आध्यात्मिक कथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and...Read More


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महाभारत की कहानी - भाग 246 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२५० कौरव और पांडवों के स्वर्गलाभ   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांधारी की धर्...

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मूल विज्ञान की अवधारणा: सिद्धांतों से पूर्व का अस्तित् ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

अस्तित्ववेदांत 2.0: सृष्टि, मनुष्य और सिद्धांतों के निर्माण से पहले की 'मूल विज्ञान' और 'केवल समझ' की अवधारणा का शोधसमकालीन दार्शनिक परिदृश्य में 'वेदांत 2.0&#3...

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श्रेष्ठ लोगों की संगति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति (66) की व्याख्या "देवानाम् सख्यमुप सेदिमा वयम्।ऋग्वेद --1/89/3भावार्थ - हम श्रेष्ठ लोगों की संगति प्राप्त करें। "देवानां सख्यमुप सेदिमा वयम्") ऋग्वेद के मंत्र का वास्...

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मित्र कौन ? By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (१) की व्याख्या "न स सखा यो न ददाति  सख्ये"ऋग्वेद --10/117/4भावार्थ -- ,वह मित्र‌ नहीँ है जो सहायता न करें।पूरा मंत्र अर्थ सहितआपने जो पंक्ति उद्धृत की है — “न स सखा...

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तुरीय-आधारित '0 बोध' By Vedanta Life Agyat Agyani

।वेदांत 2.0 लाइफ़": तुरीय-आधारित '0 बोध' को लाइफ़–साइंस और कॉन्शसनेस–स्टडीज़ के एकीकृत फ्रेमवर्क के रूप में प्रस्तावसार (Abstract) – "वेदांत 2.0 लाइफ़" नामक एक समेकित फ्रेम...

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मॉडर्न साधु By aman

ये कहानी शुरू होती हैं अस्पताल से....जहां मोहन अपने होने वाले बच्चे के लिए चिंतित हैं। ऑपरेशन रूम से आती दर्द भरी चीखों ने उसे परेशान कर दिया हैं चिंता ने उसके बच्चे पैदा होने की ख...

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कालू की पहाड़ी - 6 By RAAHULL SHARMA

कालू के गायब होते ही उन आठों दोस्तों की देह में एक अजीब सी ऐंठन पैदा हुई। उनके शरीरों से हड्डियां चटकने की आवाजें आ रही थीं।डेविड, जो बेंगलुरु में सबका लीडर बना फिरता था, अब उसकी च...

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वर्तमान नकलूसी गुरु और प्राचीन बोध By Vedanta Life Agyat Agyani

बोध पहले अनुभव है, बाद में शास्त्र। पहले भीतर एक घटनाक्रम घटता है — आनंद, मौन, संतोष, प्रस्फुटन, सहजता। बाद में बुद्धि उसे भाषा देती है, और वही भाषा शास्त्र, पद, दोहा, भजन, सूत्र,...

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साझा कल्याण By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति-(२) की व्याख्या *केवलाघो भवति केवलादी"ऋग्वेद --1/117/4भावार्थ --जो अकेले भोग करता है वह‌ पाप का‌ भागी होता है। पूरा श्लोक अर्थ सहितजो मंत्र उद्धृत किया है — "केवलाघो...

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मन – ऊर्जा और शरीर का मध्य सेतु By Vedanta Life Agyat Agyani

मन – ऊर्जा और शरीर का मध्य सेतु शरीर जड़ है।ऊर्जा चेतन है।इन दोनों के मध्य जो बोध उत्पन्न होता है, वही मन है।मन न पूर्णतः शरीर है, न पूर्णतः ऊर्जा।मन दोनों का सेतु है।इसी कारण मन द...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 86 By CHIRANJIT TEWARY

निलु के उपर आलोक दवाब बनाते हुए पूछता है:" निलु काका अब बोलिए क्या बात है। आप डरीये मत । हो सकता है इसमे हम आपकी कोई सहायता कर सके। आप हमे बेखोफ होकर बोलिए । "निलु के पास अब कोई चा...

