शुभिका बिल्कुल चुप बैठी थी। उसके हाथों पर हल्दी लगाई जा रही थी…और सामने सोफे पर विक्रांत शर्मा बैठा उसे लगातार देख रहा था।उसकी आँखों में अजीब सा पागलपन था। जैसे उसे दुनिया की किसी चीज़ की परवाह ना हो…सिवाय शुभिका के। और यही बात शुभिका को सबसे ज्यादा डराती थी।
ढोलक की आवाज़… रिश्तेदारों की हँसी…सब कुछ धुंधला पड़ चुका था उसके लिए। उसे बस विक्रांत की वो आँखें दिख रही थीं।
अचानक उसकी आँखों से एक आँसू गिरा।
उसने मन ही मन कहा—
काश… उस meeting में मैं कभी गई ही ना होती…
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कुछ महीने पहले…
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सुबह का समय। शुभिका अपने office cabin में खड़ी files देख रही थी। White suit… red dupatta… बालों खुले… आँखों पर हल्का चश्मा। पूरे office में उसकी अलग ही respect थी। 23 साल की उम्र में Senior Engineer बनना आसान नहीं था। लेकिन शुभिका ने अपनी मेहनत से ये मुकाम हासिल किया था। तभी उसका assistant अंदर आया।
वो बोला -
Ma’am सारी files ready हैं।
शुभिका ने laptop bag उठाया।
शुभिका बोली -
Good। हमें निकलना होगा। Meeting important है।
Assistant हल्का मुस्कुराया।
वो बोला -
Ma’am… सुना है जिस company के साथ meeting है… वो लोग बहुत बड़े लोग हैं।
काफी dangerous connections भी हैं उनके।
शुभिका ने बिना ऊपर देखे जवाब दिया—
हम engineers हैं… criminals नहीं। हमें बस project से मतलब रखना है।
लेकिन उसे क्या पता था…वो meeting उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा जाल बनने वाली थी।
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कुछ देर बाद—
उनकी car शहर से बाहर एक सुनसान highway पर दौड़ रही थी। बारिश होने वाली थी। आसमान काला पड़ चुका था। Assistant files check कर रहा था।
वो बोला -
Ma’am meeting location थोड़ा weird नहीं है?
शुभिका ने बाहर देखते हुए पूछा—
कहाँ है exactly?
Assistant ने mobile देखा…और उसके चेहरे का रंग उड़ गया।
वो बोला -
Ma’am…Location किसी hotel की नहीं…एक farmhouse की है…।
शुभिका ने तुरंत उसकी तरफ देखा।
वो बोली -
क्या?
तभी उनकी car के आगे अचानक 4 black SUVs आकर रुकीं।
Driver ने जोर से brake लगाया।
चीईईईईं——!!
शुभिका आगे की तरफ झटका खाकर गिरी। और अगले ही पल…
SUVs से हथियारबंद आदमी उतरने लगे।
Assistant डरकर बोला—
Ma’am… ये लोग कौन हैं…?
तभी बीच वाली गाड़ी का दरवाज़ा खुला। Black shoes सड़क पर पड़े। धीरे-धीरे एक आदमी बाहर उतरा। बारिश की पहली बूंद उसके काले coat पर गिरी। और जैसे ही उसने सिर उठाया…
शुभिका का दिल एक पल के लिए रुक गया। क्योंकि वो आदमी उसे ऐसे देख रहा था…जैसे वो उसे सालों से ढूंढ रहा हो।
वो था—
विक्रांत शर्मा।
शहर का सबसे खतरनाक नाम। जिसके बारे में लोग धीमी आवाज़ में बात करते थे। बारिश अब तेज़ होने लगी थी। काले रंग की SUV के सामने खड़ा विक्रांत बिना पलक झपकाए शुभिका को देख रहा था। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी…खतरनाक… और जुनूनी। शुभिका के assistant अर्णव चतुर्वेदी के रोंगटे खड़े हो गए।
उसने धीरे से फुसफुसाया—
Ma’am… ये वही विक्रांत शर्मा है…हम फँस गए…
शुभिका ने खुद को संभालने की कोशिश की। वो car से उतरी।
उसका professional attitude अभी भी बना हुआ था।
वो बोली -
Mr. Sharma…अगर meeting करनी थी तो इस तरह रास्ता रोकने की क्या जरूरत थी?
