आध्यात्मिक कथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and...Read More


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  • कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 4

    आज में ऐसी बातें करने जा रही हुं जो शायद सभी के मन में कभी न कभी आई ही होगी ‌। य...

  • ऋतं च सत्यं च

    ऋगुवेद सूक्ति-- (55) की व्याख्या "ऋतं च सत्यं च"ऋगुवेद--10/190/1अर्थ --नियम और स...

  • डर

    अध्यात्म का बहुत सीधा और सरल अर्थ है—ख़ुद को जानना। (‘अधि + आत्म’) यानी आत्म के...

प्रेम By Kapil Tiwari

प्रेम-प्रेम सब कोइ कहैं, प्रेम न चीन्है कोय।जा मारग साहिब मिलै, प्रेम कहावै सोय॥~ कबीर साहबप्रेम प्रेम सब कहते हैं, पर प्रेम को सच में बहुत कम लोग जानते हैं। प्रेम कोई शब्द नहीं, क...

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सदगुरू और सत दीक्षा By prem chand hembram

जयगुरु कलियुग में मनुष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता — सत्य की खोज, सद्गुरु और सत्-दीक्षाप्रस्तावनाआज का मनुष्य विज्ञान और तकनीक के युग में जी रहा है। उसने आकाश की ऊँचाइयों को छुआ है, सम...

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कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 4 By miss k

आज में ऐसी बातें करने जा रही हुं जो शायद सभी के मन में कभी न कभी आई ही होगी ‌। या तो कोई किसी को बताना जरूरी नहीं समझते या फिर शर्म के कारण कहते नहीं है अक्सर में भी ऐसी बातें किसी...

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वेदान्त 2.0 - भाग 42 By Vedanta Life Agyat Agyani

वेदांत 2.0 लाइफ: अस्तित्व-आधारित जीवन सिद्धांतपुस्तक का मुख्य संदेश (The Core Hook):"यह पुस्तक पढ़ने की नहीं, जीने की पुस्तक है। यह आपको किसी निष्कर्ष पर विश्वास करने के लिए नहीं क...

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योग क्षेमं वहाम्यहम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (१५) की व्याख्या तवेद्धि सख्यम् स्तृतम्।   १/१५/५भावार्थ -प्रभो ! आपकी ही मैत्री सच्ची है। पद-विश्लेषण--तव = तेरा / आपकाएव इद्धि (एव इद्धि/एव हि) = निश्चय ह...

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देव मार्ग By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (56) की व्याख्या " भद्रं कर्णेभि: श्रृणुयाम देव:"ऋगुवेद --1/89/8अर्थ--  हे ईश्वर ! हम अपने कानों से शुभ सुनें।यह ऋग्वेद का अत्यंत प्रसिद्ध शांति मंत्र है:मंत्र (ऋग्...

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सात फेरो का वादा By kanta

---*Chapter 1: कीचड़ और किस्मत ~ 900 शब्द*जयपुर में सावन की पहली बारिश थी। सड़कें तालाब बन गई थीं। अनाया शर्मा, 24 साल। एक MNC में HR Executive। सैलरी 25 हजार। घर में पापा टीचर, मम...

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सीक्रेट:वो लड़की - 2 By kanta

---*नोवेल: "सीक्रेट: वो लड़की"*  *Chapter 2: "मिस्टीरियस गर्ल" कॉलेज का सालाना फेयर। पूरे कैंपस में रंग-बिरंगी लाइटें, म्यूजिक, खाने की खुशबू और शोर। दिल्ली का सबसे महंगा कॉलेज था।...

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शैतानी घाटी का सफर - 10 By RAAHULL SHARMA

इस बार अपनी आँखें बंद मत करना। यह चुनरी हमारे पास खुद चलकर आई है, इसका मतलब है कि माँ अब भी हमारे साथ है!"शैतानी घाटी: दिव्य मिलन और शैतान का संहारपहाड़ी पर धूल का गुबार और तेज़ हो...

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कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 2 By miss k

"गुनाह करना , गुनाह सहना और गुनाह होते देखना ये भी एक अपराध ही है।"अब तक दृष्टि ने पढ़ना तो शुरू ही किया था कि उसके पिता को थोड़ा सा शक होने लगा की ये दृष्टि पुरे दिन घर पर तो होती...

