आध्यात्मिक कथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and...Read More


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Featured Books

अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 5 By Shivraj Bhokare

दोहा:९अमृत केरी मोटरी, सिर से धरी उतारि।जाको खोजत जग फिर्या, सो तो घट के माहिं॥कथा: "खजाने की खोज"एक भिखारी बरसों से एक पुराने फटे हुए कंबल पर बैठकर भीख माँग रहा था। वह रोज़ सुबह से...

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चेतना का स्रोत By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३३) की व्याख्या"विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि"भावार्थ --हे प्रभु ! सारी विद्याओं का आदि‌ मूल‌ तू ही‌‌ है।मंत्र —विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि--2.23.2पदच्छेद-विश्वेष...

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महाभारत की कहानी - भाग 228 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२३२ युधिष्ठिर का अश्वमेध यज्ञ   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांधारी की धर्मपर...

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स्वर्ग का दरवाजा - 1 By Author Pawan Singh

अक्सर आपके मन में एक सवाल आता होगा कि आख़िर में क्षत्रिय में क्यों पैदा हुआ? या ब्राह्मण परिवार में क्यों पैदा हुआ उसका आख़िर मुझे क्या फ़ायदा?  इससे तो अच्छा मैं किसी भी जाति में...

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वह देवों का देव By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(34) की व्याख्या-- "देवो देवनामसि"ऋग्वेद- 1-94-13अर्थ--हे प्रभु ! तू देवों का देव है।विस्तृत भावार्थ :इस मन्त्र में परमात्मा की सर्वोच्चता बताई गई है। संसार में जो भी...

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Hero - 4 By Ram Make

लेकिन जतिन जैसे ही कमरे से बाहर निकलता है । अरुण जतिन से पूछता है। "जतिन महागुरु तुमसे क्या कह रहे थे। " फिर जतिन कहता है महागुरु ने कहा है। जो उन्होंने कहा है वह किसी को भी मत बता...

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मुक्ति की कामना By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३५) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भावार्थ--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः शब्दार्थसः – वह (परमात्...

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सर्वभूतहितेरत By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३६) की व्याख्या "मा नः प्रजा रीरिषः” ऋगुवेद--१०/१८/१अर्थ-- हे प्रभु ! तू हमारी सन्तानों को नष्ट न कर।शब्दार्थ--मा = मत / नहींनः = हमारीप्रजा = सन्तान, ल...

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सत्य की खोज By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३७) की व्याख्या "सत्या मनसो मे अस्तु"ऋगुवेद--१०/१२८/४भाव--मेरे‌‌ मन के भाव सच्चे हों।"सत्या मनसो मे अस्ति"पदच्छेद--सत्या । मनसः । मे । अस्ति ।शब्दार्थ--सत्या — सत्य...

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व्रत और उपवास By Kapil Tiwari

“व्रत” और “उपवास” ये शब्द आपने कई बार सुने होगे क्या आप इनका वास्तविक अर्थ जानते है? व्रत का अर्थ है “संकल्प ” जो हमेशा मन से निकलता है। और मन क्या है ?अभी अहम का घर है आज कल के लो...

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शत्रु हृदय में भय By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (३८) की व्याख्या --"भियं दधाना हृदयेषु शत्रुव:"ऋगुवेद--१०/८४/७भाव--शत्रु के हृदय में भय उत्पन्न कर दो।भियं दधाना हृदयेषु शत्रूणाम्।शाब्दिक अर्थ--भियम् — भयदधाना — ध...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 76 By CHIRANJIT TEWARY

सत्यजीत अपनी एक भोंहे उपर करते कहता है। > गए थे ..! गए थे का क्या मतलब मिरा। मैं तो वही था। और तुम मुझे दैखकर ऐसी भागी जैसे मैं तुम्हारा पति नही बल्की मैं कोई भूत हूँ। और फिर तुम व...

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साहस मत छोड़ो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति-- (39) की न धृष्णुं त्यजेत--९/९७/७ऋगुवेदभावार्थ --साहस मत छोड़ो।पूरा मूल मंत्र --यहाँ दिया गया संदर्भ ऋग्वेद 9.97.7 से जुड़ा है, जो ऋगुवेद के सोम मण्डल (नवम मण्डल) का...

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उसके समान कोई नहीं By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४०) की व्याख्यान त्वदन्यो मघवन्नस्य मर्दिता --ऋगुवेद--१/८४/१९भावार्थ --हे मघवन(ईश्वर) ! आपके सिवा  दूसरा सुख देने वाला कोई नहीं है।“न त्वदन्यो मघवन्नस्य मर्दिता”पद...

