भाग 1
शापित हवेली
रात के ठीक 3 बजकर 13 मिनट हुए थे।
पूरा गाँव गहरी नींद में डूबा हुआ था। बाहर तेज़ हवा चल रही थी। पेड़ों की सूखी शाखाएँ एक-दूसरे से टकराकर अजीब आवाज़ें निकाल रही थीं। आसमान में बादल इतने काले थे कि चाँद की रोशनी भी ज़मीन तक नहीं पहुँच पा रही थी।
लेकिन उस रात…
गाँव के आखिरी छोर पर बनी पुरानी हवेली की तीसरी मंज़िल की एक खिड़की में फिर से रोशनी जली थी।
ठीक वैसे ही… जैसे पिछले कई सालों से हर रात जलती थी।
“काली हवेली…”
गाँव वाले आज भी उसका नाम लेते हुए काँप जाते थे।
कहते थे — उस हवेली में जो गया… वो कभी पहले जैसा वापस नहीं आया।
और जो तीसरी मंज़िल तक पहुँच गया… उसकी लाश भी नहीं मिली।
तेज़ हवा के बीच हवेली का विशाल लोहे का गेट धीरे-धीरे अपने आप हिल रहा था।
चररररर…
उस आवाज़ में कुछ ऐसा था जो इंसान के अंदर तक सिहरन पैदा कर दे।
हवेली इतनी बड़ी थी कि अँधेरे में उसका पूरा आकार भी दिखाई नहीं देता था। उसकी दीवारों पर जमी काली नमी, टूटी खिड़कियाँ, और जगह-जगह उगे जंगली पेड़ उसे किसी कब्रिस्तान से भी ज़्यादा डरावना बना रहे थे।
लेकिन सबसे खौफनाक चीज़ थी…
तीसरी मंज़िल की वो खिड़की।
जहाँ हर रात कोई खड़ा दिखाई देता था।
कभी सिर्फ परछाई। कभी लंबे बाल। और कभी… सफेद आँखें।
गाँव वाले कहते थे — वो इंसान नहीं है।
“दादी… सच में वहाँ भूत है क्या?”
छोटा चिंटू डरते हुए अपनी दादी से चिपक गया।
दादी ने तुरंत उसके मुँह पर हाथ रख दिया।
“चुप! रात में उसका नाम नहीं लेते।”
कमरे में जल रहा मिट्टी का दिया अचानक तेज़ी से टिमटिमाने लगा।
बाहर कहीं दूर से कुत्तों के रोने की आवाज़ आ रही थी।
दादी धीरे-धीरे खिड़की बंद करते हुए बोलीं, “आज फिर हवेली की बत्ती जली है…”
“लेकिन वहाँ रहता कौन है?”
दादी कुछ पल चुप रहीं।
उनकी आँखों में साफ डर दिखाई दे रहा था।
“कोई नहीं रहता।”
“फिर बत्ती कौन जलाता है?”
दादी ने काँपते हुए जवाब दिया—
“वही… जो बीस साल पहले मर चुकी है।”
चिंटू का चेहरा पीला पड़ गया।
“क… कौन?”
दादी ने धीमी आवाज़ में कहा—
“रानी महल वाली बहू…”
अचानक बाहर से किसी औरत के पायल की आवाज़ सुनाई दी।
छन… छन… छन…
दोनों जम गए।
आवाज़ बिल्कुल घर के बाहर से आ रही थी।
दादी ने तुरंत दिया बुझा दिया।
कमरे में पूरा अँधेरा छा गया।
अब सिर्फ पायल की आवाज़ थी।
धीरे-धीरे…
और पास आती हुई।
छन… छन… छन…
चिंटू डर के मारे रोने लगा।
“द… दादी…”
“आवाज़ मत करना!” दादी फुसफुसाईं।
अचानक…
घर के बाहर किसी ने दरवाज़े पर तीन बार दस्तक दी।
ठक… ठक… ठक…
दोनों की साँसें रुक गईं।
फिर एक औरत की बहुत धीमी आवाज़ आई—
“दरवाज़ा खोलो…”
दादी के हाथ काँपने लगे।
वो आवाज़ इंसानी नहीं लग रही थी।
उसमें अजीब भारीपन था… जैसे कोई बहुत दूर कुएँ के अंदर से बोल रहा हो।
“मुझे अंदर आने दो…”
चिंटू चीखने ही वाला था कि दादी ने उसका मुँह दबा दिया।
दो मिनट तक बाहर बिल्कुल सन्नाटा रहा।
फिर अचानक…
