Shakti ke Shiv - 4 sheetal द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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Shakti ke Shiv - 4


शक्ति की नज़र कुछ सेकंड के लिए उस अंधेरे corridor पर टिक गई जहाँ से सब शुरू हुआ था।
“Agar ye sirf ek part hai… to baaki network kahan hai?”
थोड़ी देर खामोशी रही।
“Aur sabse बड़ा सवाल—ye Shivay kaun hai?”
उसकी आँखों में अब तक का सबसे गहरा doubt था।

उस बंद पड़ी फैक्ट्री से बाहर निकली। बाहर अब हल्की ठंडी हवा चल रही थी और आसमान में सुबह होने के संकेत साफ़ दिखने लगे थे।
उसने चलते-चलते अपना फोन निकाला और किसी को call लगाया।
पूरी bell बजने के after, जब call कटने ही वाला था, तभी सामने से किसी ने उसे receive किया।
शक्ति की आवाज़ इस बार unusually soft थी—
“Operation successfully completed, sir… लेकिन अभी सब खत्म नहीं हुआ है।”
शक्ति के इतना कहते ही दूसरी तरफ कुछ देर तक कोई जवाब नहीं आया।
कुछ seconds की खामोशी के बाद आखिर सामने वाले की भारी आवाज़ सुनाई दी—
“ठीक है। सुबह होने वाली है… तुम 10 बजे मेरे cabin में आना। तब बात करेंगे।”
एक पल रुककर उसने आगे कहा—
“और जितने भी evidence मिले हैं… सब साथ लेकर आना।”
इतना कहकर call कट गया।
शक्ति कुछ पल वहीं खड़ी रही। उसकी आँखें अब भी उसी फैक्ट्री पर टिकी थीं—जैसे उसे यकीन हो कि इस operation की असली कहानी अभी शुरू हुई है।

शक्ति ने अपनी गाड़ी स्टार्ट की और घर की तरफ निकल पड़ी। रात अब ढल चुकी थी और आसमान में हल्की सुबह की आहट महसूस होने लगी थी।
उसका रास्ता उसी road से होकर जाता था जहाँ Royal Crest Palace पड़ता था।
वह चुपचाप drive कर रही थी। raid की थकान अब उसके चेहरे और आवाज़ दोनों में उतर चुकी थी।
तभी उसका फोन बजा।
उसने स्क्रीन पर नज़र डाली—उसकी टीम के एक officer का call था।
शक्ति ने call receive किया।
“Hello?”
सामने से जल्दबाज़ी भरी आवाज़ आई—
“Hello madam… मुझे factory से कुछ मिला है। अगर आप अभी घर नहीं पहुँची हैं तो रास्ते में मुझसे मिल लीजिए… आपको देना है।”
शक्ति ने थकी हुई आवाज़ में जवाब दिया—
“अभी नहीं… पहले घर जाना है। change करना है… और भूख भी लगी है। तुम ऐसा करो, headquarters ले आना। वहीं देख लूंगी।”
लेकिन officer ने उसकी बात बीच में ही काट दी—

“Madam, समझने की कोशिश कीजिए… ये कोई paper नहीं है। ऐसी चीज़ है जो इस case में आपके बहुत काम आ सकती है। Please madam… रास्ते में किसी café में मिल लीजिए। आप कुछ खा भी लेंगी और मैं आपको दे भी दूँगा।”
एक पल रुककर उसने धीमे लेकिन घबराए हुए स्वर में कहा—
“क्या पता… इस evidence की वजह से मेरी जान को भी खतरा हो जाए।”
उसकी बात सुनकर शक्ति कुछ सेकंड सोच में पड़ गई।
तभी उसकी नज़र सड़क किनारे पड़े एक बड़े चाय के stall पर गई।
उसने शांत स्वर में कहा—
“ठीक है… Royal Crest Palace के सामने जो बड़ा चाय का stall है, वहीं आ जाओ। तब तक मैं कुछ खाने का order करती हूँ।”
सामने से तुरंत जवाब आया—
“Yes madam.”
Call कट गया।
शक्ति ने steering पर अपनी पकड़ थोड़ी कस ली…
अब उसे महसूस हो रहा था—शायद ये रात अभी खत्म नहीं हुई थी।