विक्रांत हल्का सा मुस्कुराया।
वो बोला -
क्योंकि मुझे इंतज़ार करना पसंद नहीं।
उसकी नज़रें शुभिका के चेहरे से हट ही नहीं रही थीं। फिर उसने अपने आदमी को इशारा किया। Farmhouse का बड़ा gate धीरे-धीरे खुलने लगा।
विक्रांत ने हाथ से अंदर की तरफ इशारा किया—
तो Engineer Madam…चलिए अंदर meeting के लिए।
मुझे एक project discuss करना है।
उसके बोलने का तरीका ऐसा था…जैसे वो project नहीं…कुछ और सोच रहा हो। अर्णव तुरंत बीच में आया।
वो बोला -
Sir… meeting official है तो office में भी हो सकती थी।
विक्रांत की आँखें धीरे से अर्णव पर गईं। बस एक नज़र। और अर्णव का गला सूख गया। विक्रांत उसके करीब आया…इतना करीब कि अर्णव पीछे हट गया।
फिर बहुत धीरे बोला—
जब बड़े लोग बात कर रहे हों…तो छोटे लोगों को बीच में नहीं बोलना चाहिए।
पूरा माहौल जम गया। शुभिका समझ गई…ये आदमी normal नहीं है। लेकिन अभी वापस जाना भी possible नहीं था। क्योंकि उनके पीछे भी दो SUVs आकर रुक चुकी थीं। मतलब…वो लोग घिर चुके थे।
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कुछ देर बाद…शुभिका farmhouse के अंदर दाखिल हुई। अंदर सब कुछ surprisingly luxurious था। महँगी paintings… crystal lights… imported furniture…लेकिन फिर भी उस जगह में अजीब सा डर था। जैसे यहाँ बहुत लोगों की चीखें दबी हों।
विक्रांत धीरे-धीरे चलते हुए बोला—
आपको पता है Ms. Shubhika…मैंने आपको पहली बार एक tech seminar में देखा था।
शुभिका रुक गई।
वो बोली -
क्या मतलब?
विक्रांत मुस्कुराया।
वो बोला -
उस दिन से…मैं सिर्फ़ आपको देख रहा हूँ।
शुभिका की रीढ़ में सिहरन दौड़ गई। तभी—
अचानक ऊपर balcony से किसी लड़की की चीख सुनाई दी—
मुझे छोड़ दो!! प्लीज़—!!
शुभिका और अर्णव दोनों चौंककर ऊपर देखने लगे। लेकिन अगले ही पल…धड़ाम!!! ऊपर से कुछ नीचे गिरा। और फर्श पर खून फैलने लगा…। फर्श पर खून धीरे-धीरे फैल रहा था…अर्णव का चेहरा सफेद पड़ चुका था। उसके हाथ काँपने लगे।
वो बोला -
म… म… Ma’am…
उसकी आवाज़ बुरी तरह लड़खड़ा रही थी।
वो बोला -
मुझे… मुझे बहुत डर लग रहा है…
शुभिका खुद अंदर से काँप चुकी थी। लेकिन उसने खुद को संभाला। वो तुरंत उस तरफ बढ़ी जहाँ कोई ऊपर से गिरा था।
लेकिन तभी टक…विक्रांत उसके सामने आकर खड़ा हो गया।
उसके काले shoes पर खून की बूंदें पड़ चुकी थीं…पर उसके चेहरे पर ज़रा भी फर्क नहीं था। जैसे ये सब उसके लिए normal हो।
शुभिका ने गुस्से से कहा—
ये क्या हो रहा है यहाँ?!
कौन था वो?!
विक्रांत ने उसकी आँखों में देखते हुए बहुत शांत आवाज़ में कहा—
आप मुद्दे पर आइए, Ms. Shubhika।
मैंने आपको यहाँ business के लिए बुलाया है…
उसने हल्की मुस्कान दी।
वो बोला -
बाकी चीज़ें देखने की आदत मत डालिए।
शुभिका का गला सूख गया। तभी दो आदमी जल्दी से आए…
और खून से लथपथ body को घसीटकर दूसरी तरफ ले गए।
जैसे कुछ हुआ ही ना हो। अर्णव अब लगभग शुभिका के पीछे छिप चुका था।
वो फुसफुसाया -
Ma’am…हमें यहाँ से निकलना चाहिए…ये लोग dangerous हैं…।
लेकिन तभी क्लिक। पूरा hall अंधेरे में डूब गया। Lights बंद हो चुकी थीं। अर्णव डरकर चीख पड़ा।
वो बोला -
क… कौन है?!
