कालू के गायब होते ही उन आठों दोस्तों की देह में एक अजीब सी ऐंठन पैदा हुई। उनके शरीरों से हड्डियां चटकने की आवाजें आ रही थीं।
डेविड, जो बेंगलुरु में सबका लीडर बना फिरता था, अब उसकी चाल किसी शिकारी भेड़िए जैसी हो गई थी।
मलाइका, आरजू, दीपक और बाकी सब धीरे-धीरे एक अर्धवृत्त (Half-circle) बनाकर कार्तिक और रूही को पहाड़ी के किनारे की ओर धकेलना चाहते थे।
कार्तिक ने अपने हाथ में पकड़ी हुई गंगाजल की बोतल को कसकर थाम लिया। उसके माथे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं।
उसने चिल्लाकर कहा, "डेविड! दीपक! मोहित, होश में आओ भाई! यह तुम क्या कर रहे हो? तुम कालू के बहकावे में आ गए हो।
वह तुम्हारी रूह पर कब्जा करना चाहता है, उठो और इस अंधेरे से लड़ो!"
लेकिन कार्तिक की आवाज़ जैसे किसी बंद दीवार से टकराकर वापस आ रही थी। उन आठों की आँखों में कोई चमक नहीं थी, सिर्फ एक गहरा और डरावना सूनापन था।
वे मशीनों की तरह कदम बढ़ा रहे थे। जब रूही ने मलाइका का हाथ पकड़ने की कोशिश की, तो मलाइका ने उसे इतनी ज़ोर से झटका दिया कि रूही उस पवित्र घेरे के अंदर ही पढ़ा भारी पत्थर से जा टकराई।
रूही ने सिसकते हुए कहा, "कार्तिक, इन्हें हमारी बातें सुनाई नहीं दे रही हैं। देखो इन्हें... ये न पलकें झपका रहे हैं और न ही कुछ बोल रहे हैं।
ऐसा लग रहा है जैसे इनके अंदर कोई और बैठा है जो इन्हें रिमोट की तरह चला रहा है।"
साहिल और अभिलाषा, जो कभी एक-दूसरे का हाथ थामे बिना नहीं रह सकते थे, अब एक-दूसरे को देख तक नहीं रहे थे।
उनकी गर्दनें एक खास कोण पर टेढ़ी थीं। अचानक, दीपक ने एक पत्थर उठाया और बिना किसी भावना के उसे कार्तिक की ओर फेंका।
कार्तिक बाल-बाल बचा।
कार्तिक ने फिर से कोशिश की, "दीपक, याद करो हमारी दोस्ती! हम साथ में क्रिकेट खेलते थे, हम साथ में इस ट्रिप पर आए थे।
वह खाना जो तुमने खाया, वह सिर्फ एक छलावा था। वह कालू का जाल है! अपनी शक्ति जगाओ दोस्तों!"
लेकिन उन आठों 'प्यादों' ने एक साथ अपने मुँह खोले। उनके गले से एक ही समय पर एक ही भारी आवाज़ निकली—जो उनकी अपनी नहीं थी, बल्कि कालू की भयानक प्रतिध्वनि थी: "मीना... कहाँ है? आशिक... कहाँ है?"
यह मंज़र रोंगटे खड़े कर देने वाला था। आठ इंसान, एक ही आवाज़ और एक ही मकसद।
वे धीरे-धीरे कार्तिक और रूही के इतने करीब आ गए कि उनकी ठंडी सांसें महसूस की जा सकती थीं।
उनकी हरकतें इतनी सटीक और समन्वित (Coordinated) थीं कि साफ़ लग रहा था कि उनका अपना दिमाग अब मर चुका है।
वे अब कालू की सेना के वह सिपाही थे, जिन्हें अपने ही दोस्तों का लहू बहाने में कोई झिझक नहीं थी।
कार्तिक और रूही अब उस सुरक्षा घेरे के बिल्कुल कोने पर थे। उनके पीछे गहरी खाई थी और सामने उनके अपने आठ सबसे प्यारे दोस्त, जो अब काल का रूप धरकर खड़े थे।
पहाड़ी की हवाओं में अब सिर्फ एक ही डर गूँज रहा था—क्या कार्तिक और रूही अपने दोस्तों को बिना चोट पहुँचाए इस जादुई गुलामी से बाहर निकाल पाएंगे?
या फिर कालू का यह 'रोबोटिक' खेल इन दसों की आखिरी दास्तां बन जाएगा?