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ऋतं च सत्यं च By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (55) की व्याख्या "ऋतं च सत्यं च"ऋगुवेद--10/190/1अर्थ --नियम और सत्य ही (जगत का) आधार है।आपने जो मंत्र दिया है — “ऋतं च सत्यं च” — यह ऋग्वेद के मंडल 10, सूक्त 190, म...

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कालू की पहाड़ी - 11 By RAAHULL SHARMA

कार्तिक ने अपने झोले से भगवान शंकर की वह पवित्र भस्म निकाली जो थोड़ी सी बची थी।उसने उस भस्म को अपने हाथ में लिया और आँखें बंद कर 'अघोर मंत्र' का जाप शुरू किया। उसने वह भस्म...

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आत्मीय सुख By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२०) की व्याख्या "कृत्वा चेतिष्ठो विश्वार्म्भूत"" १/६५/५भावार्थ --पदच्छेद (संकेतात्मक)कृत्वा । चेतिष्ठः । विश्वम् । अर्मभूत् (अर्म = स्नेह/हित)भावार्थ--प्रात: जा...

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परलोक By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(35) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भाव--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः ।शब्दार्थसः – वह (परमात्मा)...

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क्या दीक्षा आवश्यक है ? By prem chand hembram

जयगुरु क्या दीक्षा आवश्यक है? — शास्त्र, संत और मानवता की दृष्टि से एक विचारभारतीय सनातन आध्यात्मिक परंपरा में "दीक्षा" केवल एक धार्मिक संस्कार नहीं, बल्कि जीवन के रूपांतरण का आरंभ...

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डर By Kapil Tiwari

अध्यात्म का बहुत सीधा और सरल अर्थ है—ख़ुद को जानना। (‘अधि + आत्म’) यानी आत्म के और करीब आना। अपने “मैं” को, अपने अहं को, और अपनी वृत्तियों को समझना ही अध्यात्म है। डर, क्रोध, प्रेम...

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बचपन की मौलिकता और मौलिक प्रश्नों की मृत्यु By Vedanta Life Agyat Agyani

बचपन की मौलिकता और मौलिक प्रश्नों की मृत्यु​(वेदांत 2.0 का एक दृष्टिकोण)​मनुष्य जन्म के समय किसी धर्म, ईश्वर, आत्मा, स्वर्ग, नरक, मोक्ष, पाप या पुण्य की अवधारणा लेकर पैदा नहीं होता...

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मैं और वो जिन्न (एक अन्खाही कहानी) - 1 By shahina shah

कहते हैं कुछ कहानियाँ सिर्फ लिखी नहीं जातीं. वो महसूस की जाती हैं.ये कहानी है सना की. एक ऐसी लडकी की जिसकी जिंदगी बाहर से बिल्कुल आम थी, लेकिन उसके बचपन से ही एक ऐसा राज जुडा था जि...

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एक कहानी दर्द भरी By parmanand markam

बात सन 1869 की है जब द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हो चुका था शीत युद्ध का दूर था एक छोटा सा परिवार शहर में गोला बारूद से बचने के लिए अपने आप को बचते बचाते गांव में छुपने के लिए आए थे...

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पीछे मत हटो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(21) की व्याख्या ऋगुवेद--"मा स्रेधत"--7/32/9अर्थ---आलस्य मत‌ करो।ऋग्वेद में प्रयुक्त — “मा स्रेधत” का भावार्थ है:“शिथिल मत पड़ो, आलस्य मत करो, पीछे मत हटो।”यहाँ—मा &...

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मृत्यु पर विजय By Vijay Erry

मृत्यु पर विजयएक आध्यात्मिक कथा— विजय शर्मा 'एरी' —सीमा पर बर्फ गिर रही थी। मेजर दिग्विजय सिंह बंकर की दीवार से पीठ टिकाए बैठे थे, और उनके दाहिने कंधे से रिसता हुआ रक्त बर्...

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सब ताले की एक चाबी By prem chand hembram

जयगुरु,सब ताले की एक चाबीभूमिकासंसार में असंख्य समस्याएँ हैं—गरीबी, हिंसा, भ्रष्टाचार, पारिवारिक विघटन, तनाव, अनिद्रा, अकेलापन, नशा, असंतोष, युद्ध और नैतिक पतन। देखने में ये सब अलग...

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एक भक्त की साधना By Vandna Sharma

नाम - जप की महिमाकलयुग में नाम-जप की बहुत महिमा है। अगर कोई व्यक्ति अपना काम करते हुए ईश्वर का नाम लेता रहता है तो उसके सारे दुख खत्म हो जाते हैं।विजयनगर में एक लड़की बचपन से ही मह...