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परिश्रम का महत्व By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति(3) की व्याख्या "न ऋते श्रान्तस्य सख्यायदेवा:"4/33/11भावार्थ -देवता(ईश्वर) श्रम करने वाले के सिवा और से मित्रता नहीं ‌करते।ऋग्वेद 4.33.11 का अंश:न ऋते श्रान्तस्य सख्या...

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शैतानी घाटी का सफर - 4 By RAAHULL SHARMA

ड्राइवर की सीट पर कालू बैठा था, लेकिन उसका चेहरा बिल्कुल सपाट था, जैसे वो किसी बेहोशी में हो।उसने गाड़ी का गियर डाला और बस तेज़ी से एक दूसरी भयानक और गहरी खाई की तरफ भगाने लगा।राम:...

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स्वर्ग का दरवाजा - 5 By Author Pawan Singh

एक लड़का और लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते।  ये लाइन तो आपने सुनी ही होगी लेकिन ऐसा क्यों कहा जाता है? क्या ये दर्शाता है कि दोस्ती में लिंग भेदभाव होता है या प्यार की भावना दोस्ती क...

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साथ साथ चलो साथ साथ बोलो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति-(4) की व्याख्या ऋगुवेद--10/191/2सं गच्छव्व सं वदध्वंभावार्थ--साथ-साथचलो, साथ ऋग्वेद 10.191.2 का मंत्र है:संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।देवा भागं यथा पूर्वे...

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जो जागे वह पाए By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति --(5) की व्याख्या "यो जागार तमृच: कामयन्ति"ऋग्वेद--5/44/14भावार्थ --जो जागता है उसे ऋचाएँ चाहती हैं।इसका पूरा मंत्र अर्थ सहितऋग्वेद 5.44.14 का पूरा मंत्र इस प्रकार है...

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मुक्ति का पंचनीति मार्ग By prem chand hembram

मुक्ति का पंचनीति मार्ग — श्री श्री ठाकुर अनुकूलचन्द्र की जीवन-दृष्टि भारतीय दर्शन में "मुक्ति" या "मोक्ष" को मानव जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य माना गया है। सामान्यतः लोग मुक्ति को मृत्...

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अमावस्या की काली रात एक खोफ या श्राप - 1 By RAAHULL SHARMA

अध्याय: देवक़ेड़ा का रहस्यछत्तीसगढ़ के भिलाई शहर की चकाचौंध से लगभग 200 किलोमीटर दूर, जहाँ मोबाइल के सिग्नल साथ छोड़ देते हैं और सड़कों की जगह ऊबड़-खाबड़ पगडंडियाँ ले लेती हैं, वहा...

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सन्मार्ग की ओर By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (6) की व्याख्या "अग्ने नय सुपथा राए अस्मान"ऋग्वेद--1/189/1भावार्थ,--हे ईश्वर (अग्नि देव) ! मुझे धन के लिए सन्मार्ग पर ले चलें।ऋग्वेद 1.189.1अग्ने नय सुपथा राये अस्म...

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मंत्र, बीज-नाम और मुक्ति: भारतीय दर्शन की वास्तविक दिशा By prem chand hembram

मंत्र, बीज-नाम और मुक्ति — भारतीय दर्शन की वास्तविक दिशा भारतीय दर्शन में "मुक्ति" या "मोक्ष" को मनुष्य जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य माना गया है। किंतु मुक्ति का अर्थ केवल संसार का त्या...

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ईश्वर-सखा कभी हारता नहीं By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (7) की व्याख्या "न यस्य हन्यते सखा न जीयते ऋगुवेद- --10/152/1भावार्थ --हे प्रभु! आपके भक्त को न कोई नष्ट कर सकता है और न जीत सकता है। इस  मंत्र का पूरा श्ल़ोक अर्थ...

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ईश्वर की महिमा अनन्त By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (8) की व्याख्या "न विन्धेश्य सुष्टतिम"ऋगुवेद --1/1/7भावार्थ --मै स्तुति से पार नहीं पा सकता। उद्धृत मन्त्र ऋग्वेद 1.7.7 का है। सही पाठ इस प्रकार है—तुञ्जे-तुञ्जे य...

