आध्यात्मिक कथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and...Read More


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अमृत वाणी - संत वाणी - 21 By Nitya Oswal

हम अक्सर सोचते हैं कि बहुत बड़े-बड़े धार्मिक अनुष्ठान कर लेना, शरीर पर विशेष तरह के तिलक लगा लेना, या दिन-भर केवल मंदिर-मस्जिद के चक्कर काट लेना ही सबसे बड़ी भक्ति है। हम बाहर से त...

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दान अर्थात् क्या? उसका महत्त्व क्या है? By Nitya Oswal

दान यानी औरों को अपना खुद का कुछ भी देकर उन्हें सुख देना वह।किसी भी दूसरे जीव को, चाहे वो मनुष्य हो या दूसरे कोई प्राणी, उन्हें सुख देना वह दान कहलाता है। हमारे पास जो भी है, उसे द...

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विष्णु परिवार: जीवन शैली - 1 By Shivam Kumar Pandey

"समाज का सुधार केवल विचार से ही संभव है,क्रांति नहीं, विचार क्रांति चाहिए।"प्रस्तावनाभारत एक महान देश है, लेकिन एक बहुत बड़ी समस्या से जूझ रहा है - जाति-प्रथा। हजारों साल से यह व्य...

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सत्य की खोज : मनुष्य सृष्टि और आत्मबोध By Chandni choudhary

सत्य की खोज : मनुष्य, सृष्टि और आत्मबोधएक दार्शनिक चिंतनलेखिका — चाँदनीजन्म से मृत्यु तक चलने वाली इस यात्रा में मनुष्य असंख्य कर्म करता है। वह हँसता है, रोता है, प्रेम करता है, सं...

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श्री कृष्ण का चमत्कार By Anamika

एक बार की बात है। एक  गाँव में 1 वृद्ध आदमी रहता था वो दिल का बहुत साफ था। वो कभी भी किसी से नहीं लड़ता था। उसका नाम राम था।   वो बिल्कुल अपने नाम जैसा ही था शांत धैर्यवान मीठे स्व...

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मृत्यु के बाद क्या होता है ? By Nitya Oswal

मृत्यु के बाद आत्मा एक देह छोड़ता है और दूसरी तरफ़ जहाँ पिता का वीर्य और माता का रज दोनों के इकट्ठा होने का संजोग हो वहाँ सीधे ही गर्भ में प्रवेश करता है। तो हमें प्रश्न होता है कि न...

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प्राणोयज्ञेन कल्पताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (12) की व्याख्याप्राणोयज्ञेन कल्पताम्यजुर्वेद --11/8,4भावार्थ --हे ईश्वर! हमारे प्राण बलिष्ठ हों।वेदों में प्रमाण--"प्राणो यज्ञेन कल्पताम्" (यजुर्वेद 11.83) का भाव...

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कालू की पहाड़ी - 14 By RAAHULL SHARMA

बुजुर्ग की बातें सुनकर कार्तिक के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। बाबा की आँखें अब लाल हो चुकी थीं और उनकी आवाज़ किसी गहरी गुफा से आती हुई प्रतीत हो रही थी।उन्होंने कार्तिक का कंधा ज़ोर स...

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आयुर्यज्ञेन कल्षताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति(11) की व्याख्या "आयुर्यज्ञेन कल्पताम्"यजुर्वेद--11/84भावार्थ--हे ईश्वर! हमारी आयु श्रेष्ठ बने। यजुर्वेद 11/84 (कुछ पाठ-परंपराओं में क्रमांकन भिन्न हो सकता है) का पू...

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ऊर्जं नः धेहि By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (10) की व्याख्या"ऊर्जं नः धेहि"यजुर्वेद --11/83भावार्थ -- हे ईश्वर! हमें शक्ति प्रदान करें। पूरा मंत्र अर्थ सहित।यजुर्वेद 11.83 का मंत्र (वाजसनेयी संहिता) इस प्रकार...

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विद्या और अविद्या By Kapil Tiwari

“विद्या और अविद्या किसको कहते हैं?” तो बड़ा सारगर्भित और संक्षिप्त उत्तर देता है उपनिषद्: “अहंभाव की जन्मदात्री अविद्या है और जिसके द्वारा अहंभाव समाप्त हो जाए, वही विद्या है।“-सर्व...

