कालू की पहाड़ी - 4 RAAHULL SHARMA द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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कालू की पहाड़ी - 4

पर उन सभी दोस्तों पर 'एडवेंचर' का भूत उन पर सवार था। दीपक ने चाबी उठाई और सब दबे पाँव गाड़ी की तरफ बढ़े। 


बिना शोर किए उन्होंने जिप्सी स्टार्ट की और गाँव की सीमा पार कर गए। उन्हें नहीं पता था कि बरगद के पेड़ के पास खड़ा एक साया उन्हें जाते हुए देख रहा था।


अभिशप्त रास्ते पर सफर


गाँव से बाहर निकलते ही रास्ता और भी भयानक हो गया। हेडलाइट की रोशनी जहाँ तक जा रही थी, वहाँ सिर्फ काले पत्थर और कटीली झाड़ियाँ थीं।


जैसे-जैसे वे पहाड़ी के करीब पहुँच रहे थे, उनकी गाड़ी का जीपीएस (GPS) स्क्रीन अचानक झिलमिलाने लगा। मैप पर रास्ता गायब हो गया और सिर्फ एक काली लकीर दिखने लगी।



"अरे! ये सिग्नल को क्या हुआ?" मलाइका ने अपना आईफोन हिलाते हुए कहा। "इंटरनेट पूरी तरह गायब है।"


तभी अचानक गाड़ी का तापमान काँटा (Temperature Gauge) नीचे गिर गया। गाड़ी के अंदर इतनी ठंड हो गई कि सबकी साँसें धुएं की तरह बाहर निकलने लगीं। आरजू ने चिल्लाकर कहा, "दीपक, गाड़ी रोको! देखो बाहर क्या है!"



रोशनी में उन्होंने देखा कि सड़क के बीचों-बीच हज़ारों की संख्या में काली बिल्लियाँ बैठी थीं। उनकी आँखें हेडलाइट की रोशनी में पीली चमक रही थीं। वे रास्ता नहीं दे रही थीं।


दीपक ने हॉर्न बजाया, लेकिन वे टस से मस नहीं हुईं।
डेविड ने गुस्से में कहा, "सब वहम है! गाड़ी चढ़ा दो इनके ऊपर!"



जैसे ही दीपक ने गाड़ी आगे बढ़ाई, सारी बिल्लियाँ एक साथ चीखीं और हवा में गायब हो गईं। वह मंज़र इतना खौफनाक था कि सबके रोंगटे खड़े हो गए। 


तभी अचानक गाड़ी के रेडियो से तेज़ शोर आने लगा—खर्र... खर्र... और फिर एक धीमी, भारी आवाज़ गूँजी:
"मीना... क्या तुम आ गई? तुम पाँचों में से मेरी मीना कौन है?"



यह सब सुन कर गाड़ी में सन्नाटा छा गया। सबके चेहरे का रंग उड़ गया। कार्तिक चिल्लाया, "वापस मोड़ो! ये कोई इंसान नहीं है!"



लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। वे 20 किलोमीटर की उस सुरक्षा रेखा को पार कर चुके थे। पीछे मुड़कर देखा तो रास्ता गायब था, वहाँ सिर्फ काली धुंध थी।


उनके सामने अब वह चोटी खड़ी थी, जिसे कालू की पहाड़ी कहा जाता था। उस चोटी पर एक धुंधली सी आकृति खड़ी थी, जिसके हाथ में एक कुल्हाड़ी चमक रही थी।



कालू का शिकार शुरू होने वाला था। बेंगलुरु के ये 10 दोस्त, जो मौत को 'पाखंड' समझ रहे थे, अब मौत के साये के नीचे खड़े थे।



जैसे ही जिप्सी कालू की पहाड़ी के शिखर पर रुकी, एक पल के लिए सबकी धड़कनें थम गईं। सामने अंधेरे में एक धुंधली आकृति खड़ी महसूस हो रही थी, जिसे देखकर कार्तिक और रूही की तो मानों जान ही निकल गई।


सभी दोस्त एक दम से घबरा गए लेकिन डेविड, जिसका अहंकार उसके डर से कहीं बड़ा था, ज़ोर से हँसा।


देखो देख लिया? कुछ नहीं है यहाँ!" डेविड ने चिल्लाकर कहा और धौंस जमाते हुए गाड़ी का दरवाज़ा खोलकर बाहर निकल गया।



बाकी सब भी सहमे हुए बाहर आए, लेकिन अगले ही पल सबकी आँखें फटी की फटी रह गई। वहाँ न कोई भूत था, न कोई खूनी साया। 



उनके सामने एक जादुई नज़ारा था। जहाँ गाँव वालों ने 'मौत की खाई' की बात की थी, वहाँ आलीशान और चमकती हुई लग्जरी कोठियाँ (Cottages) खड़ी थीं।



सफ़ेद संगमरमर, कांच की बड़ी-बड़ी खिड़कियाँ और उनमें जलती हुई सुनहरी रोशनी—ऐसा लग रहा था जैसे वे स्विट्ज़रलैंड के किसी पॉश रिजॉर्ट में आ गए हों।



डेविड ने सीटी बजाते हुए कहा, "कम ऑन गाइस! देखो इसे! ये गाँव वाले कितने शातिर हैं। इतनी आलीशान जगह को उन्होंने 'भूतिया' बता रखा है ताकि कोई बाहरी यहाँ आकर कब्ज़ा न कर ले। 


कम ऑन, अपना सामान निकालो। अब हम यहाँ पूरा एंजॉय करेंगे!"