खिड़की के बाहर किसी का चेहरा दिखाई दिया।
सफेद आँखें।
पूरे चेहरे पर काली मिट्टी।
और होंठों पर खून जैसी लाल मुस्कान।
चिंटू डर के मारे बेहोश हो गया।
दादी की चीख पूरे गाँव में गूँज उठी।
अगली सुबह पूरे गाँव में यही चर्चा थी।
“उसने फिर किसी को दिखाई दिया…”
“मैंने कहा था ना, हवेली फिर जाग गई है…”
“बीस साल बाद फिर वही सब शुरू होगा…”
गाँव के बीच बनी चाय की दुकान पर बैठे लोग डरे हुए थे।
लेकिन उन्हीं लोगों के बीच एक लड़का ऐसा भी था जो इन बातों पर हँस रहा था।
“तुम लोगों को हर चीज़ में भूत दिखता है।”
उसका नाम था — आरव।
करीब बाईस साल का लड़का। चेहरे पर हल्की दाढ़ी। गले में कैमरा। और आँखों में अजीब आत्मविश्वास।
वो paranormal videos बनाता था।
उसका एक छोटा YouTube channel था जहाँ वो haunted places explore करता था।
हालाँकि अभी उसके subscribers बहुत कम थे।
आरव चाय पीते हुए हँसा, “पुरानी हवेली है… हवा चलती होगी… कोई जानवर होगा। तुम लोगों ने कहानी बना दी।”
दुकानदार ने डरते हुए कहा, “बेटा… मज़ाक मत कर। उस हवेली में सच में कुछ है।”
“तो आपने देखा है?”
दुकानदार चुप हो गया।
पास बैठे बूढ़े आदमी ने धीरे से कहा, “मैंने देखा है…”
सभी उसकी तरफ देखने लगे।
“बीस साल पहले मैं हवेली में काम करता था।”
आरव की आँखों में चमक आ गई।
“अच्छा? फिर?”
बूढ़े आदमी ने काँपते हाथों से बीड़ी जलाई।
“उस रात हवेली में बहुत चीखें आई थीं।”
“किसकी?”
“ठाकुर वीरेंद्र सिंह की बहू की।”
“क्या हुआ था उसके साथ?”
बूढ़ा आदमी कुछ सेकंड तक चुप रहा।
फिर धीरे से बोला—
“उसे ज़िंदा दीवार में चुनवा दिया गया था।”
पूरा माहौल अचानक शांत हो गया।
आरव भी कुछ पल के लिए चुप रह गया।
“क्या मतलब?”
“ठाकुर ने उसे काली शक्तियों के लिए बलि चढ़ा दी थी।”
हवा अचानक तेज़ चलने लगी।
दुकान के बाहर टंगा पुराना बल्ब टिमटिमाने लगा।
बूढ़े आदमी ने काँपती आवाज़ में कहा—
“उस रात के बाद हवेली में रहने वाले सब लोग मर गए।”
“और ठाकुर?”
“उसकी लाश तीसरी मंज़िल पर मिली थी।”
“कैसे मरा?”
बूढ़े आदमी की आँखें डर से फैल गईं।
“उसकी आँखें बाहर निकली हुई थीं… जैसे मरने से पहले उसने कुछ ऐसा देखा हो… जिसे इंसान नहीं देख सकता।”
आरव कुछ सेकंड तक उसे देखता रहा।
फिर अचानक हँस पड़ा।
“Nice story.”
“ये कहानी नहीं है!” बूढ़ा आदमी चिल्लाया।
पूरी दुकान शांत हो गई।
“अगर अपनी जान प्यारी है… तो सूर्य ढलने के बाद उस हवेली के पास मत जाना।”
आरव मुस्कुराया।
“अब तो ज़रूर जाऊँगा।”
शाम हो चुकी थी।
आसमान में फिर काले बादल छा गए थे।
आरव अपने कमरे में कैमरा सेट कर रहा था।
उसका दोस्त रोहन बार-बार मना कर रहा था।
“भाई, सच में मत जा।”
“तू भी गाँव वालों जैसा हो गया?”
“नहीं यार… लेकिन कुछ जगहों पर नहीं जाना चाहिए।”
आरव ने बैग बंद किया।
“Perfect horror content मिलेगा।”
“और अगर सच में कुछ हुआ तो?”
आरव हँस पड़ा।
“Ghosts don’t exist.”