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ग्रहों का सहज स्वभाव। और आपकी FREE WILL. By yeash shah

                  ग्रहों का बाह्य प्रभाव संपूर्ण पृथ्वी पर होता है, परन्तु उनका आंतरिक प्रभाव मनुष्य के मस्तिष्क से लेकर उसकी नाभि तक समझाया गया है। मस्तिष्क प्रतिक्रिया और प्रतिबा...

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प्र प्र दातारं तारिष By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (9) की व्याख्या"प्र प्र दातारं तारिष"यजुर्वेद --11/83भावार्थ --हे ईश्वर ! अन्न देने वाले की रक्षा करो। पूरा मंत्र अर्थ सहितशुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन संहिता) अध्याय...

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बचपन की मौलिकता और मौलिक प्रश्नों की मृत्यु By Vedanta Life Agyat Agyani

बचपन की मौलिकता और मौलिक प्रश्नों की मृत्यु   ​(वेदांत 2.0 का एक दृष्टिकोण)   ​मनुष्य जन्म के समय किसी धर्म, ईश्वर, आत्मा, स्वर्ग, नरक, मोक्ष, पाप या पुण्य की अवधारणा लेकर पैदा नही...

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रामायण - वेदांत 2.0 Life By Vedanta Life Agyat Agyani

  राम दुःखी नहीं थे, हमारी दृष्टि दुःखी है   रामायण - वेदांत 2.0  Life   दृष्टिर्बन्धनकारिणी, दृष्टिरेव विमोचिनी।यथा दृष्टिस्तथा सृष्टिः, यथा चेतना तथा गतिः॥     लोग कहते हैं कि रा...

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मार्ग अनेक हो सकते हैं, पर बोध एक है। By Vedanta Life Agyat Agyani

 मार्ग अनेक हो सकते हैं, पर बोध एक है।  सूत्र: एकोनशतं मार्गा बोधस्त्वेकः।मन्थनाद् विवेकः विवेकाद् बोधः।बोधे सर्वे मार्गाः कृतार्थतां यान्ति॥   परिचय -  वेदांत 2.0 धार्मिक और आध्या...

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अन्नस्य न: धेहि By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति(8) की व्याख्य"अन्नस्य न‌: देहि"शुक्ल यजुर्वेद --11/83हे ईश्वर ! हमें उतम अन्न प्रदान करो। पूरा मंत्र अर्थ सहितशुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन शाखा) के अध्याय 11, मंत्र 8...

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अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 11 By Shivraj Bhokare

दोहा : 21कबीर माया तजी तो क्या भया, मान तजा नहीं जाय।मान बड़े मुनिवर गिले, मान सबन को खाय॥ कहानी: सोने का कमंडल और लंगोट का गौरवस्वामी विरक्तनंद ने जवानी में ही अपना आलीशान घर और भ...

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जीवन ही अंतिम सत्य By Vedanta Life Agyat Agyani

जीवन ही अंतिम सत्य जीवन ही ईश्वर है। जीवन से अलग कोई दूसरा ईश्वर, आत्मा या परमात्मा नहीं। जीवन स्वयं ही दिव्यता की अभिव्यक्ति है। जब जीवन को उसकी संपूर्ण गहराई में जिया जाता है, तब...

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वयं राष्ट्रे जागृयाम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (7) की व्याख्या "वयं राष्ट्रे जागृयाम् पुरोहित:*यजुर्वेद --9/23भावार्थ--हम राष्ट्र की उन्नति और जागरूकता के लिए सदैव तत्पर रहें। जिस मंत्र का अंतिम भाग "वयं राष्ट्र...

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अभय दान By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (6) की व्याख्या"मा अघशंसः°यजुर्वेद-- 1/1हे ईश्वर! दुष्ट मेरा अहगत न करें। पूरा मंत्र अर्थ सहितआपके द्वारा उद्धृत "मा अघशंसः" वास्तव में यजुर्वेद 1.1 का एक अंश है। प...

