शक्ति कुछ कहने ही वाली थी कि तभी उसकी jeans की pocket में रखा phone बज उठा।
उसने तुरंत phone निकाला।
Screen पर नाम flash हो रहा था—Dr. Chirag Mehta.
शक्ति ने बिना देर किए call receive कर लिया।
दूसरी तरफ से चिराग की gentle voice सुनाई दी—
“Miss Shakti, कहाँ हैं आप?”
शक्ति ने एक बार सामने खड़े कुशल और उसके boss की तरफ देखा, फिर जवाब दिया—
“मैं बाहर हूँ… क्या हुआ? इस वक्त call किया, कोई बात है क्या?”
चिराग की आवाज़ इस बार थोड़ी serious थी—
“हाँ। आज हमारे hospital के trustee… और medical field के एक बहुत बड़े doctor यहाँ आ रहे हैं। मैं चाहता था तुम्हारी उनसे मुलाकात करवा दूँ। और तुम्हारी current reports के बारे में भी बात करनी थी।”
शक्ति ने हल्का माथा सिकोड़ते हुए कहा—
“लेकिन मैं तो घर जा रही थी…”
चिराग ने धीमे लेकिन समझाते हुए कहा—
“Shakti… मैं तुम्हारी health के लिए बोल रहा हूँ। मुझे लगता है तुम्हें एक बार उनसे मिलना चाहिए। वो तुम्हारी मदद कर सकते हैं।”
कुछ पल की खामोशी रही।
फिर शक्ति ने गहरी साँस लेकर कहा—
“ठीक है… आधे घंटे में पहुँच रही हूँ।”
यह कहकर उसने call cut किया और phone वापस pocket में रख लिया।
फिर उसने कुशल की तरफ देखा।
“Sorry, Mr. Rathod… मुझे जाना होगा।”
इतना कहकर वह मुड़ी।
अब भी उसके हाथों में वो छोटा-सा पिल्ला था।
वह सड़क पार करके उसकी माँ के पास गई और उसे धीरे से नीचे छोड़ दिया।
जैसे ही पिल्ला अपनी माँ के पास पहुँचा, मादा कुतिया तुरंत उसे चाटने लगी… जैसे उसे यकीन ही न हो कि उसका बच्चा सुरक्षित वापस आ गया है।
यह देखकर शक्ति के होंठों पर हल्की मुस्कान आ गई।
लेकिन उसी पल उसकी आँखों में हल्की नमी भी उतर आई।
उसे यह दृश्य कुछ पुराना… कुछ बहुत गहरा याद दिला रहा था।
और तभी उसके दिमाग में कुछ धुंधले flashes उभरे—
टूटे हुए… अधूरे… दर्द से भरे।
शक्ति एक पल को वहीं ठहर गई।
लेकिन वह उन यादों में खोना नहीं चाहती थी।
उसने तुरंत अपनी नज़रें फेर लीं, वापस अपनी car तक गई… और बिना पीछे देखे उसे start करके निकल गई।
करीब आधे घंटे बाद शक्ति Silver Oak Medical Institute पहुँची।
शहर के सबसे जाने-माने hospitals में से एक—जहाँ बड़े से बड़े cases और नामी doctors का आना-जाना आम बात थी।
शक्ति ने अपनी car पार्क की, door lock किया और सीधे hospital के अंदर चली गई।
अंदर हमेशा की तरह हलचल थी—staff इधर-उधर जा रहा था, nurses files संभाल रही थीं और मरीजों के परिवार waiting area में बैठे थे।
शक्ति reception desk के पास रुकी और वहाँ खड़ी receptionist से पूछा—
“Excuse me… Dr. Chirag Mehta कहाँ मिलेंगे?”
Reception पर खड़ी लड़की ने तुरंत उसे देखा और विनम्रता से जवाब दिया—
“मैडम, वो अपने cabin में हैं। उन्होंने कहा था अगर Miss Shakti आएँ तो सीधे उनके cabin में भेज दूँ।”
शक्ति ने हल्का सिर हिलाया।
“ठीक है।”
इतना कहकर वह वहाँ से मुड़ गई और Dr. Chirag के cabin की तरफ बढ़ने लगी।
कुछ ही मिनटों बाद वह उनके cabin के बाहर खड़ी थी।
उस glass cabin के बाहर सुनहरे अक्षरों में साफ़ लिखा था—
Dr. Chirag Mehta
शक्ति कुछ पल वहाँ खड़ी रही, फिर धीरे से दरवाज़े पर knock किया।
अंदर से तुरंत आवाज़ आई—
“Come in.”
