा साफ होने लगा। और जैसे ही उसने shirt पहननी शुरू की…शुभिका की आँखें उस पर टिक गईं। वो वही था।
किशिराज।
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किशिराज ने बटन लगाते हुए बिना उसकी तरफ देखे कहा—
सुना है विक्रांत तुम्हारे पीछे पागल है…
उसकी आवाज़ शांत थी…लेकिन उसमें एक अजीब सी गहराई थी।
शुभिका अभी भी shock में थी।
वो बोली -
तुम…तुम वही हो… जो उस message में…
किशिराज ने हल्का सा सिर हिलाया और बोला -
हाँ।
बस इतना ही कहा उसने।
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बाहर गलियारे में आवाज़ें और तेज़ हो गईं -
Room 307 चेक करो!!
वो अंदर ही है!!
शुभिका घबरा गई और बोली -
वो लोग आ रहे हैं…
किशिराज ने calmly अपनी jacket उठाई।
फिर उसकी तरफ देखकर बोला—
तुमने सही जगह चुनी है भागने के लिए…
उसने दरवाज़े की तरफ देखा और बोला -
लेकिन गलत वक्त पर।
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शुभिका ने कांपते हुए पूछा—
तुम मेरी मदद क्यों कर रहे हो?
किशिराज कुछ सेकंड चुप रहा।
फिर बहुत धीरे से बोला—
क्योंकि…
उसकी आँखों में पहली बार हल्की सी आग दिखी।
वो बोला -
विक्रांत ने सिर्फ तुम्हें नहीं… मुझे भी अधूरा छोड़ा था।
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तभी दरवाज़े पर जोर से धक्का पड़ा।
धड़ाम!!
आवाज आई -
खोलो दरवाज़ा!!
किशिराज ने तुरंत शुभिका की तरफ देखा और बोला -
अब पीछे हटो…
उसने कमरे की लाइट बंद कर दी। पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।
और फिर उसने बहुत शांत आवाज़ में कहा—
अब खेल शुरू होगा…
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दरवाज़ा फिर से टूटने वाला था…और अंधेरे में किशिराज की परछाई धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी…शुभिका फिर से बेड के नीचे छिप गई… उसकी साँसें बिल्कुल रुक-सी गई थीं। कमरे में सन्नाटा फैल गया।
धड़ाम!!
दरवाज़े पर फिर जोर से धक्का पड़ा।
आवाज आई -
दरवाज़ा खोलो!!
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किशिराज ने एक गहरी सांस ली।उसने अपने कपड़े ठीक किए और दरवाज़े की तरफ बढ़ा। क्लिक…दरवाज़ा खुला।
बाहर विक्रांत के आदमी खड़े थे—चेहरे पर गुस्सा और जल्दबाज़ी।
वो बोले -
वो लड़की अंदर आई है!
किशिराज ने बिल्कुल शांत चेहरा बनाए रखा।
वो बोला -
कौन लड़की?
उसकी आवाज़ ठंडी थी। आदमी एक-दूसरे को देखने लगे।
एक ने कहा -
मत बनो समझदार, Room 307 में वो घुसी है, हमें पता है!
किशिराज हल्का सा मुस्कुराया और बोला -
तो फिर खुद देख लो।
उसने दरवाज़ा पूरा खोल दिया। कमरे के अंदर सिर्फ़ खालीपन दिख रहा था। बेड… कुर्सी… बाथरूम का खुला दरवाज़ा…
सब normal था।
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शुभिका बेड के नीचे कांप रही थी। उसने अपनी साँस रोक ली थी।
वो खुद से बोली -
प्लीज़… मुझे मत पकड़ना…
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आदमी कमरे में झाँकने लगे। एक ने बाथरूम चेक किया…दूसरे ने अलमारी खोली…लेकिन कोई नहीं मिला।
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किशिराज दरवाज़े पर ही खड़ा था। उसकी आँखों में हल्की सख्ती थी।
वो बोला -
अब और कुछ?
