Shakti ke Shiv - 2 sheetal द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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Shakti ke Shiv - 2

शक्ति अपनी गाड़ी से शांति विहार एक्सटेंशन पहुँची। वहाँ एक सुनसान सी सड़क पर उसने गाड़ी रोक दी ! और अपने खास खबरी का इंतज़ार करने लगी!बस कहीं-कहीं जलती स्ट्रीट लाइट्स की हल्की रोशनी अंधेरे को चीरने की कोशिश कर रही थी। चारों तरफ सन्नाटा पसरा था!
अपनी गाड़ी की हेडलाइट दो बार फ्लैश की। खामोशी को तोड़ते हुए किसी ने धीरे से खिड़की पर दस्तक दी।

शक्ति ने नज़र उठाई—और बिना एक शब्द कहे दरवाज़ा खोल दिया।
वह व्यक्ति गाड़ी में बैठा था। गाड़ी की हल्की रोशनी में भी उसका चेहरा साफ दिखाई दे रहा था।

शक्ति: “डिटेल में बताओ, रवि।”
रवि ने गहरी साँस ली और धीमे स्वर में बोला—
“मैडम, ये लोग local नहीं हैं… एक organized network है। हर काम अलग-अलग लोग संभालते हैं—transport, contact और safe houses। शांति विहार के पीछे वाला पुराना industrial area इनकी meetings के लिए इस्तेमाल होता है। रात के बाद ही activity होती है… दिन में सब normal दिखता है। रात दस बजे के बाद गाड़ियाँ आती-जाती हैं, और हर बार एक ही रास्ता इस्तेमाल नहीं करते।”

रवि के बोलने पर शाक्ति जो स्टीयरिंग पर अपनी उँगलियों से टैप कर रही थी, उसकी उँगलियाँ रुक गईं और वह रवि की तरफ देखने लगी।

शक्ति उसे ऐसे देख रही थी, जैसे उसने कोई बहुत बड़ी और हैरान कर देने वाली बात सुन ली हो।

कुछ पल रुका, फिर बोला—
“मैडम… ये लोग बहुत sharp हैं। मुझे लगता है ये सिर्फ इस खेल के मोहरे हैं। असली mastermind कोई और है।”
रवि की बात सुनते ही शक्ति की उँगलियाँ, जो अब तक steering पर धीमे-धीमे tap कर रही थीं, रुक गईं।

शाक्ति: “क्या तुम्हें पक्का यकीन है कि इस गैंग के पीछे कोई बड़ा मास्टरमाइंड है?”
रवि: “जी मैडम।”
शाक्ति: “तो क्या उसके लोग उन सभी लड़कियों को यहीं शांति विहार में रखते हैं?”
रवि: “नहीं मैडम, यहाँ बस मीटिंग्स होती हैं। लड़कियों को वो शहर से बाहर रखते हैं। वो नहीं चाहते कि उनके काम में कोई भी दिक्कत आए।”
उसने शक्ति को अपने फोन में एक वीडियो रिकॉर्डिंग दिखाई, जिसे कुछ मिनट तक शक्ति ध्यान से देखती रही।“लेकिन वीडियो के आखिरी फ्रेम ने Shakti को और भी गंभीर कर दिया…”
शक्ति - इसे मेरे पास भेजो और मुझे उस जगह की exact location बताओ जहाँ ये लोग लड़कियों को रखते हैं।”

रवि: “बॉस… लोकेशन नोएडा के आउटर इलाके में, सेक्टर 58 के पीछे वाला पुराना इंडस्ट्रियल बेल्ट है। वहीं पर इनका मेन सेटअप हो सकता है।”

शक्ति ने कुछ नहीं कहा। बस उसकी आँखों की गंभीरता और गहरी हो गई। शक्ति ने रवि की तरफ देखा, और उसकी नजरें कुछ देर वहीं ठहर गईं।

“ठीक है… मैं देखती हूँ।”

उसके इतना कहते ही रवि समझ गया कि अब वहाँ उसका कोई काम नहीं है। वह चुपचाप गाड़ी से उतर गया। उसके उतरते ही शक्ति ने तुरंत अपनी SUV स्टार्ट कर दी| उसने धीरे से गाड़ी पीछे ली।

दिल्ली-नोएडा बॉर्डर की तरफ निकल पड़ी।
रास्ते में अचानक मौसम ने करवट ली और तेज़ बारिश शुरू हो गई।
करीब आधे घंटे बाद, एक सुनसान सड़क पर—जहाँ गाड़ियों की आवाजाही लगभग ना के बराबर थी—शक्ति की नज़र एक luxury car पर पड़ी।
वही कार… जिसे उसने traffic area में देखा था।

वहाँ दो लड़के खड़े थे। उनमें से एक वही था जिसे वह पहले देख चुकी थी, जबकि दूसरे का चेहरा छाते की ओट में छिपा हुआ था।

उसने हल्के आइवरी रंग का सूट पहन रखा था, जिसके साथ सलीके से प्रेस की हुई सफेद शर्ट थी। पैरों में टैन लेदर के जूते और कलाई पर प्लैटिनम घड़ी उसकी शख्सियत को और निखार रहे थे। उसकी शांत और संयमित मुद्रा में वही आत्मविश्वास झलक रहा था, जो ताकत और रुतबे की दुनिया में रहने वालों में होता है।

वह young person अनजाने में ही शक्ति का ध्यान अपनी ओर खींच रहा था, लेकिन फिर भी शक्ति ने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। उसने अपनी गाड़ी रोकी और शीशा नीचे करते हुए पूछा—
“क्या हुआ? यहाँ क्यों खड़े हो?”