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चेतना का त्रिकोण By Vedanta Life Agyat Agyani

चेतना का त्रिकोण वेदांत 2.0द्रष्टा • दृश्य • दर्शनद्वन्द्व, द्वैत और अद्वैत का एक समकालीन दर्शन चेतना का त्रिकोण एक समकालीन दार्शनिक ग्रंथ है, जो वेदांत 2.0 के अंतर्गत चेतना, अनुभव...

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निगलते पहाड़ By Kapil Tiwari

महज आठ साल का ही तो था मैं, जब मैंने अपने खेत जाते समय अपनी दादी से पूछा था—"ये पहाड़ कैसे बनते हैं?"दादी मुझे बचपन से ही ढेर सारी कहानियाँ सुनाया करती थीं। उनकी कहानियों में शेर,...

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ऊर्जा त्बा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (5) की व्याख्या"इषे त्वा ऊर्जे त्वा"यजुर्वेद --1/1भावार्थ =-जीवन समृद्ध और शक्तिशाली बने। इसका पूरा मंत्र अर्थ सहितयजुर्वेद 1.1 का प्रथम मंत्रइषे त्वा ऊर्जे त्व...

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परिमाग्ने By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (3) की व्याख्या परिमाग्ने दुश्चरिताद बयजुर्वेद--4/28भावार्थ--हे ईश्वर!आप ह#में दुष्ट आचरण से बचाएँ। इसका पूरा मंत्र अर्थ सहितयजुर्वेद (शुक्ल यजुर्वेद) अध्याय 4, मंत...

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मा भैर्मा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (4) की व्याख्या मा भेर्मा संविक्था अऊर्ज धतस्व"यजुर्वेद --6/35 भावार्थ --मत डर। मत घबरा। धैर्य धारण कर। इसका पूरा मंत्र यजुर्वेद 6.35 का मंत्र इस प्रकार है—मा भेर्म...

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सदाचार By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (3) की व्याख्या परिमाग्ने दुश्चरिताद बाधस्व"यजुर्वेद--4/28भावार्थ--हे ईश्वर!आप हमें दुष्ट आचरण से बचाएँ। इसका पूरा मंत्र अर्थ सहितयजुर्वेद (शुक्ल यजुर्वेद) अध्याय 4...

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कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 3 By miss k

अब आपको पता ही होगा कि दृष्टि के पिता मोहनलाल को उसकी पढ़ाई और उनके झुठ के बारे में पता चल गया था। दृष्टि के पिता एक गुस्से वाले होंने के साथ ही बहुत चालाक है। उन्हें पता है कि जबर...

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स्वर्ग का दरवाजा - 8 By Author Pawan Singh

अध्याय - 8 आर्यावर्त और द्रविड़ में विभाजन  अक्सर ये बहस सुनने को आती है जहां हम आर्यन को विदेशी और द्रविड़ को सच्चे भारतीय मानते हैं। लेकिन क्या आर्यन सच में विदेशी हैं? 19वीं और...

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चेतन और अवचेतन मन By Kapil Tiwari

सिगमंड फ्रायड के अनुसार मनुष्य का मन एक नहीं होता, बल्कि यह अलग-अलग स्तरों पर काम करता है। उन्होंने मन को तीन हिस्सों में समझाया—इदं, अहम् और पराअहम्। इन तीनों के बीच का संबंध ही ह...

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धर्म में पवित्रता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (2) की व्याख्या "तनूपा  अग्निःपातु दुरितादलद्यात"यजुर्वेद--4/15ईश्वर हमें यह मंत्र यजुर्वेद 4.15 का अंश है। इसका भाव अत्यंत प्रेरणादायक है।मंत्र"तनूपा अग्ने! पातु द...

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शैतानी घाटी का सफर - 11 By RAAHULL SHARMA

पूरी घाटी में अब वो पुरानी सड़ांध और खौफनाक सन्नाटा नहीं था। जैसे ही उस महा-दानव की राख हवा में उड़ी, पूरी घाटी ने अपनी करवट बदल ली।वह पथरीली और सुखी मिट्टी अब मखमली हरी घास में तब्द...

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Astrological Remedies पर प्रश्नउत्तर By yeash shah

(1)  *प्रश्न : क्या टोने टोटके काम करते है?* उत्तर: टोने टोटके, शगुन अपशगुन, यह सब पारंपरिक लोकवाद के आधार पर समाज में प्रचलित है। और इसके पीछे केवल मान्यताओं का प्रभाव है। जब कोई...

