Part 16: सगाई का सच
कुछ फैसले…
दिल से नहीं, मजबूरी से लिए जाते हैं।
और वही फैसले…
सबसे ज्यादा दर्द देते हैं।
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Myra अपने कमरे में आईने के सामने खड़ी थी।
उसके हाथ में सगाई का जोड़ा था।
लाल रंग…
जो कभी प्यार का प्रतीक लगता था,
आज उसे एक कैद जैसा महसूस हो रहा था।
उसने खुद को आईने में देखा।
“क्या यही मेरी जिंदगी है?”
उसने खुद से पूछा।
जवाब…
उसकी आँखों के आँसुओं में था।
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उधर…
कबीर अब शांत नहीं था।
उसकी आँखों में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था।
“ये सब प्लान है…”
वो अर्जुन से कह रहा था।
“पहले हमें अलग किया…
फिर झूठी तस्वीरें…
और अब सगाई…”
अर्जुन ने सिर हिलाया।
“तो अब क्या करेगा?”
उसने पूछा।
कबीर ने बिना सोचे जवाब दिया—
“सच ढूंढूंगा।”
“और अगर सच वही निकला… जो दिख रहा है?”
अर्जुन ने पूछा।
कबीर कुछ पल चुप रहा।
फिर उसने कहा—
“तो मैं खुद को बदल दूंगा…
मगर पहले ये जानना जरूरी है कि सच क्या है।”
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उधर…
विक्रम वर्मा सगाई की तैयारियों में लगे थे।
घर में रोशनी…
लोगों की आवाजाही…
सब कुछ एक उत्सव जैसा था।
मगर उस उत्सव में
एक दिल टूट रहा था।
“Myra तैयार है?”
विक्रम ने पूछा।
“जी साहब,”
एक नौकर ने जवाब दिया।
विक्रम ने हल्का सा सिर हिलाया।
“आज के बाद…
सब कुछ ठीक हो जाएगा।”
उनके चेहरे पर संतोष था
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शाम…
सगाई का कार्यक्रम शुरू हो चुका था।
हॉल रोशनी से भरा था।
मेहमान…
हंसी…
शोर…
मगर उस भीड़ में Myra अकेली थी।
वो स्टेज पर खड़ी थी…
उसके पास उसका होने वाला मंगेतर—आर्यन।
आर्यन शांत था…
मगर उसकी आँखों में भी कुछ अनकहा था।
“Myra…”
उसने धीरे से कहा।
Myra ने उसकी तरफ देखा।
“क्या तुम ठीक हो?”
उसने पूछा।
Myra ने हल्की सी मुस्कान दी।
“हाँ…”
मगर वो मुस्कान…
सिर्फ दिखावे की थी।
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उसी समय…
हॉल के बाहर…
कबीर खड़ा था।
उसकी नजरें अंदर की रोशनी पर थीं।
उसका दिल तेज़ धड़क रहा था।
“आज सब खत्म हो जाएगा…”
उसने खुद से कहा।
मगर फिर…
“या शायद… आज सब शुरू होगा।”
उसने गहरी सांस ली…
और अंदर कदम रखा।
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हॉल के अंदर…
लोगों की नजर अचानक दरवाज़े की तरफ गई।
कबीर अंदर आ चुका था।
उसकी नजरें सीधी Myra पर थीं।
Myra का दिल एक पल के लिए रुक गया।
“कबीर…”
उसके होंठों से नाम निकल गया।
विक्रम वर्मा की आँखें सख्त हो गईं।
“ये यहाँ क्या कर रहा है…”
उन्होंने धीमे से कहा।
कबीर धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
हर कदम…
जैसे एक चुनौती था।
“Myra…”
उसने पुकारा।
पूरा हॉल खामोश हो गया।
Myra की आँखों में आँसू आ गए।
“तुम यहाँ क्यों आए…”
उसने धीरे से कहा।
कबीर उसके सामने आकर रुक गया।
“सच जानने,”
उसने कहा।
विक्रम आगे बढ़े।
“यहाँ कोई ड्रामा नहीं होगा,”
उन्होंने सख्त आवाज़ में कहा।
कबीर ने उनकी तरफ देखा।
“ड्रामा आपने शुरू किया है…”
उसने जवाब दिया।
हॉल में हलचल बढ़ गई।
“झूठी तस्वीरें…
सगाई का दबाव…”
कबीर ने कहा,
“ये सब क्या है?”
Myra चौंक गई।
“तस्वीरें…?”
उसने धीरे से कहा।
कबीर ने उसकी तरफ देखा।
“तुम्हें भी मिली थीं ना?”
उसने पूछा।
Myra ने सिर हिलाया।
“हाँ…”
दोनों एक-दूसरे को देखने लगे।
और उसी पल…
सच की पहली परत खुलने लगी।
“तो मतलब…”
Myra ने कहा,
“वो सब झूठ था?”
कबीर ने धीरे से कहा—
“हमें एक-दूसरे के खिलाफ करने के लिए…”
Myra की आँखों में आँसू आ गए।
“और हम… मान भी गए…”
उसने कहा।
कबीर ने उसकी तरफ हाथ बढ़ाया।
“अब भी देर नहीं हुई…”
उसने कहा।
पूरा हॉल खामोश था।
सबकी नजरें उन पर थीं।
Myra ने कबीर का हाथ देखा…
मगर उसी पल—
विक्रम की आवाज़ गूंजी—
“बस!”
दोनों रुक गए।
“ये सगाई होगी…”
उन्होंने सख्ती से कहा।
“और कोई इसे रोक नहीं सकता।”
कमरे में तनाव भर गया।
कबीर ने उनकी आँखों में देखा।
“मैं रोकूंगा,”
उसने शांत मगर मजबूत आवाज़ में कहा।
Myra की सांसें तेज़ हो गईं।
विक्रम ने गुस्से में कहा—
“तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई—”
कबीर ने बीच में ही कहा—
“हिम्मत… प्यार देता है।”
ये शब्द…
पूरे माहौल को बदल गए।
अब ये सिर्फ एक सगाई नहीं थी…
ये एक जंग थी—
प्यार और नफरत के बीच।
और इस बार…
कहानी अपने सबसे बड़े मोड़ पर आ चुकी थी।