हैरानी - Ateet ki Yaadein - 12 vishnupriya pandit द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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हैरानी - Ateet ki Yaadein - 12

Episode - 12 (दीवार और दरिंदगी का पर्दा)


रात का सन्नाटा अस्पताल की उन पुरानी दीवारों के पास और भी गहरा हो गया था जहाँ मरम्मत का काम चल रहा था। वहाँ केवल एक ही आवाज़ गूँज रही थी—ईंटों के एक-दूसरे पर रखे जाने की खुरदरी आवाज़। 


उस नकाबपोश शख्स ने डॉक्टर खुराना की ठंडी पड़ती हुई लाश को एक संकरी जगह में धकेल दिया। उसके चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था, बस एक क्रूर मुस्कान थी। उसने फुर्ती से ईंटें उठाईं और एक नई दीवार खड़ी कर दी, ताकि डॉक्टर खुराना की लाश और उसकी अपनी दरिंदगी हमेशा के लिए दफन हो जाए।

आखरी ईंट रखते हुए वह शख्स फुसफुसाया, "आप बहुत बोलते थे डॉक्टर साहब... बोलते-बोलते थक गए होंगे, अब यहीं आराम से सो जाइए। न कोई सच बाहर आएगा और न ही आपकी आवाज़ अब किसी को सुनाई देगी।" दीवार के पीछे सच्चाई कैद हो गई और वह कातिल अंधेरे में ओझल हो गया।

अगली सुबह अस्पताल में एक अजीब सी बेचैनी थी। डॉक्टर सिन्हा अन्य डॉक्टरों के साथ बैठे उस नकाबपोश हमलावर के बारे में चर्चा कर रहे थे जो पिछली रात रिया पर हमला करने आया था।

तभी एक डॉक्टर ने पूछा, "डॉक्टर सिन्हा, अब वह लड़की कैसी है?"
डॉक्टर सिन्हा ने एक लंबी और थकी हुई सांस ली, "हाँ, वह अब ठीक है।"
"और वह खून किसका था जो उसके सिर के पास मिला था? क्या उसके सिर पर कोई गहरी चोट आई है?" दूसरे डॉक्टर ने सवाल किया।

डॉक्टर सिन्हा ने कुछ सोचते हुए जवाब दिया, "नहीं, उसके सिर पर कोई चोट नहीं है। वह खून पुराना था और उस लड़की का नहीं था। उसके तो सिर्फ पैर पर चोट थी, जो टकराने की वजह से गहरी हो गई और खून बहने लगा।"

तभी डॉक्टर सिन्हा की नज़र कमरे में मौजूद लोगों पर पड़ी। "डॉक्टर खुराना कहाँ हैं? क्या किसी ने उन्हें देखा?" डॉक्टर सिन्हा के इस सवाल ने सबको सोच में डाल दिया।

डॉक्टर सिन्हा ने अपने माथे पर हाथ सहलाते हुए कहा, "मैंने उन्हें उस हमलावर के पीछे भागते हुए देखा था, पर उसके बाद से उनका कोई अता-पता नहीं है।"
अस्पताल में कानाफूसी शुरू हो गई। डॉक्टर सिन्हा परेशान होकर बोले, "किसी को तो दिखे होंगे? हमें पता करना चाहिए कि वह गए कहाँ, आखिर किसी को तो बताकर गए होंगे!"

खोज शुरू हुई। अस्पताल का कोना-कोना छाना गया, पर डॉक्टर खुराना कहीं नहीं मिले। तभी अस्पताल का वॉचमैन घबराया हुआ वहाँ पहुँचा। "डॉक्टर साहब, मैंने कल शाम डॉक्टर खुराना को अस्पताल के अंदर आते देखा था।"

डॉक्टर सिन्हा उत्साहित होकर बोले, "अकेले थे या कोई और भी था उनके साथ?"

वॉचमैन ने याद करते हुए कहा, "वह अकेले ही थे, लेकिन बहुत जल्दी में थे। वह खोए-खोए से लग रहे थे और बार-बार अपने हाथ की तरफ देख रहे थे। पता नहीं उनके हाथ में क्या था?"
"हाथ में क्या था?" डॉक्टर सिन्हा ने अपने चेहरे पर हाथ फेरते हुए सोचा। फिर पूछा, "क्या उन्हें बाहर जाते देखा?"