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अदातारं परित्यजेत By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१६)-की व्याख्या--"मान्तः स्थूर्नो अरातयः" —  १०/५७/१भावार्थ --हमारे अन्दर कंजूसी न हो।पद विच्छेद --मान्तः — भीतर, अन्तर मेंस्थूः/स्थुर्नः — स्थिर न रहें, ठहरें नहींअ...

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केंद्र और परिधि By Vedanta Life Agyat Agyani

केंद्र और परिधिमनुष्य का जन्म केंद्र में होता है, पर उसका जीवन धीरे-धीरे परिधि पर फैल जाता है। केंद्र उसका मूल है, परिधि उसका विस्तार। समस्या परिधि में नहीं है; समस्या तब उत्पन्न ह...

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भविष्यवाणी की कला: भय का व्यापार या समाधान की राह By yeash shah

नियतिबाद (Fatalism / Determinism) एक दार्शनिक विचार है जो मानता है कि इंसान के जीवन में जो कुछ भी होता है, वो पहले से तय है। यानी आपके फैसले, घटनाएँ और भविष्य पहले से ही "लिखे हुए"...

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संसार का सार धर्म By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(35) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भाव--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः ।शब्दार्थसः – वह (परमात्मा)...

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यत्र धर्म: तत्र जय: By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (१०) की व्याख्या “न रिष्यते त्वावतः सखा” — (जो ईश्वर का सखा/भक्त है वह नष्ट नहीं होता) —इस भाव की पुष्टि अनेक उपनिषदों में मिलती है। प्रस्तुत हैं प्रमुख प्रमाण —(१)...

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दोस्ती By Kapil Tiwari

हम अक्सर एक दूसरे से पूछते हैं कि.. आपका दोस्त कौन...??सामान्यतः उत्तर यही मिलता है कि जो मेरे साथ हमेशा खड़ा रहे और मेरा हमेशा साथ देता रहे वहीं हमारा असली दोस्त है, ये परिभाषा बा...

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शिथिलता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(21) की व्याख्या ऋगुवेद--"मा स्रेधत"--7/32/9अर्थ---आलस्य मत‌ करो।ऋग्वेद में प्रयुक्त — “मा स्रेधत” का भावार्थ है:“शिथिल मत पड़ो, आलस्य मत करो, पीछे मत हटो।”यहाँ—मा &...

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गीता आज के इंसान के लिए – (अंतिम अध्याय ) By Shivraj Bhokare

------------------------------अध्याय 10: निष्कर्ष (चक्रव्यूह से बाहर का रास्ता: बौद्धिक विलासिता या चेतना का वास्तविक रूपांतरण?)------------------------------  भाग 1: ज्ञान का नया...

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संकीर्णता से मुक्ति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१६)-की व्याख्या"मान्तः स्थूर्नो अरातयः" —  १०/५७/१भावार्थ --हमारे अन्दर कंजूसी न हो।पद विच्छेद --मान्तः — भीतर, अन्तर मेंस्थूः/स्थुर्नः — स्थिर न रहें, ठहरें नहींअरा...

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शिव By Kapil Tiwari

मैं वो हूँ जो नहीं है ,जो नहीं है वो मैं हूँ।जो अस्तित्व के परे है वो मैं हूँ।जो दृष्टिगोचर हैं वो सृष्टि है, जो सृष्टि के परे हैं वो मैं हूँ।जो श्रव्य हैं वो शब्द है , जो शब्द अती...

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त्रिपिंड चित्त-दर्शन By Vedanta Life Agyat Agyani

त्रिपिंड चित्त-दर्शन(The Tri-Pinda Consciousness Model)प्रस्तावना: मानव और ब्रह्मांड का त्रि-खेलमानव को मैं तीन मुख्य भागों में देखता हूँ: मन, ऊर्जा (प्राण) और शरीर। इन्हें मैं ब्र...

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प्रियं ब्रूयात By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (58) की व्याख्या प्रियं वद्।ऋगुवेद --8/89/3अर्थ--प्रिय बोलो। ऋग्वेद 8.89.3 का पूरा मंत्र इन्द्र स्तुति से संबंधित है। ऋग्वेद 8.89.3 मूल मंत्र“प्रियं वदन्निन्द्र मृळ...