और उसी अंधेरे में…शुभिका को अपने बिल्कुल पीछे किसी की धीमी आवाज़ सुनाई दी—
अब तो हमारी meeting शुरू हुई है।
अंधेरा इतना गहरा था कि किसी का चेहरा तक दिखाई नहीं दे रहा था। सिर्फ़ बारिश की आवाज़…और कहीं दूर बिजली कड़कने की गूँज। शुभिका की साँसें तेज़ हो गईं। उसे साफ महसूस हो रहा था। कोई उसके बहुत करीब खड़ा है। इतना करीब… कि उसकी साँसें गर्दन से टकरा रही थीं।
अर्णव घबराकर बोला—
Ma’am… म… मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा…
तभी टक… टक… टक…किसी के shoes की आवाज़ hall में गूँजने लगी। धीरे…बहुत धीरे…जैसे कोई जानबूझकर डर बढ़ा रहा हो। फिर अचानक पूरे hall की lights एक साथ जल उठीं।
अर्णव ने आँखें ढँक लीं। और अगले ही पल…
उसके मुँह से डरकर आवाज़ निकली—
हे भगवान…
शुभिका की आँखें भी फैल गईं। पूरा hall बदल चुका था। दीवारों पर उसकी तस्वीरें लगी थीं। Office की…Coffee shop की…Car drive करते हुए…यहाँ तक कि उसके घर की balcony की भी। सैकड़ों तस्वीरें। कुछ hidden camera से ली गई थीं।
कुछ इतनी करीब से… कि साफ था कोई लंबे समय से उसका पीछा कर रहा था। शुभिका के पैरों तले जमीन खिसक गई।
वो बोली -
ये… ये सब क्या है…?
उसकी आवाज़ काँप रही थी। विक्रांत धीरे-धीरे सीढ़ियों से नीचे उतरा।उसकी आँखों में वही पागलपन था।
वो बोला -
प्यार…
वो मुस्कुराया।
वो बोला -
इसे प्यार कहते हैं।
शुभिका डरकर पीछे हट गई।
वो बोली -
आप पागल हो…
विक्रांत हँस पड़ा। धीमी… खतरनाक हँसी।
वो बोला -
हाँ। तुम्हारे लिए।
अर्णव तुरंत शुभिका के आगे आ गया।
वो बोला -
बस बहुत हुआ! हम अभी यहाँ से जा रहे हैं!
उसने शुभिका का हाथ पकड़ा और दरवाज़े की तरफ बढ़ा।
लेकिन तभी—
धड़ाम!!!
मुख्य दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया। पूरा farmhouse फिर खामोश हो गया। अर्णव ने पलटकर देखा। विक्रांत अब मुस्कुरा नहीं रहा था। उसका चेहरा बिल्कुल ठंडा पड़ चुका था। वो धीरे-धीरे उनकी तरफ बढ़ा।
वो बोला -
मैंने…
उसकी आवाज़ बेहद धीमी थी।
वो बोला -
तुम्हें जाने की permission कब दी?
अर्णव का गला सूख गया।
लेकिन उसने हिम्मत करके कहा—
तुम हमें रोक नहीं सकते!
विक्रांत कुछ सेकंड उसे देखता रहा। फिर अचानक…उसने अपनी pocket से gun निकाली। क्लिक।।सीधा अर्णव के माथे पर तान दी।
शुभिका चीख पड़ी—
नहीं!!
विक्रांत की आँखें सिर्फ़ शुभिका पर थीं।
वो बोला -
अब choose करो…या तो तुम यहीं रुक जाओ…या फिर…
उसने gun थोड़ा और अर्णव के माथे से सटा दी।
वो बोला -
तुम्हारा assistant अभी मर जाएगा।
और तभी—
अचानक ऊपर balcony से किसी ने जोर से चिल्लाया—
भागो शुभिका!! ये आदमी अपनी पहली पत्नी को भी मार चुका है!!
पूरा hall जम गया। शुभिका ने shock में ऊपर देखा। Balcony पर सफेद कपड़ों में एक औरत खड़ी थी…जिसका चेहरा बिल्कुल शुभिका जैसा था…।