लेखक राहुल शर्मा की तरफ से आप सभी के लिए...
"नमस्कार दोस्तों, मैं आपका अपना राहुल शर्मा।
आज 'कालू की पहाड़ी (सीज़न 1)' का 9वां भाग लाइव हो चुका है। सच कहूँ तो आज मैं जो कुछ भी हूँ, सिर्फ आप सब के प्यार की वजह से हूँ। आप लोगों ने मेरी इस सीरीज़ को जितना प्यार और सपोर्ट दिया है, उसके लिए मेरे पास धन्यवाद कहने के लिए शब्द कम हैं। आपकी हर एक रेटिंग और डाउनलोड मेरे दिल को छू जाती है।
आज आप सभी प्यारे पाठकों के लिए मेरे पास एक बहुत बड़ा सरप्राइज है! 'कालू की पहाड़ी' का यह पहला सीज़न अब अपने आखिरी पड़ाव पर है—इसके बाद सिर्फ 9 भाग और बचे हैं। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होगी! जैसे ही यह सीज़न खत्म होगा, मैं आपके लिए लेकर आ रहा हूँ—'कालू की पहाड़ी' का सीज़न 2! और यकीन मानिए, वह पहले से भी दस गुना ज़्यादा धमाकेदार होगा।
सीज़न 2 में कालू की पहाड़ी पर मौत का एक ऐसा तांडव मचेगा, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी! लेकिन यहाँ एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा होता है... आखिर यह तांडव करेगा कौन? कालू की आत्मा को तो रूही और कार्तिक ने मिलकर मुक्ति दिला दी थी, सब कुछ ठीक हो चुका था।
तो फिर इस खौफ के पीछे कौन है? क्या यह तांडव कालू की प्रेमिका करेगी? या उसका कोई पुराना आशिक? या फिर पहाड़ी पर किसी नए शैतान का साया आ चुका है? ...या फिर कालू खुद दोबारा ज़िंदा होने वाला है? और अगर कालू ज़िंदा होगा, तो वह वापस क्यों आया? आखिर ऐसा क्या हुआ कि उसे मुक्ति नहीं मिली?
इन सारे खौफनाक सवालों के जवाब आपको मिलेंगे सीज़न 2 के उस नए रोमांच में! तब तक अपना प्यार इसी तरह बनाए रखिए, इस सीरीज़ को पढ़ते रहिए और रेटिंग्स देते रहिए। मैं भी आप सभी पाठकों से बहुत प्यार करता हूँ और आपके लिए ऐसी ही रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानियां लिखता रहूँगा।
दिल से धन्यवाद,
आपका अपना लेखक — राहुल शर्मा 🙏✨"
जंगल के भीतर का दृश्य पल-पल बदल रहा था। कार्तिक जैसे-जैसे उस वीरान गाँव की ओर कदम बढ़ा रहा था, कालू की मायावी शक्तियाँ उसे रोकने के लिए हर संभव प्रपंच कर रही थीं।
कभी झाड़ियों में से विशालकाय काले साँप फन फैलाकर उसके रास्ते में आ जाते, तो कभी वही पीली आँखों वाली बिल्लियाँ हज़ारों की संख्या में दीवार बनकर खड़ी हो जातीं।
अचानक एक पुराने सूखे पेड़ की टहनी टूटकर उसके ठीक ऊपर गिरी, लेकिन कार्तिक ने फुर्ती से खुद को बचा लिया।
कहीं से बड़े-बड़े पत्थर उसकी ओर लुढ़क कर आ रहे थे, मानो पूरा जंगल ही उसे कुचल देना चाहता हो।
सभी तूफानों का सामना करता कार्तिक आगे बढ़ रहा था महादेव के नाम लेते, तभी, उस भयानक सन्नाटे को चीरती हुई एक आवाज़ आई जिसने कार्तिक के पैरों की गति को पत्थर की तरह जमा दिया।
"कार्तिक! रुक जाओ कार्तिक! सब कुछ खत्म हो गया..."
वह आवाज़ एकदम धीमी, दर्द भरी और सिसकियों से भरी थी। कार्तिक का कलेजा धक से रह गया। वह आवाज़ रूही की थी।
"कार्तिक, तुम्हारे यहाँ आने के बाद कालू ने अपना असली रूप दिखाया। उसने सुरक्षा घेरा तोड़ दिया और हमारे सभी दोस्तों को एक-एक करके मार डाला!