उसे देखते ही वह लड़का, जिसे शक्ति पहले भी देख चुकी थी, उसे पहचान गया।
लड़का: “अरे मैडम, आप यहाँ?”
शक्ति: “हाँ… पर तुम लोग इस भारी बारिश में भीग क्यों रहे हो?”

लड़का: “असल में मैडम, गाड़ी अचानक बंद हो गई। शायद इंजन में कोई problem है… और इस बारिश में मदद भी नहीं मिल रही।”

शक्ति ने एक पल सोचा, Phir Shakti practical tone mein: “अगर यहीं खड़े रहे तो तबीयत खराब हो जाएगी। बैठो, मैं तुम्हें वहाँ छोड़ देती हूँ जहाँ तुम्हें जाना है। कल सुबह किसी को भेजकर अपनी कार ठीक करवा लेना… अभी इस वक्त तुम्हें कोई mechanic भी नहीं मिलेगा।”

वह लड़का कुछ पल सोच में पड़ गया। फिर वह दूसरे लड़के के पास गया और उसके कान में धीरे-से कुछ कहने लगा। कुछ सेकंड बाद वह वापस लौटा और बोला—
“मैडम, हमें Royal Crest Palace जाना है।”

शक्ति: “बैठो। मैं उसी तरफ जा रही हूँ।”

यह सुनते ही वह लड़का एक बार फिर दूसरे लड़के के पास गया और उससे कुछ कहकर वापस लौटा। इस बार दूसरा लड़का भी उसके साथ चला आ रहा था।
उनके पास आते ही पहले लड़के ने पीछे वाली सीट का दरवाज़ा खोला और दूसरे लड़के को बैठने का इशारा किया। उसके बैठते ही उसने दरवाज़ा बंद किया, अपना छाता समेटा और खुद आगे वाली सीट पर आकर बैठ गया।

उसके बैठते ही शक्ति ने गाड़ी स्टार्ट कर दी। गाड़ी के अंदर हल्की रोशनी अब भी फैली हुई थी। शक्ति का चेहरा शांत था, लेकिन उसकी आँखों में बहुत कुछ छिपा हुआ था। कभी उसकी नज़र सामने सड़क पर टिकती, तो कभी रियर-व्यू मिरर में पीछे बैठे उस लड़के की तरफ चली जाती, जहाँ अंधेरे और हल्की रोशनी के बीच बस उसकी हल्की नीली आँखें ही चमक रही थीं।

तभी शक्ति के बगल वाली सीट पर बैठे लड़के ने खामोशी तोड़ते हुए कहा—
“Miss… मैं कुशल राठौड़ हूँ।”
शक्ति ने एक पल के लिए उसकी तरफ देखा —
“मैं शक्ति हूँ।”

शक्ति के ऐसा कहते ही उस लड़के ने एक पल के लिए उसे ध्यान से देखा, जैसे उसके बारे में कुछ समझने की कोशिश कर रहा हो। फिर अपनी नज़र सामने करते हुए वह हल्की आवाज़ में बोला—

“Thank you so much, मैडम… अगर आज आपने हमारी मदद नहीं की होती, तो पता नहीं क्या होता।”

फिर हल्की नाराज़गी के साथ बोला—

“वो आदमी मुझे वैसे भी घूस लेने वाला लग रहा था। चालान के नाम पर पता नहीं क्या बिल बना देता।”

शक्ति ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—
“इतनी luxurious car लेने के बाद भी तुम्हें पैसों की फिक्र है?”

कुशल ने सिर हिलाया।
“नहीं मैडम, बात पैसों की नहीं है… बात सही और गलत की है। आपने खुद देखा ना, वो कितनी बदतमीज़ी कर रहा था। और फिर आपके साथ भी उसी लहजे में बात करने लगा। एक बार भी नहीं सोचा कि लड़कियों से ऐसे बात नहीं करनी चाहिए।”
कुशल के चेहरे पर उभरता हल्का गुस्सा देखकर शक्ति के होंठों पर आई मुस्कान और गहरी हो गई।

शक्ति: “छोड़ो ये सब… अब तो सब ठीक है ना?”

