हैरानी - Ateet ki Yaadein - 11 vishnupriya pandit द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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हैरानी - Ateet ki Yaadein - 11

Episode - 11 (सच्चाई की कीमत मौत)

अस्पताल के उस ठंडे कमरे में सन्नाटा पसरा था, जिसे केवल मशीनों की धीमी बीप तोड़ रही थी। डॉक्टर सिन्हा कोने में दुबके हुए मास्कमैन की ओर देख रहे थे, जिनकी रूह कांप रही थी। मास्कमैन की आँखों में इस वक्त कोई क्रोध नहीं, बल्कि रिया के लिए एक असहनीय तड़प थी। वह बहुत आहिस्ते से, दबे पांव रिया के बिस्तर की ओर बढ़ा।

जैसे ही वह उसके पास पहुँचा, वह बेबस होकर वहीं बैठ गया। उसने रिया का कोमल हाथ अपने हाथों में लिया और बेहद भावुक स्वर में फुसफुसाया, "मुझे माफ कर दो रिया... मैंने फिर देर कर दी आने में। अगर मैं समय पर आ जाता, तो तुम्हें यह दर्द सहन नहीं करना पड़ता।" उसने अपना सिर रिया के बेजान हाथ पर टिका दिया, मानो अपनी पूरी ताकत उसे सौंप देना चाहता हो।

लेकिन अगले ही पल, उसे डॉक्टर सिन्हा की लापरवाही याद आ गई। उसका दुख अचानक प्रचंड क्रोध में बदल गया। उसने रिया का हाथ धीरे से छोड़ा और बिजली की गति से डॉक्टर सिन्हा की ओर बढ़ा। उसने डॉक्टर सिन्हा को कॉलर से पकड़ा और घसीटते हुए कमरे से बाहर ले आया।

अस्पताल का वह गलियारा वीरान था, जहाँ हवाएँ भी जैसे डर के मारे थम गई थीं। मास्कमैन ने डॉक्टर सिन्हा को दीवार से सटा दिया। मास्क के पीछे से उसकी जलती हुई आँखें डॉक्टर सिन्हा की रूह को चीर रही थीं। उसने भारी और कड़क आवाज़ में पूछा, "मैंने क्या कहा था तुमसे? मेरी गैरमौजूदगी में इसकी जान की हिफाजत तुम्हारी ज़िम्मेदारी थी! फिर इस पर हमला कैसे हुआ?"

डॉक्टर सिन्हा का गला सूख रहा था। उन्होंने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा, "म... मुझे नहीं पता... मैं राउंड पर था। नर्स डेजी दवा देने गई थी... तभी शोर सुना तो मैं..."

"झूठ!" मास्कमैन ने उनका गला और कस दिया। "इस अस्पताल के चप्पे-चप्पे पर तुम्हारी नज़र रहती है। अगर उसे कुछ भी हुआ, तो याद रखना, ये सफेद दीवारें तुम्हारे खून से लाल कर दूँगा! वह यहाँ सुरक्षित रहने आई है, मरने नहीं!"

डॉक्टर सिन्हा की आँखों में खौफ के आँसू थे। "तुम समझ क्यों नहीं रहे? वो साया... वह साया मुझसे कहीं ज़्यादा ताकतवर है। वह हर पल हम पर नज़र रख रहा है, मैं चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा!"

मास्कमैन ने उन्हें एक झटके से छोड़ दिया। "अपनी कायरता का दोष उस साये को मत दो। यह आखिरी चेतावनी है, डॉक्टर सिन्हा। अगर उसे एक खरोंच भी आई, तो मैं भूल जाऊँगा कि तुम मेरे लिए क्या मायने रखते हो। और हाँ, जब उसे होश आए, तो उसकी आँखों में डर नहीं, सुकून होना चाहिए। वरना तुम्हारा अगला ठिकाना यह अस्पताल नहीं, श्मशान होगा!"