सिर्फ मैं बची हूँ कार्तिक... वह मेरे पीछे है, मुझे बचा लो! वह मुझे भी मार डालेगा!"
कार्तिक का मन एक पल के लिए पूरी तरह डोल गया। उसे लगा कि शायद सच में रूही मुसीबत में है। उसकी ममता और प्यार ने उसे पीछे मुड़कर देखने पर मजबूर कर दिया।
उसका हाथ कांपने लगा और वह मुड़ने ही वाला था उसकी गर्दन आधी मुड़ गई थी, कि तभी उसके दिमाग में बिजली की तरह एक बात कौंधी।
'छलावा!'
उसे गाँव के बुजुर्गों और उन कहानियों की याद आई जो उसने अपनी दादी से सुनी थीं— "अगर जंगल में कोई साया या रूह तुम्हें पीछे से अपनों की आवाज़ में पुकारे, तो कभी पीछे मुड़कर मत देखना।
अगर एक बार तुमने पलटकर उसकी आँखों में देख लिया, तो तुम हमेशा के लिए उसके वश में हो जाओगे। वह छलावा तुम्हारी रूह को खींच लेगा।"
कार्तिक को याद आया कि उसने रूही को गंगाजल और सिद्ध त्रिशूल के साथ उस अभेद्य सुरक्षा घेरे में छोड़ा था। कालू इतना शक्तिशाली नहीं था कि उस पवित्र घेरे को इतनी जल्दी तोड़ सके।
कार्तिक ने अपने दाँत भींचे और ज़ोर से चिल्लाया, "कालू! तू मेरा हौसला नहीं तोड़ सकता! मुझे पता है यह तेरी माया है। रूही सुरक्षित है और महादेव उसके साथ हैं!"
उसने पीछे मुड़कर देखने के बजाय अपने हाथ में पकड़े छोटे त्रिशूल को और कस लिया और बिना रुके आगे बढ़ने लगा।
जैसे ही उसने पीछे मुड़ने से इनकार किया, फिर से रूही बोली कार्तिक में ही हूं कोई छलावा नहीं, है बचा लो मुझे इस शैतान से पर कार्तिक ने फिर उसकी बात नहीं मानी इसके बाद वह रोने की आवाज़ एक भयानक अट्टहास (शैतानी हँसी) में बदल गई।
"हाहाहा! बच गया... तू बच गया कार्तिक! पर कब तक?" वह आवाज़ अब रूही की नहीं, बल्कि कालू की भारी और डरावनी आवाज़ थी।
अचानक वह आवाज़ हवा में विलीन हो गई। कार्तिक समझ गया कि कालू अब उसे डराने के लिए अपनी आखिरी सीमा तक जाएगा।
लेकिन इस घटना ने कार्तिक को और भी सतर्क कर दिया था। वह जान चुका था कि वह अब कालू के बहुत करीब है,
और कालू उसे डरा रहा है क्योंकि वह खुद कार्तिक की उस खोज से डर रहा है जो उस का सच उस गाँव में छिपा है।
कार्तिक बिना पीछे देखे, मंत्रों का जाप करते हुए उस पगडंडी पर बढ़ता रहा, जहाँ अब पुराने घरों की ढही हुई दीवारें नज़र आने लगी थीं। कालू का गाँव अब उसके सामने था।
उधर कालू की पहाड़ी पर माहौल इतना खौफनाक था कि हवा का हर झोंका किसी चीख जैसा महसूस हो रहा था।
सुरक्षा घेरे के अंदर बैठे सभी आठों दोस्त थर-थर कांप रहे थे। डेविड, जिसे कभी ईश्वर पर विश्वास नहीं था, आज सबसे तेज़ स्वर में 'ॐ नमः शिवाय' का जाप कर रहा था।
दीपक, मोहित, आरजू और बाकी सब भी अपनी आँखें बंद किए महादेव से प्राणों की भीख मांग रहे थे।
रूही, जो बचपन से ही संस्कारों और धार्मिक वातावरण में पली-बढ़ी थी, पूरी तन्मयता से महामृत्युंजय मंत्र का जाप कर रही थी।
उसकी आवाज़ में एक ऐसी शक्ति थी जो उस घेरे को टूटने से बचाए हुए थी। कार्तिक और रूही का जुड़ाव भी इसीलिए गहरा था क्योंकि दोनों की आत्मा प्रकृति और धर्म के प्रति समर्पित थी।
अचानक, उस काली धुंध को चीरता हुआ एक साया उनकी ओर लड़खड़ाता हुआ आया। वह नज़ारा देखते ही सबकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई।
"बचाओ... मुझे बचाओ!"
