चिराग ने गहरी साँस लेते हुए रिपोर्ट शिवाय की ओर बढ़ा दी।
"Sir... please, once have a look."
शिवाय प्रताप सिंह ने बिना कुछ कहे रिपोर्ट अपने हाथ में ली और ध्यान से पढ़ने लगे।
कमरे में कुछ पल के लिए गहरा सन्नाटा छा गया।
रिपोर्ट पढ़ते हुए उनकी नज़रें एक-एक पन्ने पर ठहरती रहीं।
तभी चिराग ने शांत स्वर में कहना शुरू किया—
"Physically, ये बिल्कुल ठीक हैं। लेकिन मानसिक रूप से पिछले कई सालों से unresolved trauma से जूझ रही हैं। इन्हें अक्सर flashbacks आते हैं... और इन्हीं की वजह से severe anxiety develop हो चुकी है।"
शक्ति चुपचाप सामने बैठी रही।
चिराग आगे बोला—
"ये जानबूझकर खुद को हर समय काम में व्यस्त रखती हैं, ताकि इन्हें अपने अतीत के बारे में सोचने का मौका ही न मिले। लेकिन जैसे ही ये अकेली होती हैं... या किसी ऐसी चीज़ से सामना होता है जो इनके पुराने घावों की याद दिला दे... इनका trauma फिर सामने आ जाता है।"
उसने एक पल रुककर धीमे स्वर में कहा—
"Sleeping pills भी लेती हैं। मैंने सिर्फ़ एक tablet लेने की सलाह दी थी... लेकिन कई बार चार-चार tablets तक ले लेती हैं। फिर भी तीन-चार घंटे से ज़्यादा नहीं सो पातीं।"
शिवाय ने धीरे से रिपोर्ट बंद की और मेज़ पर रख दी।
उन्होंने पहली बार सीधे शक्ति की ओर देखा।
"देखिए, Miss Shakti..."
उनकी आवाज़ शांत थी, लेकिन शब्दों में गंभीरता साफ़ थी।
"मैं आपके अतीत के बारे में नहीं जानता... और न ही जानना चाहता हूँ। लेकिन इतना ज़रूर समझ सकता हूँ कि कोई पुराना दर्द आज भी आपका पीछा नहीं छोड़ रहा।"
कुछ पल रुककर उन्होंने आगे कहा—
"कई बार हम अपने दर्द को भुलाने के लिए खुद को काम में इतना उलझा लेते हैं कि हमें लगता है हम उससे आगे निकल आए हैं। लेकिन सच यह होता है... कि दर्द वहीं खड़ा हमारा इंतज़ार कर रहा होता है।"
शक्ति की उँगलियाँ धीरे-धीरे रिपोर्ट के किनारे पर कस गईं।
वह अब भी शांत थी।
"अगर मेरी बात गलत लगे तो उसे यहीं छोड़ दीजिए..." शिवाय ने संयत स्वर में कहा, "लेकिन अगर सही लगे... तो अपने मन को भी उतना ही समय दीजिए जितना अपने कर्तव्य को देती हैं। क्योंकि जो दर्द दबा रहता है... वह कभी खत्म नहीं होता, सिर्फ़ और गहरा होता जाता है।"
यह सुनते ही शक्ति ने बिना कुछ कहे अपनी नज़रें दूसरी ओर फेर लीं।
उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था...
लेकिन उसकी खामोशी बता रही थी कि शिवाय के शब्द कहीं न कहीं उसके भीतर तक पहुँच चुके थे।
कुछ क्षण बाद उसने मेज़ पर रखी पर्ची उठाई।
"Thank you."
