हैरानी - Ateet ki Yaadein - 7 vishnupriya pandit द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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हैरानी - Ateet ki Yaadein - 7

 Episode - 7 ( कौन रक्षक और कौन भक्षक)

रिया अभी भी अपनी पुरानी यादों के भंवर में खोई हुई थी। अतीत की उन गलियों से बाहर निकलने की कोशिश कर ही रही थी कि तभी उसे अपने कमरे में किसी की उपस्थिति का आभास हुआ। उसे महसूस हुआ कि कोई उसे अंधेरे कोने से घूर रहा है।
और बहुत धीरे-धीरे, दबे पाँव उसकी ओर बढ़ रहा है। घबराहट में वह झटके से अपने बिस्तर से उठ बैठी।

उसने चारों ओर नज़रें दौड़ाईं यह जानने के लिए कि जो उसने महसूस किया, क्या वह सच था? लेकिन कमरे में सन्नाटे के सिवा कुछ न था। वह बेड से उतरी और सावधानी से कमरे के बाहर जाकर देखा, पर वहाँ भी दूर-दूर तक कोई नज़र नहीं आया जिस पर शक किया जा सके।

जैसे ही वह वापस अपने कमरे के सुरक्षित घेरे में जाने के लिए मुड़ी, अचानक सामने एक धुंधली परछाईं दिखाई दी। उसे देखते ही रिया की सांस उसके गले में ही अटक गई। वह चीखकर वहाँ से भागने ही वाली थी कि उस परछाईं ने झपट्टा मारकर उसके पैर पकड़ लिए। रिया ने अपनी पूरी ताकत से पैर छुड़ाने की कोशिश की, तभी कोई अदृश्य साया उसे अंधेरे कमरे के अंदर खींचने लगी।

रिया की चीखें अस्पताल के गलियारों में गूंज उठीं, "बचाओ! बचाओ! कोई है? डॉक्टर... नर्स... बचाओ!"

उसकी आवाज सुनकर अचानक 'मास्कमैन' वहाँ आ गया। उसने फुर्ती से रिया का हाथ थामा और उसे अपनी ओर खींचने लगा। दोनों ओर से हो रही इस खींचतानी में मास्कमैन सफल रहा और उसने रिया को उस अंधेरे के चंगुल से बाहर निकाल लिया। 

रिया को सुरक्षित करने के बाद, वह निर्भीकता से कमरे के भीतर उस रहस्यमयी साये का पता लगाने चला गया।
तभी चीखें सुनकर डॉक्टर सिन्हा, नर्स डेज़ी और अस्पताल के अन्य कर्मचारी वहाँ जमा हो गए। 
रिया बुरी तरह कांप रही थी। नर्स डेजी उसे सहारा देकर दूसरे कमरे में ले जाने लगी, तभी रिया रोते हुए चिल्लाई, "उस कमरे में भूत है! वहाँ कोई है जो मुझे मारना चाहता है!"

रिया की बात सुनकर सबके चेहरे पीले पड़ गए। जब उन्होंने रिया के पैरों की ओर देखा, तो वहाँ गहरे ज़ख्म थे, मानो किसी ने नुकीले नाखूनों से उसे बुरी तरह खरोंचा हो। खून की बूंदें फर्श पर गिर रही थीं। डॉक्टर सिन्हा और बाकी लोग कमरे के दरवाज़े पर ही ठिठक गए; किसी की भी हिम्मत उस अंधेरे कमरे के भीतर झाँकने की नहीं हुई।
काफी देर तक जब अंदर से कोई हलचल नहीं हुई, तो लोग कानाफूसी करते हुए अपने-अपने रास्तों पर चले गए। 

डॉक्टर सिन्हा अकेले उस दरवाज़े पर खड़े कुछ सोच ही रहे थे कि तभी एक झटके से उन्हें किसी ने अंदर खींच लिया और धड़ाम से दरवाज़ा बंद हो गया।
डॉक्टर सिन्हा बदहवास होकर दरवाज़ा पीटने लगे, "खोलो! कोई है? दरवाज़ा खोलो!"

तभी उनके पीछे से एक ठंडी और भारी आवाज़ आई, "तुम्हारी आवाज़ यहाँ कोई नहीं सुनेगा, डॉक्टर सिन्हा!"
डॉक्टर सिन्हा का गला सूखने लगा और शरीर पसीने से तर-बतर हो गया। उन्हें लगा कि आज उनका अंत निश्चित है। वे धीरे से पीछे मुड़े और हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाने लगे, "मैंने... मैंने कुछ नहीं किया! मुझे छोड़ दो!"

