Shakti ke Shiv - 7 sheetal द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

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Shakti ke Shiv - 7

उधर…

दिल्ली के बाहरी इलाके में स्थित Royal Crest Palace।

शिवाय प्रताप सिंह इस वक्त अपने कमरे में रखे बड़े, गहरे भूरे रंग के leather couch पर आराम से बैठे थे।


कमरे में हमेशा की तरह सन्नाटा था।

उनके सामने कुशल राठौड़ खड़ा था और अगले कुछ दिनों की मीटिंग्स और बिज़नेस प्लान्स के बारे में बता रहा था।

तभी मेज़ पर रखा शिवाय का फ़ोन बज उठा।

उन्होंने स्क्रीन पर नज़र डाली।

"Shivani Calling..."

शिवाय के होंठों पर अनायास हल्की मुस्कान आ गई।

उन्होंने कॉल रिसीव की।

"कहाँ हैं आप, बड़े भाई सा?" दूसरी तरफ़ से शिवानी की चहकती हुई आवाज़ आई।

शिवाय ने सहज स्वर में कहा—

"दिल्ली में हूँ, मेरी लाडो। क्या बात है? आज हमारी बहन इतनी खुश क्यों लग रही है?"

शिवानी खिलखिलाकर हँस पड़ी।

"भाई सा... बात ही ऐसी है। पापा सा ने हमें बनारस जाने की इजाज़त दे दी। कॉलेज भी खत्म हो गया है, इसलिए हम सब कुछ दिन घूमने जा रहे हैं।"

शिवाय ने तुरंत पूछा—

"हम सब... यानी कौन-कौन?"

"हमारे साथ रुद्र भाई सा, कामाक्षी दीदी और कार्तिक भी जा रहे हैं..."

वह एक पल रुकी, फिर शरारती लहजे में बोली—

"…और आप भी।"

शिवाय का चेहरा फिर से गंभीर हो गया।

"नहीं, शिवानी। आप कहीं नहीं जाएँगी।"

उधर कुछ पल के लिए चुप्पी छा गई।

फिर शिवानी ने हल्की नाराज़गी से पूछा—

"क्यों, भाई सा?"

शिवाय की आवाज़ इस बार पहले से ज़्यादा सख़्त थी।

"आप जानती हैं हमारे हमारे दुश्मनों की कमी नहीं है। मैं आपकी या कामाक्षी की सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं ले सकता।"

शिवानी ने तुरंत जवाब दिया—

"भाई सा, हमारी सुरक्षा की चिंता मत कीजिए। रुद्र भाई सा और बाकी सब हमारे साथ हैं। और पापा सा भी अनुमति दे चुके हैं।"

शिवाय कुछ कहना ही चाहते थे—

"लेकिन, शिवानी..."

उसने बीच में ही बात काट दी।

"पर-वर कुछ नहीं। हम आज शाम तक बनारस पहुँच रहे हैं... और आप भी वहीं आ रहे हैं। बस।"

इतना कहकर उसने कॉल काट दिया।


शिवाय कुछ क्षण तक फोन की स्क्रीन को देखता रहा। फिर उसके होंठों पर हल्की-सी मुस्कान आ गई।

"ज़िद्दी..." उसने धीमे से खुद से कहा !

सामने खड़ा कुशल सब कुछ चुपचाप देख रहा था।


__


शक्ति ने धीरे से IG के cabin का दरवाज़ा खटखटाया।


"May I come in, Sir?"


अंदर से गंभीर आवाज़ आई—


"Come in."


शक्ति ने दरवाज़ा खोला और अंदर चली गई।


Cabin हमेशा की तरह सलीके से सजा हुआ था।


सामने बड़ी-सी लकड़ी की desk के पीछे एक अधेड़ उम्र के अधिकारी गंभीर मुद्रा में बैठे थे।


उनकी खाकी वर्दी पर चमकते सितारे और चेहरे पर वर्षों के अनुभव की सख़्ती साफ़ झलक रही थी।


Desk पर रखी सुनहरे अक्षरों वाली name plate पर लिखा था—


IG Manish Jaiswal


उनके सामने कुछ files, evidence pouches और कई photographs फैली हुई थीं।


शक्ति ने एक नज़र उन सब पर डाली, फिर सीधे उनकी ओर देखकर सलाम किया।


"Good evening, Sir."


मनीष जायसवाल ने हल्का-सा सिर हिलाया और सामने रखी कुर्सी की ओर इशारा किया।


"Sit down, Shakti."


शक्ति उनके सामने जाकर बैठ गई।


IG मनीष जायसवाल के चेहरे की गंभीरता देखकर ही वह समझ गई कि बात साधारण नहीं है।


कुछ ऐसा ज़रूर हुआ था... जिसने उसके वरिष्ठ अधिकारी तक को चिंता में डाल दिया था।

"IG मनीष जायसवाल कुछ देर तक सामने रखी फ़ाइल को देखते रहे। फिर उन्होंने धीमे से उसे बंद किया और नज़रें शक्ति पर टिकाईं।"


"Shakti... जिस trafficking case की investigation तुम lead कर रही हो... अब वो सिर्फ़ एक trafficking case नहीं रह गया है।"

शक्ति की भौंहें हल्की सिकुड़ गईं।

"Sir... क्या कोई नई जानकारी मिली है?"