वह साया कोई और नहीं, बल्कि कार्तिक जैसा दिख रहा था। उसकी हालत देखकर किसी का भी कलेजा फट जाए।
उसके माथे से खून की धार बह रही थी, हाथों की उंगलियां टेढ़ी-मेढ़ी होकर टूट चुकी थीं और पूरे शरीर पर ऐसे घाव थे जैसे किसी जंगली जानवर ने उसे नोचा हो।
वह ज़मीन पर घिसटता हुआ चिल्ला रहा था:
"रूही... डेविड... दीपक... मुझे बचा लो! कालू ने मुझे लगभग मार ही डाला है। मुझे माफ़ कर दो, मैं उसकी सच्चाई का पता नहीं लगा पाया।
वह बहुत ताकतवर है... मुझे अंदर ले लो, वरना वह मुझे अभी मार डालेगा!"
यह देखकर रूही के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उसका हृदय अपने प्रिय कार्तिक की यह हालत देखकर विचलित हो उठा।
ममता और डर के मारे उसका महामृत्युंजय जाप रुक गया। उसकी आँखों में आँसू आ गए और वह बदहवास होकर चिल्लाई, "कार्तिक! तुम्हें यह क्या हुआ?"
रूही अपना सुध-बुध खोकर जैसे ही उस पवित्र सुरक्षा घेरे को पार करने के लिए आगे बढ़ी, तभी एक मज़बूत हाथ ने उसे पीछे से झटके के साथ पकड़ लिया।
वह डेविड था। डेविड की आँखों में इस बार डर नहीं, बल्कि एक गहरी समझ और दृढ़ता थी। उसने रूही का हाथ ज़ोर से जकड़ते हुए कहा, "रुको रूही! कदम बाहर मत निकालना!"
रूही ने रोते हुए उसे धक्का देने की कोशिश की, "छोड़ो मुझे डेविड! देखो कार्तिक मर रहा है, हमें उसे बचाना होगा!"
लेकिन डेविड ने उसे नहीं छोड़ा। उसने चिल्लाकर कहा, "नहीं रूही! यह कार्तिक नहीं हो सकता! मैं जानता हूँ कार्तिक को, वह इतना कमज़ोर नहीं है। और अगर उसे कुछ होता भी, तो वह कभी भी यहाँ वापस आकर हमें खतरे में नहीं डालता।
वह जिस काम के लिए निकला है, उसे पूरा किए बिना वह हार नहीं मान सकता।"
डेविड ने उस लहूलुहान साये की ओर इशारा करते हुए कहा, "देखो उसे गौर से! कालू की शक्ति कार्तिक को इस घेरे के इतने करीब आने ही नहीं देती अगर वह सच में कार्तिक होता।
यह कालू का ही कोई गंदा छलावा है। वह जानता है कि तुम्हारी कमज़ोरी कार्तिक है, इसलिए वह तुम्हें बाहर खींचना चाहता है। यह कार्तिक नहीं है रूही, यह मौत का जाल है!"
डेविड की बातों ने रूही के दिमाग पर किसी ठंडे पानी के छींटे जैसा काम किया। उसने गौर से देखा—उस 'कार्तिक' की परछाईं ज़मीन पर नहीं बन रही थी और उसकी आँखों में वह सौम्यता नहीं थी।
जो असली कार्तिक की पहचान थी। रूही समझ गई कि वह एक पल के लिए कालू के मायाजाल में फंसने ही वाली थी।
उसने तुरंत पीछे हटकर फिर से मंत्रों का जाप शुरू कर दिया। डेविड के इस साहस और सूझबूझ ने आज न केवल रूही की, बल्कि उन सबकी जान बचा ली थी। घेरे के बाहर खड़ा वह 'छलावा' अब भयानक रूप में बदलकर ज़ोर-ज़ोर से गर्जना करने लगा क्योंकि उसकी चाल विफल हो चुकी थी।
उधर, असली कार्तिक इस सब से बेखबर, ऊपर खबर रास्ता हो चुके उस वीरान गाँव की और बढ़ रहा चुका था, जहाँ हर पत्थर एक नया राज़ उगलने को तैयार था।