इतना कहकर मास्कमैन वहाँ से यह कहते हुए निकल गया कि वह उस साये का हिसाब खुद करेगा। उसके जाते ही डॉक्टर सिन्हा फर्श पर ढेर हो गए और अपनी उखड़ती साँसों को संभालने की कोशिश करने लगे। उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि असली तबाही अब 'डॉक्टर खुराना' के रूप में शुरू होने वाली है।

उधर, डॉक्टर खुराना के हाथ में वह घड़ी किसी सुलगते हुए अंगारे की तरह थी। वह तेज़ कदमों से एक केबिन की ओर बढ़ रहे थे। जैसे ही उन्होंने केबिन का दरवाज़ा खोला, ठंडी हवा का एक झोंका उनसे टकराया। केबिन के भीतर अंधेरा था। डॉक्टर खुराना ने वह घड़ी मेज़ पर पटक दी।
"यह तुम्हारी ही है ना? पहचान लो इसे!" डॉक्टर खुराना की आवाज़ में नफरत थी। "याद करो यह कहाँ गिरी होगी। चलो मैं ही बताता हूँ—यह मुझे उस नकाबपोश के पास से मिली जो उस मासूम लड़की की जान लेने पर तुला था। हाथापाई के दौरान यह तुम्हारे हाथ से छूट गई थी, क्योंकि वह नकाबपोश और कोई नहीं... तुम हो! मैंने कभी नहीं सोचा था कि तुम इतना गिर जाओगे।"

अंधेरे में रखी वह कुर्सी धीरे से घूमी। उस शख्स का चेहरा धुंधला था, पर उसकी आँखों में कोई पछतावा नहीं था। वह ठंडी और भारी आवाज़ में बोला, "डॉक्टर साहब... आप एक नेक इंसान हैं, नेक ही रहिए। मेरे काम के बीच में मत आइए। कुछ सवाल ऐसे होते हैं जिनके जवाब सिर्फ मौत दे सकती है। भलाई इसी में है कि अपना मुँह बंद रखें।"

"बस!" डॉक्टर खुराना चिल्लाए। "तुम्हारा यह खूनी खेल अब खत्म होगा। मैं तुम्हें समझाने आया था, पर तुम नहीं मानोगे। जान बचाना हमारा काम है, लेना नहीं। तुम अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रहे हो और मैं ऐसा होने नहीं दूँगा।"

उस शख्स ने अहंकार से हँसते हुए कहा, "आप मुझे धमकी दे रहे हैं? क्या कर लेंगे आप?"
डॉक्टर खुराना की आँखों में सच्चाई की चमक थी। "यह तो वक्त बताएगा। अब मेरा फैसला सुनो—कल सुबह होने से पहले तुम्हारा यह काला सच सबके सामने होगा। जब पुलिस आएगी, तो स्टाफ और वह लड़की सब जान जाएंगे कि इस नकाब के पीछे का असली शैतान कौन है!"

केबिन में अचानक मौत जैसा सन्नाटा छा गया। वह शख्स धीरे से उठा। उसके जूतों की आवाज़ फर्श पर डरावनी तरह से गूंज रही थी। उसने एक खौफनाक मुस्कान के साथ कहा, "सच? सच बहुत भारी होता है डॉक्टर खुराना... आप इसे संभाल नहीं पाएंगे। आपने यह घड़ी लौटाकर अपना वक्त ही खत्म कर लिया है।"

"तुम मुझे डरा रहे हो? मैं—"

इससे पहले कि खुराना अपनी बात पूरी कर पाते, उस शख्स ने बिजली की फुर्ती से एक नुकीली चीज़ उनके गले में उतार दी। डॉक्टर खुराना की आवाज़ उनके गले में ही दम तोड़ गई। उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं। 

अस्पताल के सबसे सच्चे और बहादुर डॉक्टर, जिन्होंने रिया की जान बचाई थी, आज अपनी सच्चाई की कीमत अपनी जान देकर चुका रहे थे। डॉक्टर खुराना का बेजान शरीर फर्श पर गिर पड़ा, और उस केबिन के अंधेरे में एक और राज़ दफन हो गया।

प्रिय पाठकों, उम्मीद है आपको आज का अध्याय- सच्चाई की कीमत मौत। पसंद आया होगा। क्या डॉक्टर खुराना की मौत का राज पता चलेगा? और कौन है वह नकाबपोश खूनी जिसने रिया पर हमला किया और एक नेक डॉक्टर को मार दिया? जानने के लिए बने रहे। कहानी पसंद आए तो रेटिंग जरूर करें। आपकी एक रेटिंग मेरे लिए बहुत कीमती है। अपना सुझाव कॉमेंट में जरूर बताएं।