तेरहवा द्वार - 7 InkImagination द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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तेरहवा द्वार - 7

भाग 7
13वाँ दरवाज़ा
“माँ… क्या इस बार भी तुम मुझे बंद रखोगी…?”
उस मासूम लेकिन डरावनी आवाज़ के साथ पूरा तहखाना काँप उठा।
धड़ाम!!! धड़ाम!!!
13वें दरवाज़े के पीछे कुछ लगातार टकरा रहा था।
इतनी ताकत से… कि लोहे के मोटे ताले धीरे-धीरे टूटने लगे।
ठन! ठन!
रानी सुनयना का चेहरा डर से सफेद पड़ चुका था।
उसकी सफेद आँखें अब पहली बार इंसानी लग रही थीं।
जैसे वो सच में डरी हुई हो।
वो अचानक आरव की तरफ मुड़ी और चीखी—
“इसे मत खोलने देना!”
तभी…
दरवाज़े के नीचे से निकलता काला पानी तेजी से पूरे तहखाने में फैलने लगा।
वो पानी सामान्य नहीं था।
उसके अंदर कुछ हिल रहा था।
छोटे-छोटे काले साए।
जैसे दर्जनों हाथ पानी के अंदर रेंग रहे हों।
रोहन डर के मारे पीछे हट गया।
“ये क्या है?!”
अचानक काला पानी उसके पैर से टकराया।
और उसी पल रोहन जोर से चीख उठा।
उसकी टाँग पर काले निशान बनने लगे।
जैसे किसी ने जलते हाथों से उसे पकड़ लिया हो।
“आआआह्ह!!”
आरव तुरंत उसकी तरफ भागा।
लेकिन तभी…
तहखाने की सारी दीवारों से बच्चों की हँसी गूँजने लगी।
ही… ही… ही…
सैकड़ों आवाज़ें।
एक साथ।
आरव ने flashlight चारों तरफ घुमाई।
और उसका खून जम गया।
दीवारों पर छोटे-छोटे बच्चे बैठे थे।
काले।
पतले।
उनकी सफेद आँखें अँधेरे में चमक रही थीं।
कुछ छत पर उल्टे लटके थे।
कुछ दीवारों पर रेंग रहे थे।
और सबकी नजरें सिर्फ आरव पर थीं।
एक बच्चा धीरे-धीरे मुस्कुराया।
उसके मुँह के अंदर सिर्फ अँधेरा था।
फिर उसने फुसफुसाया—
“वो आ रहा है…”
धप्प!
अचानक सारी परछाइयाँ गायब हो गईं।
उसी समय…
13वें दरवाज़े का एक ताला अपने आप टूट गया।
ठननन!!!
पूरा तहखाना काँप उठा।
सुनयना दर्द से चीख पड़ी।
उसके शरीर पर काले निशान उभरने लगे।
जैसे कोई अदृश्य चीज़ उसे अंदर से जला रही हो।
“नहीं…”
वो घुटनों पर गिर गई।
उसकी पायल अपने आप बजने लगी।
छन… छन… छन…
आरव डरते हुए बोला, “वो क्या है?”
सुनयना ने धीरे-धीरे सिर उठाया।
उसकी आँखों से काला खून बह रहा था।
“वो… भूखा है…”
“कौन?”
कुछ सेकंड तक सन्नाटा रहा।
फिर उसने काँपती आवाज़ में कहा—
“वो बच्चा नहीं है…”
धड़ाम!!!
इस बार दरवाज़े के बीचोंबीच बड़ा crack पड़ गया।
और उस crack के अंदर से गहरा अँधेरा दिखाई देने लगा।
लेकिन वो सामान्य अँधेरा नहीं था।
वो हिल रहा था।
साँस ले रहा था।
आरव का दिल तेजी से धड़कने लगा।
तभी उसके कानों में फिर वही आवाज़ गूँजी—
“ताले खोल दो…”
“मैं तुम्हें सच दिखाऊँगा…”
आरव ने अपना सिर पकड़ लिया।
उसका दिमाग भारी होने लगा।
उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई उसकी सोच पर कब्ज़ा कर रहा हो।
उसकी आँखें धीरे-धीरे खाली होने लगीं।
वो बिना सोचे दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगा।
रोहन चीखा, “आरव!”