मुख्य आदमी ने गुस्से में उसे देखा और बोला -
विक्रांत को पता चलेगा तुमने हमें रोका…
किशिराज ने शांत आवाज़ में कहा—
जाकर बता देना…मैंने किसी लड़की को नहीं देखा।
कुछ सेकंड सन्नाटा रहा।वीफिर वो लोग धीरे-धीरे पीछे हट गए।
वो बोले -
चलो…
और गलियारे में कदमों की आवाज़ दूर जाने लगी।
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जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ…कमरे में फिर से खामोशी छा गई। शुभिका अब भी बेड के नीचे थी। उसका पूरा शरीर काँप रहा था।
किशिराज धीरे-धीरे झुका।
वो बोला -
अब निकल आओ…
उसकी आवाज़ शांत थी। शुभिका डरते हुए बाहर आई। उसकी आँखों में अभी भी डर था।
वो बोली -
तुमने… झूठ क्यों बोला?
किशिराज ने उसे देखा और बोला -
क्योंकि अभी तुम्हें जिंदा रहना है।
उसने दरवाज़े की तरफ देखा और बोला -
और विक्रांत को नहीं पता चलना चाहिए कि मैं लौट आया हूँ।
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शुभिका confused थी वो बोली -
तुम आखिर चाहते क्या हो?
किशिराज कुछ पल चुप रहा…
फिर धीरे से बोला—
विक्रांत को खत्म करना।
उसकी आँखों में अब पूरी आग जल रही थी। और बाहर मुंबई की रात फिर से खामोश होती जा रही थी…लेकिन ये खामोशी बस तूफ़ान से पहले की थी।
शुभिका की आवाज़ टूट गई…
वो बोली -
वो मेरे मम्मी-पापा को मार देगा…
उसकी आँखों से आँसू लगातार गिर रहे थे। किशिराज कुछ पल चुप रहा। उसकी आँखों में पहली बार हल्की नरमी आई।
कमरे में सन्नाटा इतना भारी था कि AC की आवाज़ भी साफ सुनाई दे रही थी।
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किशिराज ने धीरे से कहा—
अगर विक्रांत ने उन्हें हाथ लगाया…
उसने अपनी मुट्ठी कस ली।
वो बोला -
तो फिर ये खेल यहीं खत्म कर दूँगा।
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शुभिका ने डर और उम्मीद दोनों से उसकी तरफ देखा।
वो बोली -
तुम… सच में उन्हें बचा सकते हो?
किशिराज ने सिर हिलाया और बोला -
मैंने तुम्हें इसलिए नहीं बचाया कि तुम यहाँ मर जाओ।
उसकी आवाज़ शांत थी, लेकिन अंदर कुछ बहुत तेज़ जल रहा था।
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तभी उसके phone पर एक message आया। उसने स्क्रीन देखी और उसकी आँखें थोड़ी सख्त हो गईं।
Messege था -
विक्रांत ने move कर दिया है…
उसने शुभिका की तरफ देखा और बोला -
तुम्हारे parents अभी safe नहीं हैं।
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शुभिका का चेहरा सफेद पड़ गया।
वो बोली -
नहीं…प्लीज़… उन्हें कुछ मत होने देना…
वो रोते हुए उसके सामने हाथ जोड़ने लगी।
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किशिराज ने उसका हाथ पकड़कर नीचे किया।
वो बोला -
रोओ मत…
उसकी आवाज़ अब पहले से भारी थी।
वो बोला -
अब तुम्हें डरना बंद करना होगा।
उसने दरवाज़ा खोला और बाहर देखा और बोला -
क्योंकि अब…
वो थोड़ा रुका और बोला -
विक्रांत भी छिपा नहीं रहेगा।
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शुभिका काँपते हुए उसके पीछे खड़ी थी।
वो बोली -
तुम कहाँ जा रहे हो?
किशिराज ने बिना पीछे देखे कहा—
उससे मिलने।
और फिर उसने एक आखिरी बात जोड़ी—
और इस बार… वो मुझे नहीं गिरा पाएगा।
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दरवाज़ा धीरे से बंद हुआ। शुभिका कमरे में अकेली रह गई…
और बाहर गलियारे में सिर्फ़ कदमों की आवाज़ दूर जाती रही।
To be continued…