डेविड की बातों ने बाकी दोस्तों के मन से डर निकाल दिया। अभिलाषा, मोहित, दीपक और बाकी सब के चेहरे पर एक लालची चमक आ गई। 


उन्हें लगा कि उन्हें बिना पैसे दिए एक महल मिल गया है। सब अपना-अपना बैग उठाकर उन कोठियों की ओर दौड़ पड़े।


लेकिन कार्तिक और रूही अभी भी ज़मीन पर जमे हुए थे। उनकी रूह कांप रही थी।


"कार्तिक, ये मुमकिन नहीं है," रूही ने कांपते हुए कहा। "जिस पहाड़ी पर 20 किलोमीटर दूर से लोग आने को मना करते हैं, जहाँ परिंदा भी पर नहीं मारता, वहाँ ऐसी आलीशान कोठियाँ कहाँ से आईं?


और इन कोठियों को बिजली कौन दे रहा है? यहाँ तो कोई तार भी नहीं दिख रहा।"


कार्तिक ने गौर से उन घरों को देखा। वे घर बाहर से बहुत सुंदर थे, लेकिन उनमें से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी। "तुम सही कह रही हो रूही।


ये 'मायाजाल' लग रहा है। अगर ये सच होता, तो यहाँ हज़ारों की भीड़ होती। ये सिर्फ हमारी आँखों का धोखा है... या फिर कालू हमें अंदर बुलाने के लिए चारा डाल रहा है।"



भ्रामक विलासिता का खेल


जब कार्तिक और रूही अंदर पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि उनके दोस्त पागल हो चुके थे। हर कमरा रेशमी पर्दों, मखमली बिस्तरों और महंगे खान-पान से सजा था।



डेविड एक डाइनिंग टेबल पर बैठा था जिस पर दुनिया भर के पकवान सजे थे। "देखो कार्तिक! तुम लोग अंधविश्वास में मरे जा रहे थे। 


यहाँ तो फाइव स्टार होटल जैसा खाना रखा है। आओ और खाओ!"


कार्तिक ने चिल्लाकर मना किया, "कोई कुछ नहीं खाएगा! ये खाना कहाँ से आया? यहाँ कोई वेटर नहीं है, कोई इंसान नहीं है, फिर ये गरम खाना यहाँ कैसे हो सकता है?"



लेकिन भूख और थकान ने सबको अंधा कर दिया था। दीपक और आरजू एक कमरे में चले गए, डेविड और मलाइका दूसरे में। धीरे-धीरे सब अपने-अपने 'लक्जरी' कमरों में कैद हो गए। 


कार्तिक और रूही ने फैसला किया कि वे सोएंगे नहीं। वे हॉल के एक कोने में बैठ गए, अपने पास एक छोटा सा भगवान का चित्र और गंगाजल की बोतल रखी।


दिन का उजाला किसी मीठे सपने जैसा बीता। पहाड़ी की गोद में बसे उन बगीचों की हरियाली, चांदी की तरह गिरते झरने और फूलों की महक ने उन पाँचों जोड़ों को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया था।


ऐसा लग रहा था मानो कुदरत ने उनके लिए स्वर्ग के द्वार खोल दिए हों। लेकिन कार्तिक और रूही को छोड़कर बाकी आठ दोस्तों के साथ कुछ बहुत ही डरावना घट रहा था।



जैसे ही रात हुई और सबने उस 'मायावी' कोठी का खाना खाया, उनके व्यवहार में एक भयानक बदलाव आ गया। उनकी आँखों की चमक गायब हो गई थी और उनकी जगह एक सूनी, पथराई हुई नज़र आ गई थी।



मायावी भोजन और बदली हुई रूहें


वह खाना खाते ही डेविड, दीपक, साहिल और उनके साथी किसी सम्मोहन (Hypnosis) में चले गए थे। जो दोस्त हमेशा आपस में हँसी-मज़ाक करते थे, अब वे एक-दूसरे को देख तक नहीं रहे थे।


वे बस मशीनों की तरह काम कर रहे थे। डेविड, जो भगवान और शैतान को नहीं मानता था, अब दीवार की तरफ मुँह करके अजीब सी भाषा में बड़बड़ा रहा था।



आरजू और मलाइका अपने बालों को नोच रही थीं और बस एक ही बात दोहरा रही थीं—"कितना सुंदर घर है... कितना स्वादिष्ट मांस है..."



कार्तिक और रूही यह सब एक कोने से देख रहे थे। उनकी रूह कांप उठी थी। उन्हें समझ आ गया था कि उस कोठी का खाना कोई भोजन नहीं, बल्कि कालू का परोसा हुआ 'मरण-भोग' था।


जिसने उसे चखा, वह धीरे-धीरे अपनी इंसानियत खोकर कालू के वश में होने लगा था।


महादेव का सुरक्षा कवच

सौभाग्य से, कार्तिक और रूही ने उस जादुई खाने को हाथ तक नहीं लगाया था। उन्होंने वही सूखा खाना खाया जो वे मनाली से अपने साथ लाए थे। लेकिन उनकी असली ताकत वह भोजन नहीं, बल्कि उनकी अटूट श्रद्धा थी।



मनाली में शॉपिंग के दौरान, जब बाकी दोस्त ऐश-ओ-आराम का सामान खरीद रहे थे, तब कार्तिक और रूही एक पुराने शिव मंदिर गए थे। वहाँ से वे अपने साथ तीन दिव्य चीज़ें लाए थे:


छोटा त्रिशूल: पीतल का बना एक सिद्ध त्रिशूल।

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