आध्यात्मिक कथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and...Read More


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नवीन भवति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:--नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीनभवति = होता है / बनता ह...

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वेदांत और आधुनिकता — संतुलन की खोज By Vedanta Life Agyat Agyani

: वेदांत और आधुनिकता — संतुलन की खोजआधुनिक युग ने मनुष्य को वह सब दिया है जिसकी कभी कल्पना भी कठिन थी। आकाश में उड़ने वाले विमान, हाथ में समाई हुई पूरी दुनिया, क्षणों में होने वाला...

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आध्यात्मिक दर्शन - प्रश्न 4 - सनातन धर्म ग्रंथों में डायनासोर का उल्लेख क्यो नहीं? By Janshi Saroha

पिछले अध्याय से हम यह समझते आ रहे है कि सनातन धर्म प्राचीन धर्मों में से एक है .. जिसका न आदि है न अंत वह सनातन है ... अब प्रश्न यह आता है कि यदि सनातन धर्म इतना ही प्राचीन है तो उ...

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गीता आज के इंसान के लिए – (अध्याय -6) By Shivraj Bhokare

------------------------------ अध्याय 6: सफलता का वास्तविक अर्थ (चूहा-दौड़ का सच: धन, प्रसिद्धि और आंतरिक दिवालियापन)------------------------------  भाग 1: तुम्हारी 'सफलता'...

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कालू की पहाड़ी - 9 By RAAHULL SHARMA

लेखक राहुल शर्मा की तरफ से आप सभी के लिए..."नमस्कार दोस्तों, मैं आपका अपना राहुल शर्मा।आज 'कालू की पहाड़ी (सीज़न 1)' का 9वां भाग लाइव हो चुका है। सच कहूँ तो आज मैं जो कुछ भ...

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अंतर्जगत का रूपांतरण और मांसाहार का सच By Kapil Tiwari

अंतर्जगत का रूपांतरण और मांसाहार का सच: एक आध्यात्मिक व पर्यावरणवादी दृष्टिकोण ~जब हम जीवन के सत्यों को गहराई से समझने का प्रयास करते हैं, तो सबसे पहला प्रश्न यही उठता है कि हमारी...

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सत्य पथी By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२७) की व्याख्या  मन्त्र —“मा प्रगाम पथोवयम्”  ऋग्वेद_ १०.५७.१भावार्थ --हम वैदिक मार्ग से पृथक न हों।पदच्छेदमा — नहींप्रगाम — आगे बढ़ें / जाएँपथः — मार्ग सेवयम् — हम...

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शून्य से नौ तक:अस्तित्ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

वेदांत 2.0 का 0–9 मॉडल एक ऐसा संरचनात्मक ढाँचा प्रस्तुत करता है जो साधारण दशमलव संख्या‑पद्धति को अस्तित्व की दस मूल अवस्थाओं के रूप में पुनर्पाठित करता है। इस दृष्टि में 0 से 9 तक...

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 7 By Janshi Saroha

श्री अंदर चली गई । हरि और श्री सोफे पर आ कर बैठ गए हरि ने लैपटॉप ओपन किया और श्री का रिजल्ट चेक करने लगा । श्री ने अपनी आंखें बंद की हुई थी और वो यही सोच रही थी कि जो होगा अच्छा ही...

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मॉडर्न साधु - 2 By nirala ji

अमन को अपने दोस्तों के साथ खेलना और उनके साथ स्कूल जाना अच्छा लगता था। अमन,विक्रम,अब्दुल और मीरा चारों में अच्छी मित्रता थी। उस जगह के लोग भी एकता और भाईचारे के साथ रहना पसंद करते...

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कर्मशील मनुष्य By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति-- (73) की व्याख्या न देवास: कवत्नवे।ऋगवेद--7/32/9भावार्थ--ईश्वर अकर्मण्य का साथ नहीं देता।ऋग्वेद 7.32.9मा स्रेधत सोमिनो दक्षता महे कृणुध्वं राय आतुजे ।तरणिरिज्जयति क्...