शक्ति ने अपनी गाड़ी सड़क के किनारे रोकी और सीधे चाय के stall की तरफ बढ़ गई।
इस बार उसने एक बार भी सामने खड़े Royal Crest Palace की तरफ नज़र नहीं डाली।
अब तक वह उन दोनों लड़कों के बारे में लगभग भूल चुकी थी। उसके दिमाग में इस वक्त सिर्फ उसका case चल रहा था।
raid, suspects, files… और वो अधूरा network—उसका मन अब भी वहीं अटका हुआ था।
वह stall के पास पहुँचते हुए बोली—
“भैया, एक cup चाय देना… और खाने में क्या है?”
चाय वाले ने तुरंत जवाब दिया—
“मैडम, है तो बहुत कुछ… आपको क्या लेना है?”
शक्ति ने एक नज़र सामने रखी चीज़ों पर दौड़ाई। तभी उसे ताज़ा बन रहे sandwich की खुशबू आई।
“ऐसा करो… मेरे लिए एक full sandwich लगा दो।”
चाय वाला हल्का मुस्कुराया—
“जी मैडम, बस पाँच मिनट wait करिए।”
इतना सुनकर शक्ति बाहर लगी tables की तरफ बढ़ी और एक कुर्सी खींचकर बैठ गई।
वो stall काफी बड़ा था। बाहर कई chairs और tables करीने से रखी हुई थीं। रात की ठंडी हवा और हल्की सुबह की आहट मिलकर उस जगह को अजीब-सा शांत बना रही थी।
शक्ति ने एक बार आसपास नज़र दौड़ाई… फिर अपना phone निकालकर कुछ check करने लगी।
लेकिन उसका दिमाग अब भी उसी case में उलझा हुआ था।

पाँच मिनट बाद एक कम उम्र का लड़का चाय और sandwich लेकर उसकी table पर आया।
शक्ति ने phone से नज़र हटाई और सामने रखा cup उठाया।
उसने हल्की थकान भरी साँस छोड़ी।
“कमाल है… अभी तक नहीं आया।”
उसने तुरंत उस officer को call लगाया।
सिर्फ एक ring में ही call उठ गया।
सामने से आवाज़ आई—
“आ गया madam… आपके सामने ही हूँ।”
शक्ति ने तुरंत सामने देखा।
वहीं road के दूसरी तरफ एक car आकर side में रुक रही थी।
उसमें से वही officer उतरा… और उसके साथ अलीशा भी थी।
अलीशा को देखकर शक्ति की भौंहें हल्की सिकुड़ गईं।
एक पल के लिए वह समझ नहीं पाई कि उसके साथ आने की क्या वजह थी।
दोनों उसके पास आकर रुके।
शक्ति ने बिना कुछ कहे सामने वाली कुर्सियों की तरफ इशारा किया।
“बैठो।”
फिर sandwich का एक bite लेते हुए उसने सीधा पूछा—
“क्या लाए हो?”

