कालू की पहाड़ी - 2 RAAHULL SHARMA द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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कालू की पहाड़ी - 2

साहब, ये अंधविश्वास नहीं, उन मांओं का दर्द है जिनकी कोख सूनी हो गई और उन पिताओं की बेबसी है जिन्हें अपने बच्चों की अस्थियां तक नसीब नहीं हुईं।"



शाम होते ही पहाड़ी के चारों ओर एक अजीब सी धुंध छा जाती है। लोग अपने घरों के दीये जलाते हैं और भगवान से बस एक ही दुआ मांगते हैं।


कि आज की रात कालू शांत रहे। पर उन शांत रातों में भी, जब हवा तेज़ चलती है, तो ऐसा लगता है जैसे कोई 20 किलोमीटर दूर से ही फुसफुसा रहा हो... "मीना... तुम लौट आई?"



अध्याय 2: नियति का खेल और बेंगलुरु के मुसाफिर


कहते हैं कि इंसान चाहे कितनी भी तरक्की कर ले, विज्ञान चाहे सितारों तक पहुँच जाए, लेकिन 'नियति' के लिखे को कोई नहीं मिटा सकता। किसकी साँसें कहाँ थमेंगी और किसका अंत किस मिट्टी में लिखा है, इसका हिसाब उस विधाता के पास पहले से ही तय होता है।


और जब विनाश करीब आता है, तो बुद्धि सबसे पहले भ्रमित होती है।


कालू की पहाड़ी के उस खौफनाक सन्नाटे से हज़ारों मील दूर, भारत की 'सिलिकॉन वैली' कहे जाने वाले शहर बेंगलुरु की चकाचौंध में मौत की बिसात बिछनी शुरू हो चुकी थी। 



जहाँ आसमान छूती इमारतें, रात भर जगमगाती पब-संस्कृति और दिन-रात कोडिंग में उलझे सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की अपनी ही एक दुनिया है।



यहाँ की एक जानी-मानी सॉफ्टवेयर कंपनी ने अपने बेहतरीन काम के इनाम के तौर पर अपने 10 सबसे काबिल कर्मचारियों को एक महीने की लंबी छुट्टी और 'मनाली ट्रिप' का तोहफा दिया।


इन 10 दोस्तों का ग्रुप ऑफिस में अपनी बॉन्डिंग के लिए मशहूर था:


कार्तिक और रूही: शांत और समझदार प्रेमी जोड़ा।

अभिलाषा और मोहित: ग्रुप के सबसे चुलबुले और हर बात पर मज़ाक करने वाले।

दीपक और आरजू: जिन्हें एडवेंचर और नई चीज़ें आज़माने का जुनून था।

डेविड और मलाइका: ग्रुप के 'टेक-गीक्स' जो हर चीज़ में लॉजिक ढूँढते थे।

साहिल और रोहिणी: जिन्हें फोटोग्राफी और पहाड़ों से प्यार था।

ऑफिस के कैफ़ेटेरिया में ट्रिप की प्लानिंग चल रही थी। सबके चेहरे पर खुशी थी, पर एक उलझन भी थी।


"यार, मनाली? फिर से?" अभिलाषा ने कॉफी का घूँट भरते हुए मुँह बनाया। "मनाली तो हम तीन बार जा चुके हैं। वही मॉल रोड, वही हिडिम्बा टेंपल। कुछ नया नहीं है क्या?"


साहिल ने कैमरे के लेंस साफ़ करते हुए कहा, "बात तो सही है। फोटोग्राफी के लिए भी अब वहां कुछ नया नहीं बचा। 


सब कुछ 'एक्सप्लोर' (explore) किया हुआ है।"
तभी दीपक, जिसके अंदर हमेशा कुछ तूफानी करने की आग रहती थी, टेबल पर झुकते हुए बोला, 


"देखो दोस्तों, कंपनी ने हमें एक महीना दिया है। मनाली सिर्फ हमारा बेस कैंप होगा। हम मनाली में रुकेंगे नहीं, बल्कि मनाली से और आगे निकलेंगे। 


हिमाचल के उन हिस्सों में जहाँ अभी तक कम ही टूरिस्ट पहुँचे हैं।"



"जैसे?" रोहिणी ने उत्सुकता से पूछा।


"जैसे कि शिमला से आगे के अनछुए इलाके," दीपक की आँखों में एक अजीब सी चमक थी। "मैंने सुना है कि शिमला से करीब 160-170 किलोमीटर दूर कुछ ऐसी पहाड़ियाँ हैं जहाँ की खूबसूरती जन्नत जैसी है, 



लेकिन वहाँ लोग जाने से डरते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि वो जगह शापित है, कुछ कहते हैं कि वहाँ कोई खौफनाक राज़ छिपा है। क्या तुम लोगों को नहीं लगता कि 'एडवेंचर' का असली मज़ा वहीं आएगा जहाँ थोड़ा खतरा हो?"




