भाग 3
बंद कमरा
“अब तुम वापस नहीं जा सकते…”
कैमरे की स्क्रीन पर लिखे वो शब्द देखकर आरव के हाथ सुन्न पड़ गए।
बारिश लगातार तेज़ होती जा रही थी। आसमान में बिजली चमक रही थी, और हर चमक के साथ हवेली का काला चेहरा कुछ सेकंड के लिए साफ दिखाई देता… फिर दोबारा अंधेरे में गायब हो जाता।
आरव की साँसें अभी तक सामान्य नहीं हुई थीं।
उसका पूरा शरीर काँप रहा था।
“ये… ये कोई prank नहीं था…”
उसने काँपती आवाज़ में खुद से कहा।
वो किसी तरह उठकर बाइक तक पहुँचा। लेकिन जैसे ही उसने पीछे मुड़कर हवेली की तरफ देखा…
तीसरी मंज़िल की उसी खिड़की में फिर कोई खड़ा था।
इस बार वो औरत अकेली नहीं थी।
उसके पीछे कई और परछाइयाँ दिखाई दे रही थीं।
जैसे दर्जनों लोग अंधेरे में खड़े उसे देख रहे हों।
आरव तुरंत बाइक स्टार्ट करके वहाँ से निकल गया।
लेकिन जाते-जाते भी उसे ऐसा लग रहा था… जैसे कोई उसकी पीठ के ठीक पीछे बैठा हो।
सुबह के करीब पाँच बजे।
आरव अपने कमरे में बैठा था।
उसके कपड़े अभी तक गीले थे। सिर पर लगी चोट से हल्का खून निकल रहा था।
लेकिन उसे दर्द महसूस ही नहीं हो रहा था।
उसके दिमाग में सिर्फ वही चीज़ घूम रही थी—
“13वाँ दरवाज़ा मत खोलना…”
कमरे की लाइट जल रही थी, फिर भी उसे हर कोना अँधेरा लग रहा था।
रोहन सामने बैठा उसे घबराकर देख रहा था।
“भाई… मैंने कहा था मत जा।”
आरव चुप था।
“तूने सच में क्या देखा वहाँ?”
कुछ सेकंड तक कमरे में सन्नाटा रहा।
फिर आरव ने धीरे से कैमरा आगे बढ़ाया।
“सब इसमें रिकॉर्ड हुआ होगा…”
उसने वीडियो प्ले किया।
वीडियो की शुरुआत बिल्कुल normal थी।
हवेली… बारिश… अंधेरा…
फिर सीढ़ियाँ।
लेकिन जैसे ही तीसरी मंज़िल वाला हिस्सा आया…
स्क्रीन अचानक glitch होने लगी।
टक… टक… टक…
वीडियो अपने आप रुक-रुककर चलने लगा।
और फिर…
स्क्रीन पर वो औरत दिखाई दी।
बहुत पास।
इतनी पास कि उसका आधा चेहरा ही दिखाई दे रहा था।
उसकी सफेद आँखें सीधे कैमरे की तरफ देख रही थीं।
रोहन डरकर पीछे हट गया।
“हे भगवान…”
फिर वीडियो में आरव की डरी हुई आवाज़ सुनाई दी—
“दूर रहो!”
लेकिन अजीब बात ये थी…
वीडियो में वहाँ कोई औरत नहीं थी।
सीढ़ियाँ पूरी खाली थीं।
आरव का चेहरा सफेद पड़ गया।
“नहीं… वो वहीं थी…”
रोहन ने काँपती आवाज़ में कहा, “भाई… शायद तुझे hallucination हुआ हो…”
“Hallucination गीले पैरों के निशान नहीं छोड़ते!”
आरव लगभग चिल्ला पड़ा।
उसी समय वीडियो में एक और आवाज़ सुनाई दी।
बहुत धीमी।
जैसे कोई कैमरे के बिल्कुल पास खड़ा फुसफुसा रहा हो—
“आरव…”
दोनों जम गए।
वीडियो अपने आप zoom होने लगा।
धीरे-धीरे…
और स्क्रीन पर अंधेरे में एक दरवाज़ा दिखाई देने लगा।
लाल रंग का दरवाज़ा।
जिसे आरव ने हवेली में कभी देखा ही नहीं था।
फिर वीडियो अचानक बंद हो गया।
कमरे में सन्नाटा फैल गया।
रोहन ने तुरंत कैमरा दूर कर दिया।
“इसे फेंक दे।”
“क्या?”
“ये चीज़ ठीक नहीं है।”
आरव कुछ बोल ही रहा था कि तभी उसके फोन पर unknown number से call आया।
उसने call उठाया।
लेकिन दूसरी तरफ कोई नहीं बोला।
सिर्फ धीमी साँसों की आवाज़ आ रही थी।
“Hello?”
कुछ सेकंड बाद…
एक लड़की की बहुत धीमी आवाज़ आई—
“वो तुम्हें देख रही है…”
Call कट गया।
कमरे का माहौल अचानक और भारी हो गया।
रोहन घबराकर बोला, “बस! अब और नहीं। पुलिस को बताते हैं।”
आरव ने सिर हिलाया।
“पुलिस इस पर हँसेगी।”
“तो अब क्या करेगा?”
आरव कुछ पल चुप रहा।
फिर धीरे से बोला—
“मुझे वापस हवेली जाना होगा।”
“तू पागल हो गया है क्या?!”
