कालू की पहाड़ी - 10 RAAHULL SHARMA द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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कालू की पहाड़ी - 10

खंडहरों की ओर बढ़ते कार्तिक के कदम एक बार फिर ठिठक गए। इस बार जो आवाज़ आई, वह रूही की नहीं बल्कि उनके ग्रुप की सबसे ग्लैमरस और मॉडर्न लड़की, मलाइका की थी।




मलाइका की आवाज़ में एक अजीब सी खनक और घबराहट थी। वह पीछे से चिल्लाई, "कार्तिक! रुको! मैं भी तुम्हारे साथ चल रही हूँ। 



मैं वहाँ उस घेरे में घुट-घुट कर नहीं मर सकती। मुझे तुम्हारी फिक्र है कार्तिक, इसलिए मैं चुपके से तुम्हारे पीछे चली आई। हम दोनों साथ मिलकर उस कालू का सामना करेंगे।"




कार्तिक के पाँव एक पल के लिए थम गए। उसे समझ नहीं आया कि मलाइका जैसा डरपोक इंसान इस खौफनाक जंगल में अकेले उसके पीछे कैसे आ सकती है। 




लेकिन इससे पहले कि वह कुछ सोच पाता, मलाइका ने वह बात कह दी जिसने कार्तिक को पूरी तरह चौंका दिया।
वह आगे बढ़ी और मधुर आवाज़ में बोली, "कार्तिक, तुम्हें क्या लगा?




मैं डेविड से प्यार करती हूँ? नहीं! डेविड तो मेरे लिए सिर्फ एक नाम है, मैं उससे कभी प्यार नहीं किया। मैं तो तुमसे प्यार करती हूँ कार्तिक! इसी चाहत और तुम्हारी फिक्र ने मुझे यहाँ तक खींच लाया है।




वह कालू तुम्हें अकेला पाकर मार डालेगा, पर हम दोनों साथ होंगे तो वह हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।"



कार्तिक का दिमाग चकराने लगा। एक तरफ उसका मिशन था और दूसरी तरफ एक लड़की का अचानक किया गया प्रेम का इज़हार। 




वह अभी इसी कशमकश में था कि तभी पीछे से एक ज़ोरदार चीख गूँजी— "आह! कार्तिक!"



मलाइका का पैर शायद किसी कटीली झाड़ी या पत्थर से टकराया था और वह ज़ोर से ज़मीन पर गिर पड़ी। उसके कराहने की आवाज़ ऐसी थी मानो वह बहुत दर्द में हो।




कार्तिक का संवेदनशील मन तड़प उठा। उसका हाथ अनजाने में ही पीछे मुड़ने के लिए मुड़ा, उसकी गर्दन घूमने ही वाली थी...





पर तभी, उसके अंतर्मन में एक बिजली कौंधी।
उसे फिर से वही चेतावनी याद आई: 'शमशान और अभिशप्त जंगलों में रूहें सिर्फ डराती नहीं, बल्कि वे लालच और वासना का रूप धरकर भी आती हैं।'




कार्तिक ने ठंडे दिमाग से सोचा—मलाइका, जो अंधेरे से थर-थर कांपती थी, वह अकेले इस मायावी तूफान और डरावने जंगल को पार करके यहाँ तक कैसे पहुँच सकती है? और मलाइका कभी उसे पसंद नहीं करती थी, फिर अचानक यह प्यार का इज़हार?




उसने अपनी आँखें बंद कीं और खुद को संभाला। उसे समझ आ गया कि यह कालू का दूसरा और उससे भी खतरनाक वार है।




कालू ने पहले रूही की ममता का इस्तेमाल किया और अब वह मलाइका के रूप में वासना और सहानुभूति का जाल बुन रहा था।



कार्तिक ने अपने दाँत भींचे और चिल्लाकर कहा, "कालू! तेरी चालें बहुत पुरानी हो चुकी हैं। मलाइका कभी उस घेरे से बाहर नहीं निकल सकती और तेरा यह झूठा प्यार मुझे मेरे रास्ते से नहीं भटका सकता!"




जैसे ही कार्तिक ने यह कहा, पीछे से आ रही कराहने की आवाज़ अचानक एक डरावनी, मर्दाना हँसी में बदल गई। वह गिरना, वह चोट, वह प्यार... सब कुछ एक पल में धुएं की तरह उड़ गया।




कार्तिक ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपनी टॉर्च की रोशनी में सीधे उस गाँव की पहली ढही हुई दीवार की ओर बढ़ गया।




उसे अब यकीन हो गया था कि वह सही रास्ते पर है, क्योंकि कालू उसे रोकने के लिए अपनी सारी हदें पार कर रहा था।



हवा का रुख अचानक बदला और जंगल के सूखे पेड़ किसी हिंसक जानवर की तरह चरमराने लगे।



कालू की वह भारी और गूँजती हुई आवाज़ इस बार किसी छलावे की तरह नहीं, बल्कि साक्षात काल की गर्जना की तरह सुनाई दी।



वह आवाज़ इतनी तेज़ थी कि कार्तिक के कानों के पर्दे फटने लगे।



कालू ने अट्टहास करते हुए कहा:



"कार्तिक! तू जा तो रहा है मेरी सच्चाई जानने... लेकिन याद रख, जब तक तू वापस लौटेगा, तुझे तेरा एक भी दोस्त ज़िंदा नहीं मिलेगा! अगर तू उन्हें बचाना चाहता है, तो अभी के अभी वापस उसी पहाड़ी पर लौट जा और खुद को मेरे हवाले कर दे।"




कालू की आवाज़ में अब एक खूनी जुनून था। वह आगे बोला:



"अगर तूने मुझे खुद को सौंप दिया, तो मैं तुझे मारकर तेरे उन कमज़ोर दोस्तों को छोड़ दूँगा। लेकिन अगर तूने उस गाँव की तरफ एक भी कदम और बढ़ाया, तो न तू बचेगा और न ही वे! 




