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भाग 2: कांटों भरा गुलाब**सुबह की धूप जब रुद्र प्रताप सिंह के आलीशान केबिन की कां...
होटल का नजारा देखने लायक था।माया ने हंस कर कहा जीयो मेरे भाई।विक्की ने कहा थैंक...
खुशहाल जीवन के 10 नियमतनाव (Tension) और डिप्रेशन से दूर रहकर खुशहाल जीवन जीने के...
जैसे ही सात मिनट की गिनती पूरी हुई, विक्रम के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई। वह बिना...
महाराणा लक्ष्य सिंह (लाखा) : हिंदुओं के रक्षक व चूँडा की अमर गाथा (1382-1421 ईसव...
महक जैसे ही हॉल में दाखिल हुई, हल्की-सी हलचल हुई। कई लोगों ने उसकी ओर देखा — उसक...
"यह किताब नहीं है" अध्याय 1: उधार का बोझ — हम कैसे फँसे?कहाँ से शुरू हुआ:बच्चा...
Snow City :रात का वक़्त…: ध्रुविका ने घूर कर लड़के की ओर देखा ! और फिर अपनी गर्द...
अचानक शांति टूट गई पेड़ के भीतर से एक भयंकर धमाका हुआ और जमीन ऐसे हिली जैसे नीचे...
भाग 1: देवपुर रियासत सन 1926, भारत भूमि पर फिरंगियों का क्रूर शासन अपने चरम पर थ...
नवंबर की हल्की ठंड... और मीठी-सी धूप में... आँगन में बैठी महक अपने गीले बालों को सुखाते हुए कुछ गुनगुना रही थी। तभी अंदर से फोन की आवाज़ आई... ? "ट्रिन ट्रिन... ट्रिन ट...
Ghost hunter रात के 2:17 बजे दिल्ली के बाहरी इलाके में एक छोटा-सा ऑफिस बाहर से देखने पर बिल्कुल साधारण, लेकिन अंदर का माहौल अलग ही था। दीवारों पर अजीब-सी मशीनें, वायरिंग, EMF मीटर,...
हिंदी फिल्म और वेबसिरिज़ रिव्यू.
" इंस्पेक्टर मैं सच कह रही हूँ। उस दिन मेरे घर पार्टी में लगभग 110 लोग आए थे। सभी मेरे दोस्त थे। खाने में चिकन करी, फिश करी और अंडा करी तीनों ही थीं। कुछ लोग चिकन नहीं खाते थे,...
बारिश इतनी तेज़ थी कि सड़कें धुंधली पड़ चुकी थीं…लाल जोड़े में लिपटी एक लड़की नंगे पाँव भाग रही थी…उसकी पायल बार-बार टूटे रास्तों में अटक रही थी… सांसें बिखर चुकी थीं… आँखों में डर...
प्रिया पाठको,, यह एक सामाजिक कहानी है । जिसे मैंने अपने शब्दों के मोती में पिरोकर माला बनाने की कोशिश की है । अपना स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखिएगा ?? ....... .......
अध्याय 1: वीरान हवेली की पहली आहट पहाड़ों के बीच बसी वह जगह जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही डरावनी भी। दूर-दूर तक फैली घनी चीड़ की जंगलों के बीच एक पुरानी हवेली खड़ी थी—नीलगिरी हवेली। द...
रात का अंधेरा बहुत गहरा था…आसमान में बादल ऐसे छाए थे जैसे किसी अनहोनी का इंतज़ार कर रहे हों। एक पुराने खंडहर जैसे महल के अंदर…लाल रोशनी टिमटिमा रही थी। वहीं धीरे-धीरे एक लड़की बाह...
“शिफ़ा शिफ़ा....”,अनस सहन में खड़ा उसको आवाज़ कम दे रहा था और चि़ल्ला ज़्यादा रहा था।“क्या मुसीबत है, कभी तो चैन से खाना खाने दिया करो। हर वक़्त सर पर नाज़िल रहते हो”वह बड़बड़ाती ह...
यह शब्द सुना तो बहुत था, बचपन में इस पर निबंध भी बहुत लिखे थे पर मेरे लिए यह शब्द तब तक अस्तित्व में नहीं था जब तक की मुझे मेरी सहेली ने इसका असल अर्थ समझाया नहीं था। मेरे पिताज...
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