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त्रयम्बकं यजामहे By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति~(1) की व्याख्या"त्रयम्बकं यजामहे"त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टि वर्धनम्"यजुर्वेद --3/60भावार्थ --हम तीन नेत्रों वाले भगवान् शिव की उपासना करते हैं जो सुगन्ध की भा...

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सदगुरू और सत दीक्षा By prem chand hembram

जयगुरु कलियुग में मनुष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता — सत्य की खोज, सद्गुरु और सत्-दीक्षाप्रस्तावनाआज का मनुष्य विज्ञान और तकनीक के युग में जी रहा है। उसने आकाश की ऊँचाइयों को छुआ है, सम...

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प्रेम By Kapil Tiwari

प्रेम-प्रेम सब कोइ कहैं, प्रेम न चीन्है कोय।जा मारग साहिब मिलै, प्रेम कहावै सोय॥~ कबीर साहबप्रेम प्रेम सब कहते हैं, पर प्रेम को सच में बहुत कम लोग जानते हैं। प्रेम कोई शब्द नहीं, क...

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कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 4 By miss k

आज में ऐसी बातें करने जा रही हुं जो शायद सभी के मन में कभी न कभी आई ही होगी ‌। या तो कोई किसी को बताना जरूरी नहीं समझते या फिर शर्म के कारण कहते नहीं है अक्सर में भी ऐसी बातें किसी...

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वेदान्त 2.0 - भाग 42 By Vedanta Life Agyat Agyani

वेदांत 2.0 लाइफ: अस्तित्व-आधारित जीवन सिद्धांतपुस्तक का मुख्य संदेश (The Core Hook):"यह पुस्तक पढ़ने की नहीं, जीने की पुस्तक है। यह आपको किसी निष्कर्ष पर विश्वास करने के लिए नहीं क...

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योग क्षेमं वहाम्यहम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (१५) की व्याख्या तवेद्धि सख्यम् स्तृतम्।   १/१५/५भावार्थ -प्रभो ! आपकी ही मैत्री सच्ची है। पद-विश्लेषण--तव = तेरा / आपकाएव इद्धि (एव इद्धि/एव हि) = निश्चय ह...

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सात फेरो का वादा By kanta

---*Chapter 1: कीचड़ और किस्मत ~ 900 शब्द*जयपुर में सावन की पहली बारिश थी। सड़कें तालाब बन गई थीं। अनाया शर्मा, 24 साल। एक MNC में HR Executive। सैलरी 25 हजार। घर में पापा टीचर, मम...

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देव मार्ग By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (56) की व्याख्या " भद्रं कर्णेभि: श्रृणुयाम देव:"ऋगुवेद --1/89/8अर्थ--  हे ईश्वर ! हम अपने कानों से शुभ सुनें।यह ऋग्वेद का अत्यंत प्रसिद्ध शांति मंत्र है:मंत्र (ऋग्...

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सीक्रेट:वो लड़की - 2 By kanta

---*नोवेल: "सीक्रेट: वो लड़की"*  *Chapter 2: "मिस्टीरियस गर्ल" कॉलेज का सालाना फेयर। पूरे कैंपस में रंग-बिरंगी लाइटें, म्यूजिक, खाने की खुशबू और शोर। दिल्ली का सबसे महंगा कॉलेज था।...

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ऋतं च सत्यं च By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (55) की व्याख्या "ऋतं च सत्यं च"ऋगुवेद--10/190/1अर्थ --नियम और सत्य ही (जगत का) आधार है।आपने जो मंत्र दिया है — “ऋतं च सत्यं च” — यह ऋग्वेद के मंडल 10, सूक्त 190, म...

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आत्मीय सुख By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२०) की व्याख्या "कृत्वा चेतिष्ठो विश्वार्म्भूत"" १/६५/५भावार्थ --पदच्छेद (संकेतात्मक)कृत्वा । चेतिष्ठः । विश्वम् । अर्मभूत् (अर्म = स्नेह/हित)भावार्थ--प्रात: जा...

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परलोक By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(35) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भाव--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः ।शब्दार्थसः – वह (परमात्मा)...