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मन का पर्दा और प्रत्यक्षता की त्रासदी By Vedanta Life Agyat Agyani

 मन का पर्दा और प्रत्यक्षता की त्रासदी — Vedanta 2.0 @import url('https://fonts.googleapis.com/css2?family=EB+Garamond:ital,wght@0,400;0,600;0,700;1,400&family=Noto+Sans+Devan...

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ईश्वर एक है By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (57) की व्याख्या एकं सद्विप्रा; बहुधा वदन्ति।ऋगुवेद --1/164/46अर्थ --ईश्वर एक है, ज्ञानी उसे अनेक नामों से पुकारते हैं।यह मंत्र ऋग्वेद (1.164.46) का अत्यंत प्रसिद्ध...

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डिप्रेशन By Kapil Tiwari

आपने कभी सोचा है,आज से पचास-साठ साल पहले एक मानसिक रोगी को जितनी एंग्ज़ायटी महसूस होती थी, उतनी आज एक सामान्य युवा को महसूस होती है। अगर भविष्य में हम इस समस्या का हल नहीं निकाल पा...

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स्वर्ग का दरवाजा - 7 By Author Pawan Singh

एपिसोड - 7 तंत्र, मंत्र और यंत्र का ज्ञान “किसी भी देवता को मारने का सबसे अच्छा तरीका है कि उस पर विश्वास करना बंद कर दो” ये लाइन मैं क्यों कह रहा हूँ? क्योंकि आज मैं उस ज्ञान के प...

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अमृत वाणी - संत वाणी - 6 By Nitya Oswal

“विद्येविना मती गेली, मतीविना नीती गेली।नीतीविना गती गेली, गतीविना वित्त गेले।वित्ताविना शूद्र खचले, इतके अनर्थ एका अविद्याने केले।।”ज्योतिबा फुले जी कहते हैं कि शिक्षा (ज्ञान) के...

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अविचारित जीवन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३५) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भावार्थ--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः शब्दार्थसः – वह (परमात्...

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नव्यो नव्य: By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:--नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीनभवति = होता है / बनता ह...

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कामवासना By Kapil Tiwari

जन्म से ही हमारे भीतर कामवासना नाम की एक वृत्ति या प्रवृत्ति मौजूद रहती है। यह प्रकृति की अपनी व्यवस्था है कि जैसे-जैसे मनुष्य उम्र में आगे बढ़ता है, वैसे-वैसे यह प्रवृत्ति भी सक्र...

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नवीन भवति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:--नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीनभवति = होता है / बनता ह...

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प्रेम By Kapil Tiwari

प्रेम-प्रेम सब कोइ कहैं, प्रेम न चीन्है कोय।जा मारग साहिब मिलै, प्रेम कहावै सोय॥~ कबीर साहबप्रेम प्रेम सब कहते हैं, पर प्रेम को सच में बहुत कम लोग जानते हैं। प्रेम कोई शब्द नहीं, क...

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सदगुरू और सत दीक्षा By prem chand hembram

जयगुरु कलियुग में मनुष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता — सत्य की खोज, सद्गुरु और सत्-दीक्षाप्रस्तावनाआज का मनुष्य विज्ञान और तकनीक के युग में जी रहा है। उसने आकाश की ऊँचाइयों को छुआ है, सम...

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कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 4 By miss k

आज में ऐसी बातें करने जा रही हुं जो शायद सभी के मन में कभी न कभी आई ही होगी ‌। या तो कोई किसी को बताना जरूरी नहीं समझते या फिर शर्म के कारण कहते नहीं है अक्सर में भी ऐसी बातें किसी...

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वेदान्त 2.0 - भाग 42 By Vedanta Life Agyat Agyani

वेदांत 2.0 लाइफ: अस्तित्व-आधारित जीवन सिद्धांतपुस्तक का मुख्य संदेश (The Core Hook):"यह पुस्तक पढ़ने की नहीं, जीने की पुस्तक है। यह आपको किसी निष्कर्ष पर विश्वास करने के लिए नहीं क...

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योग क्षेमं वहाम्यहम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (१५) की व्याख्या तवेद्धि सख्यम् स्तृतम्।   १/१५/५भावार्थ -प्रभो ! आपकी ही मैत्री सच्ची है। पद-विश्लेषण--तव = तेरा / आपकाएव इद्धि (एव इद्धि/एव हि) = निश्चय ह...