लेकिन वो नहीं रुका।
उसके कदम अपने आप चल रहे थे।
धीरे-धीरे…
वो दरवाज़े के बिल्कुल सामने पहुँच गया।
दरवाज़े के crack के अंदर से अब दो सफेद आँखें उसे देख रही थीं।
और फिर…
अँधेरे से एक छोटा काला हाथ बाहर निकला।
बहुत पतला।
लंबी उँगलियाँ।
वो हाथ धीरे-धीरे आरव के चेहरे को छूने लगा।
छूते ही…
आरव की आँखों के सामने फिर images आने लगीं।
लेकिन इस बार…
उसने कुछ और देखा।
एक छोटा बच्चा हवेली के आँगन में खेल रहा था।
सामान्य बच्चा।
मासूम।
सुनयना उसे गोद में लेकर हँस रही थी।
सब कुछ normal था।
फिर अचानक…
रात हो गई।
हवेली के नीचे तहखाने में ठाकुर वीरेंद्र सिंह कुछ लोगों के साथ खड़ा था।
बीच में वही बच्चा पड़ा था।
रो रहा था।
“माँ…”
लेकिन सुनयना वहाँ नहीं थी।
ठाकुर ने बच्चे के माथे पर खून से कुछ निशान बनाए।
और मंत्र पढ़ने लगा।
पूरा तहखाना काँपने लगा।
फिर…
13वाँ दरवाज़ा अपने आप खुल गया।
अंदर सिर्फ अँधेरा था।
और उसी अँधेरे से सैकड़ों आवाज़ें गूँज रही थीं।
“हमें अंदर आने दो…”
ठाकुर पागलों की तरह हँसने लगा।
“इस बच्चे को द्वार बना दो!”
अचानक अँधेरा तेजी से बच्चे के शरीर में घुसने लगा।
बच्चा दर्द से चीखने लगा।
उसकी आँखें सफेद हो गईं।
हड्डियाँ टूटने लगीं।
टक… टक… टक…
उसकी चीखें पूरे हवेली में गूँज रही थीं।
और फिर…
वो अचानक शांत हो गया।
कुछ सेकंड बाद…
उसने धीरे-धीरे सिर उठाया।
लेकिन अब वो बच्चा नहीं था।
उसकी मुस्कान इंसानी नहीं थी।
और उसकी आवाज़…
बहुत गहरी हो चुकी थी।
“अब मैं बाहर आ सकता हूँ…”
अगले ही पल पूरे तहखाने में मौजूद लोग हवा में उठ गए।
चीखें… खून… अँधेरा…
सब कुछ खत्म हो गया।
“आरव!!!”
आरव अचानक होश में वापस आया।
उसकी साँसें टूट रही थीं।
उसने डरते हुए दरवाज़े को देखा।
“उन्होंने… उसे किसी चीज़ का रास्ता बना दिया…”
सुनयना रो रही थी।
काले आँसू उसके चेहरे पर बह रहे थे।
“मैं उसे बचा नहीं पाई…”
तभी…
दरवाज़े के पीछे से बहुत धीमी हँसी सुनाई दी।
ही… ही… ही…
फिर crack धीरे-धीरे बड़ा होने लगा।
क्र्र्र्र्र…
अंदर का अँधेरा अब बाहर रिस रहा था।
और उसके साथ तहखाने का तापमान अचानक गिरने लगा।
इतना कि दीवारों पर बर्फ जमने लगी।
रोहन काँप गया।
“ये बाहर आ रहा है…”
उसी समय…
तहखाने के कोने में रखा पुराना पालना अपने आप जोर-जोर से हिलने लगा।
चररर! चररर!
फिर अचानक…
पालने के अंदर से रोने की आवाज़ आई।
“माँ…”
आरव धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ा।
और जैसे ही उसने पालने के अंदर देखा…
उसका पूरा शरीर सुन्न पड़ गया।
पालने के अंदर…
एक छोटा बच्चा लेटा था।
काले शरीर वाला।
सफेद आँखों वाला।
और वो मुस्कुरा रहा था।
धीरे-धीरे उसने अपना हाथ उठाया…
और फुसफुसाया—
“क्या तुम मेरे साथ खेलोगे…?”

अगला भाग जल्द ही...