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अमृत वाणी - संत वाणी - 21 By Nitya Oswal

हम अक्सर सोचते हैं कि बहुत बड़े-बड़े धार्मिक अनुष्ठान कर लेना, शरीर पर विशेष तरह के तिलक लगा लेना, या दिन-भर केवल मंदिर-मस्जिद के चक्कर काट लेना ही सबसे बड़ी भक्ति है। हम बाहर से त...

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दान अर्थात् क्या? उसका महत्त्व क्या है? By Nitya Oswal

दान यानी औरों को अपना खुद का कुछ भी देकर उन्हें सुख देना वह।किसी भी दूसरे जीव को, चाहे वो मनुष्य हो या दूसरे कोई प्राणी, उन्हें सुख देना वह दान कहलाता है। हमारे पास जो भी है, उसे द...

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विष्णु परिवार: जीवन शैली - 1 By Shivam Kumar Pandey

"समाज का सुधार केवल विचार से ही संभव है,क्रांति नहीं, विचार क्रांति चाहिए।"प्रस्तावनाभारत एक महान देश है, लेकिन एक बहुत बड़ी समस्या से जूझ रहा है - जाति-प्रथा। हजारों साल से यह व्य...

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सत्य की खोज : मनुष्य सृष्टि और आत्मबोध By Chandni choudhary

सत्य की खोज : मनुष्य, सृष्टि और आत्मबोधएक दार्शनिक चिंतनलेखिका — चाँदनीजन्म से मृत्यु तक चलने वाली इस यात्रा में मनुष्य असंख्य कर्म करता है। वह हँसता है, रोता है, प्रेम करता है, सं...

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श्री कृष्ण का चमत्कार By Anamika

एक बार की बात है। एक  गाँव में 1 वृद्ध आदमी रहता था वो दिल का बहुत साफ था। वो कभी भी किसी से नहीं लड़ता था। उसका नाम राम था।   वो बिल्कुल अपने नाम जैसा ही था शांत धैर्यवान मीठे स्व...

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मृत्यु के बाद क्या होता है ? By Nitya Oswal

मृत्यु के बाद आत्मा एक देह छोड़ता है और दूसरी तरफ़ जहाँ पिता का वीर्य और माता का रज दोनों के इकट्ठा होने का संजोग हो वहाँ सीधे ही गर्भ में प्रवेश करता है। तो हमें प्रश्न होता है कि न...

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प्राणोयज्ञेन कल्पताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (12) की व्याख्याप्राणोयज्ञेन कल्पताम्यजुर्वेद --11/8,4भावार्थ --हे ईश्वर! हमारे प्राण बलिष्ठ हों।वेदों में प्रमाण--"प्राणो यज्ञेन कल्पताम्" (यजुर्वेद 11.83) का भाव...

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कालू की पहाड़ी - 14 By RAAHULL SHARMA

बुजुर्ग की बातें सुनकर कार्तिक के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। बाबा की आँखें अब लाल हो चुकी थीं और उनकी आवाज़ किसी गहरी गुफा से आती हुई प्रतीत हो रही थी।उन्होंने कार्तिक का कंधा ज़ोर स...

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आयुर्यज्ञेन कल्षताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति(11) की व्याख्या "आयुर्यज्ञेन कल्पताम्"यजुर्वेद--11/84भावार्थ--हे ईश्वर! हमारी आयु श्रेष्ठ बने। यजुर्वेद 11/84 (कुछ पाठ-परंपराओं में क्रमांकन भिन्न हो सकता है) का पू...

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ऊर्जं नः धेहि By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (10) की व्याख्या"ऊर्जं नः धेहि"यजुर्वेद --11/83भावार्थ -- हे ईश्वर! हमें शक्ति प्रदान करें। पूरा मंत्र अर्थ सहित।यजुर्वेद 11.83 का मंत्र (वाजसनेयी संहिता) इस प्रकार...

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विद्या और अविद्या By Kapil Tiwari

“विद्या और अविद्या किसको कहते हैं?” तो बड़ा सारगर्भित और संक्षिप्त उत्तर देता है उपनिषद्: “अहंभाव की जन्मदात्री अविद्या है और जिसके द्वारा अहंभाव समाप्त हो जाए, वही विद्या है।“-सर्व...