पहाड़ी पर मौत का तांडव अपने चरम पर था। उन आठों दोस्तों की बेजान और पथराई हुई आँखें कार्तिक और रूही को निगल जाने के लिए बेताब थीं।
खौफ का आलम यह था कि हवा में ऑक्सीजन की जगह सिर्फ दहशत और ठंडक महसूस हो रही थी।
कार्तिक और रूही एक-दूसरे का हाथ कसकर थामे हुए थे, लेकिन तभी एक भयानक अनहोनी हुई। डेविड ने एक ऐसी चीख मारी जिसकी गूँज से ज़मीन कांप उठी। उसी घबराहट और हड़बड़ाहट में, पसीने से लथपथ कार्तिक का हाथ रूही के हाथ से फिसल गया।
संतुलन बिगड़ा और रूही उस पवित्र सुरक्षा घेरे की लकीर से बाहर गिर गई।
"कार्तिक!" रूही के हलक से एक चीख निकली। घेरे से बाहर कदम रखते ही उसे ऐसा लगा मानो हज़ारों बर्फीली सुइयां उसके शरीर में चुभ गई हों। कालू की काली शक्तियों ने उसे चारों तरफ से जकड़ लिया।
जैसे ही उन आठों 'रोबोट' बन चुके दोस्तों ने देखा कि शिकार अब कवच से बाहर है, वे सब एक साथ रूही की तरफ मुड़े।
उनकी आँखों में खून उतर आया था। दीपक और साहिल किसी भूखे भेड़िए की तरह रूही पर झपटने ही वाले थे।
रूही ज़मीन पर गिर चुकी थी और मौत उसके सामने खड़ी थी। मलाइका और आरजू के हाथ हवा में किसी नुकीले हथियार की तरह उठे हुए थे।
कार्तिक का कलेजा मुँह को आ गया। उसके पास सोचने के लिए एक पल भी नहीं था।
उसी बिजली जैसी फुर्ती के साथ उसने अपनी जेब में हाथ डाला और भगवान शंकर की वह परम पवित्र भस्म निकाली जिसे वह मनाली के उस प्राचीन मंदिर से लाया था।
यह भस्म कोई साधारण राख नहीं थी, बल्कि इसमें हज़ारों सालों की तपस्या और मंत्रों की शक्ति समाहित थी।
कार्तिक चिल्लाया, "हर हर महादेव!"
उसने मुट्ठी भर भस्म हवा में उछाली और एक विशेष मंत्र का उच्चारण करते हुए उसे उन आठों दोस्तों की ओर फेंक दिया।
जैसे ही वह भस्म हवा के झोंके के साथ फैली, वह साधारण राख से बदलकर एक दिव्य सुनहरी चमक में तब्दील हो गई।
जैसे ही भस्म का एक-एक कण डेविड, दीपक, मलाइका और बाकी सबके शरीर से टकराया, एक ज़ोरदार धमाका हुआ।
वह मंज़र रोंगटे खड़े कर देने वाला था। उन आठों के शरीर से एक काला, बदबूदार धुआँ (कालू का प्रभाव) बाहर निकलने लगा।
वे सब एक साथ हवा में उछले और फिर जैसे ही भस्म का प्रभाव उनके खून में पहुँचा, उनकी रूह को उस जादुई गुलामी से आज़ादी मिलने लगी।
एक पल के लिए वे सब हवा में ठिठके, उनके मुँह से कालू की वह आखिरी चीख निकली, और फिर अचानक जैसे किसी ने बिजली का स्विच बंद कर दिया हो,
उन आठों दोस्तों के शरीर ढीले पड़ गए। वे सब के सब वहीं के वहीं ढेर होकर बेसुध हो गए। कोई पत्थर पर गिरा, तो कोई सूखी घास पर।
उनके चेहरों से वह डरावनापन गायब हो चुका था और वे अब गहरी, लेकिन बेहोशी की नींद में थे।
कार्तिक हाँफते हुए रूही की तरफ झपटा और उसे खींचकर वापस सुरक्षा घेरे के अंदर ले आया। चारों तरफ अब फिर से सन्नाटा था,
लेकिन यह सन्नाटा सुकून वाला नहीं था। कार्तिक ने देखा कि उसके आठों दोस्त ज़िंदा तो थे, लेकिन उनकी आत्मा और शरीर उस भस्म की पवित्र शक्ति और कालू के काले जादू के टकराव को बर्दाश्त नहीं कर पाए थे और पूरी तरह निढाल होकर बेहोश हो चुके थे।
रूही की सांसें अभी भी तेज़ चल रही थीं। उसने कार्तिक को देखा और सिसकते हुए कहा, "कार्तिक... तुमने हमें बचा लिया, लेकिन अब हम इन आठों को इस मौत की पहाड़ी से वापस कैसे ले जाएंगे?"
रूही की आँखों में आँसू थे, पर उसका इरादा फौलादी था। उसने कार्तिक का हाथ थामते हुए कहा, "कार्तिक, हमारे पास समय बहुत कम है।
कालू हार नहीं माना है, वह सिर्फ पीछे हटा है। इससे पहले कि वह दोबारा हमला करे या कोई और माया रचे,
हमें इन सबको एक ऐसे सुरक्षा कवच में लेना होगा जिसे कालू की कोई भी शक्ति भेद न सके। हमें इन्हें वापस होश में लाना ही होगा!"
कार्तिक ने सिर हिलाया। वह जानता था कि अब उसे अपनी पूरी आध्यात्मिक शक्ति झोंकनी होगी।
महा-सुरक्षा कवच का निर्माण