अंधेरे में खड़े मास्कमैन ने संजीदगी से कहा, "मैं जानता हूँ तुमने कुछ नहीं किया, लेकिन कोई और है जो यह सब कर रहा है।"
डॉक्टर सिन्हा ने राहत की साँस ली ही थी कि मास्कमैन का लहज़ा और कड़ा हो गया, "तुम कहाँ थे?"
डॉक्टर हकलाते हुए बोले, "म-म-मैं... मैं तो अपने केबिन में था।"

"क्या कर रहे थे वहाँ?" मास्कमैन ने दीवार पर हाथ पटकते हुए गरजकर पूछा, "जब तुम्हें उसका ख्याल रखने को कहा है, तो उसे अकेला क्यों छोड़ा? मेरी नज़र 24 घंटे तुम पर है। अगर अब कोई लापरवाही हुई, तो मैं तुम्हें ज़िंदा नहीं छोड़ूँगा, समझ गए?"

डॉक्टर सिन्हा ने डर के मारे सिर हिला दिया। मास्कमैन के आदेश पर वे उसे अपने केबिन ले गए और अलमारी से रिया की मेडिकल रिपोर्ट निकालकर उसे थमा दी। रिपोर्ट देखते हुए मास्कमैन मुड़ा और जाते-जाते बोला, "बस कुछ ही दिनों की बात है, जैसे ही वह ठीक होगी, मैं उसे यहाँ से ले जाऊँगा। तब तक उसकी सुरक्षा तुम्हारी ज़िम्मेदारी है।"

उसके जाते ही डॉक्टर सिन्हा का डर गुस्से में बदल गया। उन्होंने मेज़ पर रखा काँच का गिलास ज़मीन पर दे मारा। काँच के टुकड़े बिखर गए और वे कुर्सी पर बैठकर खुद से ही कुछ बड़बड़ाने लगे।

उधर, नर्स डेज़ी रिया के ज़ख्मों पर दवा लगाते हुए कड़वाहट से बोली, "ज़रूर तुमने किसी के साथ बहुत बुरा किया होगा, तभी तो कोई तुम्हें बार-बार मारने पर तुला है।"
रिया हैरान रह गई, "बार-बार? आज ही तो मुझ पर हमला हुआ है!"

नर्स डेजी ने उसे घूरते हुए कहा, "क्या सच में तुम्हें कुछ याद नहीं? या नाटक कर रही हो? तुम्हें अंदाज़ा भी है कि तुम्हारी वजह से हम कितनी बार मौत के मुँह से वापस आए हैं?"
रिया को भी गुस्सा आ गया, "मैने क्या किया है? मुझे तो खुद नहीं पता मैं यहाँ कैसे पहुँची! मैं तो जाना चाहती हूँ, पर आप लोग ही मुझे रोक कर बैठे हैं!"

नर्स डेजी बिना जवाब दिए गुस्से में वहाँ से चली गई। उसके जाने के बाद रिया के मन में सवालों का बवंडर उठने लगा। 'यह नर्स मुझे दोष क्यों दे रही है? वह परछाईं किसकी थी? क्या वह कोई इंसान था या कोई साया? और वह मास्क वाला लड़का... उसका स्पर्श मुझे इतना जाना-पहचाना क्यों लगा? जैसे उसका और मेरा कोई गहरा रिश्ता हो...'

रिया के पास इन सवालों के पहाड़ थे, जिनके जवाब सिर्फ दो ही लोगों के पास थे—एक वह 'मास्कमैन' और दूसरा उसका अपना धुंधला 'अतीत'।

नमस्ते प्रिय पाठकों, उम्मीद है आपको हैरानी अतीत की यादें' का आज का अध्याय- कौन रक्षक और कौन भक्षक जरूर पसंद आया होगा। आखिर नर्स डेजी रिया को ये क्यों कह रही थी कि उसने कुछ गलत किया और उसपर बार -बार हमला हुआ है? जानने के लिए बने रहे। अगर कहानी पसंद आए तो रेटिंग जरूर करें। अगर कहानी में कोई त्रुटी हुई हो तो कमेंट में जरूर बताएं ताकि मैं उसे सुधार कर कहानी और अच्छे से पेस कर सकूं।