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ईश्वर को हम नहीं छोड़ सकते By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (9) की व्याख्या "महे चन त्वामंद्रिव:परां शुल्काय देयाम्"ऋगुवेद --8/1/5भावार्थ --हे ईश्वर ! मैं ‌आपको  किसी भी मूल्य पर नहीं छोड़ सकता।मंत्र का पदानुसार अर्थ इस प्रक...

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ईश्वर मेरा चरवाह है By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (10)की व्याख्या "न रिष्येत त्यावत: सखा"ऋगुवेद --1/91/8भावार्थ --हे ईश्वर !आपका सखा (भक्त) कभी‌नष्ट नहीं होता। ऋग्वेद १।९१।८ का पूरा मंत्र इस प्रकार है —त्वं नः सोम...

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समस्त लोकों का राजा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(11)की व्याख्या "एको विश्वस्य भुवनस्य राजा"ऋगुवेद --6/36/4भावार्थ -समस्त लोकों का वह‌ स्वामी एक है।इसका पूरा मंत्र अर्थ‌ सहितऋग्वेद ६.३६.४ का पूरा मंत्र इस प्रकार है...

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तू मेरा मैं तेरा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१२) की‌ व्याख्या- “त्वमस्माकं तव स्मसि”ऋगुवेद --८/९२/३२भावार्थ --प्रभु ! तू हमारा है हम‌ तेरे‌ हैं।यह आत्मसमर्पण, आश्रय और दिव्य–संबंध का उद्घोष है।ऋग्वेद ८।९२।३२ का...

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God Wishar - 6 By Ram Make

"अरे वाह!" मेयर साहब ने उत्सुकता से कहा, "कबीर, मुझे नहीं पता था कि तुम्हारे अंदर इतने सारे हुनर छिपे हैं। लगता है आज हमारी किस्मत अच्छी है।"यहाँ तक कि शिवानी ने भी आँखों में थोड़ी...

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आत्मा की यात्रा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (१३) की व्याख्या अधाम इन्द्र श्रणवो हवेमा — ऋग्वेद ७/२९/३भावार्थ --हे प्रभो ! हमारी पुकार को‌ सुनो।पदच्छेद--अधाम । इन्द्र । श्रणवः । हवेमा ॥शब्दार्थअधाम — हम नीचे (...

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आत्मबोध By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (१४) की व्याख्या ऋग्वेद के मंत्र “यस्तन्न वेद किमृचा करिष्यति""… (१.१६४.३९)  भावार्थ --ब्रह्म-तत्त्व को जाने बिना  वेद-मंत्रों का पाठ व्यर्थ है।ऋग्वेद १.१६४.३९ऋचो अ...

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महाभारत भीतर का युद्ध ( तत्व मीमांसा) भाग 1 By prem chand hembram

महाभारत भीतर का युद्ध (तत्व मीमांसा) — भाग : ०१ मनुष्य सदियों से भगवान को खोज रहा है।कभी मंदिरों में,कभी तीर्थों में,कभी मूर्तियों में,कभी ग्रंथों में।पर शायद सबसे कठिन खोज अपने भी...

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सच्ची मित्रता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(१५) की व्याख्या तवेद्धि सख्यम् स्तृतम्।   १/१५/५भावार्थ -प्रभो ! आपकी ही मैत्री सच्ची है। पद-विश्लेषण--तव = तेरा / आपकाएव इद्धि (एव इद्धि/एव हि) = निश्चय ही...

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ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरण By Vedanta Life Agyat Agyani

ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरणअध्यात्म और जीवन-दर्शन के क्षेत्र में 'ब्रह्मचर्य' शब्द को अक्सर एक कठिन तपस्या, इंद्रिय-दमन और कठोर नियंत्रण के पर्याय के र...

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महाभारत की कहानी - भाग 246 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२५० कौरव और पांडवों के स्वर्गलाभ   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांधारी की धर्...

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मूल विज्ञान की अवधारणा: सिद्धांतों से पूर्व का अस्तित् ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

अस्तित्ववेदांत 2.0: सृष्टि, मनुष्य और सिद्धांतों के निर्माण से पहले की 'मूल विज्ञान' और 'केवल समझ' की अवधारणा का शोधसमकालीन दार्शनिक परिदृश्य में 'वेदांत 2.0&#3...