अलीशा ने अपने bag से एक evidence pouch निकालते हुए उसे शक्ति की तरफ बढ़ाया।
“मैडम, ये देखिए… वहाँ के एक कमरे से हमें ये phone मिला है… और ये एक छोटी-सी diary।”
शक्ति ने pouch अपने हाथ में लिया और ध्यान से उसे खोलकर check करने लगी।
Officer ने आगे कहा—
“मैडम, इस phone में कोई contacts save नहीं हैं… लेकिन इस diary में सिर्फ एक ही number बार-बार लिखा हुआ है। और उसी number से कई बार call आया है।”
वो थोड़ा रुका, फिर बोला—
“और madam… calls सिर्फ आए हैं, गए एक भी नहीं।”
यह सुनकर शक्ति की नज़र और गहरी हो गई।
वह phone और diary दोनों को ध्यान से check करने लगी।
कुछ सेकंड की खामोशी के बाद उसने धीरे से कहा—
“Interesting…”
फिर उसने दोनों की तरफ देखते हुए सख्त आवाज़ में कहा—
“इस phone के बारे में अभी किसी से कोई बात नहीं होगी।”
उसने diary बंद की और आगे बोली—
“Diary में जितने bhi numbers हैं, सब note करो। पता लगाओ calls कहाँ से आए थे… और number किसके नाम पर registered है।”
एक पल रुककर उसकी आवाज़ और ठंडी हो गई—
“और police वालों को inform कर दो… उन लोगों से जो भी उगलवाना है, उगलवाओ। लेकिन उससे पहले मुझे update चाहिए।”
अलीशा और officer दोनों ने एक साथ सिर हिलाया।
“जी मैडम।”
यह कहते हुए शक्ति ने चाय का एक घूंट लिया और फिर शांत होकर अपना sandwich खाने लगी।
उसके सामने बैठी अलीशा और officer ने भी अपने लिए चाय मंगवाई और धीरे-धीरे पीने लगे।
बाहर माहौल शांत था… लेकिन शक्ति के भीतर एक अलग ही हलचल चल रही थी।
उसका दिमाग लगातार उसी phone, diary और बार-बार आए उस एक नंबर पर अटका हुआ था।
कौन था वो?
और calls सिर्फ आए ही क्यों… गए क्यों नहीं?
इन सवालों ने उसके मन में एक नई बेचैनी पैदा कर दी थी।
कुछ देर तक वहाँ सिर्फ चाय की भाप, हल्की सुबह की हवा और खामोशी थी।
फिर धीरे-धीरे सब उठने लगे।
अलीशा और officer अपने-अपने काम के लिए निकल गए।
शक्ति ने table पर रखा phone और diary उठाई, एक बार उन्हें देखा… और फिर बिना कुछ कहे अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गई।
अब उसके पास सिर्फ evidence नहीं था…
उसके हाथ में शायद उस पूरे case की अगली कड़ी थी।

शक्ति ने वो evidence अपनी गाड़ी में रखा और जैसे ही दरवाज़ा खोलकर बैठने लगी, तभी उसे पास ही कहीं से एक कुत्ते के ज़ोर-ज़ोर से भौंकने की आवाज़ सुनाई दी।

कुत्ते के ज़ोर-ज़ोर से भौंकने की आवाज़ सुनकर जैसे ही शक्ति का ध्यान उधर गया, उसने देखा—एक मादा कुतिया अपने कई छोटे-छोटे बच्चों के साथ सड़क किनारे खड़ी थी।
यह देखकर एक पल के लिए शक्ति के चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आ गई।
लेकिन अगले ही पल उसकी नज़र फिर उसी दिशा में गई—
और वह ठिठक गई।
उस मादा कुतिया का एक बच्चा सड़क के ठीक बीचों-बीच था… और वह लगातार उसी तरफ देखकर बुरी तरह भौंक रही थी।
शक्ति ने पहले उस मादा कुतिया की तरफ देखा, फिर सड़क की तरफ—
तेज़ रफ्तार से गाड़ियाँ आ-जा रही थीं।
उसके मन में एक झटका-सा लगा।
उसे साफ़ महसूस हो रहा था—वह कुतिया अपने बच्चे के लिए डरी हुई थी।

बिना एक पल गंवाए शक्ति ने ज़ोर से अपनी गाड़ी का दरवाज़ा बंद किया और दौड़ पड़ी।
वह हाथ उठाकर गाड़ियों को रुकने का इशारा करते हुए आगे बढ़ रही थी।
कुछ गाड़ियाँ उसकी तरफ देखकर रुक गईं… लेकिन कुछ तेज़ रफ्तार में निकलती चली गईं।
आख़िरकार शक्ति उस छोटे से पिल्ले तक पहुँच गई।
उसने झुककर उसे अपनी गोद में उठा लिया।
लेकिन जैसे ही वह खड़ी हुई—
उसकी नज़र सामने पड़ी।
एक तेज़ रफ्तार truck सीधा उसकी तरफ बढ़ रहा था।
एक पल के लिए शक्ति वहीं जम गई।
उसका दिमाग जैसे सुन्न पड़ गया था।
ना हटने का समय… ना सोचने का।