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देव मार्ग By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (56) की व्याख्या " भद्रं कर्णेभि: श्रृणुयाम देव:"ऋगुवेद --1/89/8अर्थ--  हे ईश्वर ! हम अपने कानों से शुभ सुनें।यह ऋग्वेद का अत्यंत प्रसिद्ध शांति मंत्र है:मंत्र (ऋग्...

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सात फेरो का वादा By kanta

---*Chapter 1: कीचड़ और किस्मत ~ 900 शब्द*जयपुर में सावन की पहली बारिश थी। सड़कें तालाब बन गई थीं। अनाया शर्मा, 24 साल। एक MNC में HR Executive। सैलरी 25 हजार। घर में पापा टीचर, मम...

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सीक्रेट:वो लड़की - 2 By kanta

---*नोवेल: "सीक्रेट: वो लड़की"*  *Chapter 2: "मिस्टीरियस गर्ल" कॉलेज का सालाना फेयर। पूरे कैंपस में रंग-बिरंगी लाइटें, म्यूजिक, खाने की खुशबू और शोर। दिल्ली का सबसे महंगा कॉलेज था।...

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शैतानी घाटी का सफर - 10 By RAAHULL SHARMA

इस बार अपनी आँखें बंद मत करना। यह चुनरी हमारे पास खुद चलकर आई है, इसका मतलब है कि माँ अब भी हमारे साथ है!"शैतानी घाटी: दिव्य मिलन और शैतान का संहारपहाड़ी पर धूल का गुबार और तेज़ हो...

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कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 2 By miss k

"गुनाह करना , गुनाह सहना और गुनाह होते देखना ये भी एक अपराध ही है।"अब तक दृष्टि ने पढ़ना तो शुरू ही किया था कि उसके पिता को थोड़ा सा शक होने लगा की ये दृष्टि पुरे दिन घर पर तो होती...

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ऋतं च सत्यं च By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (55) की व्याख्या "ऋतं च सत्यं च"ऋगुवेद--10/190/1अर्थ --नियम और सत्य ही (जगत का) आधार है।आपने जो मंत्र दिया है — “ऋतं च सत्यं च” — यह ऋग्वेद के मंडल 10, सूक्त 190, म...

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कालू की पहाड़ी - 11 By RAAHULL SHARMA

कार्तिक ने अपने झोले से भगवान शंकर की वह पवित्र भस्म निकाली जो थोड़ी सी बची थी।उसने उस भस्म को अपने हाथ में लिया और आँखें बंद कर 'अघोर मंत्र' का जाप शुरू किया। उसने वह भस्म...

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आत्मीय सुख By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२०) की व्याख्या "कृत्वा चेतिष्ठो विश्वार्म्भूत"" १/६५/५भावार्थ --पदच्छेद (संकेतात्मक)कृत्वा । चेतिष्ठः । विश्वम् । अर्मभूत् (अर्म = स्नेह/हित)भावार्थ--प्रात: जा...

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परलोक By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(35) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भाव--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः ।शब्दार्थसः – वह (परमात्मा)...

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क्या दीक्षा आवश्यक है ? By prem chand hembram

जयगुरु क्या दीक्षा आवश्यक है? — शास्त्र, संत और मानवता की दृष्टि से एक विचारभारतीय सनातन आध्यात्मिक परंपरा में "दीक्षा" केवल एक धार्मिक संस्कार नहीं, बल्कि जीवन के रूपांतरण का आरंभ...

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डर By Kapil Tiwari

अध्यात्म का बहुत सीधा और सरल अर्थ है—ख़ुद को जानना। (‘अधि + आत्म’) यानी आत्म के और करीब आना। अपने “मैं” को, अपने अहं को, और अपनी वृत्तियों को समझना ही अध्यात्म है। डर, क्रोध, प्रेम...

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बचपन की मौलिकता और मौलिक प्रश्नों की मृत्यु By Vedanta Life Agyat Agyani

बचपन की मौलिकता और मौलिक प्रश्नों की मृत्यु​(वेदांत 2.0 का एक दृष्टिकोण)​मनुष्य जन्म के समय किसी धर्म, ईश्वर, आत्मा, स्वर्ग, नरक, मोक्ष, पाप या पुण्य की अवधारणा लेकर पैदा नहीं होता...