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परम ज्योति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्या ऋगुवेद सूक्ति--"आर्य ज्योतिरग्रा:"ऋगुवेद-७/३३/७भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है। मंत्र-“आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७भावार्थ--यह...

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श्रैष्ठ मार्ग By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्या ऋगुवेद सूक्ति--"आर्य ज्योतिरग्रा:"ऋगुवेद-७/३३/७भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है। मंत्र-“आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७भावार्थ--यह...

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भक्त प्रह्लाद - 20 By Siya Kashyap

इंद्र को दिया चारित्र्य दानअत्याचारी हिरण्यकशिपु के अंत के पश्चात् प्रह्लाद को राजसिंहासन प्राप्त हुआ। वे तीनों लोकों में अपने सद्गुणों एवं उज्ज्वल चारित्र्य के कारण प्रसिद्ध हो गए...

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पीड़ितों की मदद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

४ऋगुवेद सूक्ति-- (४२) की व्याख्या करो यत्र वरिवो बाधिताय।६/१८/१४भावार्थ --पीड़ितों की सहायता करने वाले हाथ ही उत्तम है। मंत्र +-ऋग्वेद ६/१८/१४—उसका भावार्थ “पीड़ितों की सहायता करने...

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प्रात जागरण का महत्व By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (43) की व्याख्या "प्रात: रत्नं प्रातरिश्वा  दधाति"ऋगुवेद-- 1/125/1भावार्थ--प्रात: जागने वाला प्रातकाल का ऐश्वर्य पाता है।मंत्र दिया है—“प्रात: रत्नं प्रातरिश्वा दधा...

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मूल विज्ञान की अवधारणा: सिद्धांतों से पूर्व का अस्तित् ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

अस्तित्ववेदांत 2.0: सृष्टि, मनुष्य और सिद्धांतों के निर्माण से पहले की 'मूल विज्ञान' और 'केवल समझ' की अवधारणा का शोधसमकालीन दार्शनिक परिदृश्य में 'वेदांत 2.0&#3...

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विचारों का संग्राम By prem chand hembram

विचारों का संग्राम(उपशीर्षक: क्या मैं आस्तिक हूँ?)प्रातःकाल का समय था।पूरा नगर अभी नींद की गोद में था, पर पंडित सम्पूर्ण झा के आँगन से संस्कृत श्लोकों की मधुर, स्पष्ट ध्वनि उठ रही...

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जल-छाया By Makvana Bhavek

जल-छायाहिमालय की गोद में बसा कुमाऊँ का छोटा सा गाँव धारकोट, जहाँ सुबह की हवा में देवदार की खुशबू घुली रहती थी और शाम ढलते ही पहाड़ों पर एक अजीब सा सन्नाटा उतर आता था। यहाँ के लोग म...

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प्रकाश की ओर बढ़ो। By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(45)की व्याख्या उद्वयं तमसस्परि ज्योतिष्पश्यन्तउत्तरे।ऋग्वेद- 1/115/1भाव--अन्धकार से ऊपर उठकर प्रकाश की ओर बढ़ो।यहाँ जो मन्त्र उद्धृत किया है, वह वास्तव में अत्यन्त...

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अन्दर से उत्साह उत्पन्न करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (65) की व्याख्या "उत्सं दुहन्ति"ऋगुवेद --9/112/1भावार्थ --अन्दर से उत्साह उत्पन्न करो। उत्सं दुहन्ति” (ऋग्वेद 9.112.1)इसका अर्थ समझने के लिए शब्दों और प्रसंग दोनों...

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अन्दर से विश्वास उत्पन्न करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद  सूक्ति-- (64)की व्याख्या "विश्वासं धेहि"ऋगुवेद --10/48/5भावार्थ --मन में विश्वास स्थापित करो। ऋग्वेद 10/48/5 — पूरा मंत्रमंत्र (संस्कृत):विश्वासं धेहि मे मनो यथा त्वं मघवन्...

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मन को स्थिर रखकर सत्य को जानना By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (63)की व्याख्या "धियं धारय"ऋगुवेद --8/1/5भावार्थ -- मन को स्थिर रखो।मंत्र:“धियं धारय” — ऋग्वेद 8.1.5 शब्दार्थ--धियं (धियः) = बुद्धि, मन, विचारशक्ति।धारय = ध...