उसी समय…
कमरे की लाइट अचानक बंद हो गई।
पूरा कमरा अँधेरे में डूब गया।
“लो… शुरू हो गया,” रोहन घबराया।
आरव ने मोबाइल की flashlight ऑन की।
तभी…
उसे कमरे के कोने में किसी के खड़े होने का एहसास हुआ।
एक लंबी परछाई।
सफेद कपड़े।
लंबे बाल।
आरव तुरंत पलटा।
लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
उसकी मुस्कान थोड़ी कमजोर पड़ गई।
“शायद मेरा भ्रम था…”
अचानक उसके मोबाइल में अपने आप recording चालू हो गई।
स्क्रीन पर सिर्फ अँधेरा दिखाई दे रहा था।
फिर…
एक औरत की धीमी आवाज़ सुनाई दी—
“मत आना…”
आरव का चेहरा जम गया।
रोहन डरकर पीछे हट गया।
“भाई… ये क्या था?”
Recording अपने आप बंद हो गई।
कमरे में फिर सन्नाटा फैल गया।
कुछ सेकंड तक दोनों कुछ नहीं बोले।
फिर आरव ने गहरी साँस ली।
“किसी ने prank किया होगा।”
लेकिन इस बार उसकी आवाज़ में पहले जैसा confidence नहीं था।
बाहर बिजली जोर से चमकी।
खिड़की के शीशे पर कुछ सेकंड के लिए किसी औरत की परछाई दिखाई दी।
और फिर गायब हो गई।
रोहन लगभग चिल्ला पड़ा।
“मैं नहीं जा रहा!”
आरव भी डरा हुआ था…
लेकिन अब उसके अंदर डर से ज़्यादा curiosity जाग चुकी थी।
आखिर वो आवाज़ कौन थी?
और उसे हवेली जाने से मना क्यों कर रही थी?
रात के 11 बज चुके थे।
बारिश शुरू हो चुकी थी।
आरव अकेला हवेली की तरफ बढ़ रहा था।
उसके कैमरे की flashlight अँधेरे को चीरने की कोशिश कर रही थी…
लेकिन हवेली के आसपास का अंधेरा जैसे रोशनी को निगल रहा था।
जैसे-जैसे वो करीब पहुँच रहा था…
हवा और ठंडी होती जा रही थी।
उसकी साँसों से धुआँ निकलने लगा।
“Temperature इतना अचानक कैसे गिर सकता है…”
उसने कैमरे में फुसफुसाते हुए कहा।
तभी…
उसे दूर हवेली की तीसरी मंज़िल की खिड़की में कोई खड़ा दिखाई दिया।
एक औरत।
लाल साड़ी।
लंबे बाल।
और सफेद आँखें।
आरव के कदम वहीं रुक गए।
उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
कैमरा काँप रहा था।
“को… कोई है वहाँ?”
जवाब में सिर्फ हवा की आवाज़ आई।
फिर अचानक…
तीसरी मंज़िल की वो खिड़की अपने आप बंद हो गई।
धड़ाम!!!
आरव बुरी तरह काँप गया।
लेकिन अब वापस लौटना उसके ego के खिलाफ था।
वो धीरे-धीरे हवेली के विशाल लोहे के गेट तक पहुँचा।
गेट आधा खुला हुआ था।
जैसे कोई उसका इंतज़ार कर रहा हो।
चररररर…
उसने गेट को धक्का दिया।
अंदर कदम रखते ही…
उसके कैमरे की screen कुछ सेकंड के लिए glitch हुई।
और स्क्रीन पर एक सेकंड के लिए वही औरत दिखाई दी।
बहुत पास।
इतनी पास कि उसका चेहरा पूरी स्क्रीन में भर गया।
सफेद आँखें…
फटे होंठ…
और खून से भरी मुस्कान।
आरव डरकर पीछे हट गया।
लेकिन अगले ही पल स्क्रीन normal हो गई।
उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं।
“ये… ये क्या था?”
तभी…
हवेली के अंदर कहीं ऊपर से पायल की आवाज़ आई।
छन… छन… छन…
धीरे-धीरे…
कोई सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था।
आरव ने काँपते हुए flashlight ऊपर की तरफ की।
अँधेरे में सिर्फ सीढ़ियाँ दिखाई दे रही थीं।
लेकिन
आवाज़ लगातार पास आ रही थी।
छन… छन… छन…
फिर अचानक…
सब कुछ शांत हो गया।
पूरा हवेली फिर से खामोश हो गई।
इतनी खामोश… कि आरव अपनी धड़कन सुन सकता था।
और तभी…
उसके ठीक पीछे किसी औरत की फुसफुसाहट सुनाई दी—
“तुम वापस क्यों आए…?”
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