हैरानी - Ateet ki Yaadein - 4 vishnupriya pandit द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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हैरानी - Ateet ki Yaadein - 4

डॉक्टर सिन्हा और नर्स डेजी, दोनों की आँखें फटी की फटी रह गई थीं। अस्पताल के उस केबिन की दीवार पर, जो कभी बिल्कुल साफ रहती थी, अब गहरे सुर्ख लाल रंग से एक डरावनी चेतावनी लिखी थी।

वह रंग इतना ताज़ा था कि जैसे अभी-अभी किसी के जिस्म से खून निकला हो। लिखावट में एक अजीब सी पागलपन की झलक थी।

चेतावनी साफ़-साफ़ चीख रही थी: "उसे जल्दी ठीक करो! जितना समय उसके इलाज में लगाओगे, उतना ही तुम लोग अपनी मौत के करीब होते जाओगे।"

सन्नाटा इतना गहरा था कि दोनों को अपनी ही धड़कनें किसी बड़े खतरे के ड्रम की तरह सुनाई दे रही थीं। नर्स डेजी का चेहरा सफेद पड़ गया, उसके होंठ कांप रहे थे। 

उसे अचानक रिया की वो लाल दहकती आँखें याद आ गईं। उसने हकलाते हुए, लगभग रोते हुए डॉक्टर सिन्हा से कहा, "डॉक्टर साहब... वो... वो लड़की! उसकी आँखें! जब उसने मेरी तरफ देखा था, तो उसकी आँखो में गुस्सा नहीं, बल्कि कुछ और था—एक गहरा, रूह कंपा देने वाला खौफ। उसकी आँखें पूरी तरह से लाल थीं, जैसे खून से भरी हों। मैं यही बताने के लिए तो आपके केबिन की तरफ भागी थी!"

डॉक्टर सिन्हा ने अपना माथा पकड़ा और हताशा में फर्श पर ही बैठ गए। "क्या हो रहा है इस अस्पताल में? जब से वो लड़की यहाँ आई है, अस्पताल की हवा बदल गई है। यहाँ की दीवारों में भी जैसे कोई साज़िश पल रही है। हम अपने ही अस्पताल में कैदी बन गए हैं। आखिर ये मास्कमैन चाहता क्या है? उस लड़की का मास्कमैन से क्या रिश्ता है? और ये दीवार पर मौत का पैगाम... ये किसने लिखा होगा? क्या ये भी उसी का काम है?"

डॉक्टर सिन्हा का गला सूख रहा था। वे खुद को बेबस महसूस कर रहे थे। नर्स डेजी ने दीवार की ओर इशारा करते हुए धीरे से पूछा, "सर, अब क्या करें? यहाँ का हर कोना अब डरावना लग रहा है। ये किसने लिखा होगा? क्या मास्कमैन है या फिर कोई और साया हमारे साथ यहाँ मौजूद है?"

डॉक्टर सिन्हा झटके से खड़े हुए। उनके चेहरे पर अब डर से ज़्यादा एक अजीब सा गुस्सा था। "चलो मेरे साथ!" उन्होंने नर्स डेजी को आदेश दिया। वे बिना कुछ सोचे सीधे रिया के कमरे की ओर बढ़े।

रिया के कमरे का भयावह सन्नाटा...

वहाँ सन्नाटा इतना गहरा था कि सुई गिरने की आवाज़ भी किसी धमाके जैसी सुनाई दे। 
रिया बिस्तर पर बेधड़क सोई थी, पर उसके हाथ में वही पुरानी तस्वीर अब भी मजबूती से दबी थी। डॉक्टर सिन्हा ने नर्स डेजी को चुप रहने का इशारा किया और दबे पाँव बिस्तर की ओर बढ़े। उनके हाथ कांप रहे थे। वे बस रिया के हाथ से वो तस्वीर खींचने ही वाले थे कि तभी...

रिया की आँखें अचानक खुल गई! वह किसी बिजली के झटके की तरह उठी और डॉक्टर सिन्हा को पूरी ताकत से धक्का दिया। उसकी साँसे इतनी तेज़ चल रही थीं कि पूरे कमरे में सिर्फ 'धक-धक... 
धक-धक' की आवाज़ गूँज रही थी। 

वो आवाज़ किसी इंसान के दिल की नहीं, बल्कि मौत की दस्तक जैसी लग रही थी। 

डॉक्टर सिन्हा इतने डर गए कि चेकअप करना तो दूर, उनकी आवाज़ तक नहीं निकली। 

नर्स डेजी यह मंजर देख कर बदहवास होकर कमरे से बाहर भाग निकली।

अस्पताल के बाहर का सन्नाटा...