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गुरु महिमा नहीं- गुरु मैत्री By Vedanta Life Agyat Agyani

  "स्त्री का प्रेम और गुरु-भक्ति की मूर्खता"वेदांत 2.0 के लिए एक नया दृष्टिकोणप्रस्तावना: दो तरह का प्रेमदुनिया में प्रेम के दो रूप सबसे ज़्यादा दिखाई देते हैं। एक पत्नी का प्रेम औ...

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सफलता का आधार पुरुषार्थ By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति--(74) की व्याख्या "तरणि:इत‌ जयति"ऋग्वेद -7/32/9भावार्थ --परिश्रमी ही सफल होता है। पूरा श्लोक अर्थ सहित--ऋग्वेद मण्डल 7, सूक्त 32, मंत्र 9 का मूल पाठ इस प्रकार है—मा स...

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प्राप्ति नहीं, प्रसाद By Vedanta Life Agyat Agyani

प्राप्ति नहीं, प्रसादजीवन का मूल सूत्रमनुष्य सोचता है कि उसे सब कुछ पाना है। धन पाना, सफलता पाना, सम्मान पाना, ईश्वर पाना, मोक्ष पाना। परंतु सत्य इससे भिन्न है।जो वास्तव में तुम्हा...

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मा हृणीथा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (72) की व्याख्यामा हृणीथा:ऋग्वेद---8/2/19से ईश्वर ! हमसै रुष्ट मत हों। पूरा श्लोकहाँ, ऋग्वेद 8.2.19 का पूरा मंत्र इस प्रकार है—ओ षु प्र याहि वाजेभिर्मा हृणीथा अभ्यस्म...

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शैतानी घाटी का सफर - 7 By RAAHULL SHARMA

उसके शरीर से सड़ी हुई मांस की गंध आ रही थी। उसके हज़ारों हाथ मकड़ी के जाले की तरह फैले हुए थे, और उन हज़ारों हाथों के बिल्कुल बीच में फंसी हुई थी—मोनिका!मोनिका: (घुटती हुई आवाज़ में) "र...

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यूनानी दर्शन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (71) की व्याख्याबृहस्पते अति यदर्यो अराति:ऋगुवेद--2/23/1भावार्थ--हे ईश्वर ! हमें श्रेष्ठ बुद्धि प्रदान करें।आपने जो मंत्र उद्धृत किया है—बृहस्पते अति यदर्यो अरातिर्द्...

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कलयुग में कैसे जिएँ? शास्त्रों के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण 5 बातें By Jai Krishan

कलयुग में कैसे जिएँ? शास्त्रों के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण 5 बातेंआज के समय में लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी चिंता, तनाव, प्रतियोगिता, असुरक्षा या मानसिक अशांति से जूझ रहा है। यही कार...

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महाजनो येन गत:सपन्थ: By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (70) की व्याख्या "प्रेहि प्रेहि पथिभि: पूर्व्येभि:"ऋग्वेद --10/14/7भावार्थ --श्रेष्ठ मार्ग  पर आगे बढ़ो।इसका पूरा मंत्र --प्रेहि प्रेहि पथिभिः पूर्व्येभिर्यत्रा नः पू...

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मैं नहीं, अस्तित्व By Vedanta Life Agyat Agyani

 मैं नहीं, अस्तित्वइच्छा, प्रश्न और समर्पण के मध्य पूर्णता की खोज  भूमिका↓१. प्रश्नकर्ता कौन है? (अस्तित्व की जिज्ञासा)↓२. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और प्रश्न का संकट↓३. अस्तित्व का...

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शुभ सुनें By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (56) की व्याख्या " भद्रं कर्णेभि: श्रृणुयाम देव:"ऋगुवेद --1/89/8अर्थ--  हे ईश्वर ! हम अपने कानों से शुभ सुनें।यह ऋग्वेद का अत्यंत प्रसिद्ध शांति मंत्र है:मंत्र (ऋग्...