शक्ति के ऐसा कहते ही कुशल ने अपने चेहरे पर उभरते गुस्से को दबाया और खुद को संभालते हुए कहा—

“हाँ मैडम, अब सब ठीक है… और एक बात, ये car मेरी नहीं है। ये मेरे boss की है, जो अभी पीछे बैठे हैं। मैं इनके लिए काम करता हूँ।”

कुशल के उसे अपना बॉस बताने के बाद शक्ति की नज़र फिर रियर-व्यू मिरर पर गई।

उसकी निगाह फिर उसी शख्स पर जा ठहरी—इस वक्त उसकी आँखें बंद थीं, जैसे वह पूरी बातचीत से बेपरवाह खामोशी में डूबा बैठा हो।

अभी उसने अपनी नज़र वापस सामने सड़क पर टिकाई ही थी कि तभी कुशल की आवाज़ फिर सुनाई दी—
“वैसे मैडम, आप इस वक्त जा कहाँ रही हैं?”
कुशल के इस सवाल पर शक्ति ने उसे ज्यादा कुछ बताए बिना शांत स्वर में कहा—
“बस… कुछ काम है। शहर से बाहर जा रही हूँ।”

कुशल ने भी इससे आगे कुछ पूछना जरूरी नहीं समझा।

तभी शक्ति के फोन की घंटी बजी। उसने एक नज़र स्क्रीन पर डाली—उस पर अलीशा का नाम चमक रहा था।

शक्ति ने कॉल receive की और उसे speaker पर डाल दिया।
“हेलो।”
दूसरी तरफ से तुरंत अलीशा की आवाज़ आई—
“कहाँ थीं मैडम आप? हम कब से आपका wait कर रहे हैं। हम यहाँ पहुँच चुके हैं… आप कितनी देर में आ रही हो?”

शक्ति ने सड़क पर नज़र टिकाए हुए जवाब दिया—
“अरे, मैं आ रही हूँ। बस एक urgent काम की वजह से रुकना पड़ा था… अब निकल चुकी हूँ, थोड़ी ही देर में पहुँच जाऊँगी।”
शक्ति की बात सुनकर अलीशा बोली—
“ओके मैडम, बस जल्दी आइए। मैं यहाँ सबके साथ खड़ी हूँ।”
कॉल कटते ही गाड़ी के भीतर कुछ पल के लिए फिर वही खामोशी लौट आई।
अलीशा शक्ति की personal assistant थी, जो उसके schedules से लेकर field updates तक हर चीज़ संभालती थी।

शक्ति ने उन दोनों को Royal Crest Palace तक छोड़ दिया। बारिश की बूंदों में होटल की चमकती रोशनियाँ धुंधली-सी लग रही थीं।

दोनों नीचे उतर गए। पूरे रास्ते उसकी नज़र बार-बार कुशल के साथ आए उस लड़के पर चली जाती। उसे कुछ अजीब तो नहीं लग रहा था, फिर भी उसकी सिर्फ आँखें देखकर एक अनजानी-सी बेचैनी महसूस हो रही थी।

लेकिन देर होने की वजह से उसने उन एहसासों को नज़रअंदाज़ किया और गाड़ी स्टार्ट कर वहाँ से निकलने ही वाली थी कि तभी कुशल वापस आया।

वह खिड़की के पास आकर शांत स्वर में बोला—
“मैडम, कितने पैसे हुए आपके?”

शक्ति ने भौंहें सिकोड़ लीं।
“कैसे पैसे?”

कुशल ने सहज भाव से कहा—
“मैडम, मतलब… आपने हमें lift दी है। किराया तो बनता है।”

कुशल की यह बात सुनकर शक्ति को थोड़ा बुरा लगा। उसने तो सिर्फ मदद करने के इरादे से उन्हें lift दी थी, पैसों के लिए नहीं। लेकिन कुशल की बातों से उसे लगा जैसे उसने उसके इरादों को गलत समझ लिया हो।

अब शक्ति की आवाज़ में हल्की सख्ती आ गई—
“मिस्टर राठौड़, मैं पैसों के लिए lift नहीं देती। और जहाँ तक पैसों की बात है… शक्ति के पास इतने हैं कि उसे किसी से माँगने की ज़रूरत नहीं पड़े।”

कुशल कुछ पल चुप खड़ा रहा।

उसी वक्त शक्ति की नज़र अनजाने में होटल के दरवाज़े की तरफ उठी—

और वहाँ… वही नीली आँखें इस बार खुली हुई थीं।
सीधी… उसी पर टिकी हुई।

एक पल के लिए समय जैसे थम-सा गया।

ना जाने क्यों, उस अनजान चेहरे में कुछ ऐसा था जो शक्ति के मन में हलचल छोड़ गया।
अगले ही पल वह शख्स मुड़ा और होटल के भीतर चला गया… पीछे छोड़ गया सिर्फ एक अनकहा एहसास और कई अधूरे सवाल।

लेकिन शक्ति नहीं जानती थी—ये मुलाकात यहीं खत्म नहीं हुई थी।
आगे क्या होगा, जानने के लिए पढ़ते रहिए — शक्ति के शिव....