बस इतना कहकर वह उठी और बाहर चली गई।
दरवाज़ा बंद होने के बाद भी शिवाय की नज़र कुछ पल उसी दरवाज़े पर टिकी रही।
उन्होंने धीमे स्वर में कहा—
"उसके चेहरे पर जितनी सख़्ती है... उससे कहीं ज़्यादा दर्द उसकी आँखों में छिपा है।"
चिराग ने हल्का-सा सिर झुकाया।
"जी, Sir... और वही दर्द उसे हर दिन थोड़ा-थोड़ा तोड़ रहा है।"
शक्ति बिना किसी की तरफ देखे cabin से बाहर निकल आई।
उसके कदम तेज़ थे… जैसे वह वहाँ एक पल भी और रुकना नहीं चाहती थी।
Hospital के लंबे corridor से गुजरते हुए पहली बार उसकी आँखों में घबराहट नहीं… नमी थी।
उसने अपनी पलकों को कई बार झपकाया, मानो आँखों में उतर आए आँसुओं को वापस भेज देना चाहती हो।
लेकिन इस बार उसके लिए खुद पर काबू पाना आसान नहीं था।
शिवाय के शब्द बार-बार उसके कानों में गूँज रहे थे—
"तुम्हारा अतीत आज भी तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ रहा..."
उसने चलते-चलते गहरी साँस ली और अपनी मुट्ठियाँ भींच लीं।
"नहीं..." उसने मन ही मन खुद से कहा।
"मैं कमज़ोर नहीं पड़ सकती..."
वह लगभग Hospital के मुख्य द्वार तक पहुँच चुकी थी कि तभी उसकी jeans की pocket में रखा phone बज उठा।
उसने जल्दी से phone निकाला।
Screen पर Alisha Calling... लिखा चमक रहा था।
शक्ति ने खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश की और call receive कर लिया।
"Hello..."
दूसरी तरफ से Alisha की घबराई हुई आवाज़ सुनाई दी।
उसने कुछ ऐसा कहा कि शक्ति के चेहरे का रंग पल भर में बदल गया।
उसकी आँखों की नमी एक झटके में गायब हो गई और उसकी जगह एक पुलिस अधिकारी की सतर्कता लौट आई।
"क्या?..."
वह एकदम से तेज़ क़दमों से Hospital के बाहर की ओर बढ़ी।
"मैं अभी पहुँच रही हूँ।"
इतना कहकर उसने call काट दिया।
कुछ ही क्षण बाद Hospital के बाहर उसकी car तेज़ी से parking से निकली...
और अगले ही पल सड़क पर दौड़ रही थी।
कुछ ही देर बाद शक्ति की कार तेज़ रफ़्तार से Crime Branch Headquarters के मुख्य गेट के भीतर दाखिल हुई।
उसने कार पार्किंग में रोकी, इंजन बंद किया और बिना एक पल गँवाए बाहर निकल आई।
उसके चेहरे पर कुछ देर पहले की भावनाएँ अब पूरी तरह गायब थीं।
आँखों की नमी की जगह फिर वही सख़्ती लौट आई थी, जो एक पुलिस अधिकारी की पहचान थी।
तेज़ क़दमों से चलते हुए वह Headquarters के अंदर दाखिल हुई।
तभी सामने वाले कॉरिडोर से लगभग दौड़ती हुई आलिशा उसकी ओर आती दिखाई दी।
शक्ति को देखते ही वह उसके सामने आकर रुक गई।
उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं और चेहरे पर साफ़ घबराहट थी।
शक्ति ने बिना समय गँवाए पूछा—
"क्या हुआ, Alisha?"
आलिशा उसके सामने आकर रुकी और जल्दी से बोली—
"Madam... IG Sir ने आपको तुरंत अपने cabin में बुलाया है। उन्होंने कहा है कि उनसे तुरंत मिलिए। उन्हें आपसे बहुत ज़रूरी बात करनी है।"
शक्ति की भौंहें हल्का-सा सिकुड़ गईं।
"अभी?"
"Yes, Madam." आलिशा ने बिना देर किए जवाब दिया।
शक्ति ने एक पल भी गँवाया नहीं।
वह तेज़ क़दमों से IG के cabin की तरफ़ बढ़ गई।
रास्ते भर उसके मन में सिर्फ़ एक ही सवाल घूम रहा था—
आख़िर ऐसी कौन-सी बात थी, जिसके लिए IG ने उसे बिना एक पल की देरी किए बुलाया था?
जानने के लिए पढ़ते रहिए... Shakti Ke Shiv