उधर...
शाम ढल चुकी थी।
वाराणसी शहर अपनी रौनक में डूबा हुआ था। घाटों पर आरती की तैयारियाँ चल रही थीं|
उसी समय शहर के बाहरी हिस्से में कई गाड़ियों का एक काफ़िला तेज़ी से आगे बढ़ रहा था।
सबसे आगे चल रही काली SUV की पिछली सीट पर शिवाय प्रताप सिंह शांत भाव से बैठे खिड़की के बाहर देखते जा रहे थे।
उनके पीछे की गाड़ियों में शिवानी, रुद्र, कामाक्षी और कार्तिक बैठे थे।
शिवानी पूरे रास्ते खिड़की से बाहर झाँकते हुए उत्साहित होकर कभी घाटों की तरफ इशारा करती, तो कभी पुरानी इमारतों को देखकर मुस्कुरा उठती।
"भाई सा को देखिए…" उसने हँसते हुए कहा, "इतने खूबसूरत शहर में भी इनके चेहरे के भाव नहीं बदलते।"
रुद्र हल्का-सा मुस्कुराया।"तुम्हारे बड़े भाई सा अगर मुस्कुराने लगें, तो शायद दुनिया का आठवाँ अजूबा घोषित हो जाए।"
कार्तिक अपनी हँसी रोक नहीं पाया कामाक्षी ने मुस्कुराकर सिर हिला दिया।
कई काली SUVs का काफ़िला शहर की सड़कों से होता हुआ एक बड़े लेकिन सादगी से बने दो-मंज़िला मकान के सामने आकर रुका।
यह सिंह परिवार का पुश्तैनी घर था।
बाहर छोटा-सा बगीचा, लोहे का साधारण फाटक और बरामदे में जलती पीली रोशनी... घर की सादगी उसकी अपनी अलग पहचान थी।
शिवाय प्रताप सिंह गाड़ी से उतरे और कुछ क्षण उस घर को देखते रहे।
यह घर उनके लिए सिर्फ़ एक मकान नहीं था... बल्कि बचपन की अनगिनत यादों का हिस्सा था।
पीछे से शिवानी गाड़ी से उतरते ही मुस्कुराई।
"आख़िरकार... अपने बनारस वाले घर आ ही गए।"
"अंदर चलिए। सफ़र लंबा था, पहले सब आराम कर लीजिए।"
__
रात के लगभग नौ बजे थे।
अगली सुबह उन्हें वाराणसी के लिए रवाना होना था, इसलिए दोनों अपने-अपने काम में व्यस्त थीं।
शक्ति अपने कमरे में खुले ट्रॉली बैग के सामने खड़ी ज़रूरी सामान रख रही थी।
उधर अलिशा कमरे के बाहर डाइनिंग टेबल पर बैठी एक-एक फ़ाइल और दस्तावेज़ को व्यवस्थित कर रही थी। उसके सामने लैपटॉप खुला था और वह लगातार Banaras Crime Branch से आए e-mails चेक कर रही थी।
कुछ देर बाद वह फ़ाइल हाथ में लेकर शक्ति के कमरे तक आई।
"Madam..."
शक्ति ने बैग की ज़िप बंद करते हुए उसकी तरफ देखा।
"Banaras Crime Branch से confirmation आ गया है। हमारी arrival की information वहाँ पहुँच चुकी है। Local Crime Branch की टीम कल सुबह एयरपोर्ट पर हमारा इंतज़ार करेगी।"
शक्ति ने हल्का-सा सिर हिलाया।
"Good."
अलिशा: "Madam, सुबह की flight के tickets confirm हो गए हैं। Banaras Crime Branch को भी हमारी arrival की information भेज दी गई है।"
शक्ति: "Good. बाकी?"
अलिशा: "Local team हमें airport से सीधे headquarters लेकर जाएगी। वहीं case की पूरी briefing और documents मिल जाएँगे।"
शक्ति ने हल्का-सा सिर हिलाया।
"ठीक है। पाँच बजे निकलना है, इसलिए सब तैयारी आज ही पूरी कर लो।"
"जी, Madam."
__
उधर... उसी समय, वाराणसी।
रात के लगभग नौ बजे थे।
सिंह परिवार का बनारस वाला घर रोशनी से जगमगा रहा था।
घर में काम करने वाले कर्मचारी सभी के सामान को उनके कमरों तक पहुँचा रहे थे, जबकि शिवानी पूरे घर में उत्साह से इधर-उधर घूम रही थी।
"आख़िरकार... हम बनारस आ ही गए!" उसने मुस्कुराते हुए कहा।
कामाक्षी हल्का-सा मुस्कुराईं।
"इतनी खुशी तो तुम्हें कॉलेज ख़त्म होने पर भी नहीं हुई थी।"
"क्योंकि ये बनारस है, दीदी!" शिवानी ने हँसते हुए जवाब दिया।
उधर शिवाय बिना कुछ बोले सीधे ड्रॉइंग रूम से होते हुए अपने कमरे की ओर बढ़ गए।
उनकी आदत थी...
सफ़र कितना भी लंबा क्यों न हो, पहले खुद को व्यवस्थित करना और फिर बाकी काम देखना।
उन्होंने कमरे में पहुँचकर अपना कोट उतारा और कुर्सी पर रख दिया।
तभी दरवाज़े पर हल्की दस्तक हुई।
"Yes"
दरवाज़ा खुला और कुशल अंदर आया।
"बड़े भाई सा..."
शिवाय ने उसकी तरफ देखा।
""बड़े भाई सा... हमारे source से खबर आई है। जिस जानकारी का हम इतने सालों से इंतज़ार कर रहे थे... उससे जुड़ा एक अहम सुराग मिला है।"
एक पल के लिए शिवाय के चेहरे के भाव बदल गए।
"क्या तुम्हें पूरा यक़ीन है?"
"जी, बड़े भाई सा। इसलिए मैंने आपको आते ही बताना ज़रूरी समझा।"
शिवाय कुछ क्षण खामोश रहे। उनकी गहरी नज़रें कुशल पर टिकी थीं, मानो उसकी बातों का वज़न परख रही हों।
फिर उन्होंने शांत लेकिन दृढ़ स्वर में कहा—
"Study room में चलते हैं। वहाँ आराम से पूरी बात करना।"
"जी, बड़े भाई सा।"
कुशल तुरंत कमरे से बाहर निकल गया।
शिवाय कुछ पल वहीं खड़े रहे।
खिड़की से बाहर नज़र गई, जहाँ रात के सन्नाटे में बनारस अब भी अपनी रफ़्तार से साँस ले रहा था।
उन्होंने धीरे से अपनी मुट्ठी भींच ली।
"अगर इस बार भी ये सुराग झूठा निकला..." उन्होंने मन ही मन सोचा, "...तो शायद एक और उम्मीद हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।"
अगले ही पल उन्होंने खुद को संभाला और बिना एक पल गंवाए कमरे से बाहर निकल गए।
उन्हें नहीं पता था...
जिस सच्चाई की तलाश उन्हें वर्षों से थी...
उसकी आहट अब उसी शहर में दस्तक दे चुकी थी।
जारी रहेगा...
जानने के लिए पढ़ते रहिए... Shakti Ke Shiv