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श्रेष्ठ लोगों की संगति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति (66) की व्याख्या "देवानाम् सख्यमुप सेदिमा वयम्।ऋग्वेद --1/89/3भावार्थ - हम श्रेष्ठ लोगों की संगति प्राप्त करें। "देवानां सख्यमुप सेदिमा वयम्") ऋग्वेद के मंत्र का वास्...

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मित्र कौन ? By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (१) की व्याख्या "न स सखा यो न ददाति  सख्ये"ऋग्वेद --10/117/4भावार्थ -- ,वह मित्र‌ नहीँ है जो सहायता न करें।पूरा मंत्र अर्थ सहितआपने जो पंक्ति उद्धृत की है — “न स सखा...

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तुरीय-आधारित '0 बोध' By Vedanta Life Agyat Agyani

।वेदांत 2.0 लाइफ़": तुरीय-आधारित '0 बोध' को लाइफ़–साइंस और कॉन्शसनेस–स्टडीज़ के एकीकृत फ्रेमवर्क के रूप में प्रस्तावसार (Abstract) – "वेदांत 2.0 लाइफ़" नामक एक समेकित फ्रेम...

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मॉडर्न साधु By aman

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कालू की पहाड़ी - 6 By RAAHULL SHARMA

कालू के गायब होते ही उन आठों दोस्तों की देह में एक अजीब सी ऐंठन पैदा हुई। उनके शरीरों से हड्डियां चटकने की आवाजें आ रही थीं।डेविड, जो बेंगलुरु में सबका लीडर बना फिरता था, अब उसकी च...

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वर्तमान नकलूसी गुरु और प्राचीन बोध By Vedanta Life Agyat Agyani

बोध पहले अनुभव है, बाद में शास्त्र। पहले भीतर एक घटनाक्रम घटता है — आनंद, मौन, संतोष, प्रस्फुटन, सहजता। बाद में बुद्धि उसे भाषा देती है, और वही भाषा शास्त्र, पद, दोहा, भजन, सूत्र,...

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साझा कल्याण By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति-(२) की व्याख्या *केवलाघो भवति केवलादी"ऋग्वेद --1/117/4भावार्थ --जो अकेले भोग करता है वह‌ पाप का‌ भागी होता है। पूरा श्लोक अर्थ सहितजो मंत्र उद्धृत किया है — "केवलाघो...

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मन – ऊर्जा और शरीर का मध्य सेतु By Vedanta Life Agyat Agyani

मन – ऊर्जा और शरीर का मध्य सेतु शरीर जड़ है।ऊर्जा चेतन है।इन दोनों के मध्य जो बोध उत्पन्न होता है, वही मन है।मन न पूर्णतः शरीर है, न पूर्णतः ऊर्जा।मन दोनों का सेतु है।इसी कारण मन द...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 86 By CHIRANJIT TEWARY

निलु के उपर आलोक दवाब बनाते हुए पूछता है:" निलु काका अब बोलिए क्या बात है। आप डरीये मत । हो सकता है इसमे हम आपकी कोई सहायता कर सके। आप हमे बेखोफ होकर बोलिए । "निलु के पास अब कोई चा...

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ऋग्वेद सूक्ति(3) की व्याख्या "न ऋते श्रान्तस्य सख्यायदेवा:"4/33/11भावार्थ -देवता(ईश्वर) श्रम करने वाले के सिवा और से मित्रता नहीं ‌करते।ऋग्वेद 4.33.11 का अंश:न ऋते श्रान्तस्य सख्या...

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शैतानी घाटी का सफर - 4 By RAAHULL SHARMA

ड्राइवर की सीट पर कालू बैठा था, लेकिन उसका चेहरा बिल्कुल सपाट था, जैसे वो किसी बेहोशी में हो।उसने गाड़ी का गियर डाला और बस तेज़ी से एक दूसरी भयानक और गहरी खाई की तरफ भगाने लगा।राम:...

