मौत से भागती दुल्हन - 3 Sonam Brijwasi द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

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मौत से भागती दुल्हन - 3

शुभिका लगभग चीख पड़ी -
अर्णव भागो!!

उसकी आँखों में डर साफ था। लेकिन उससे ज्यादा डर अर्णव के लिए था। अर्णव ने सिर हिलाया।

वो बोला - 
नहीं Ma’am!
मैं आपको छोड़कर नहीं जा सकता!

उसकी आवाज़ काँप रही थी…लेकिन वो सच में शुभिका को अकेला छोड़ना नहीं चाहता था। शुभिका ने उसका हाथ कसकर पकड़ा।

वो बोली - 
पागल मत बनो!
ये लोग तुम्हें मार देंगे!

उसकी आँखों से आँसू बह निकले।

वो बोली - 
भागो यहाँ से…और ये खबर मेरे घर तक पहुँचा देना…
अपने mummy papa को लेकर कहीं छिप जाना…

अर्णव समझ चुका था…शुभिका अब खुद को बचाने की उम्मीद छोड़ चुकी है। उसकी आँखें लाल हो गईं।

वो बोला - 
लेकिन Ma’am—

शुभिका बोली - 
GO!!

इस बार शुभिका इतनी जोर से चिल्लाई कि पूरा hall गूँज उठा।
उसी पल ऊपर balcony वाली औरत ने अचानक एक flower vase नीचे फेंका।
धड़ाम!!
Glass टूटने की आवाज़ से सबका ध्यान एक सेकंड के लिए भटका। और अर्णव उसी मौके का फायदा उठाकर side वाले emergency gate की तरफ भाग पड़ा।

विक्रांत दहाड़ा -
पकड़ो उसे!!

चार आदमी तुरंत उसके पीछे दौड़े। अर्णव बारिश में जान बचाकर भाग रहा था। उसकी साँसें टूट रही थीं…दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था जैसे अभी बाहर निकल आएगा। पीछे गोलियों की आवाज़ गूँजने लगी। धाँय!! धाँय!! एक गोली उसके कान के पास से निकल गई। लेकिन वो रुका नहीं। क्योंकि अब उसे समझ आ चुका था ये सिर्फ़ kidnapping नहीं थी। विक्रांत शर्मा…शुभिका के लिए पागल हो चुका था।

━━━━━━━━━━━━━━━

उधर farmhouse के अंदर विक्रांत बिल्कुल शांत खड़ा था। उसके आदमी अर्णव के पीछे भाग चुके थे। Hall में अब सिर्फ़ शुभिका… विक्रांत…और balcony वाली रहस्यमयी औरत थी।

शुभिका काँपती आवाज़ में बोली—
वो… वो कौन है…?

विक्रांत ने धीरे-धीरे ऊपर balcony की तरफ देखा। कुछ सेकंड तक वो औरत उसे घूरती रही। फिर…वो अचानक मुस्कुराने लगी।
एक डरावनी मुस्कान। और अगले ही पल उसने balcony से छलांग लगा दी।

शुभिका चीख पड़ी -
नहीं!!

लेकिन…धड़ाम की आवाज़ नहीं आई। क्योंकि नीचे कोई body गिरी ही नहीं। Balcony के नीचे… कुछ था ही नहीं। सिर्फ़ अंधेरा।
और तभी—

शुभिका के कान के पास किसी लड़की की फुसफुसाहट गूँजी—
अब तुम्हारी बारी है…

शुभिका का पूरा शरीर सिहर उठा। उसने घबराकर पीछे देखा लेकिन वहाँ कोई नहीं था। सिर्फ़ अंधेरा…और विक्रांत शर्मा की ठंडी आँखें। वो धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ा।

वो बोला - 
डर गई?

उसके होंठों पर हल्की मुस्कान थी। शुभिका पीछे हटती गई।

वो बोली - 
तुम… तुम आखिर चाहते क्या हो मुझसे?!

विक्रांत कुछ पल उसे देखता रहा।

फिर बहुत शांति से बोला—
तुम।
सिर्फ़ तुम।

उसकी आवाज़ में ऐसा जुनून था कि शुभिका का दिल काँप गया।
तभी विक्रांत का phone बजा। उसने बिना नज़र हटाए call उठाई।

वो बोला - 
हाँ?

कुछ सेकंड वो सामने देखता रहा।

फिर बिल्कुल सामान्य लहजे में बोला—
हाँ… ले आओ उसके घर वालों को।

शुभिका का चेहरा उड़ गया।

वो बोली - 
नहीं…!

वो उसकी तरफ भागी।

वो बोली - 
मेरे मम्मी-पापा को इसमें मत घसीटो!

लेकिन विक्रांत ने उसका हाथ पकड़ लिया।

उसने धीरे से कहा -
शांत…तुम्हारी एक problem है शुभिका…
तुम अभी भी सोचती हो कि तुम्हारे पास choices हैं।

शुभिका की आँखों से आँसू बहने लगे।

वो बोली - 
Please…उन्होंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है?

