Shakti ke Shiv - 28 sheetal द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

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Shakti ke Shiv - 28

शक्ति इन्हीं सवालों में उलझी हुई थी कि तभी पीछे से किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा।

वह हल्का-सा चौंकी और पलटकर देखा।

शिवाय उसके पीछे खड़ा था।

उसने बिना कुछ कहे चाय की tray सामने रखी table पर रख दी।

"इतना क्या सोच रही हो?"

शक्ति ने उसकी तरफ देखा।

"रणविजय के network के बारे में।"

शिवाय कुछ कहता, उससे पहले ही दरवाज़ा खुला।

अलिशा जल्दी-जल्दी अंदर आई।

"Boss..."

शक्ति तुरंत उसकी तरफ मुड़ी।

"क्या हुआ?"

अलिशा ने हाथ में पकड़ी एक file उसकी तरफ बढ़ाई।

"रणविजय से जुड़ी एक आख़िरी information मिली है।"

शक्ति ने file ले ली।

"क्या?"

"उसके कुछ पुराने contacts से पूछताछ हुई है। उनसे पता चला कि रणविजय अकेले इतने बड़े network को handle नहीं कर रहा था। लेकिन..."

अलिशा कुछ पल रुकी।

"लेकिन?"

"उसके पीछे कोई दूसरा mastermind होने की बात किसी ने confirm नहीं की। बल्कि ऐसा लगता है कि रणविजय ही उस पूरे operation का सबसे बड़ा हिस्सा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद बाकी लोग भी अपने-अपने ठिकानों से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हमारी team ने उन्हें पकड़ लिया।"

शक्ति ने file के पन्ने पलटे।

कुछ देर तक वह चुपचाप पढ़ती रही।

फिर उसने file बंद कर दी।

"तो मतलब..."

अलिशा ने कहा—

"हाँ Boss। जो कुछ रणविजय ने शुरू किया था, उसका बड़ा हिस्सा अब सामने आ चुका है। और उसके खिलाफ़ जो evidence मिला है, वो case को मजबूत करने के लिए काफी है।"

शक्ति ने file बंद की और उसे एक तरफ रख दिया।


उसने थके हुए अंदाज़ में कहा—


"अभी के लिए इस case को यहीं end करो। दिमाग पका दिया है यार इस रणविजय ने। आगे देखेंगे कि क्या करना है।"


अलिशा ने भी राहत की साँस ली।


"आप सही कह रही हैं। थक गए हैं हम इस case को handle करते-करते।"


शक्ति के होंठों पर हल्की-सी मुस्कान आ गई।


कई दिनों बाद उसके चेहरे पर case की चिंता से अलग कोई भाव दिखाई दिया था।


शिवाय धीरे से उसके पास आकर बैठ गया।


उसने दोनों को देखा और पूछा—


"तो अब आगे का क्या plan है?"


अलिशा के चेहरे पर अचानक excitement आ गई।


"Plan? बनारस घूमने का!"


शक्ति ने उसकी तरफ देखा।


अलिशा ने तुरंत शिवाय की तरफ देखकर कहा—


"आप घुमाएँगे ना हमें?"


शिवाय ने कुछ पल उसे गौर से देखा।


फिर बिल्कुल गंभीर चेहरा बनाकर बोला—


"कौन हो तुम, मैडम?"


एक पल के लिए कमरे में खामोशी छा गई।


फिर शक्ति के चेहरे पर मुस्कान आ गई।


अलिशा भी हँसी रोक नहीं पाई।


"क्या मतलब कौन हूँ मैं?"


शिवाय ने कंधे उचकाए।


"मुझे तो याद नहीं कि मैंने किसी को बनारस घुमाने का वादा किया हो।"


अलिशा थोड़ा झेंप गई।


"वो... मैंने सोचा..."


"आपने सोचा?"


शिवाय ने मुस्कुराते हुए उसकी बात काटी।


"सोचना अच्छी बात है। लेकिन मेरा नाम उसमें कब से शामिल हो गया?"


अब शक्ति भी अपनी हँसी नहीं रोक पाई।


अलिशा ने शर्माते हुए कहा—


"ठीक है, नहीं घुमाना तो मत घुमाइए।"


शिवाय ने उसकी तरफ देखा और फिर शक्ति की ओर।


"अच्छा बाबा, घुमा दूँगा।"


अलिशा के चेहरे पर तुरंत खुशी लौट आई।


"सच?"


"हाँ। लेकिन एक शर्त है।"


"क्या?"


शिवाय ने शक्ति की तरफ देखकर कहा—


"आपकी Boss भी हमारे साथ चलेंगी।"


शक्ति ने तुरंत भौंहें चढ़ाईं।


"मुझे बीच में क्यों ला रहे हो?"


शिवाय मुस्कुराया।


"क्योंकि इनके साथ अकेले बनारस घूमने की हिम्मत मुझमें नहीं है।"


अलिशा खिलखिला उठी।


और शक्ति ने पहली बार महसूस किया—


कई दिनों की थकान के बाद शायद उसे भी इस तरह बिना किसी case, बिना किसी tension के कुछ पल बिताने चाहिए थे।


उसने हल्की मुस्कान के साथ कहा—


"ठीक है। देखते हैं तुम्हारी बनारस की सैर में कितना दम है।"

शक्ति ने इतना कहा और table पर रखे चाय के cup को उठाकर अपने होंठों से लगा लिया।

शिवाय की नज़र कुछ पल के लिए उसी पर ठहर गई।

तभी कमरे के दूसरे कोने में खड़े कुशल की नज़र शिवाय पर पड़ी।

वह कुछ सेकंड तक उसे देखता रहा।

आज शिवाय के चेहरे पर कुछ अलग था।

एक अजीब-सी चमक...