IG ने मेज़ पर रखी एक फ़ाइल उसकी ओर सरका दी।

"पूछताछ में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने इस पूरे मामले की दिशा बदल दी है।"

शक्ति ने फ़ाइल खोली।

जैसे-जैसे उसकी नज़र पन्नों पर दौड़ती गई, उसके चेहरे की गंभीरता बढ़ती चली गई।

उसने धीरे से सिर उठाया।

"Sir... इसका मतलब..."

IG ने उसकी बात बीच में ही रोक दी।

"हाँ, Shakti... और यही वजह है कि मैंने तुम्हें तुरंत बुलाया है।"


"दिल्ली में पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में बनारस का लिंक मिला हैं वाराणसी पुलिस पिछले कई महीनों से एक trafficking network पर काम कर रही है। आज उनकी investigation में मिले कुछ inputs हमारे case से match हुए हैं। मुझे लगता है दोनों मामलों के पीछे एक ही संगठन है। इसलिए मैंने फैसला किया है कि इस case को तुम ही आगे lead करोगी। तुम कल सुबह वाराणसी के लिए निकलोगी।"


शक्ति कुछ सेकंड तक चुपचाप IG की बात सुनती रही।

उसके चेहरे पर कोई घबराहट नहीं थी, लेकिन आँखों में एकाग्रता साफ़ दिखाई दे रही थी।

उसने धीरे से फ़ाइल बंद की और गंभीर स्वर में पूछा—

"Departure कब तक है, Sir?"

IG ने उसकी तरफ़ देखते हुए कहा—

"जितनी जल्दी हो सके। बेहतर होगा कि तुम कल सुबह तक वाराणसी पहुँच जाओ।"

उसके पास तैयारी के लिए बहुत कम समय था।

उसे वाराणसी रवाना होने से पहले case से जुड़ी ज़रूरी files तैयार करनी थीं, कुछ आवश्यक सामान पैक करना था और निकलने से पहले अपनी आगे की strategy भी तय करनी थी।

उसने बिना देर किए अपना phone निकाला और एक नंबर dial किया।

"Alisha... मेरे cabin में आओ। हमें तुरंत Banaras mission की तैयारी शुरू करनी है।"

दूसरी तरफ़ से बिना एक पल गँवाए जवाब आया—

"Yes, Madam."

शक्ति ने call काटा और तेज़ क़दमों से अपने cabin की ओर बढ़ गई।

उसे नहीं पता था...

वाराणसी का यह सफ़र उसके सामने सिर्फ़ एक नए केस के दरवाज़े नहीं खोलेगा...

बल्कि उसकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा सच भी उसी शहर में उसका इंतज़ार कर रहा होगा।

क्या वाराणसी में उसे इस trafficking network की सबसे मज़बूत कड़ी मिलेगी?

या फिर यह सफ़र उसकी ज़िंदगी को ऐसी दिशा में मोड़ देगा, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी?

जानने के लिए पढ़ते रहिए... Shakti Ke Shiv

उसने गंभीर स्वर में कहा—

"Okay, Sir."

एक पल रुककर उसने अगला सवाल पूछा—

"Sir, क्या मेरी टीम भी मेरे साथ जाएगी... या वहाँ की Local Crime Branch और Police Team के साथ मुझे coordinate करना होगा?"

IG मनीष जायसवाल कुर्सी पर हल्का-सा पीछे टिके।

"तुम्हारी core team यहीं रहेगी। वाराणसी पहुँचने के बाद वहाँ की Crime Branch और Local Police तुम्हारे साथ काम करेगी। ज़रूरत पड़ने पर तुम अपनी टीम के किसी भी अधिकारी को बाद में बुला सकती हो।"

शक्ति ने संक्षिप्त-सा सिर हिलाया।

"Understood, Sir."

IG ने आख़िरी बार उसकी ओर देखते हुए कहा—

"Be careful, Shakti. इस बार ज़रा-सी चूक भी पूरे operation पर भारी पड़ सकती है।"

"I won't disappoint you, Sir." शक्ति ने दृढ़ स्वर में कहा।

इतना कहकर उसने फ़ाइल उठाई, सलाम किया और तेज़ क़दमों से cabin से बाहर निकल गई।

अब उसके सामने सिर्फ़ एक ही लक्ष्य था—वाराणसी।

उसे नहीं पता था कि यह सफ़र सिर्फ़ एक नए मिशन की शुरुआत नहीं होगा...

जानने के लिए पढ़ते रहिए... Shakti Ke Shiv