शक्ति बिना कुछ बोले अंदर चली गई।
अंदर का cabin हमेशा की तरह साफ़, व्यवस्थित और शांत था।
Dr. Chirag अपनी desk पर बैठे थे, और उनकी नज़र सामने रखी files पर टिकी हुई!
वह सामने रखी files में इतने डूबे हुए थे कि उन्हें उसके अंदर आने का एहसास तक नहीं हुआ।
कुछ पल की खामोशी के बाद शक्ति ने आवाज़ दी—
“Dr. Chirag…”
आवाज़ सुनते ही चिराग ने तुरंत सिर उठाया।
उसे सामने देखकर वो हल्का-सा चौंके।
“अरे Shakti… आप आ गईं। Sorry, मैं files में इतना busy था कि ध्यान ही नहीं गया।”
शक्ति ने शांत स्वर में कहा—
“It’s okay.”
---
चिराग ने हल्का मुस्कुराते हुए कहा—
“अरे Shakti, बैठो ना।”
यह कहते हुए उसने अपनी desk के सामने रखी दो कुर्सियों की तरफ इशारा किया।
शक्ति बिना कुछ बोले आगे बढ़ी और जाकर उनमें से एक कुर्सी पर बैठ गई।
उसका चेहरा अब भी शांत था… लेकिन उसकी आँखों में थकान और बेचैनी दोनों साफ़ दिख रही थीं।
चिराग कुछ देर तक बड़ी ध्यान से शक्ति के चेहरे को देखता रहा।
उसकी आँखों के नीचे की थकान, चेहरे की हल्की सख्ती… और भीतर चल रही बेचैनी—वह सब जैसे पढ़ने की कोशिश कर रहा था।
कुछ seconds तक उसे observe करने के बाद उसने शांत स्वर में पूछा—
“कैसी तबीयत है अब तुम्हारी?”
शक्ति ने बिना कोई भाव दिखाए सीधा जवाब दिया—
“ठीक है।”
चिराग कुछ पल चुप रहा। फिर उसने थोड़ा गंभीर होकर पूछा—
“क्या अब भी… कुछ चीज़ों को देखकर पुरानी बातें तुम्हारे दिमाग में flash होती हैं?”
यह सुनते ही शक्ति का चेहरा और गंभीर हो गया।
लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया।
बस अपनी नज़रें दूसरी तरफ घुमा लीं।
उसकी खामोशी ही उसका जवाब थी।
चिराग समझ गया।
उसने बिना और कुछ पूछे अपनी desk पर रखी एक report उठाई और धीरे से उसकी तरफ सरका दी।
“ये तुम्हारी reports हैं।”
धीमे स्वर में कहा—
“Shakti… तुम्हारी reports physically normal हैं। Body में कोई major problem नहीं है।”
वो कुछ पल रुका, फिर उसकी आँखों में देखते हुए बोला—
“लेकिन issue body में नहीं… mind में है।”
शक्ति की नज़र धीरे से उसकी तरफ उठी।
चिराग ने report बंद करते हुए कहा—
“तुम severe anxiety और trauma triggers से गुजर रही हो। कुछ खास situations… कुछ दृश्य… तुम्हारे past की यादें forcefully वापस ले आते हैं।”
उसकी आवाज़ और नरम हो गई—
“और जब तुम उन्हें ignore करती हो… वो और dangerous हो जाते हैं।”
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चिराग की बात सुनकर कुछ पल के लिए cabin में खामोशी छा गई।
शक्ति की नज़र reports पर टिक गई।
उसकी उंगलियाँ file के किनारे पर हल्का दबाव बना रही थीं।
कुछ seconds बाद उसने बिना ऊपर देखे धीमे लेकिन सख्त स्वर में कहा—
“तो… तुम्हारा मतलब है मैं कमजोर पड़ रही हूँ?”
चिराग ने तुरंत सिर हिलाया—
“नहीं। Weak नही.... बस wounded.”
बिलकुल, same words और same flow में:
यह शब्द सुनते ही शक्ति की आँखों में एक पल के लिए हल्की हलचल हुई।
उसने तुरंत अपनी नज़रें दूसरी तरफ फेर लीं।
“मैं अपने काम में कोई कमी नहीं आने देती, Dr. Chirag.”
उसकी आवाज़ अब फिर से ठंडी थी।
चिराग शांत स्वर में बोला—
“मुझे पता है। लेकिन हर जख्म बाहर से नहीं दिखता, Shakti.”
यह सुनकर शक्ति कुछ पल तक चुप रही।
उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था… लेकिन उसकी मुट्ठियाँ अब कस चुकी थीं।
जैसे वो खुद से ही लड़ रही हो।
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चिराग ने कुछ पल तक उसे देखा, फिर धीरे से अपनी chair से थोड़ा आगे झुकते हुए बोला—
“Shakti… तुम जितना खुद को strong दिखाती हो, उतना ही अपने अंदर सब दबाती भी हो।”
शक्ति ने हल्की सख्त नज़र से उसकी तरफ देखा।
“Point pe aao, doctor.”