जैसे कई दिनों बाद उसके चेहरे से कोई पुराना बोझ थोड़ा हल्का हुआ हो।

कुशल के होंठों पर हल्की मुस्कान आ गई।

वह मन ही मन सोचने लगा—

"लगता है Boss का mood आज कुछ ज़्यादा ही अच्छा है।"

शिवाय ने अचानक उसकी तरफ देखा।

"क्या हुआ?"

कुशल ने तुरंत अपनी मुस्कान छिपाई।

"कुछ नहीं, सर।"

शिवाय ने उसकी आँखों में देखते हुए पूछा—

"कुछ तो है।"

कुशल ने सिर हिलाया।

"नहीं सर... बस आज आपको देखकर अच्छा लग रहा है।"

शिवाय कुछ पल चुप रहा।

फिर हल्की मुस्कान उसके चेहरे पर आ गई।

शक्ति ने कप नीचे रखते हुए दोनों की तरफ देखा।

"तुम दोनों क्या बातें कर रहे हो?"

कुशल ने तुरंत कहा—

"कुछ नहीं, मैडम।"

शिवाय ने कुशल की तरफ देखा और मुस्कुराकर बोला—

"कुछ नहीं। ये बस आजकल बहुत ज़्यादा observe करने लगा है।"

कुशल हँस पड़ा।

"क्या करूँ सर... आप बदल जो गए हैं।"

शिवाय की मुस्कान एक पल के लिए रुक गई।

शक्ति ने उसकी तरफ देखा।

"बदल गए हो?"

शिवाय ने सहज बनने की कोशिश की।

"पता नहीं।"

कुशल ने मुस्कुराते हुए कहा—

"शायद आपको पता होगा, मैडम।"

शक्ति ने उसे घूरकर देखा।

"कुशल..."

कुशल तुरंत चुप हो गया।

और शिवाय पहली बार थोड़ा झेंप गया।

तभी अचानक शिवाय की आँखों में कुछ कौंधा।


उसके चेहरे की मुस्कान एक पल में गायब हो गई।


उसने जैसे ही सामने देखा, उसके कानों में एक धीमी-सी आवाज़ गूँजने लगी।


किसी छोटे बच्चे के रोने की आवाज़...


शिवाय ने बेचैनी से अपना सिर पकड़ लिया।


"नहीं..."


आवाज़ फिर आई।


इस बार एक औरत की घबराई हुई आवाज़ थी—


"मेरी बेटी को बचाओ... वो लोग उसे उठाकर ले गए..."


शिवाय की साँसें तेज़ हो गईं।


उसने आँखें बंद कर लीं।


लेकिन आवाज़ और साफ़ होती चली गई।


फिर अचानक बच्चे की चीख सुनाई दी—


"शक्ति...!"


शिवाय की आँखें झटके से खुल गईं।


वह कुछ पल तक सामने देखता रहा, जैसे समझने की कोशिश कर रहा हो कि वह कहाँ है।


फिर अचानक अपनी कुर्सी से उठ खड़ा हुआ।


"शिवाय!"


कुशल की आवाज़ उसके पीछे से आई।


लेकिन शिवाय ने जैसे कुछ सुना ही नहीं।


वह तेज़ कदमों से अपने कमरे की तरफ बढ़ गया।


"सर!"


कुशल उसके पीछे भागा।


"शिवाय!"


लेकिन शिवाय किसी की आवाज़ नहीं सुन रहा था।


उसके दिमाग में वही रोता हुआ बच्चा...


वही औरत की आवाज़...


और आख़िरी शब्द बार-बार गूँज रहे थे—


"शक्ति..."


शिवाय अपने कमरे तक पहुँचा।


उसने जल्दी से दरवाज़ा खोला, अंदर गया और तुरंत दरवाज़ा बंद कर लिया।


बाहर कुशल दरवाज़े के सामने आकर रुक गया।


उसने घबराकर दरवाज़ा खटखटाया।


"शिवाय सर... दरवाज़ा खोलिए। क्या हुआ है?"


अंदर कोई जवाब नहीं आया।


कुछ पल बाद शक्ति भी वहाँ पहुँच गई।


उसने कुशल की तरफ देखा।


"क्या हुआ?"


कुशल ने परेशान होकर कहा—


"पता नहीं मैडम। अचानक उनका चेहरा बदल गया और वो बिना किसी की सुने अपने कमरे में चले गए।"


शक्ति की नज़र बंद दरवाज़े पर टिक गई।


अंदर पूरी तरह खामोशी थी।


लेकिन उस खामोशी के पीछे...


शिवाय अपने अतीत की किसी ऐसी आवाज़ से लड़ रहा था, जिसे वह सालों से अपने अंदर दबाकर बैठा था।



“दरवाज़े के उस पार शिवाय खामोश था… लेकिन उसके अतीत की वो आवाज़ आज पहली बार फिर ज़िंदा हो चुकी थी—और उस आवाज़ में सिर्फ़ एक नाम था… शक्ति।”


आख़िर शिवाय के अतीत में ऐसा क्या हुआ था, जिसका रिश्ता शक्ति से था?

जानने के लिए पढ़ते रहिए — शक्ति के शिव।