डेविड हँस पड़ा, "अरे दीपक, ये 21वीं सदी है भाई! 'शापित' और 'भूतिया' जैसी चीज़ें सिर्फ फिल्मों में अच्छी लगती हैं। 



असलियत में ऐसी जगहें सिर्फ इसलिए मशहूर होती हैं क्योंकि वहाँ की सड़कें खराब होती हैं या इंटरनेट नहीं होता।"



आरजू ने उसका साथ देते हुए कहा, "बिल्कुल! और हम तो सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स हैं। हमारा काम ही समस्याओं को हल करना है। 



चलो फिर, डन करते हैं। इस बार हम मनाली से आगे उस 'अननोन' दुनिया में कदम रखेंगे।"


वे 10 दोस्त, जो अपनी कारों और जीपीएस (GPS) के भरोसे दुनिया जीतने निकले थे, इस बात से बिल्कुल अनजान थे कि वे जिस रास्ते को 'एडवेंचर' समझ रहे थे, वह सीधे कालू के जबड़े में जा रहा था। 



विधाता मुस्कुरा रहा था, क्योंकि इन 10 प्रेमी जोड़ों के रूप में, कालू को उसकी 'मीना' की तलाश पूरी करने के लिए एक नहीं, बल्कि पाँच नए शिकार मिलने वाले थे।



बेंगलुरु की उस चकाचौंध वाली रात में, उनके बैग पैक हो रहे थे। किसी ने स्वेटर रखा, किसी ने कैमरा, तो किसी ने पावर बैंक। लेकिन उनमें से कोई भी अपने साथ 'बचने का रास्ता' नहीं रख पाया था।



अध्याय 3: मनाली का सन्नाटा और तर्क की जंग


रात के 12:00 बज रहे थे। जब बेंगलुरु शहर अपनी आधी नींद में था, तब केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ये पाँचों जोड़े अपने भारी-भरकम बैग्स के साथ उत्साह से भरे हुए थे। 



फ्लाइट ने उड़ान भरी और कुछ ही घंटों के सफर के बाद वे चंडीगढ़ होते हुए मनाली की बर्फीली वादियों में पहुँच गए। 


कंपनी की तरफ से बुक की गई टैक्सी उन्हें सीधे ओल्ड मनाली के एक आलीशान होटल ले गई।



खिड़की से बाहर देवदार के ऊँचे पेड़ और ब्यास नदी का शोर सुनाई दे रहा था, पर उधर इन 10 दोस्तों के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था।


होटल के लॉबी में कॉफी पीते हुए दीपक की बेचैनी साफ़ दिख रही थी। "यार, ये वही पुरानी गलियाँ, वही कैफे। मुझे यहाँ सुकून नहीं मिल रहा। 



हमें यहाँ से निकलना होगा, किसी ऐसी जगह जहाँ रूह कांप जाए।"


कार्तिक ने गहरी साँस ली और सोफे पर टिकते हुए कहा, "भाई, थोड़ा तो संयम रखो। हमने बेंगलुरु से यहाँ तक का लंबा सफर तय किया है। 


शरीर थक चुका है। और सच कहूँ तो, जो तुम उस 'कालू की पहाड़ी' के बारे में कह रहे थे, मुझे वो थोड़ा ठीक नहीं लग रहा। 


अक्सर बड़े-बुजुर्गों की बातों में कुछ सच्चाई होती है। हमें अपनी सुरक्षा का भी सोचना चाहिए।"



कार्तिक की बात सुनते ही डेविड ज़ोर से हँस पड़ा। वह ग्रुप का सबसे पढ़ा-लिखा और तार्किक इंसान माना जाता था, पर उसका स्वभाव थोड़ा अक्खड़ था।



डेविड ने मेज़ पर हाथ पटकते हुए कहा, "बुजुर्गों की बातें? सीरियसली कार्तिक? तुम एक सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट होकर ये बातें कर रहे हो?



ये सब पाखंड है, एक कोरी कल्पना! ये भूत-प्रेत और भगवान के डर की दुकानें सिर्फ इसलिए चलाई जाती हैं ताकि तांत्रिकों और पंडितों की आमदनी होती रहे।



इंसान का दिमाग जब किसी चीज़ को समझ नहीं पाता, तो उसे 'चमत्कार' या 'शाप' का नाम दे देता है।



मैंने आधी दुनिया घूम ली है, आज तक न कहीं भगवान दिखा और न ही कोई शैतान। यह सब सिर्फ एक 'भ्रम' (illusion) है।"



मलाइका ने डेविड का समर्थन किया, "सही तो कह रहा है डेविड। ये कहानियाँ सिर्फ टूरिस्ट्स को डराने या किसी खास जगह को 'मिस्टीरियस' बनाने के लिए बुनी जाती हैं।"



रूही ने कार्तिक का हाथ थामते हुए धीमी आवाज़ में कहा, "पर सावधानी में बुराई क्या है? अगर वहाँ के लोग 20 किलोमीटर दूर से ही लौट आते हैं, तो कुछ तो बात होगी न?"



"वही तो देखना है!" मोहित ने जोश में आकर कहा। "अगर हम वहाँ नहीं गए, तो वापस बेंगलुरु जाकर दोस्तों को क्या बताएंगे? 



कि हम डर के मारे मनाली के होटल में दुबके रहे? हम जाएंगे और यह साबित करेंगे कि 'कालू' नाम का कोई भूत नहीं है। यह सब बकवास है।"



बहस लंबी चली, लेकिन अंत में बहुमत 'एडवेंचर' के पक्ष में था। 


यह तय हुआ कि वे एक दिन मनाली में आराम करेंगे और अगली सुबह अपनी प्राइवेट ज़िपसी (Gypsy) से उस अनजानी पहाड़ी की ओर निकल पड़ेंगे।