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हार मत मानो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (62) की व्याख्या "न मृष्यसे"ऋगुवेद --1/116/2हार मत मानो। सामना करो।“न मृष्यसे” (ऋग्वेद 1/116/2) का अर्थ थोड़ा सूक्ष्म है, इसलिए इसे सही संदर्भ में समझना ज़रूरी है।श...

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व्याख्या ऋगुवेद की By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(61) की व्याख्या "बलं धेहि"ऋगुवेद --4/9/6भाव--शक्ति प्रदान करो।ऋग्वेद मण्डल 4, सूक्त 9, मन्त्र 6 का “बलं धेहि” पद अत्यन्त सारगर्भित है। मूल मन्त्र (ऋग्वेद 4/9/6)बलं...

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अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 5 By Shivraj Bhokare

दोहा:९अमृत केरी मोटरी, सिर से धरी उतारि।जाको खोजत जग फिर्या, सो तो घट के माहिं॥कथा: "खजाने की खोज"एक भिखारी बरसों से एक पुराने फटे हुए कंबल पर बैठकर भीख माँग रहा था। वह रोज़ सुबह से...

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चेतना का स्रोत By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३३) की व्याख्या"विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि"भावार्थ --हे प्रभु ! सारी विद्याओं का आदि‌ मूल‌ तू ही‌‌ है।मंत्र —विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि--2.23.2पदच्छेद-विश्वेष...

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महाभारत की कहानी - भाग 228 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२३२ युधिष्ठिर का अश्वमेध यज्ञ   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांधारी की धर्मपर...

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स्वर्ग का दरवाजा - 1 By Author Pawan Singh

अक्सर आपके मन में एक सवाल आता होगा कि आख़िर में क्षत्रिय में क्यों पैदा हुआ? या ब्राह्मण परिवार में क्यों पैदा हुआ उसका आख़िर मुझे क्या फ़ायदा?  इससे तो अच्छा मैं किसी भी जाति में...

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वह देवों का देव By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(34) की व्याख्या-- "देवो देवनामसि"ऋग्वेद- 1-94-13अर्थ--हे प्रभु ! तू देवों का देव है।विस्तृत भावार्थ :इस मन्त्र में परमात्मा की सर्वोच्चता बताई गई है। संसार में जो भी...

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Hero - 4 By Ram Make

लेकिन जतिन जैसे ही कमरे से बाहर निकलता है । अरुण जतिन से पूछता है। "जतिन महागुरु तुमसे क्या कह रहे थे। " फिर जतिन कहता है महागुरु ने कहा है। जो उन्होंने कहा है वह किसी को भी मत बता...

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मुक्ति की कामना By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३५) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भावार्थ--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः शब्दार्थसः – वह (परमात्...

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ऋगुवेद सूक्ति--(३६) की व्याख्या "मा नः प्रजा रीरिषः” ऋगुवेद--१०/१८/१अर्थ-- हे प्रभु ! तू हमारी सन्तानों को नष्ट न कर।शब्दार्थ--मा = मत / नहींनः = हमारीप्रजा = सन्तान, ल...

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सत्य की खोज By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३७) की व्याख्या "सत्या मनसो मे अस्तु"ऋगुवेद--१०/१२८/४भाव--मेरे‌‌ मन के भाव सच्चे हों।"सत्या मनसो मे अस्ति"पदच्छेद--सत्या । मनसः । मे । अस्ति ।शब्दार्थ--सत्या — सत्य...

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व्रत और उपवास By Kapil Tiwari

“व्रत” और “उपवास” ये शब्द आपने कई बार सुने होगे क्या आप इनका वास्तविक अर्थ जानते है? व्रत का अर्थ है “संकल्प ” जो हमेशा मन से निकलता है। और मन क्या है ?अभी अहम का घर है आज कल के लो...

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शत्रु हृदय में भय By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (३८) की व्याख्या --"भियं दधाना हृदयेषु शत्रुव:"ऋगुवेद--१०/८४/७भाव--शत्रु के हृदय में भय उत्पन्न कर दो।भियं दधाना हृदयेषु शत्रूणाम्।शाब्दिक अर्थ--भियम् — भयदधाना — ध...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 76 By CHIRANJIT TEWARY

सत्यजीत अपनी एक भोंहे उपर करते कहता है। > गए थे ..! गए थे का क्या मतलब मिरा। मैं तो वही था। और तुम मुझे दैखकर ऐसी भागी जैसे मैं तुम्हारा पति नही बल्की मैं कोई भूत हूँ। और फिर तुम व...