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ग्रहों का सहज स्वभाव। और आपकी FREE WILL. By yeash shah

                  ग्रहों का बाह्य प्रभाव संपूर्ण पृथ्वी पर होता है, परन्तु उनका आंतरिक प्रभाव मनुष्य के मस्तिष्क से लेकर उसकी नाभि तक समझाया गया है। मस्तिष्क प्रतिक्रिया और प्रतिबा...

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प्र प्र दातारं तारिष By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (9) की व्याख्या"प्र प्र दातारं तारिष"यजुर्वेद --11/83भावार्थ --हे ईश्वर ! अन्न देने वाले की रक्षा करो। पूरा मंत्र अर्थ सहितशुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन संहिता) अध्याय...

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बचपन की मौलिकता और मौलिक प्रश्नों की मृत्यु By Vedanta Life Agyat Agyani

बचपन की मौलिकता और मौलिक प्रश्नों की मृत्यु   ​(वेदांत 2.0 का एक दृष्टिकोण)   ​मनुष्य जन्म के समय किसी धर्म, ईश्वर, आत्मा, स्वर्ग, नरक, मोक्ष, पाप या पुण्य की अवधारणा लेकर पैदा नही...

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रामायण - वेदांत 2.0 Life By Vedanta Life Agyat Agyani

  राम दुःखी नहीं थे, हमारी दृष्टि दुःखी है   रामायण - वेदांत 2.0  Life   दृष्टिर्बन्धनकारिणी, दृष्टिरेव विमोचिनी।यथा दृष्टिस्तथा सृष्टिः, यथा चेतना तथा गतिः॥     लोग कहते हैं कि रा...

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मार्ग अनेक हो सकते हैं, पर बोध एक है। By Vedanta Life Agyat Agyani

 मार्ग अनेक हो सकते हैं, पर बोध एक है।  सूत्र: एकोनशतं मार्गा बोधस्त्वेकः।मन्थनाद् विवेकः विवेकाद् बोधः।बोधे सर्वे मार्गाः कृतार्थतां यान्ति॥   परिचय -  वेदांत 2.0 धार्मिक और आध्या...

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अन्नस्य न: धेहि By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति(8) की व्याख्य"अन्नस्य न‌: देहि"शुक्ल यजुर्वेद --11/83हे ईश्वर ! हमें उतम अन्न प्रदान करो। पूरा मंत्र अर्थ सहितशुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन शाखा) के अध्याय 11, मंत्र 8...

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अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 11 By Shivraj Bhokare

दोहा : 21कबीर माया तजी तो क्या भया, मान तजा नहीं जाय।मान बड़े मुनिवर गिले, मान सबन को खाय॥ कहानी: सोने का कमंडल और लंगोट का गौरवस्वामी विरक्तनंद ने जवानी में ही अपना आलीशान घर और भ...

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जीवन ही अंतिम सत्य By Vedanta Life Agyat Agyani

जीवन ही अंतिम सत्य जीवन ही ईश्वर है। जीवन से अलग कोई दूसरा ईश्वर, आत्मा या परमात्मा नहीं। जीवन स्वयं ही दिव्यता की अभिव्यक्ति है। जब जीवन को उसकी संपूर्ण गहराई में जिया जाता है, तब...

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वयं राष्ट्रे जागृयाम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (7) की व्याख्या "वयं राष्ट्रे जागृयाम् पुरोहित:*यजुर्वेद --9/23भावार्थ--हम राष्ट्र की उन्नति और जागरूकता के लिए सदैव तत्पर रहें। जिस मंत्र का अंतिम भाग "वयं राष्ट्र...

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अभय दान By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (6) की व्याख्या"मा अघशंसः°यजुर्वेद-- 1/1हे ईश्वर! दुष्ट मेरा अहगत न करें। पूरा मंत्र अर्थ सहितआपके द्वारा उद्धृत "मा अघशंसः" वास्तव में यजुर्वेद 1.1 का एक अंश है। प...