चिराग ने गहरी साँस ली।
“Point ये है… अगर तुमने अपने trauma को face नहीं किया, तो ये flashbacks बढ़ते जाएँगे। अभी सिर्फ कुछ images दिखती हैं… लेकिन आगे panic attacks भी हो सकते हैं।”
शक्ति का चेहरा एकदम शांत था, लेकिन उसकी आँखों में हल्की बेचैनी उतर आई थी।
“और solution?” उसने सीधा पूछा।
चिराग ने जवाब दिया—
“इसीलिए मैंने तुम्हें बुलाया है। आज hospital के trustee आ रहे हैं… वो सिर्फ trustee नहीं, neuro-psychiatry और trauma treatment के सबसे बड़े नामों में से एक हैं।”
शक्ति की भौंह हल्की सिकुड़ी।
“तो तुम चाहते हो मैं उनसे मिलूँ?”
“हाँ।” चिराग ने बिना हिचक जवाब दिया।
कुछ पल खामोशी रही।
शक्ति ने report बंद की और कुर्सी पर पीछे टिक गई।
तभी बाहर corridor में कदमों की आहट सुनाई दी।
Cabin का दरवाज़ा खुला।
एक nurse अंदर आई और धीरे से बोली—
“Sir… trustee आ चुके हैं।”
चिराग ने शक्ति की तरफ देखा।
“Ready?”
शक्ति ने कोई जवाब नहीं दिया… बस अपनी नज़र दरवाज़े की तरफ घुमा ली।
क्योंकि उसे नहीं पता था— इस दरवाज़े के पीछे सिर्फ एक doctor था…
या उसके अतीत से जुड़ा कोई नया सच।
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हल्का सा दरवाज़ा खुला और दो लोग अंदर आए।
शक्ति की नज़र पहले उस पर पड़ी जिसे वह पहचानती थी—कुशल राठौड़।
कुशल ने हल्का सा सिर झुकाकर एक formal सा greeting दिया, लेकिन उसके चेहरे पर थोड़ी nervousness साफ़ दिख रही थी।
फिर उसकी नज़र दूसरे शख्स पर गई…
वो उसके लिए अब भी अजनबी था।
लेकिन जैसे ही उस अजनबी ने उसकी तरफ देखा—
शक्ति कुछ पल के लिए वहीं ठहर गई।
उसकी आँखें…
वो आँखें बहुत familiar थीं।
नीली आँखें।
कल वही आँखें थीं… जिन्होंने उसे उस अजीब से confusion और हल्की बेचैनी में डाल दिया था, जब उसने उसे रास्ते में lift दी थी।
शक्ति की निगाहें कुछ seconds तक उसी पर टिकी रहीं।
उस आदमी ने भी बिना कुछ कहे उसे देखा… जैसे वो जानता हो कि वो उसे पहचानने की कोशिश कर रही है।
कमरे में एक अजीब सी खामोशी फैल गई।
चिराग ने हल्का सा cough करके silence तोड़ा—
“Shakti… these are Mr. Rathod and…”
वो थोड़ा रुका।
“…Shiv Pratap Singh.”
नाम कमरे में गूंजा।
शक्ति की expression अब भी controlled थी।
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शक्ति ने बिना किसी expression के हल्का सा सिर झुकाया।
“Hello.”
उसकी आवाज़ शांत थी, जैसे उसने सामने खड़े शख्स को पहचान लिया हो… लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखानी हो।
शिव ने भी बस हल्का सा सिर हिलाकर जवाब दिया।
“Hi.”
उसकी नज़र कुछ सेकंड के लिए शक्ति पर टिकी रही, फिर वह calmly आगे बढ़ा और उसके ठीक बगल वाली कुर्सी पर जाकर बैठ गया।
कमरे में फिर से एक अजीब सी खामोशी फैल गई…
जहाँ तीन लोग थे, लेकिन tension सिर्फ दो लोगों के बीच महसूस हो रही थी।
चिराग ने files बंद करते हुए एक गहरी साँस ली।
और उसी पल उसके दिमाग में एक ही सवाल घूम रहा था—
क्या शक्ति सच में उसे पहचान चुकी है… या वो सिर्फ एक coincidence था?
और दूसरा सवाल…
Shiv Pratap Singh आखिर इस case में मदद करने आया है… या इस case का कोई छुपा हुआ हिस्सा खुद वही है?
“आगे क्या होगा जानने के लिए पढ़ते रहिए Shakti ke Shiv…”