मैं सिर्फ उन्हें ही नहीं, बल्कि अपने ही गाँव के उन लोगों को भी नहीं छोड़ूँगा जो आज भी वहाँ बसते हैं। मैं मौत का ऐसा तांडव मचाऊँगा कि पूरा इलाका श्मशान बन जाएगा! मैं किसी को भी जीवित नहीं छोड़ूँगा!"




कार्तिक के कदम एक पल के लिए थम गए। उसके सामने दो रास्ते थे: या तो वह अपने दोस्तों की जान बचाने के लिए पीछे लौट जाए और खुद की बलि दे दे, या फिर कालू की धमकी को नज़रअंदाज़ कर उस राज़ तक पहुँचे जो इस शैतान का अंत कर सकता था।




कार्तिक ने अपने मन को स्थिर किया। उसे पता था कि कालू जैसा धोखेबाज कभी अपनी बात का पक्का नहीं हो सकता। अगर वह वापस गया, तो कालू उसे भी मारेगा और उसके दोस्तों को भी। 




कालू का यह डर ही बता रहा था कि वह उस सच्चाई के सामने आने से कितना घबरा रहा है जो उस खंडहर गाँव में दबी है।



कार्तिक ने चिल्लाकर उस अंधेरे को जवाब दिया:
"कालू! तू डरा रहा है क्योंकि तू हार रहा है। तूने अपने गाँव वालों को पहले ही मार दिया है,




अब तू और क्या तांडव मचाएगा? मेरे दोस्त महादेव के सुरक्षा कवच में हैं, और जब तक मैं तेरी उस कमजोरी को नहीं ढूँढ लेता जिसने तुझे इंसान से राक्षस बनाया, मैं चैन से नहीं बैठूँगा। तू जो करना चाहता है कर, पर आज रात तेरा अंत तय है!"




कालू का क्रोध अब अपनी चरम सीमा को पार कर चुका था। कार्तिक की निडरता ने उसके अहंकार पर ऐसी चोट की थी कि उसने अपनी पूरी आसुरी शक्ति झोंक दी।




अचानक, पूरे जंगल में एक ऐसी गूँज हुई जैसे कोई पहाड़ फट रहा हो। जिस पगडंडी पर कार्तिक खड़ा था, वहीं पर कालू ने एक भयंकर चक्रवात पैदा किया।




विशालकाय और सदियों पुराने पेड़ मिट्टी छोड़ते हुए हवा में किसी तिनके की तरह उड़ने लगे।



एक के बाद एक, भारी भरकम तने कार्तिक के ठीक सामने गिरते गए और देखते ही देखते लकड़ी और कटीली झाड़ियों की एक ऐसी ऊँची दीवार खड़ी हो गई, जिसने गाँव का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया।




धुंध के बीच से कालू का विकराल चेहरा उभरा और वह दहाड़ते हुए बोला:




"अब लगा ले अपनी सारी शक्ति कार्तिक! बुला ले अपने महादेव को! जिस दिन उस आशिक और मीना ने मिलकर मेरी पीठ में कुल्हाड़ी घोंपी थी, जिस दिन मैं इस पहाड़ी से नीचे गिरकर अपनी आखिरी सांसें गिन रहा था, 




उस दिन भी मैंने उन्हें पुकारा था... पर वे नहीं आए! जब वे मेरे बुलाने पर नहीं आए, तो अब तेरे बुलाने पर क्या आएंगे?"




कालू की आवाज़ में सदियों का दर्द और नफरत घुली थी। उसने चुनौती देते हुए कहा:




"अगर तेरे महादेव में इतनी ही शक्ति है, तो हटा इन पेड़ों को! पार कर इस सीमा को! आज मैं देखूँगा कि तेरी



आस्था बड़ी है या मेरा यह प्रतिशोध!"



कार्तिक उस विशाल बाधा के सामने छोटा सा लग रहा था। धूल और मिट्टी उसकी आँखों में भर रही थी, लेकिन कालू की बात सुनकर कार्तिक की आँखों में गुस्सा नहीं, बल्कि करुणा उभरी। उसने अपना सिद्ध त्रिशूल ज़मीन पर टिकाया और शांत स्वर में कहा:




"कालू, तूने महादेव को पुकारा तो था, पर उस वक्त तेरे मन में सिर्फ प्रतिशोध की आग थी, श्रद्धा नहीं। महादेव न्याय करते हैं, और आज वही न्याय तुझे इस तड़प से आज़ाद करेगा।"