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चेतना का त्रिकोण By Vedanta Life Agyat Agyani

चेतना का त्रिकोण वेदांत 2.0द्रष्टा • दृश्य • दर्शनद्वन्द्व, द्वैत और अद्वैत का एक समकालीन दर्शन चेतना का त्रिकोण एक समकालीन दार्शनिक ग्रंथ है, जो वेदांत 2.0 के अंतर्गत चेतना, अनुभव...

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निगलते पहाड़ By Kapil Tiwari

महज आठ साल का ही तो था मैं, जब मैंने अपने खेत जाते समय अपनी दादी से पूछा था—"ये पहाड़ कैसे बनते हैं?"दादी मुझे बचपन से ही ढेर सारी कहानियाँ सुनाया करती थीं। उनकी कहानियों में शेर,...

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ऊर्जा त्बा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (5) की व्याख्या"इषे त्वा ऊर्जे त्वा"यजुर्वेद --1/1भावार्थ =-जीवन समृद्ध और शक्तिशाली बने। इसका पूरा मंत्र अर्थ सहितयजुर्वेद 1.1 का प्रथम मंत्रइषे त्वा ऊर्जे त्व...

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परिमाग्ने By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (3) की व्याख्या परिमाग्ने दुश्चरिताद बयजुर्वेद--4/28भावार्थ--हे ईश्वर!आप ह#में दुष्ट आचरण से बचाएँ। इसका पूरा मंत्र अर्थ सहितयजुर्वेद (शुक्ल यजुर्वेद) अध्याय 4, मंत...

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मा भैर्मा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (4) की व्याख्या मा भेर्मा संविक्था अऊर्ज धतस्व"यजुर्वेद --6/35 भावार्थ --मत डर। मत घबरा। धैर्य धारण कर। इसका पूरा मंत्र यजुर्वेद 6.35 का मंत्र इस प्रकार है—मा भेर्म...

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सदाचार By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (3) की व्याख्या परिमाग्ने दुश्चरिताद बाधस्व"यजुर्वेद--4/28भावार्थ--हे ईश्वर!आप हमें दुष्ट आचरण से बचाएँ। इसका पूरा मंत्र अर्थ सहितयजुर्वेद (शुक्ल यजुर्वेद) अध्याय 4...

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कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 3 By miss k

अब आपको पता ही होगा कि दृष्टि के पिता मोहनलाल को उसकी पढ़ाई और उनके झुठ के बारे में पता चल गया था। दृष्टि के पिता एक गुस्से वाले होंने के साथ ही बहुत चालाक है। उन्हें पता है कि जबर...

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स्वर्ग का दरवाजा - 8 By Author Pawan Singh

अध्याय - 8 आर्यावर्त और द्रविड़ में विभाजन  अक्सर ये बहस सुनने को आती है जहां हम आर्यन को विदेशी और द्रविड़ को सच्चे भारतीय मानते हैं। लेकिन क्या आर्यन सच में विदेशी हैं? 19वीं और...

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चेतन और अवचेतन मन By Kapil Tiwari

सिगमंड फ्रायड के अनुसार मनुष्य का मन एक नहीं होता, बल्कि यह अलग-अलग स्तरों पर काम करता है। उन्होंने मन को तीन हिस्सों में समझाया—इदं, अहम् और पराअहम्। इन तीनों के बीच का संबंध ही ह...

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धर्म में पवित्रता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (2) की व्याख्या "तनूपा  अग्निःपातु दुरितादलद्यात"यजुर्वेद--4/15ईश्वर हमें यह मंत्र यजुर्वेद 4.15 का अंश है। इसका भाव अत्यंत प्रेरणादायक है।मंत्र"तनूपा अग्ने! पातु द...

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शैतानी घाटी का सफर - 11 By RAAHULL SHARMA

पूरी घाटी में अब वो पुरानी सड़ांध और खौफनाक सन्नाटा नहीं था। जैसे ही उस महा-दानव की राख हवा में उड़ी, पूरी घाटी ने अपनी करवट बदल ली।वह पथरीली और सुखी मिट्टी अब मखमली हरी घास में तब्द...

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Astrological Remedies पर प्रश्नउत्तर By yeash shah

(1)  *प्रश्न : क्या टोने टोटके काम करते है?* उत्तर: टोने टोटके, शगुन अपशगुन, यह सब पारंपरिक लोकवाद के आधार पर समाज में प्रचलित है। और इसके पीछे केवल मान्यताओं का प्रभाव है। जब कोई...