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साहस मत छोड़ो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति-- (39) की न धृष्णुं त्यजेत--९/९७/७ऋगुवेदभावार्थ --साहस मत छोड़ो।पूरा मूल मंत्र --यहाँ दिया गया संदर्भ ऋग्वेद 9.97.7 से जुड़ा है, जो ऋगुवेद के सोम मण्डल (नवम मण्डल) का...

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उसके समान कोई नहीं By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४०) की व्याख्यान त्वदन्यो मघवन्नस्य मर्दिता --ऋगुवेद--१/८४/१९भावार्थ --हे मघवन(ईश्वर) ! आपके सिवा  दूसरा सुख देने वाला कोई नहीं है।“न त्वदन्यो मघवन्नस्य मर्दिता”पद...

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परम ज्योति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्या ऋगुवेद सूक्ति--"आर्य ज्योतिरग्रा:"ऋगुवेद-७/३३/७भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है। मंत्र-“आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७भावार्थ--यह...

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श्रैष्ठ मार्ग By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्या ऋगुवेद सूक्ति--"आर्य ज्योतिरग्रा:"ऋगुवेद-७/३३/७भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है। मंत्र-“आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७भावार्थ--यह...

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भक्त प्रह्लाद - 20 By Siya Kashyap

इंद्र को दिया चारित्र्य दानअत्याचारी हिरण्यकशिपु के अंत के पश्चात् प्रह्लाद को राजसिंहासन प्राप्त हुआ। वे तीनों लोकों में अपने सद्गुणों एवं उज्ज्वल चारित्र्य के कारण प्रसिद्ध हो गए...

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पीड़ितों की मदद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

४ऋगुवेद सूक्ति-- (४२) की व्याख्या करो यत्र वरिवो बाधिताय।६/१८/१४भावार्थ --पीड़ितों की सहायता करने वाले हाथ ही उत्तम है। मंत्र +-ऋग्वेद ६/१८/१४—उसका भावार्थ “पीड़ितों की सहायता करने...

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ऋगुवेद सूक्ति-- (43) की व्याख्या "प्रात: रत्नं प्रातरिश्वा  दधाति"ऋगुवेद-- 1/125/1भावार्थ--प्रात: जागने वाला प्रातकाल का ऐश्वर्य पाता है।मंत्र दिया है—“प्रात: रत्नं प्रातरिश्वा दधा...

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मूल विज्ञान की अवधारणा: सिद्धांतों से पूर्व का अस्तित् ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

अस्तित्ववेदांत 2.0: सृष्टि, मनुष्य और सिद्धांतों के निर्माण से पहले की 'मूल विज्ञान' और 'केवल समझ' की अवधारणा का शोधसमकालीन दार्शनिक परिदृश्य में 'वेदांत 2.0&#3...

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विचारों का संग्राम By prem chand hembram

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जल-छाया By Makvana Bhavek

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ऋगुवेद सूक्ति--(45)की व्याख्या उद्वयं तमसस्परि ज्योतिष्पश्यन्तउत्तरे।ऋग्वेद- 1/115/1भाव--अन्धकार से ऊपर उठकर प्रकाश की ओर बढ़ो।यहाँ जो मन्त्र उद्धृत किया है, वह वास्तव में अत्यन्त...

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अन्दर से उत्साह उत्पन्न करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

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ऋगुवेद  सूक्ति-- (64)की व्याख्या "विश्वासं धेहि"ऋगुवेद --10/48/5भावार्थ --मन में विश्वास स्थापित करो। ऋग्वेद 10/48/5 — पूरा मंत्रमंत्र (संस्कृत):विश्वासं धेहि मे मनो यथा त्वं मघवन्...

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ऋगुवेद सूक्ति-- (63)की व्याख्या "धियं धारय"ऋगुवेद --8/1/5भावार्थ -- मन को स्थिर रखो।मंत्र:“धियं धारय” — ऋग्वेद 8.1.5 शब्दार्थ--धियं (धियः) = बुद्धि, मन, विचारशक्ति।धारय = ध...

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हार मत मानो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

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व्याख्या ऋगुवेद की By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(61) की व्याख्या "बलं धेहि"ऋगुवेद --4/9/6भाव--शक्ति प्रदान करो।ऋग्वेद मण्डल 4, सूक्त 9, मन्त्र 6 का “बलं धेहि” पद अत्यन्त सारगर्भित है। मूल मन्त्र (ऋग्वेद 4/9/6)बलं...

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