कालू की पहाड़ी - 8 RAAHULL SHARMA द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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कालू की पहाड़ी - 8

कार्तिक ने बहुत ही धीमे लेकिन ठोस स्वर में कहा:
"रूही, अब और इंतज़ार करना मौत को दावत देना है।

मुझे इसी वक्त कालू के उस पुराने गाँव जाना होगा जो अब जहां हम एक रात रुख चुका है। मुझे उसकी कमजोरी, उसके अतीत के पन्नों और उस अधूरी कहानी को ढूँढना ही होगा।


जब तक हमें यह पता नहीं चलेगा कि मीना और उस धोखेबाज आशिक ने उसके साथ असल में क्या किया था, और कालू का दिल किस बात के लिए पछता रहा है,



हम उसे शांत नहीं कर पाएंगे। उसे मुक्ति दिलाना ही हमारी जान बचाने का एकमात्र रास्ता है।"



रूही की आँखों में डर साफ दिख रहा था, उसने घबराते हुए कहा, "कार्तिक, तुम अकेले उस वीराने में कैसे जाओगे? वहाँ कालू की शक्तियाँ और भी ज़्यादा प्रबल होंगी!"रास्ते में  कुछ हो गया तो में तुम्हें अकेला नहीं जाने दूंगी।



कार्तिक ने जवाब दिया, "मुझे जाना ही होगा रूही। और जब तक मैं वापस न आ जाऊँ, इन सबकी जिम्मेदारी तुम्हारी है। 




मैं अपने इन आठों दोस्तों को तुम्हारे हवाले छोड़ कर जा रहा हूँ। यह सुरक्षा कवच (घेरा) कभी टूटना नहीं चाहिए। रूही, तुम्हें इनका ढाल बनना होगा।"



फिर कार्तिक अपने सभी दोस्तों की तरफ मुड़ा, जो अभी-अभी मौत के मुँह से बाहर आए थे। उसने ऊँची आवाज़ में उन्हें चेतावनी दी:




"दोस्तों, मेरी बात कान खोलकर सुन लो! कालू अपनी हार से तिलमिलाया हुआ है। वह अपनी जीत के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। 



वह फिर से माया रचेगा, तुम्हें खाने का लालच देगा, तुम्हारी प्यास का फायदा उठाएगा या शायद अपनों की आवाज़ में तुम्हें पुकारेगा।



लेकिन याद रखना—कुछ भी हो जाए, इस घेरे से बाहर मत निकलना। किसी भी छलावे में मत आना और कुछ भी मत खाना! कालू का असली हथियार उसका डर नहीं, बल्कि तुम्हारा लालच और भ्रम है।"



डेविड ने आगे बढ़कर कार्तिक का हाथ थामा, "भाई, मैं अपनी आखिरी साँस तक रूही का साथ दूँगा और इन सबको इस घेरे के अंदर रखूँगा। तुम बस अपना ख्याल रखना।"



कार्तिक ने आखिरी बार झोले से महादेव की भस्म निकाली और अपने माथे पर तिलक लगाया। उसने एक छोटा सा सिद्ध त्रिशूल अपने हाथ में लिया और सुरक्षा घेरे से बाहर कदम रख दिया।



जैसे ही वह बाहर निकला, कालू की एक ज़ोरदार हँसी पूरी पहाड़ी पर गूँज उठी, जैसे वह कार्तिक का ही इंतज़ार कर रहा हो।



रूही ने कांपते हाथों से घेरे के अंदर गंगाजल छिड़का और मंत्रों का जाप तेज़ कर दिया। कार्तिक धीरे-धीरे उस घनी धुंध में ओझल होने लगा,



जहाँ कालू का अतीत और उसकी मौत का राज़ दफन था। अब एक तरफ रूही को आठ ज़िंदगियों की रक्षा करनी थी,



और दूसरी तरफ कार्तिक को मौत के सौदागर के गढ़ में जाकर उसके विनाश का रास्ता खोजना था।



जैसे ही कार्तिक ने उस पवित्र सुरक्षा घेरे से बाहर अपना पहला कदम रखा, मानो पूरी प्रकृति उसके विरुद्ध हो गई। कालू की वह डरावनी और गूँजती हुई हँसी अचानक एक प्रलयंकारी तूफान में बदल गई।



हवा की गति इतनी तेज़ थी कि वह कानों के पास किसी ज़हरीले साँप की तरह फुफकार रही थी।



पहाड़ का मंज़र पल भर में बदल गया:


कालू का तांडव


पहाड़ी की ज़मीन किसी कागज़ की तरह कांपने लगी। बड़े-बड़े पत्थर ऊपर से नीचे गिरने लगे, जिससे ऐसा लग रहा था मानो पहाड़ खुद को नष्ट कर लेना चाहता हो। 



जहाँ देखो, वहाँ सिर्फ धूल, काली धुंध और कटीली झाड़ियाँ उड़ रही थीं। कार्तिक के लिए एक कदम भी आगे बढ़ाना नामुमकिन हो गया। 



उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे हवा में हज़ारों अदृश्य हाथ उसे वापस खाई की ओर धकेल रहे हों।



कार्तिक ने अपने हाथ में पकड़े सिद्ध त्रिशूल को ज़मीन में गाड़ने की कोशिश की ताकि वह खुद को संतुलित कर सके, लेकिन तूफान का वेग इतना प्रचंड था कि उसे अपनी आँखों को खोल पाना भी दूभर हो रहा था।