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मैं और वो जिन्न (एक अन्खाही कहानी) - 1 By shahina shah

कहते हैं कुछ कहानियाँ सिर्फ लिखी नहीं जातीं. वो महसूस की जाती हैं.ये कहानी है सना की. एक ऐसी लडकी की जिसकी जिंदगी बाहर से बिल्कुल आम थी, लेकिन उसके बचपन से ही एक ऐसा राज जुडा था जि...

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एक कहानी दर्द भरी By parmanand markam

बात सन 1869 की है जब द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हो चुका था शीत युद्ध का दूर था एक छोटा सा परिवार शहर में गोला बारूद से बचने के लिए अपने आप को बचते बचाते गांव में छुपने के लिए आए थे...

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पीछे मत हटो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(21) की व्याख्या ऋगुवेद--"मा स्रेधत"--7/32/9अर्थ---आलस्य मत‌ करो।ऋग्वेद में प्रयुक्त — “मा स्रेधत” का भावार्थ है:“शिथिल मत पड़ो, आलस्य मत करो, पीछे मत हटो।”यहाँ—मा &...

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मृत्यु पर विजय By Vijay Erry

मृत्यु पर विजयएक आध्यात्मिक कथा— विजय शर्मा 'एरी' —सीमा पर बर्फ गिर रही थी। मेजर दिग्विजय सिंह बंकर की दीवार से पीठ टिकाए बैठे थे, और उनके दाहिने कंधे से रिसता हुआ रक्त बर्...

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सब ताले की एक चाबी By prem chand hembram

जयगुरु,सब ताले की एक चाबीभूमिकासंसार में असंख्य समस्याएँ हैं—गरीबी, हिंसा, भ्रष्टाचार, पारिवारिक विघटन, तनाव, अनिद्रा, अकेलापन, नशा, असंतोष, युद्ध और नैतिक पतन। देखने में ये सब अलग...

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एक भक्त की साधना By Vandna Sharma

नाम - जप की महिमाकलयुग में नाम-जप की बहुत महिमा है। अगर कोई व्यक्ति अपना काम करते हुए ईश्वर का नाम लेता रहता है तो उसके सारे दुख खत्म हो जाते हैं।विजयनगर में एक लड़की बचपन से ही मह...

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अदातारं परित्यजेत By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१६)-की व्याख्या--"मान्तः स्थूर्नो अरातयः" —  १०/५७/१भावार्थ --हमारे अन्दर कंजूसी न हो।पद विच्छेद --मान्तः — भीतर, अन्तर मेंस्थूः/स्थुर्नः — स्थिर न रहें, ठहरें नहींअ...

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केंद्र और परिधि By Vedanta Life Agyat Agyani

केंद्र और परिधिमनुष्य का जन्म केंद्र में होता है, पर उसका जीवन धीरे-धीरे परिधि पर फैल जाता है। केंद्र उसका मूल है, परिधि उसका विस्तार। समस्या परिधि में नहीं है; समस्या तब उत्पन्न ह...

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भविष्यवाणी की कला: भय का व्यापार या समाधान की राह By yeash shah

नियतिबाद (Fatalism / Determinism) एक दार्शनिक विचार है जो मानता है कि इंसान के जीवन में जो कुछ भी होता है, वो पहले से तय है। यानी आपके फैसले, घटनाएँ और भविष्य पहले से ही "लिखे हुए"...

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संसार का सार धर्म By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(35) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भाव--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः ।शब्दार्थसः – वह (परमात्मा)...

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यत्र धर्म: तत्र जय: By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (१०) की व्याख्या “न रिष्यते त्वावतः सखा” — (जो ईश्वर का सखा/भक्त है वह नष्ट नहीं होता) —इस भाव की पुष्टि अनेक उपनिषदों में मिलती है। प्रस्तुत हैं प्रमुख प्रमाण —(१)...

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दोस्ती By Kapil Tiwari

हम अक्सर एक दूसरे से पूछते हैं कि.. आपका दोस्त कौन...??सामान्यतः उत्तर यही मिलता है कि जो मेरे साथ हमेशा खड़ा रहे और मेरा हमेशा साथ देता रहे वहीं हमारा असली दोस्त है, ये परिभाषा बा...

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शिथिलता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(21) की व्याख्या ऋगुवेद--"मा स्रेधत"--7/32/9अर्थ---आलस्य मत‌ करो।ऋग्वेद में प्रयुक्त — “मा स्रेधत” का भावार्थ है:“शिथिल मत पड़ो, आलस्य मत करो, पीछे मत हटो।”यहाँ—मा &...