"नहीं साहब! वह कल शाम से बाहर नहीं निकले। मैं गेट पर ही था और उनकी गाड़ी भी अभी तक पार्किंग में ही खड़ी है। अगर वह बाहर जाते तो अपनी गाड़ी से ही जाते।"

वॉचमैन की इस बात ने अस्पताल में अफरा-तफरी मचा दी। डॉक्टर खुराना के रहस्यमयी तरीके से गायब होने की खबर आग की तरह फैल गई।
इधर, रिया को धीरे-धीरे होश आने लगा। जैसे ही उसकी आँखें खुलीं, वह झटके से बिस्तर पर उठ बैठी। उसकी सांसें तेज़ थीं। नर्स डेजी ने पास आकर पूछा, "ठीक तो हो ना तुम?"

रिया ने बदहवास होकर इधर-उधर देखा, "हाँ! मैं ठीक हूँ।" पर उसके सब्र का बाँध अब टूट चुका था। वह गुस्से में चिल्लाई, "डॉक्टर सिन्हा कहाँ हैं?"

नर्स डेजी ने हैरान होकर कहा, "पता नहीं, मैंने उन्हें बहुत देर से नहीं देखा।"
रिया बिना किसी की परवाह किए बिस्तर से उतरने लगी। नर्स डेजी ने उसे रोकना चाहा, "अरे! तुम्हारे पैर में चोट है, तुम उठो मत!"

"मुझे डॉक्टर सिन्हा से अभी इसी वक्त मिलना है!" रिया की आवाज़ में एक अजीब सी जिद्द थी।
थोड़ी देर बाद डॉक्टर सिन्हा रिया के पास पहुँचे। "क्या हुआ रिया? इतनी चिल्ला क्यों रही हो?"

रिया की आँखों में आँसू और गुस्सा एक साथ था। "मुझे अब यहाँ एक पल भी नहीं रुकना! मुझे मेरे घर जाना है, मैं किसी की कोई बात नहीं सुनूँगी।"
डॉक्टर सिन्हा ने बेबसी से कहा, "देखो रिया, हम खुद बहुत परेशान हैं। डॉक्टर खुराना कल शाम से लापता हैं।"

रिया की आँखें फटी की फटी रह गईं। "क्या? इसी अस्पताल के डॉक्टर कैसे गायब हो सकते हैं?"
"पता नहीं, पर वह अस्पताल से बाहर नहीं गए। उनकी गाड़ी यहीं है," डॉक्टर सिन्हा ने जवाब दिया।

रिया का डर अब दहशत में बदल गया। वह बिस्तर से नीचे उतरी, "अब तो मैं यहाँ बिल्कुल नहीं रुकूँगी। मैं जा रही हूँ!"

डॉक्टर सिन्हा ने उसे रोकते हुए कहा, "कहाँ? तुम कहीं नहीं जा सकती। वह तुम्हें खुद यहाँ से लेने आएगा।"

"कौन? किसकी बात कर रहे हैं आप? मुझे किसी के साथ नहीं जाना, मेरी जान के पीछे कोई पड़ा है!" रिया चिल्लाई।

डॉक्टर सिन्हा ने चिढ़कर एक लंबी सांस ली, "हाँ! इसीलिए कह रहा हूँ, उसे आने दो। उसके बाद जो जी में आए करना, पर अभी आराम करो।"

"नहीं! मुझे घर जाना है, मेरे माँ-पापा परेशान होंगे!" रिया फूट-फूट कर रोने लगी।
उसकी ज़िद और बिगड़ती हालत देख डॉक्टर सिन्हा ने उसे शांत करने के लिए नींद का इंजेक्शन लगा दिया। रिया कुछ बड़बड़ाते हुए गहरी नींद के आगोश में समा गई। उसे सोता देख डॉक्टर सिन्हा अपना सिर पकड़कर कुर्सी पर बैठ गए। अस्पताल की दीवारों में कैद उस लाश का राज अब और गहरा हो गया था।

प्रिय पाठकों, उम्मीद है आपको आज का अध्याय- दीवार और दरिंदगी का पर्दा। पसंद आया होगा, क्या करेंगे डॉक्टर सिन्हा और क्या दीवार में छिपी डॉक्टर खुराना की लाश बाहर आएगी? जानने के लिए बने रहे। कहानी पसंद आए तो रेटिंग जरूर करें। और अपनी राय कमेंट में जरूर दें।"