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त्रयम्बकं यजामहे By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति~(1) की व्याख्या"त्रयम्बकं यजामहे"त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टि वर्धनम्"यजुर्वेद --3/60भावार्थ --हम तीन नेत्रों वाले भगवान् शिव की उपासना करते हैं जो सुगन्ध की भा...

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सदगुरू और सत दीक्षा By prem chand hembram

जयगुरु कलियुग में मनुष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता — सत्य की खोज, सद्गुरु और सत्-दीक्षाप्रस्तावनाआज का मनुष्य विज्ञान और तकनीक के युग में जी रहा है। उसने आकाश की ऊँचाइयों को छुआ है, सम...

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प्रेम By Kapil Tiwari

प्रेम-प्रेम सब कोइ कहैं, प्रेम न चीन्है कोय।जा मारग साहिब मिलै, प्रेम कहावै सोय॥~ कबीर साहबप्रेम प्रेम सब कहते हैं, पर प्रेम को सच में बहुत कम लोग जानते हैं। प्रेम कोई शब्द नहीं, क...

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कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 4 By miss k

आज में ऐसी बातें करने जा रही हुं जो शायद सभी के मन में कभी न कभी आई ही होगी ‌। या तो कोई किसी को बताना जरूरी नहीं समझते या फिर शर्म के कारण कहते नहीं है अक्सर में भी ऐसी बातें किसी...

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वेदान्त 2.0 - भाग 42 By Vedanta Life Agyat Agyani

वेदांत 2.0 लाइफ: अस्तित्व-आधारित जीवन सिद्धांतपुस्तक का मुख्य संदेश (The Core Hook):"यह पुस्तक पढ़ने की नहीं, जीने की पुस्तक है। यह आपको किसी निष्कर्ष पर विश्वास करने के लिए नहीं क...

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योग क्षेमं वहाम्यहम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (१५) की व्याख्या तवेद्धि सख्यम् स्तृतम्।   १/१५/५भावार्थ -प्रभो ! आपकी ही मैत्री सच्ची है। पद-विश्लेषण--तव = तेरा / आपकाएव इद्धि (एव इद्धि/एव हि) = निश्चय ह...

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सात फेरो का वादा By kanta

---*Chapter 1: कीचड़ और किस्मत ~ 900 शब्द*जयपुर में सावन की पहली बारिश थी। सड़कें तालाब बन गई थीं। अनाया शर्मा, 24 साल। एक MNC में HR Executive। सैलरी 25 हजार। घर में पापा टीचर, मम...

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देव मार्ग By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (56) की व्याख्या " भद्रं कर्णेभि: श्रृणुयाम देव:"ऋगुवेद --1/89/8अर्थ--  हे ईश्वर ! हम अपने कानों से शुभ सुनें।यह ऋग्वेद का अत्यंत प्रसिद्ध शांति मंत्र है:मंत्र (ऋग्...

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सीक्रेट:वो लड़की - 2 By kanta

---*नोवेल: "सीक्रेट: वो लड़की"*  *Chapter 2: "मिस्टीरियस गर्ल" कॉलेज का सालाना फेयर। पूरे कैंपस में रंग-बिरंगी लाइटें, म्यूजिक, खाने की खुशबू और शोर। दिल्ली का सबसे महंगा कॉलेज था।...

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ऋतं च सत्यं च By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (55) की व्याख्या "ऋतं च सत्यं च"ऋगुवेद--10/190/1अर्थ --नियम और सत्य ही (जगत का) आधार है।आपने जो मंत्र दिया है — “ऋतं च सत्यं च” — यह ऋग्वेद के मंडल 10, सूक्त 190, म...

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आत्मीय सुख By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२०) की व्याख्या "कृत्वा चेतिष्ठो विश्वार्म्भूत"" १/६५/५भावार्थ --पदच्छेद (संकेतात्मक)कृत्वा । चेतिष्ठः । विश्वम् । अर्मभूत् (अर्म = स्नेह/हित)भावार्थ--प्रात: जा...

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परलोक By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(35) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भाव--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः ।शब्दार्थसः – वह (परमात्मा)...

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