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बलं धेहि By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(61) की व्याख्या "बलं धेहि"ऋगुवेद --4/9/6भाव--शक्ति प्रदान करो।ऋग्वेद मण्डल 4, सूक्त 9, मन्त्र 6 का “बलं धेहि” पद अत्यन्त सारगर्भित है। मूल मन्त्र (ऋग्वेद 4/9/6)बलं...

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आश्रम की रामकथा By Kapil Tiwari

मैं ऋषिकेश की सड़कों पर भटक ही रहा था कि अचानक मेरी नज़र एक पोस्टर पर पड़ी और उसे देखकर मेरे मन में खुशी की लहर दौड़ गई। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि उस पोस्टर पर बड़े-बड़े अक्षरों में ल...

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ब्रह्म ज्ञान By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति(69) की व्याख्या "यद्भद्रं तन्न आसुव"ऋगुवेद--5/82/5भावार्थ --हे ईश्वर ! जो हमारे लिए शुभ है, वह हमें प्रदान करें।पूरा मंत्र अर्थ सहित --उद्धृत पंक्ति "यद्भद्रं तन्न आ...

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मार्ग दर्शक By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति(69) की व्याख्या "यद्भद्रं तन्न आसुव"ऋगुवेद--5/82/5भावार्थ --हे ईश्वर ! जो हमारे लिए शुभ है, वह हमें प्रदान करें।पूरा मंत्र अर्थ सहित --उद्धृत पंक्ति "यद्भद्रं तन्न आ...

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अस्तित्व बनाम दावा (मैं) By Vedanta Life Agyat Agyani

   अस्तित्व बनाम दावा(“मैं”) : कर्ता की समस्या का नया फ्रेममनुष्य सामान्यतः अपनी आध्यात्मिक उलझनों को “आत्मा बनाम अहंकार”, “ज्ञान बनाम अज्ञान”, या “धर्म बनाम अधर्म” की भाषा में समझ...

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शुभता की चाह By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति(69) की व्याख्या "यद्भद्रं तन्न आसुव"ऋगुवेद--5/82/5भावार्थ --हे ईश्वर ! जो हमारे लिए शुभ है, वह हमें प्रदान करें।पूरा मंत्र अर्थ सहित --उद्धृत पंक्ति "यद्भद्रं तन्न आ...

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स्वर्ग का दरवाजा - 6 By Author Pawan Singh

एपिसोड - 6 नास्तिकतावाद और भौतिकवादअंते वयम सर्वे कथाः भवें - अंत में हम सब कहानी बन जाते हैं। कहानी से याद आया, एक बार की बात है सभी राक्षस, दैत्य और दानवों ने सोचा कि क्यों न हम...

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पूर्ण दर्शन और विज्ञान: By Vedanta Life Agyat Agyani

**पूর্ণ दर्शन‑विज्ञान:“ईश्वर पाना” की मानसिकता पर वेदान्तीय और समाज‑मनोवैज्ञानिक समालोचना**प्रस्तावनासमकालीन धार्मिक विमर्श में “ईश्वर को पाना”, “भगवान की प्राप्ति करना”, “मुक्ति ह...

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दो छोर, एक जीवन By Vedanta Life Agyat Agyani

 परिधि पर दौड़ और केंद्र में ठहराव — Vedanta 2.0 का द्वि-छोर जीवनपरिचयआज का जीवन परिधि की दोड़ पर आधारित है। हम ऊपर देखने के लिए टेलीस्कोप खोजते हैं, नीचे देखने के लिए ड्रिल बनाते...

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त्याग नहीं, देखना - द्वैत के पार By Vedanta Life Agyat Agyani

  त्याग नहीं, देखना — द्वैत के पार — 𝓐𝓰𝔂𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲धर्म की पुरानी भाषा प्रायः कहती रही है —"छोड़ो।"वासना छोड़ो।लोभ छोड़ो।अहंकार छोड़ो।संसार छोड़ो।मानो सत्य किसी त्याग के बाद मिलने व...