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स्वर्ग का दरवाजा - 5 By Author Pawan Singh

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मुक्ति का पंचनीति मार्ग By prem chand hembram

मुक्ति का पंचनीति मार्ग — श्री श्री ठाकुर अनुकूलचन्द्र की जीवन-दृष्टि भारतीय दर्शन में "मुक्ति" या "मोक्ष" को मानव जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य माना गया है। सामान्यतः लोग मुक्ति को मृत्...

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अध्याय: देवक़ेड़ा का रहस्यछत्तीसगढ़ के भिलाई शहर की चकाचौंध से लगभग 200 किलोमीटर दूर, जहाँ मोबाइल के सिग्नल साथ छोड़ देते हैं और सड़कों की जगह ऊबड़-खाबड़ पगडंडियाँ ले लेती हैं, वहा...

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सन्मार्ग की ओर By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (6) की व्याख्या "अग्ने नय सुपथा राए अस्मान"ऋग्वेद--1/189/1भावार्थ,--हे ईश्वर (अग्नि देव) ! मुझे धन के लिए सन्मार्ग पर ले चलें।ऋग्वेद 1.189.1अग्ने नय सुपथा राये अस्म...

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मंत्र, बीज-नाम और मुक्ति: भारतीय दर्शन की वास्तविक दिशा By prem chand hembram

मंत्र, बीज-नाम और मुक्ति — भारतीय दर्शन की वास्तविक दिशा भारतीय दर्शन में "मुक्ति" या "मोक्ष" को मनुष्य जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य माना गया है। किंतु मुक्ति का अर्थ केवल संसार का त्या...

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ईश्वर-सखा कभी हारता नहीं By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (7) की व्याख्या "न यस्य हन्यते सखा न जीयते ऋगुवेद- --10/152/1भावार्थ --हे प्रभु! आपके भक्त को न कोई नष्ट कर सकता है और न जीत सकता है। इस  मंत्र का पूरा श्ल़ोक अर्थ...

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ऋगुवेद सूक्ति-- (8) की व्याख्या "न विन्धेश्य सुष्टतिम"ऋगुवेद --1/1/7भावार्थ --मै स्तुति से पार नहीं पा सकता। उद्धृत मन्त्र ऋग्वेद 1.7.7 का है। सही पाठ इस प्रकार है—तुञ्जे-तुञ्जे य...

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ऋगुवेद सूक्ति-- (9) की व्याख्या "महे चन त्वामंद्रिव:परां शुल्काय देयाम्"ऋगुवेद --8/1/5भावार्थ --हे ईश्वर ! मैं ‌आपको  किसी भी मूल्य पर नहीं छोड़ सकता।मंत्र का पदानुसार अर्थ इस प्रक...

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ईश्वर मेरा चरवाह है By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (10)की व्याख्या "न रिष्येत त्यावत: सखा"ऋगुवेद --1/91/8भावार्थ --हे ईश्वर !आपका सखा (भक्त) कभी‌नष्ट नहीं होता। ऋग्वेद १।९१।८ का पूरा मंत्र इस प्रकार है —त्वं नः सोम...

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समस्त लोकों का राजा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(11)की व्याख्या "एको विश्वस्य भुवनस्य राजा"ऋगुवेद --6/36/4भावार्थ -समस्त लोकों का वह‌ स्वामी एक है।इसका पूरा मंत्र अर्थ‌ सहितऋग्वेद ६.३६.४ का पूरा मंत्र इस प्रकार है...

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तू मेरा मैं तेरा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

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God Wishar - 6 By Ram Make

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आत्मबोध By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

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महाभारत भीतर का युद्ध ( तत्व मीमांसा) भाग 1 By prem chand hembram

महाभारत भीतर का युद्ध (तत्व मीमांसा) — भाग : ०१ मनुष्य सदियों से भगवान को खोज रहा है।कभी मंदिरों में,कभी तीर्थों में,कभी मूर्तियों में,कभी ग्रंथों में।पर शायद सबसे कठिन खोज अपने भी...

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सच्ची मित्रता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

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ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरण By Vedanta Life Agyat Agyani

ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरणअध्यात्म और जीवन-दर्शन के क्षेत्र में 'ब्रह्मचर्य' शब्द को अक्सर एक कठिन तपस्या, इंद्रिय-दमन और कठोर नियंत्रण के पर्याय के र...

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