बोध ------कहानी सगरहे की जबरदस्त कहानी मेरी पिरये सबसे जयादा.....
( बोध ) वक़्त मे याद रखो महान नहीं बनना है... इंसान बनना है। जो किसी के काम आ सको... आलोचक नहीं, तुम कुछ नहीं जानते। न उसकी प्रकिति को जान सकते हो। याद रखो बस याद रखो। तुम इतना करो जो तुम्हारे फ़र्ज़ है वो तुम आराम से बच्चों के लिये कर जाओ। कुछ खास नहीं है, चलो तो सही।आपने फ़र्ज़ शिके पर टांग दो गे... वाह बहुत खूब। भाग जाओगे कितनी दूर, तुम दिशाहीनता मै रहना चाहुगे... 👎 मंजिल बरकरार बनी रहे उस पर पहुंचने का दम भी तो परमात्मा के नाम से मिलेगा। वैसे तुम कया हो। जानो.. प्रकिति की दुर्दतिष्ठा को.... जानो परमात्मा की हर बात.... पर परमात्मा की चुप मे जो है, वो ही असर है समझ लो।
उसे जयादा बोलने वाले हर राज खोल देने वाले अच्छे तो कम ही लगते होंगे... " मै तेरे जोन अक्ल की बात करना चाहता हुँ। " जिसे कोई बात पचती नहीं..."पास्टर से मिलने की 👎... कथा सुनते हो उसकी " ---"चलो छोड़ो भी अक्ल। " ---"जोन ने आज फिर पी तो नहीं... इलाज करा के भी पियेगा, बहुत खूब " चलो मान लो। "बता रहे थे तेरे अक्ल मरे दादा चप्पल मागने आये, कया तुमने पूछा " टाम बीच मे कूद पड़ा, हमरे नहीं आते.. हम मसीह है समझे। "
" ठीक है मैंने तो वैसे ही पूछा " टाम ने बड़ा सा मुँह बना लिया। मै सोचने लगा, मसीह कौन है?? एक धर्म है ? इस को बनाने वाला तो परम पिता ही है... फिर इतनी तोड़ मरोड़ कयो की गयी, हमसे,हमारे धर्म से इतनी नफ़रत कयो.... धर्म नफ़रत सिखाता है... वो तो एक है सब ये पढ़ाता है। कयो ऐसा होता है अक्सर कि समय हमें कुछ कहना चाहता है। 👎सुनो भी सब की ----" एक उसको समझने के लिये इतने दिमाग़... वो ही आपनी कायनात को समझने के लिये देता है। समझो भी। धर्म कितने ही है... चोन आप नहीं, वो करता है, क्योंकि करता वो है। " आप कुछ भी नहीं है.... आप को बोध वो ही देता है... ये किसी से मिल कर नहीं आता। " 👎मिलते हुए पलो का लुत्फ तुम लेन के लिये ही इस धरती पर आये हो --- सत्य बोल रहे हो, नहीं मित्र हम तो उसे खोजने के लिये आये है.... तुम लुत्फ मे आपना ज़ी प्रचाओ... हम उसकी आराधना मे ज़ी प्रचाते है... कोई तुम्हे कहे तुम जूती के बिना ही सारा जीवन काटोगे... तो तुम उसकी रजा मान कर काट लेना। हिन्दू पर ही कयो संकट धर्म परिवर्तन का मंडराता है.... क्यूंकि ये इतना डरा हुआ है.. पूछो मत। पंडितो ने डरा रखा है। सीधे हो जाओ, तो कया फिर भी यही ताल्लुकात बनेंगे। संकट खुद इन्होने ही आपने धर्म पर बना दिए है।,------" कयो डरते हो हिंदू हो... "लड़ो खूब लड़ो.... परमपिता को पाना आसान है कोई टेक्स थोड़ी है, पर्ची थोड़ी लगती है। " "लोग धर्म छोड़ रहे है... " हिंदू किधर से किधर जा रहा है... डर कर जा रहा है। कयो ? किसी धर्म को मै गलत नहीं कहता, न ही कह सकता हुँ, मै तो उधारे सास उनसे ले रहा हुँ... समझ लो, समझ लो। बहुत कुछ है जो वो खुद परिवर्तन करता है। 👍
नीरज शर्मा
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