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अभी नहीं..... By prem chand hembram

अभी नहीं...गाँव के किनारे एक विशाल पीपल का वृक्ष था। उसकी फैली हुई शाखाएँ दूर-दूर तक शीतल छाया बिखेरती थीं। पक्षियों का कलरव, पत्तों की सरसराहट और उसके नीचे पसरी हुई शांति मानो थके...

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नवीन भवति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:--नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीनभवति = होता है / बनता ह...

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वेदांत और आधुनिकता — संतुलन की खोज By Vedanta Life Agyat Agyani

: वेदांत और आधुनिकता — संतुलन की खोजआधुनिक युग ने मनुष्य को वह सब दिया है जिसकी कभी कल्पना भी कठिन थी। आकाश में उड़ने वाले विमान, हाथ में समाई हुई पूरी दुनिया, क्षणों में होने वाला...

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आध्यात्मिक दर्शन - प्रश्न 4 - सनातन धर्म ग्रंथों में डायनासोर का उल्लेख क्यो नहीं? By Janshi Saroha

पिछले अध्याय से हम यह समझते आ रहे है कि सनातन धर्म प्राचीन धर्मों में से एक है .. जिसका न आदि है न अंत वह सनातन है ... अब प्रश्न यह आता है कि यदि सनातन धर्म इतना ही प्राचीन है तो उ...

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गीता आज के इंसान के लिए – (अध्याय -6) By Shivraj Bhokare

------------------------------ अध्याय 6: सफलता का वास्तविक अर्थ (चूहा-दौड़ का सच: धन, प्रसिद्धि और आंतरिक दिवालियापन)------------------------------  भाग 1: तुम्हारी 'सफलता'...

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कालू की पहाड़ी - 9 By RAAHULL SHARMA

लेखक राहुल शर्मा की तरफ से आप सभी के लिए..."नमस्कार दोस्तों, मैं आपका अपना राहुल शर्मा।आज 'कालू की पहाड़ी (सीज़न 1)' का 9वां भाग लाइव हो चुका है। सच कहूँ तो आज मैं जो कुछ भ...

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अंतर्जगत का रूपांतरण और मांसाहार का सच By Kapil Tiwari

अंतर्जगत का रूपांतरण और मांसाहार का सच: एक आध्यात्मिक व पर्यावरणवादी दृष्टिकोण ~जब हम जीवन के सत्यों को गहराई से समझने का प्रयास करते हैं, तो सबसे पहला प्रश्न यही उठता है कि हमारी...

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सत्य पथी By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२७) की व्याख्या  मन्त्र —“मा प्रगाम पथोवयम्”  ऋग्वेद_ १०.५७.१भावार्थ --हम वैदिक मार्ग से पृथक न हों।पदच्छेदमा — नहींप्रगाम — आगे बढ़ें / जाएँपथः — मार्ग सेवयम् — हम...

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शून्य से नौ तक:अस्तित्ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

वेदांत 2.0 का 0–9 मॉडल एक ऐसा संरचनात्मक ढाँचा प्रस्तुत करता है जो साधारण दशमलव संख्या‑पद्धति को अस्तित्व की दस मूल अवस्थाओं के रूप में पुनर्पाठित करता है। इस दृष्टि में 0 से 9 तक...

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 7 By Janshi Saroha

श्री अंदर चली गई । हरि और श्री सोफे पर आ कर बैठ गए हरि ने लैपटॉप ओपन किया और श्री का रिजल्ट चेक करने लगा । श्री ने अपनी आंखें बंद की हुई थी और वो यही सोच रही थी कि जो होगा अच्छा ही...