“वहाँ कुछ है… और वो मुझसे कुछ कहना चाहती है।”
रोहन अविश्वास से उसे देखता रह गया।
उसी दिन शाम।
गाँव में हवेली की बातें और फैल चुकी थीं।
क्योंकि सुबह एक और घटना हुई थी।
गाँव का एक आदमी… जो रात में शराब पीकर हवेली के पास गया था…
सुबह जंगल में बेहोश मिला।
और होश में आने के बाद वो सिर्फ एक ही बात बोल रहा था—
“वो दीवार के अंदर है…”
“वो बाहर आना चाहती है…”
पूरा गाँव डरा हुआ था।
लेकिन उसी गाँव में एक लड़की ऐसी भी थी… जिसकी आँखों में डर से ज्यादा बेचैनी थी।
उसका नाम था — मीरा।
करीब इक्कीस साल की।
शांत स्वभाव। लेकिन उसकी आँखों में हमेशा अजीब उदासी रहती थी।
पिछले कुछ महीनों से उसे रोज़ एक ही सपना आता था।
एक पुरानी हवेली…
लाल दरवाज़ा…
और एक औरत जो अंधेरे में खड़ी उसे बुलाती थी।
“वापस आ जाओ…”
मीरा हर रात चीखकर उठ जाती थी।
लेकिन उसने कभी किसी को नहीं बताया।
उस शाम भी वो अपने कमरे में बैठी थी जब अचानक उसकी नज़र आईने पर गई।
और आईने में…
कुछ सेकंड के लिए उसे अपने पीछे कोई खड़ा दिखाई दिया।
लंबे बाल।
सफेद चेहरा।
मीरा तुरंत पलटी।
लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
फिर उसकी नज़र दोबारा आईने पर गई।
इस बार आईने पर उँगलियों से कुछ लिखा हुआ था—
“13वाँ दरवाज़ा।”
मीरा का गला सूख गया।
“ये… ये कैसे…”
तभी उसके सिर में अचानक तेज़ दर्द शुरू हुआ।
और उसकी आँखों के सामने कुछ images flash होने लगीं—
अंधेरी हवेली…
चीखती हुई औरत…
दीवार में चुनती ईंटें…
और खून…
बहुत सारा खून।
मीरा दर्द से जमीन पर गिर पड़ी।
उसी समय उसके कान में एक आवाज़ गूँजी—
“उसे रोक दो…”
“इस बार दरवाज़ा नहीं खुलना चाहिए…”
रात के करीब 11 बजे।
आरव फिर हवेली के बाहर खड़ा था।
लेकिन इस बार वो अकेला नहीं था।
रोहन भी मजबूरी में उसके साथ आया था।
“अगर आज कुछ हुआ ना… मैं भाग जाऊँगा।”
आरव ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसकी नजरें हवेली पर टिकी थीं।
आज हवेली पहले से भी ज्यादा डरावनी लग रही थी।
तीसरी मंज़िल की कई खिड़कियाँ अपने आप खुल-बंद हो रही थीं।
जैसे अंदर कोई भाग रहा हो।
ठंडी हवा अचानक चलने लगी।
और उसी हवा में फिर वही पायल की आवाज़ सुनाई दी।
छन… छन… छन…
रोहन का चेहरा पीला पड़ गया।
“भाई…”
आरव ने flashlight ऑन की।
“आज सच पता करेंगे।”
दोनों धीरे-धीरे अंदर गए।
हवेली के अंदर कदम रखते ही फिर वही सड़ी हुई बदबू फैल गई।
लेकिन इस बार एक नई चीज़ थी।
दीवारों पर जगह-जगह हाथों के निशान बने हुए थे।
काले।
जैसे किसी ने जलते हाथों से दीवार छुई हो।
अचानक ऊपर से किसी चीज़ के घसीटने की आवाज़ आई।
घरररर…
जैसे कोई भारी चीज़ फर्श पर खींची जा रही हो।
दोनों धीरे-धीरे तीसरी मंज़िल की तरफ बढ़े।
लेकिन जैसे ही वो ऊपर पहुँचे…
आरव रुक गया।
कॉरिडोर पहले जैसा नहीं था।
अब वहाँ एक नया दरवाज़ा था।
लाल रंग का।
ठीक वही… जो कैमरे में दिखाई दिया था।
रोहन की आवाज़ काँप गई।
“ये… ये कल यहाँ नहीं था…”
आरव धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
दरवाज़े पर पुराने खून जैसे निशान बने हुए थे।
और ऊपर दीवार पर किसी ने नाखूनों से लिखा था—
“मत खोलो…”
उसी समय अंदर से किसी लड़की के रोने की आवाज़ आने लगी।
“मदद करो…”
रोहन तुरंत पीछे हट गया।
“नहीं भाई… नहीं…”
लेकिन आरव जैसे किसी trance में था।
वो दरवाज़े के बिल्कुल सामने पहुँच गया।
उसके कानों में अब दर्जनों आवाज़ें गूँज रही थीं—
“खोल दो…”
“वो इंतज़ार कर रही है…”
“उसे बाहर आने दो…”
आरव ने काँपते हाथों से दरवाज़े का हैंडल पकड़ा।
और तभी…
कॉरिडोर की सारी लाइटें अपने आप जल उठीं।
टक!
दोनों डरकर पीछे हटे।
अब पहली बार पूरा कॉरिडोर साफ दिखाई दे रहा था।
दीवारों पर पुराने portraits लगे थे।
लेकिन सबसे डरावनी बात…
हर portrait की आँखें फूटी हुई थीं।
जैसे किसी ने जानबूझकर उन्हें नोच दिया हो।
तभी सबसे आखिरी portrait पर आरव की नज़र गई।
और उसका खून जम गया।
उस portrait में वही औरत थी।
लाल साड़ी।
सफेद आँखें।
लेकिन इस बार…
उसकी गोद में एक छोटा बच्चा भी था।
और portrait के नीचे खून से लिखा था—
“उसने अपने बच्चे को अभी तक नहीं छोड़ा…”
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