और तभी—
किसी ने अचानक उसका हाथ कसकर पकड़ लिया और ज़ोर से अपनी तरफ खींच लिया।
डर के मारे शक्ति की आँखें अपने आप बंद हो गईं।
उसकी नाक जाकर किसी की सख्त छाती से टकराई।
वह तना हुआ सीना इस बात का सबूत था कि सामने कोई आदमी था।
शक्ति इतनी घबरा गई थी कि ना उसने अपनी आँखें खोलीं… ना ही उस शख्स की तरफ देखने की हिम्मत जुटाई।

कुछ seconds बाद शक्ति को एहसास हुआ कि किसी मज़बूत हाथों ने उसकी बाँहों को कसकर थाम रखा था।
उसकी साँसें अब भी तेज़ चल रही थीं।
तभी एक आवाज़ गूँजी—
“Boss! Boss, आप यहाँ क्या कर रहे हैं? मैंने आपको पूरे hotel में ढूँढ लिया।”
उस आवाज़ ने शक्ति का ध्यान तोड़ा।
उसने धीरे से अपनी नज़र सामने उठाई।
उसके चेहरे पर अब भी घबराहट साफ़ दिख रही थी।
जैसे ही वह उस मज़बूत पकड़ से अलग हुई, सामने खड़ा लड़का तुरंत उसकी तरफ पीठ करके खड़ा हो गया।
इतनी जल्दी सब हुआ कि शक्ति को उसका चेहरा तक देखने का मौका नहीं मिला… और सच कहें तो उसने कोशिश भी नहीं की।
भी उसकी बाँहों में वह छोटा-सा पिल्ला सुरक्षित था, और उसने उसे इस तरह पकड़ा हुआ था जैसे उसे छोड़ना ही नहीं चाहती हो।
जब शक्ति ने सामने खड़े दूसरे लड़के को देखा—वह कुशल था, जो hotel की तरफ से बाहर आता दिखा।
शक्ति को देखते ही कुशल के चेहरे पर हैरानी उभर आई।
“अरे शक्ति जी… आप यहाँ? क्या surprise है… आप यहाँ कैसे?”
लेकिन शक्ति अभी भी संभल रही थी।
शक्ति से उस वक्त कुछ कहा ही नहीं गया।
उसकी साँसें अब भी थोड़ी अस्थिर थीं।

कुशल हल्की मुस्कान के साथ बोला—
“मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा कि आप फिर से यहाँ मिल जाएँगी। मैंने तो सोचा था शायद अब हमारी मुलाकात कभी नहीं होगी।”
शक्ति उसकी बात समझ नहीं पाई।
लेकिन तभी कुशल की नज़र अपने boss के चेहरे पर पड़ी।
उसके चेहरे की सख्ती देखकर कुशल एकदम चुप हो गया।
उसे तुरंत समझ आ गया—
शक्ति से उसका इतना casually बात करना शायद उसके boss को पसंद नहीं आया था।

कुछ सवाल अब भी अनसुलझे रह गए…
क्या factory से मिला वो phone और diary इस पूरे case की असली जड़ तक पहुँचा पाएँगे?
या यह सिर्फ उस बड़े जाल का एक छोटा हिस्सा है?
और सबसे बड़ा सवाल—
आख़िर कौन था वो अनजान शख्स… जो सही वक्त पर वहाँ पहुँचा और शक्ति की जान बचा गया?
क्या उसकी मौजूदगी सिर्फ एक इत्तेफ़ाक थी…
या वह पहले से ही सब कुछ जानता था?
इन सवालों के जवाब जानने के लिए पढ़ते रहिए — शक्ति के शिव....