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गीता आज के इंसान के लिए – (अंतिम अध्याय ) By Shivraj Bhokare

------------------------------अध्याय 10: निष्कर्ष (चक्रव्यूह से बाहर का रास्ता: बौद्धिक विलासिता या चेतना का वास्तविक रूपांतरण?)------------------------------  भाग 1: ज्ञान का नया...

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संकीर्णता से मुक्ति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१६)-की व्याख्या"मान्तः स्थूर्नो अरातयः" —  १०/५७/१भावार्थ --हमारे अन्दर कंजूसी न हो।पद विच्छेद --मान्तः — भीतर, अन्तर मेंस्थूः/स्थुर्नः — स्थिर न रहें, ठहरें नहींअरा...

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शिव By Kapil Tiwari

मैं वो हूँ जो नहीं है ,जो नहीं है वो मैं हूँ।जो अस्तित्व के परे है वो मैं हूँ।जो दृष्टिगोचर हैं वो सृष्टि है, जो सृष्टि के परे हैं वो मैं हूँ।जो श्रव्य हैं वो शब्द है , जो शब्द अती...

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त्रिपिंड चित्त-दर्शन By Vedanta Life Agyat Agyani

त्रिपिंड चित्त-दर्शन(The Tri-Pinda Consciousness Model)प्रस्तावना: मानव और ब्रह्मांड का त्रि-खेलमानव को मैं तीन मुख्य भागों में देखता हूँ: मन, ऊर्जा (प्राण) और शरीर। इन्हें मैं ब्र...

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प्रियं ब्रूयात By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (58) की व्याख्या प्रियं वद्।ऋगुवेद --8/89/3अर्थ--प्रिय बोलो। ऋग्वेद 8.89.3 का पूरा मंत्र इन्द्र स्तुति से संबंधित है। ऋग्वेद 8.89.3 मूल मंत्र“प्रियं वदन्निन्द्र मृळ...

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मन का पर्दा और प्रत्यक्षता की त्रासदी By Vedanta Life Agyat Agyani

 मन का पर्दा और प्रत्यक्षता की त्रासदी — Vedanta 2.0 @import url('https://fonts.googleapis.com/css2?family=EB+Garamond:ital,wght@0,400;0,600;0,700;1,400&family=Noto+Sans+Devan...

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ईश्वर एक है By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (57) की व्याख्या एकं सद्विप्रा; बहुधा वदन्ति।ऋगुवेद --1/164/46अर्थ --ईश्वर एक है, ज्ञानी उसे अनेक नामों से पुकारते हैं।यह मंत्र ऋग्वेद (1.164.46) का अत्यंत प्रसिद्ध...

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डिप्रेशन By Kapil Tiwari

आपने कभी सोचा है,आज से पचास-साठ साल पहले एक मानसिक रोगी को जितनी एंग्ज़ायटी महसूस होती थी, उतनी आज एक सामान्य युवा को महसूस होती है। अगर भविष्य में हम इस समस्या का हल नहीं निकाल पा...

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स्वर्ग का दरवाजा - 7 By Author Pawan Singh

एपिसोड - 7 तंत्र, मंत्र और यंत्र का ज्ञान “किसी भी देवता को मारने का सबसे अच्छा तरीका है कि उस पर विश्वास करना बंद कर दो” ये लाइन मैं क्यों कह रहा हूँ? क्योंकि आज मैं उस ज्ञान के प...

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अमृत वाणी - संत वाणी - 6 By Nitya Oswal

“विद्येविना मती गेली, मतीविना नीती गेली।नीतीविना गती गेली, गतीविना वित्त गेले।वित्ताविना शूद्र खचले, इतके अनर्थ एका अविद्याने केले।।”ज्योतिबा फुले जी कहते हैं कि शिक्षा (ज्ञान) के...

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अविचारित जीवन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३५) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भावार्थ--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः शब्दार्थसः – वह (परमात्...

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नव्यो नव्य: By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:--नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीनभवति = होता है / बनता ह...

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कामवासना By Kapil Tiwari

जन्म से ही हमारे भीतर कामवासना नाम की एक वृत्ति या प्रवृत्ति मौजूद रहती है। यह प्रकृति की अपनी व्यवस्था है कि जैसे-जैसे मनुष्य उम्र में आगे बढ़ता है, वैसे-वैसे यह प्रवृत्ति भी सक्र...

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नवीन भवति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:--नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीनभवति = होता है / बनता ह...

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