सुरक्षा घेरे में दहशत


दूसरी ओर, उस छोटे से सुरक्षा घेरे के अंदर रूही और बाकी आठों दोस्त मौत का साक्षात नाच देख रहे थे। डेविड और दीपक ने ज़मीन को कसकर पकड़ रखा था क्योंकि वे जिस जगह बैठे थे, वह हिस्सा पूरी तरह सुरक्षित था।



मलाइका और आरजू ज़ोर-ज़ोर से रोने लगीं। उन्हें लगा कि यह पहाड़ अब फट जाएगा और वे सब ज़िंदा दफन हो जाएंगे।


रूही ने चिल्लाकर कहा, "सब एक-दूसरे का हाथ पकड़ लो! कोई भी घेरा मत छोड़ना! यह कालू की माया है, वह हमें डराकर इस पवित्र लकीर से बाहर निकालना चाहता है!"



घेरे के ठीक बाहर वह भयंकर तूफान था, लेकिन आश्चर्य की बात यह थी कि घेरे के अंदर की हवा बिल्कुल शांत थी, जैसे वहाँ कोई अदृश्य दीवार खड़ी हो।



कार्तिक का संघर्ष


धुंध के बीच से कालू की भारी आवाज़ फिर गूँजी:
"तुझे क्या लगा था कार्तिक? तू मेरे साम्राज्य से बाहर निकल पाएगा? तूने मेरी सीमा लांघी है, अब यह पहाड़ ही तेरी कब्र बनेगा!"



कार्तिक ने अपने मुँह पर कपड़ा बाँधा और अपनी पूरी इच्छाशक्ति बटोरी। उसने ज़ोर से 'हर हर महादेव' का नारा लगाया।



जैसे ही उसने महादेव का नाम लिया, उसके चारों ओर एक हल्की सी सुनहरी चमक उभरी। उसने महसूस किया कि त्रिशूल अब ज़मीन को पकड़ रहा था।



तूफान इतना भयंकर था कि पास के पेड़ उखड़कर हवा में तैर रहे थे। कार्तिक को समझ आ गया कि कालू उसे उस पुराने गाँव तक पहुँचने से रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहा है। 



लेकिन कार्तिक जानता था कि अगर वह आज रुक गया, तो सुबह का सूरज कोई भी नहीं देख पाएगा।



वह घुटनों के बल रेंगते हुए, पत्थर के टुकड़ों की मार सहते हुए, उस दिशा की ओर बढ़ने लगा जहाँ कालू का अतीत उस गांव में दबा था।



हर इंच की दूरी तय करना एक जंग जीतने जैसा था। पीछे रूही की दुआएँ थीं और सामने मौत का सबसे खौफनाक मंज़र।



कालू ने अपनी पूरी आसुरी शक्ति झोंक दी थी, लेकिन कार्तिक का संकल्प किसी फौलाद की तरह अटल था।



तूफान के थपेड़े उसे पीछे धकेलने की कोशिश कर रहे थे, पत्थरों की बारिश उसे लहूलुहान कर रही थी, लेकिन कार्तिक के होठों पर सिर्फ एक ही नाम था— 'हर हर महादेव'।



वह हर कदम पर अपने सिद्ध त्रिशूल को पूरी ताकत से पहाड़ी की पथरीली ज़मीन में गाड़ता और उसी के सहारे खुद को खींचकर आगे बढ़ाता।



उसकी उंगलियां पत्थरों से घिसकर खून से सन चुकी थीं, लेकिन उसकी नज़रें सामने उस घने और डरावने जंगल पर टिकी थीं जहाँ कालू का रहस्य छिपा था।



जैसे-जैसे कार्तिक उस घने जंगल की सीमा के करीब पहुँचा, कालू की गर्जना और भी तेज़ हो गई। ऐसा लग रहा था मानो हवाएँ चिल्ला रही हों कि 'वापस जाओ!'



लेकिन जैसे ही कार्तिक ने अपने त्रिशूल के अंतिम प्रहार के साथ जंगल की काली सीमाओं के भीतर प्रवेश किया, एक अद्भुत और डरावनी शांति छा गई।




अचानक, वह प्रलयंकारी तूफान थम गया।


पहाड़ का हिलना बंद हो गया और हवा की वह डरावनी फुफकार एक पल में शांत हो गई। वह भयंकर मायावी बवंडर ऐसे गायब हुआ जैसे कभी था ही नहीं। 



धूल के बादल छंट गए और पीछे सुरक्षा घेरे में मौजूद रूही और उसके दोस्तों ने देखा कि कार्तिक उस घने अंधेरे जंगल की धुंध में किसी साये की तरह ओझल हो चुका था।



जंगल का सन्नाटा


जंगल के अंदर का माहौल बाहर से भी ज़्यादा डरावना था। वहाँ की हवा में नमी नहीं, बल्कि एक अजीब सी भारीपन और सड़न थी।



ऊँचे-ऊँचे पेड़ ऐसे लग रहे थे मानो वे कंकाल हों जो आकाश को पकड़ने की कोशिश कर रहे हों। सूरज की रोशनी तो दूर, वहाँ चाँद की चाँदनी भी ज़मीन को नहीं छू पा रही थी।



कार्तिक ने अपने झोले से एक छोटी टॉर्च निकाली, लेकिन उसकी रोशनी भी उस काली धुंध को मुश्किल से भेद पा रही थी। 


उसे महसूस हो रहा था कि पेड़ की टहनियों के पीछे से हज़ारों आँखें उसे देख रही हैं।