नर्स डेजी जब भागकर अस्पताल के मुख्य द्वार पर पहुँची, तो वहाँ का दृश्य देख कर उसके पैर जड़ हो गए। हर तरफ एक अजीब सी, भारी शांति छाई थी। दूर-दूर तक कोई इंसान नहीं था। बस ठंडी हवाओं के चलने की सांय-सांय की आवाज़ें आ रही थीं।

जैसे ही वह अंदर जाने के लिए मुड़ी, उसे दीवार पर एक लंबे कद के आदमी की विशाल परछाई नज़र आई। नर्स डेजी की साँसे गले में ही अटक गई। 

वह गिरती-पड़ती डॉक्टर सिन्हा के केबिन की तरफ भागी और रास्ते में एक कर्मचारी से टकरा गई। उसकी चीख सुनकर डॉक्टर सिन्हा भी वहाँ पहुँच गए।

नर्स डेजी चिल्लाने लगी, "मुझे यहाँ काम नहीं करना! मैं यहाँ अब एक पल भी नहीं रुक सकती!"

तभी केबिन का दरवाज़ा खुला और 'मास्कमैन' का प्रवेश हुआ। उसके आने से केबिन की हवा में जैसे ज़हर घुल गया। उसने दरवाज़ा अंदर से बंद किया और कुर्सी पर बैठ गया। 

उसने अपना चश्मा उतारा और नर्स डेजी को घूरते हुए बोला, "भागने की कोशिश भी मत करना... वरना बेवजह मारी जाओगी।"
नर्स डेजी घुटनों के बल बैठकर रोने लगी, "प्लीज मुझे जाने दो! मैं यहाँ घुट-घुट कर नहीं मरना चाहती!"

"मेरा काम होने के बाद ही तुम सब आज़ाद होगे," मास्कमैन ने भारी आवाज़ में कहा।

डॉक्टर सिन्हा ने हिम्मत जुटाकर पूछा, "हमें क्या करना होगा?"

मास्कमैन की नज़र दीवार पर लिखी उस धमकी पर पड़ी। वह कुछ पल के लिए ठहर गया। "ये सब क्या है?" उसने पूछा। 
डॉक्टर सिन्हा ने कहा, "हमें लगा ये आपने लिखा होगा।"

यह सुनते ही मास्कमैन ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगा। उसकी भयानक हँसी केबिन की दीवारों से टकराकर और भी डरावनी हो गई। "तो तुम्हारे केबिन में कोई आता है, मौत की धमकी लिखता है और तुम्हें खबर तक नहीं होती? पता लगाओ ये किसका काम है, वरना अंजाम बुरा होगा!"
उसके जाते ही डॉक्टर सिन्हा और नर्स डेजी सन्न रह गए। अब उनके पास सिर्फ एक ही रास्ता था—उस दीवार के पीछे का सच ढूँढना।

इधर मास्कमैन भी सोच में था, "आखिर अस्पताल में ऐसा कौन है जिसने धमकी लिखी है और डॉक्टर सिन्हा को ही क्यूं धमकी दी! क्या उसे सब पता है ? पता लगाना होगा ये किसका काम है मुझे अब और नजर रखनी पड़ेगी इस अस्पताल पर।उसकी जान की हिफाजत करना बहुत जरूरी है! तुम जो भी हो, मैं तुम्हे ढूंढ लूंगा।"
ऐसी बहुत सी बातें मास्कमैन के दिमाग में घूम रही थी।

डॉक्टर सिन्हा और नर्स डेजी भी धमकी देने वाले साए और मास्कमैन से परेशान थे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था, कि ये सब हो क्या रहा है। और कैसे इन सब से छुटकारा मिले।

रिया भी अपने कमरे में अपनी यादों की दुनिया में खोई थी उसे भी अंदाजा नहीं था कि ये सब क्यों और किसके लिए हो रहा है? 

"नमस्ते, मेरे प्यारे पाठकों! उम्मीद है आपको हैरानी: अतीत की यादें का यह चौथा अध्याय पसंद आया होगा। अस्पताल की उस दीवार पर लिखा खून से सना संदेश और खुद मास्कमैन का वह खौफनाक खुलासा। सस्पेंस अब ऐसी जगह पहुंच गया है जहां से वापसी का रास्ता और भी मुश्किल है। आखिर वह तीसरा कौन है? जो मास्कमैन की नजरों से बचकर इस अस्पताल में मौत का खेल, खेल रहा है। इस सफर को और भी रोमांचक बनाने के लिए, अपना साथ और रेंटिंग्स देते रहे। क्या डॉक्टर सिन्हा इस चक्रव्यूह से बाहर निकल पाएंगे? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।"