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मॉडर्न साधु - 2 By nirala ji

अमन को अपने दोस्तों के साथ खेलना और उनके साथ स्कूल जाना अच्छा लगता था। अमन,विक्रम,अब्दुल और मीरा चारों में अच्छी मित्रता थी। उस जगह के लोग भी एकता और भाईचारे के साथ रहना पसंद करते...

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कर्मशील मनुष्य By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति-- (73) की व्याख्या न देवास: कवत्नवे।ऋगवेद--7/32/9भावार्थ--ईश्वर अकर्मण्य का साथ नहीं देता।ऋग्वेद 7.32.9मा स्रेधत सोमिनो दक्षता महे कृणुध्वं राय आतुजे ।तरणिरिज्जयति क्...

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गुरु महिमा नहीं- गुरु मैत्री By Vedanta Life Agyat Agyani

  "स्त्री का प्रेम और गुरु-भक्ति की मूर्खता"वेदांत 2.0 के लिए एक नया दृष्टिकोणप्रस्तावना: दो तरह का प्रेमदुनिया में प्रेम के दो रूप सबसे ज़्यादा दिखाई देते हैं। एक पत्नी का प्रेम औ...

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सफलता का आधार पुरुषार्थ By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति--(74) की व्याख्या "तरणि:इत‌ जयति"ऋग्वेद -7/32/9भावार्थ --परिश्रमी ही सफल होता है। पूरा श्लोक अर्थ सहित--ऋग्वेद मण्डल 7, सूक्त 32, मंत्र 9 का मूल पाठ इस प्रकार है—मा स...

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प्राप्ति नहीं, प्रसाद By Vedanta Life Agyat Agyani

प्राप्ति नहीं, प्रसादजीवन का मूल सूत्रमनुष्य सोचता है कि उसे सब कुछ पाना है। धन पाना, सफलता पाना, सम्मान पाना, ईश्वर पाना, मोक्ष पाना। परंतु सत्य इससे भिन्न है।जो वास्तव में तुम्हा...

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मा हृणीथा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (72) की व्याख्यामा हृणीथा:ऋग्वेद---8/2/19से ईश्वर ! हमसै रुष्ट मत हों। पूरा श्लोकहाँ, ऋग्वेद 8.2.19 का पूरा मंत्र इस प्रकार है—ओ षु प्र याहि वाजेभिर्मा हृणीथा अभ्यस्म...

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शैतानी घाटी का सफर - 7 By RAAHULL SHARMA

उसके शरीर से सड़ी हुई मांस की गंध आ रही थी। उसके हज़ारों हाथ मकड़ी के जाले की तरह फैले हुए थे, और उन हज़ारों हाथों के बिल्कुल बीच में फंसी हुई थी—मोनिका!मोनिका: (घुटती हुई आवाज़ में) "र...

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यूनानी दर्शन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (71) की व्याख्याबृहस्पते अति यदर्यो अराति:ऋगुवेद--2/23/1भावार्थ--हे ईश्वर ! हमें श्रेष्ठ बुद्धि प्रदान करें।आपने जो मंत्र उद्धृत किया है—बृहस्पते अति यदर्यो अरातिर्द्...

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कलयुग में कैसे जिएँ? शास्त्रों के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण 5 बातें By Jai Krishan

कलयुग में कैसे जिएँ? शास्त्रों के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण 5 बातेंआज के समय में लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी चिंता, तनाव, प्रतियोगिता, असुरक्षा या मानसिक अशांति से जूझ रहा है। यही कार...

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मैं नहीं, अस्तित्व By Vedanta Life Agyat Agyani

 मैं नहीं, अस्तित्वइच्छा, प्रश्न और समर्पण के मध्य पूर्णता की खोज  भूमिका↓१. प्रश्नकर्ता कौन है? (अस्तित्व की जिज्ञासा)↓२. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और प्रश्न का संकट↓३. अस्तित्व का...