विक्रांत कुछ सेकंड उसे देखता रहा। फिर अचानक उसके आँसू अपनी उंगलियों से पोंछने लगा। इतने प्यार से…कि वही चीज़ और डरावनी लग रही थी।

वो बोला - 
उन्होंने कुछ नहीं बिगाड़ा…
लेकिन अगर तुमने मुझे छोड़कर जाने की कोशिश की…

उसकी आवाज़ अचानक ठंडी हो गई।

वो बोला - 
तो सबसे पहले उनके bodies मिलेंगे।

शुभिका के पैरों से जैसे जान निकल गई। वो धीरे-धीरे पीछे हट गई। तभी farmhouse के बाहर कई गाड़ियों के रुकने की आवाज़ आई। विक्रांत हल्का सा मुस्कुराया।

वो बोला - 
लगता है… मेहमान आ गए।

मुख्य दरवाज़ा खुला। चार आदमी अंदर आए। और उनके बीच—
शुभिका के मम्मी-पापा। उनके हाथ बंधे हुए थे। माँ रो रही थीं…
और ठाकुर साहब के चेहरे पर चोट के निशान थे।

शुभिका बोली - 
पापा…!!

शुभिका दौड़कर उनकी तरफ जाने लगी। लेकिन तभी टक…किसी ने उसके सिर पर gun रख दी। वो रुक गई। विक्रांत धीरे-धीरे उसके पीछे आकर खड़ा हो गया।

फिर उसके कान में फुसफुसाया—
अब बताओ…शादी की shopping शुरू करें… या किसी का अंतिम संस्कार?

शुभिका चीख पड़ी -
नहीं…!

उसकी आँखों से आँसू लगातार बह रहे थे।

वो बोली -
Please उन्हें छोड़ दो…मैं… मैं जो कहोगे वो करूँगी…।

बस यही सुनना चाहता था विक्रांत। उसके होंठों पर धीमी मुस्कान आ गई।

उसने धीरे से कहा -
Good girl…

ठाकुर साहब गुस्से से चिल्लाए—
शुभी! इसकी बात मत मानना!
हम मर जाएँगे लेकिन—

धाँय!!!
गोली उनके पैरों के पास लगी। शुभिका डरकर काँप गई। उसकी माँ जोर-जोर से रोने लगीं। विक्रांत ने बिना expression बदले gun नीचे की।

वो बोला - 
मैं शोर बिल्कुल पसंद नहीं करता ठाकुर साहब।

फिर उसने अपने आदमियों की तरफ देखा।

वो बोला - 
इन दोनों को ऊपर वाले कमरे में बंद कर दो।

शुभिका बोली - 
नहीं!! 

शुभिका भागी। लेकिन दो आदमी उसे पकड़ चुके थे। उसने तड़पते हुए माँ की तरफ हाथ बढ़ाया।

वो चीखी -
मम्मी!!

उसकी माँ रोते हुए सिर्फ़ एक ही बात कह पा रही थीं—
मुझे माफ़ कर देना बेटा…

कुछ सेकंड बाद…ऊपर कमरे का दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई। और hall फिर शांत हो गया। अब वहाँ सिर्फ़ शुभिका और विक्रांत थे।

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विक्रांत धीरे-धीरे उसके सामने आकर बैठ गया। उसने table पर एक लाल रंग का bridal box रखा।

वो बोला - 
Open it.

शुभिका चुप रही।

वो दहाड़ा -
मैंने कहा… खोलो।

काँपते हाथों से उसने box खोला। अंदर भारी bridal jewellery रखी थी। लेकिन उसके नीचे कुछ और भी था। एक पुरानी तस्वीर।
शुभिका ने जैसे ही वो photo उठाई…उसका दिल रुक गया।
तस्वीर में एक लड़की dulhan के जोड़े में खड़ी थी। और उसका चेहरा…बिल्कुल शुभिका जैसा था। वही आँखें। वही मुस्कान। बस माथे पर खून फैला हुआ था।

Photo के पीछे लाल स्याही से लिखा था—
पहली दुल्हन भाग नहीं पाई थी…

शुभिका के हाथ काँपने लगे।

वो बोली - 
ये… ये कौन है…?

विक्रांत कुछ पल चुप रहा।

फिर धीरे से बोला—
मेरी पत्नी।

शुभिका ने shock में उसकी तरफ देखा।

वो बोली - 
लेकिन लोग तो कहते हैं कि तुमने कभी शादी नहीं की—

विक्रांत अचानक हँस पड़ा। धीमी… डरावनी हँसी।

वो बोला - 
लोग बहुत कुछ कहते हैं…मेरी पत्नी मारी गई।

फिर वो धीरे-धीरे उसके करीब झुका।

वो बोला - 
लेकिन तुम्हें पता है सबसे मजेदार बात क्या है?

शुभिका की साँस अटक गई।

विक्रांत ने उसकी आँखों में देखते हुए फुसफुसाया—
उसका नाम भी शुभिका था…