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शुभ सुनें By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (56) की व्याख्या " भद्रं कर्णेभि: श्रृणुयाम देव:"ऋगुवेद --1/89/8अर्थ--  हे ईश्वर ! हम अपने कानों से शुभ सुनें।यह ऋग्वेद का अत्यंत प्रसिद्ध शांति मंत्र है:मंत्र (ऋग्...

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बलं धेहि By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(61) की व्याख्या "बलं धेहि"ऋगुवेद --4/9/6भाव--शक्ति प्रदान करो।ऋग्वेद मण्डल 4, सूक्त 9, मन्त्र 6 का “बलं धेहि” पद अत्यन्त सारगर्भित है। मूल मन्त्र (ऋग्वेद 4/9/6)बलं...

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ब्रह्म ज्ञान By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति(69) की व्याख्या "यद्भद्रं तन्न आसुव"ऋगुवेद--5/82/5भावार्थ --हे ईश्वर ! जो हमारे लिए शुभ है, वह हमें प्रदान करें।पूरा मंत्र अर्थ सहित --उद्धृत पंक्ति "यद्भद्रं तन्न आ...

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मार्ग दर्शक By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

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अस्तित्व बनाम दावा (मैं) By Vedanta Life Agyat Agyani

   अस्तित्व बनाम दावा(“मैं”) : कर्ता की समस्या का नया फ्रेममनुष्य सामान्यतः अपनी आध्यात्मिक उलझनों को “आत्मा बनाम अहंकार”, “ज्ञान बनाम अज्ञान”, या “धर्म बनाम अधर्म” की भाषा में समझ...

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ऋग्वेद सूक्ति(69) की व्याख्या "यद्भद्रं तन्न आसुव"ऋगुवेद--5/82/5भावार्थ --हे ईश्वर ! जो हमारे लिए शुभ है, वह हमें प्रदान करें।पूरा मंत्र अर्थ सहित --उद्धृत पंक्ति "यद्भद्रं तन्न आ...

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स्वर्ग का दरवाजा - 6 By Author Pawan Singh

एपिसोड - 6 नास्तिकतावाद और भौतिकवादअंते वयम सर्वे कथाः भवें - अंत में हम सब कहानी बन जाते हैं। कहानी से याद आया, एक बार की बात है सभी राक्षस, दैत्य और दानवों ने सोचा कि क्यों न हम...

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पूर्ण दर्शन और विज्ञान: By Vedanta Life Agyat Agyani

**पूর্ণ दर्शन‑विज्ञान:“ईश्वर पाना” की मानसिकता पर वेदान्तीय और समाज‑मनोवैज्ञानिक समालोचना**प्रस्तावनासमकालीन धार्मिक विमर्श में “ईश्वर को पाना”, “भगवान की प्राप्ति करना”, “मुक्ति ह...

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दो छोर, एक जीवन By Vedanta Life Agyat Agyani

 परिधि पर दौड़ और केंद्र में ठहराव — Vedanta 2.0 का द्वि-छोर जीवनपरिचयआज का जीवन परिधि की दोड़ पर आधारित है। हम ऊपर देखने के लिए टेलीस्कोप खोजते हैं, नीचे देखने के लिए ड्रिल बनाते...

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त्याग नहीं, देखना - द्वैत के पार By Vedanta Life Agyat Agyani

  त्याग नहीं, देखना — द्वैत के पार — 𝓐𝓰𝔂𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲धर्म की पुरानी भाषा प्रायः कहती रही है —"छोड़ो।"वासना छोड़ो।लोभ छोड़ो।अहंकार छोड़ो।संसार छोड़ो।मानो सत्य किसी त्याग के बाद मिलने व...

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अभी नहीं..... By prem chand hembram

अभी नहीं...गाँव के किनारे एक विशाल पीपल का वृक्ष था। उसकी फैली हुई शाखाएँ दूर-दूर तक शीतल छाया बिखेरती थीं। पक्षियों का कलरव, पत्तों की सरसराहट और उसके नीचे पसरी हुई शांति मानो थके...

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